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Sri Dev Suman Great Martyr of Uttarakhand- अमर शहीद श्रीदेव सुमन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 25, 2010, 09:04:48 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

श्रीदेव सुमन की स्मृति में एक कविता, प्रबोध उनियाल

शत शत तुम्हें प्रणाम
हे वीर तुम्हें शत शत प्रणाम

श्रीदेव सुमन तुम रण गर्जन
वीरों के हो तुम प्रण-सर्जन
अभिमान न तोड़ा तुमने निज
तुम हो वीरों के कीर्ति धाम

अयं निजः यह स्वार्थ भुलाया
जग कुटुंब यह पाठ पढ़ाया
आज़ादी पर जीवन अर्पण
कर तुम विदा हुए हे राम

चौरासी दिन का कर अनशन
तुम जीते आज़ादी का रण
मरण वरन कर देव शरण हो
स्वर्णाक्षरित तुम्हारा नाम

आओ श्रद्धा सुमन चढाएं
उसकी पावन स्मृति दोहराएं
जो दृष्टांत बना वीरों का
अमर कीर्ति लेकर अभिराम

शत शत तुम्हें प्रणाम
हे वीर तुम्हें शत शत प्रणाम.

Devbhoomi,Uttarakhand

जन्मदिवस पर याद किए गए सुमन


टिहरी जनक्रांति के नायक अमर शहीद श्रीदेव सुमन के जन्मदिवस के मौके पर लोगों ने उनके पैतृक गांव जौल में भावपूर्ण स्मरण कर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर उत्तरकाशी में हनुमान चौक पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

शुक्रवार को शहीद श्रीदेव सुमन की जयंती पर उनके पैतृक गांव स्थित स्मारक पर गांव के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर कहा गया कि टिहरी जनक्रांति के नायक अमर शहीद श्रीदेव सुमन के बलिदान की वजह से लोगों का स्वतंत्रता मिली इसलिए उनके कायरें से प्रेरणा ली जानी चाहिए। विदित को कि शहीद का जन्म 25 मई 1916 को चम्बा प्रखंड के जौल गांव में हुआ था।

  जब टिहरी के लोग आजादी के लिए तड़प रहे थे ऐसे में श्रीदेव सुमन ने टिहरी रियासत के खिलाफ आंदोलन किया। बदले में उन्हें अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी जिसकी बदौलत टिहरी के लोग आजाद हुए। 25 जुलाई 1944 को श्रीदेव सुमन का निधन हुआ।

इस मौके पर जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शहीद की याद में उनके गांव में संग्रहालय बनाया जाना चाहिए। इस अवसर पर शहीद के भतीजे मस्तराम बडोनी, रामकुंवरी देवी, प्रधान पिंगला देवी, दर्मियान सिंह भंडारी, दर्मियान सिंह नेगी, खुशीराम उनियाल, अनिल बडोनी, सत्यप्रसाद आदि जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मौजूद थे।

उत्तरकाशी : श्रीदेव सुमन जयंती के मौके पर श्री देव सुमन साहित्य एवं कला स्मृति मंच की ओर से विचार गोष्ठी का आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। हनुमान चौक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गंगोत्री विधायक विजयपाल सिंह सजवाण ने कहा कि टिहरी रियासत से लड़ते हुए श्रीदेव सुमन का बलिदान पीढि़यां याद रखेंगी।

SOurce Dainik Jagran



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720





श्रीदेव सुमन जी की बेड़ियां

25 जुलाई को टिहरी के स्कूल बंद रहते हैं और बच्चे जेल की एक कोठरी में रखी ये बेड़ियां देखने जाते हैं। बचपन में हम भी पुरानी टिहरी के जेल की उस कोठरी में जाते थे और बेड़ियां उठाकर देखते थे।उसी कोठरी में सुमन जी ने ऐतिहासिक 84 दिन का उपहास रखा था। जो कि अपने में एक रिकार्ड है। श्री कुंवर सिंह नेगी जी द्वारा लिखी गयी पुस्तक को पढने के बाद मुझे सुमनजी की कुर्बानियों के बारे में काफी कुछ पता लगा। यह पुस्तक गढवाल की जानी-मानी हस्तियों द्वारा सुमन जी के बारे में लिखे गये लेखों का संकलन है।

Mohan Lal Aswal

fariaydhi

अमर शहीद श्री देव सुमन जी" की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन !!!!!!!!!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अमर शहीद श्रीदेव सुमन
अ:-अग्रदूत बन गढ भूमि पर आप अवतरित हुए ॥
म:-मर्माहत प्रजा की मुक्ति के स्वर फिर मुखरित हुए ॥1॥
र:-रश्मि-पुंज-सा तेज़,ओज-मय वाणी लिये ॥
श:-शक्ति का संचार कर,जन,नव-ऊर्जा से भर दिये ॥2॥
ही:-हिल उठा टिहरी सिँहासन,राज-सत्ता हिल गई ॥
द:-दमन-चक्र ऐसा चला कि क्रूरता भी सहम गई ॥3॥
श्री:-श्रीदेव कैसे आपने,यातना इतनी सही ॥
दे:-देख सुन मन द्रवित है,बस आप तो थे आप ही ॥4।।
व:-वक्त की पगडंडियोँ पर,पद-चिन्ह अंकित कर गये ॥
सु:-सुमन उत्तराखंड के,तुम अमर होकर गये ॥5॥
म:-मन मेँ रहे हर उत्तराखंडी के,नित भाव भी यह ॥
न:-नहीँ हो व्यर्थ 'शशांक'श्रीदेव का बलिदान भी यह ॥6॥

रचयिता:-मयंक शेखर गौनियाल'शशांक'
Email:-mayankgauniyal@yahoo.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




Shri Dev Suman -- A Hero who fought for freedom from Tehri Riyasat...


Shri Dev Suman (15 May 1915 – 25 July 1944) was a freedom fighter from Uttarakhand.

He was born at Jaul village patti Bamund of Tehri Garhwal. His father was a doctor and his mother a housewife.

When the whole of India was fighting for freedom from the British government, Suman was fighting for the freedom of Tehri Riyasat from the King of Garhwal. He was a great fan of Gandhi and used the nonviolence way for the freedom of Tehri. Environment leader Sunderlal Bahuguna was also with Shri Dev Suman.

During his fight with the King of Tehri who called as Bolanda Badri (speaking Badrinath), he demand complete freedom for the Tehri. On 30 December 1943 he was declared a rebel and arrested by Tehri kingdom. In jail, Suman was tortured, very heavy cuffs was given to him, pieces of stone were mixed with his food, sand mixed roti was given to him, and many more tortures were applied by the jailer Mohan Singh and other staff. Then he decided to go on hunger strike. Jail staff tried to give him food and water forcibly, with no success. After being in prison for 209 days, and on hunger strike for 84 days, Shri Dev Suman died on 25 July 1944.

His dead body was thrown into the Bhilangna River without a funeral.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज 25 जुलाई बीर शहीद श्रीदेव
सुमन बडोनी (निवासी ग्राम जौल
जिला टेहरी गढ़वाल उत्तराखंड )
जी की पुण्य तिथि है ....209
दिनों की जेल की एकान्त यातना और
84 दिन की इस ऐतिहासिक अनशन वह
भी २९ वर्ष की अल्पआयु शहीद
श्रीदेव सुमन का बलिदान..... एक
सच्ची श्रद्धांजली ...श्रीदेव
सुमन ने जो संघर्ष किया, वह अपने
आप में एक इतिहास है। श्रीदेव
सुमन एक विचारधारा का नाम है।
जिनके अमर बलिदान के साक्ष्य हैं
टिहरी के वृक्ष जिसकी छाँव में
हमें स्वतंत्र होने का आनंद
प्राप्त होता है, टिहरी के पहाड़
जिनसे हमें अपने कर्तब्य के
प्रति अटल रहने, कभी ना झुकने व
जीवन की ऊँचाइयों को छूने
की प्रेरणा मिलती है वह गंगा,
भिलंगना, भागीरथी जैसे कई निरंतर
प्रवाहित पवित्र
नदियाँ जो किसी भी बाधा के समक्ष
घुटने नहीं टेकती और अपने प्रयाण
का मार्ग स्वयं ढूंड लेती हैं और
यह विद्यालय जो कई वर्षों से सुमन
जी के नाम की ज्वाला अपने
विद्यार्थिओं के ह्रदय में
निरंतर प्रज्वलित करता आ रहा है
किन्तु आज हम उन
मूल्यों को विस्मृत कर गए हैं
जो सुमन जी ने हमें एक स्वतंत्र
टिहरी का आजाद नागरिक बना सिद्ध
किया था. जिन मूल्यों के लिए
उन्होंने ८४ दिन अन्न जल
का परित्याग कर पंचतत्व
का आलिंगन किया था. उन्होंने एक
स्वतंत्र टिहरी राज्य
की ही नहीं अपितु कल्पना की थी एक
ऐसे भारत वर्ष की जो एक उन्नत,
स्वाबलंबी, शांति का द्योतक,
गौरवमयी राष्ट्र हो, जिसमें
प्रत्येक नागरिक को पूर्ण
स्वतंत्रता का अधिकार
हो..उत्तराखंड जनक्रांति में उनके
योगदान
को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
श्रीदेव सुमन ने समाज को सिर
उठाकर जीने की प्रेरणा दी है। उन
का बलिदान उत्तराखंड के इतिहास
में सदा याद
रहेगा ..लोकशाही की सथापना के लिए
८४ दिन के आमरण अनशन में २५
जुलाई १९४४ को शहादत देने वाले
अमर शहीद श्री देव सुमन की शहादत
दिवस पर २५ जुलाई को बलिदान दिवस
के रूप में मनाया जाता है .209
दिनों की जेल की एकान्त यातना और
84 दिन की इस ऐतिहासिक अनशन के
बाद मात्र 29 वर्ष की अल्पआयु में
25 जुलाई, 1944, को यह
क्रांतिकारी अपने देश, आदर्श और
आन के लिए इस संसार से विदा हो गए।
टिहरी रियासत के कर्मचारियों ने
जनाक्ररोश के भय से 25 जुलाई,
1944 की रात्रि को अमर शहीद
श्रीदेव सुमन के शव को बिना उनके
परिवार को सूचित कीए
टिहरी की भिलंगना नदी में
बलपूर्वक जलमग्न कर दिया। यह एक
पवित्र
आत्मा की हत्या थी टिहरी जनक्रांत
नायक अमर शहीद श्रीदेव सुमन के
पैतृक गांव जौल में उनकी जन्म
तिथि व पुण्य तिथि के मौके पर भले
ही कार्यक्रम आयोजित कर
उनका स्मरण
किया जाता रहा हो लेकिन उनके
पैतृक मकान को आज तक ऐतिहासिक
धरोहर घोषित नहीं किया गया है।
इसको लेकर
जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक
जो घोषणाएं की गईं वे हवाई साबित
हुई हैं। अभी तक उनके परिजनों ने
ही किसी तरह इस धरोहर को बचाकर
रखा है। टिहरी रियासत
की गुलामी में
जकड़ी प्रजा को आजादी दिलाने
वाले अमर शहीद को कोटि कोटि नमन ,,
सूत्र श्री नीरज डंगवाल