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Your Hearth Touching Uttarakhadi Songs -आपके दिल को छू लेने वाले ये गाने !

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 31, 2010, 04:30:17 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
Dosto,

The history of Uttarakhandi Folk Music is very old. There have been many singers who composed and sung several heart touching songs which are ever green. Some of the songs are  so sweets and heart touching that you will never forget them. When I listen old folk songs,  I find many songs which have been made on social issues and geographical issues of Uttarakhand. Apart from this, Uttarakhandi Folk Music has also made several songs on the tough life of women there.

Here we just want to know your choice of songs which you prefer most

So please do write why you like any particular songs which you really feel heart touching. We will appreciate if you mention the social message from that songs.

Regards,

M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


बहुत पहले मैंने यह गाना आकाशवाणी में सुना और पिछले साल एक बार फिर से इस गाने का आडियो मुझे मिला! यह गाना मैंने स्वर्गीय गोपाल बाबू गोस्वामी के आवाज में सुना था! इस गाने में पहाड़ के नारी का दुःख और वहां के लोगो के कष्ट भरा जीवन के बारे में काफी वर्णन किया गया है! हालकि आज समय बदल गया सिथिति भी बदल गयी लेकिन गाने में समस्यों का वर्णन बहुत सुंदर तरह से किया गया है! जो भी गाने को सुनेगा, निश्चित रूप से भाविक हो जायेगा !

" दिन ऊना जाना रैया, जुग -२ बीते गैया
म्यार पहाड़ माँ बैनिया उदेखिया (उदासी) रैया

हमो कै नि भी आपुन ज्ञान
पहाड़ चेली रेई अज्ञान हो.....

" दिन ऊना जाना रैया, जुग -२ बीते गैया
म्यार पहाड़ माँ बैनिया उदेखिया (उदासी) रैया

स्वामी चिट्टी आयी घर में
कही पडूना लागी शरमा हो..


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गाने में पूरे ला-इन मै नहीं लिख पाया हूँ लेकिन यह गाना मेरे दिल के बहुत करीब है ! गाने का सामाजिक सन्देश है महिलाओं को शिक्षा जरुर दे !






Devbhoomi,Uttarakhand

 दुरु पर्देशु छौहोंमैं !!! इस सब्द को सुनकर , हर उस परदेसी का रोम रोम खड़ा हो जाता है , जिसने इस पापी पेट के लिए , अपने ,घर बार सब कुछ , अपने माँ बाप भाई बहिन और गाँव गलियों और देश को त्याग रखा है ,और कुछ पल ऐसे होते हैं कि सब कुछ भूल जाने के बाद भी अपनों और अपने गाँव गलियों ,और माँ बाप भाई बहिनों कि याद आ ही जाती है और शादी होने के बाद भी कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो अपनी पतनी को शाथ नहीं ले जा सकते हैं , जानकर सायद कोई भी नही ले जाते हैं , आदमी कि अपनी अपनी परेसानी होती ,जिससे उसको , उसको अपने बीबी बच्चों को घर छोड कर परदेश जाना पड़ता है ,क्यूं ये हम जैसे लोगों के शाथ ही होता है


ये विशेष कर गढ़वाल उत्तराँचल ले लोगों मैं ज्यादा देखने को मिलता है , चलो यही सायद हमारी किस्मत है और ये पापी पेट भी तो है जो कि इंसान को सब कुछ त्याग करवाता है , चलो कोई बात नहीं है हौंसला बुलंद होना कहिये , एक दिन खुशियाँ जरूर हमारे कदम चूमेगी ,
श्री नरेंदर सिंह नेगी जी ने ये जो गाना गया है सायद हम लोगों के ऊपर सही लागू होता है , उसी गाने की ये पंक्तियाँ मैं यहाँ लिखा रहा हूँ



दुरु पर्देसू छूँ , उम्मा तवे तैं मेरा सुऊं , हे भूली न जेई, चिट्ठी , देणी रई
राजी खुसी छों  मैं यख , तू भी राजी रही तख
गौं गोलू मा चिट्ठी खोली , मेरी सेवा सौंली बोली
हे भूली न जेई , चिट्ठी देणी रैइ
घाम पाणी मा न रै तू
याखुली डंडियों न जै तू
दुखयारी न हवे जै  कखी ,सरिल कु ख्याल रखी, खानी पैनी खाई
हे भूली न जेई , चिट्ठी देणी  रैइ
हुंदा जू  पांखुर  मैं मा , उड्डी औंदु फुर तवे मा
बीराना देस की बात , क्यच उम्मा मेरा हात , हे भूली न जेई , चिट्टी देणी  रैइ
दुरु पर्देसू छुओं , उम्मा तवे तै मेरा सों , हे भूली न जेई , चिट्ठी देणी रैइ , चिट्ठी देणी रैइ

Devbhoomi,Uttarakhand

बरखा हवेली बत्वानी होलू रै, छौया मन्दारों कु पाणी होलू रै
जाली सुवा घासु का डांडीयों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!



            धरयों खांदा मा चाकू कितलू, चुल्ला मा भावरानी च आग !
            छन स्वामी परदेश मा देवतों, रख्या राजी तुमु मेरु सुहाग !!



मेरी प्यारी उदास न होई ,मैं छुटी का अरज देणु छौं !
लगदा मंगसीर का मैना,मेरी प्यारी मैं घोर ऑनु छौं !!



            लगी सौणकी  कुरेडी  रोला गदरियों मा ,हौंदु सिंस्याट !
            घुट घुट लगदी च बडुली, दिल मा हौंदु धक् धक्द्याट    !!!



बौन पंछी , गाड गद्नियों ,मेरी प्यारी खुदेनं न देना !!
होली घासु क जांई बाणु मा तुमु सौं छन वीं रौन न देना !!!



            सेवा सौंली, राजी खुसी अपणी तुमु फ़ोन मा दी दयान!
            बाटु देखुलू मंगसीर क मैना ,स्वामी घोर जरूर अयान !!



प्यारी कन क्वे कटेला यी दीन,मेरु त्वेसी बिछाडाट करयों च !
बाकि पर्देसू नौकरी क बानाघर गाँव गुठयार छोडीयूँ च !!!!



             पर्देसू मा अफु रयान , मेरा बाना नि मन झुराण!
            मैं जन्नी छुओं ,अपणाघोर  मा स्वामी तुमु अपणु ख्याल रख्यान!!!



सुवा तू अपणु ख्याल रख्यान , बरखा होली बत्वानी होलू रै चौया मंद्रों कु पाणी होलू रै!
जाली सुवा घासु क डंडियों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: devbhoomi on July 31, 2010, 04:56:50 PM
बरखा हवेली बत्वानी होलू रै, छौया मन्दारों कु पाणी होलू रै
जाली सुवा घासु का डांडीयों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!



            धरयों खांदा मा चाकू कितलू, चुल्ला मा भावरानी च आग !
            छन स्वामी परदेश मा देवतों, रख्या राजी तुमु मेरु सुहाग !!



मेरी प्यारी उदास न होई ,मैं छुटी का अरज देणु छौं !
लगदा मंगसीर का मैना,मेरी प्यारी मैं घोर ऑनु छौं !!



            लगी सौणकी  कुरेडी  रोला गदरियों मा ,हौंदु सिंस्याट !
            घुट घुट लगदी च बडुली, दिल मा हौंदु धक् धक्द्याट    !!!



बौन पंछी , गाड गद्नियों ,मेरी प्यारी खुदेनं न देना !!
होली घासु क जांई बाणु मा तुमु सौं छन वीं रौन न देना !!!



            सेवा सौंली, राजी खुसी अपणी तुमु फ़ोन मा दी दयान!
            बाटु देखुलू मंगसीर क मैना ,स्वामी घोर जरूर अयान !!



प्यारी कन क्वे कटेला यी दीन,मेरु त्वेसी बिछाडाट करयों च !
बाकि पर्देसू नौकरी क बानाघर गाँव गुठयार छोडीयूँ च !!!!



             पर्देसू मा अफु रयान , मेरा बाना नि मन झुराण!
            मैं जन्नी छुओं ,अपणाघोर  मा स्वामी तुमु अपणु ख्याल रख्यान!!!



सुवा तू अपणु ख्याल रख्यान , बरखा होली बत्वानी होलू रै चौया मंद्रों कु पाणी होलू रै!
जाली सुवा घासु क डंडियों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!!!

आज कल के माहौल में इस प्रकार के गाने बहुत कम बनते है! गजेन्द्र राणा के फुर्की बाद एल्बम का यह गाने मुझे बहुत ही पसंद है!

जहां एक परदेशी अपनी घरवाली को याद करते है गाने के माध्यम से चौमास यानी वरसात के दिनों में उसकी घरवाली किस प्रकार से पहाडो काम कर रही होगी और किस प्रकार से उसे इस वरसात के ऋतू में आराम से काम करने की नशिहत भी देता है! और जल्दी ही घर गाने के वादा भी करता है !

देखिये जाखी जी के द्वारा इस गाने के ला-इन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


कबूतरी देवी का यह गाना!

एक प्रदेश जिसे २ दिन के बाद प्रदेश जाना है और वह उदास हो जाता है! और अपनी पीड़ा गाने के रूप में व्यक्त करता है !

" आज पनी जाऊ-२ भोल जा पनी जाऊ
  परसु के नै जून, स्टेशन पूजा दे ...
  वान बाटी रवाना है जूना


Raje Singh Karakoti

मेहता जी,     एक गाना जिसके कुछ बोल हैं तूले चिठी कले नि भेजी का पूरा विवरण देने का कष्ट करे !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


राजे जी.. बहुत अच्छा प्रशन आपका! उत्तराखंड के सबसे सफल फीचर फिल्म में एक "घर जवाई" का यह गाना है! जिसमे नायिका अपने पति / प्रेमी से चिट्टी ने भेजने से नाराज है!

गाने में बहुत अच्छी जुगल बंदी है!

This is the video of this song.

घरजन्वें,सुपर हिट गढ़वाली फिल्म भाग 11

Devbhoomi,Uttarakhand

एक और भी बहुत पुराना गाना है जो दिलों के तार छन-छना देता है,नेगी जी ने इस गीत में प्यार का वर्णन किया है की किसकी माया ज्यादा है नेगी जी के  इन बोलों मैं ओ मिठास है जिसको सुनकर ,दो दिलों की तार झनझनाते है , यही है दो दिलों की दास्तान ,इन बोलों को अपने सुरीली आवाज दी है नरेंद्र सिंह नेगी और रेखा धस्माना ने


हे गंगा जी की औन्त हे गंगा जी की औन्त ,
कैकी माया घनाघौर ,तराजू  न तौली लेण
कैकी माया भौत तराजू न तौली लेण हो

हे झंगौरा की घाण, जैकी माया घनघोर ,
अंखियों मा पछाण, जैकी माया घनाघौर हो


हे सड़कों का घूमा ,हे सड़कों का घूमा
सदानी नि रेंदू सुवा ,सदानी नि रेंदू सुवा

जवानी की धुमा , सदानी नि रेंदुं सुवा हो
भैरा रींगी भैराक भैरा रींगी भैराक
तरूणी उमर सुवा ,बथोंसी  हराक, तरूणी उमर सुवा हो

हे घुघूती कु घुला , घुघूती कु घोला
मनखी माटु हेवे जांदू रही जांदा बोल , मनखी माटु हेवे जांदू हो

हे गौडी कु मखानम हे गौडी कु मखान
दुनिया न मरी जाण दुनिया न मरी जाण
क्या लिजाण यखान दुनिया न मरी जाण हो


हे गंगाजी की औन्त , कैकी माया घनाघौर तराजू न तौली लेन कैकी माया भौत
तराजू न तौली लेन

Devbhoomi,Uttarakhand

इस गाने मैं श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी ने उस जुन्याली रात का वर्णनकिया है जो की गांवों मैं लोग रात होते ही अपने अपने घरों मैं बैठ जाते है और एक दुसरे बेटी ब्वारी अपने मइके की बातें और अपने बचपन की कहानियो और अपने बचपन मैं खौ जाते हैं, इस जुन्याली रात का इन्तजार लोग एक साल से करते हैं
वा जुनियाली रात ऐगे फ़िर याद -२
ऐगेनी फ़िर याद वो दिन वो दिनों की बात
              निराला - वा जुनियाली रात ऐगे फ़िर याद -२
हिटदी रात रुकिया पन्त
हमना कैक रंता -मन्ता -2
                     दुनिया सेई नींद निचंत
                     हमारी छुयो कु नी क्वी अंत
                     वा जुनियाली रात ऐगे फ़िर याद -२
उजियल दिनों न जब डराई
अँधेरी रातो न सारु दयाई
                     भाग्य हम बदली नी सक्या
                     बगत झणी किले बदलियाई
                      वा जुनियाली रात ऐगे फ़िर याद -२
गेणा खोजियाणा आगास
जून बेठी मेरा पास -२
                    मै साणी जून बथोंण वाला
                    कख गे वो तेरु विस्वास
                    वा जुनियाली रात ऐगे फ़िर याद -२
तेरु सौबत का रात दिन
आज आँखीयो  रिटना छन-२
क्या बतो  अब तवे बिन
क्या खोई क्या पाई मिन
वा जुनियाली रात ऐगे फ़िर याद -२