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Heera Singh Rana - हीरा सिंह राणा उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि एव गायक

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 13, 2007, 02:52:48 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे आ लिली बाकरी लिली छ्यू छ्यू |
आ लि लि लि लि ......छ यू छ यू |
बाकरी ऐजा उज्याड न खा , जोडनूँ तिहांडी हाता ,
त्योरो - म्योरो कलि पटवै गुस्याणी तीन पिडिक सरादा |
सभापति ज्यू कैंल रपोटा , बात मान तू - तू -
ज्यांणी छ कती आली जब , एती परतिम चबकारी |
त्यर भी लगाली मेंकणी कच्याली , गाड़ी बे ल्वेकी धारी |
जब लागैली धन्तरैकि , पै भाजैली टू ... टू ....
ते बाकरी बाग लि जो रे त्विल उज्याड खाय |
ओये बाकरी त्यर कारणा काव जै म्यर आय ,
लट्ठ लिबेर ऐ  गो पधाना  अब कथां हणी जूं .........जूं ..
त्विल नी खांण पय बाकरी धान युं पधानु का ,
मैं भाजुनुं तल गध्यारा टू बुज हना लुका ,
त्विल अपणी चिरि लधोड़ी क्या मैं टिकें खूं....खूं ...
ध्यौ कें जाबेरा आज मैं बौं लै मर्चे धूप दिणी |
ओ रे  "हिरुवा " आज का दिना आगेछ तेरी निहुणी |
मार पडैली एसी हो रामा याद एँला बू ........... .बू ...........
जब नि खया मैल बुधुवा मेरि बाकरिल गोव |
ग्वेल्देराणी द्वि डबला भेंट चढौला भोव |
हम ग्वलों की त्वी छै देवी और कै छै कूं............कूं............|

                                        -हीरासिंह राणा