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Good Wishes In Uttarakhand Language - उत्तराखंडी शुभकामनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 14, 2007, 12:17:27 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भगवान देण है जाया .

मतलब .. भगवान सफल हो जाना.. सबका भला करना

Mukesh Joshi

गढ़वाली मे धन्यवाद के बदले में   " जुगराज रै" एक तरह से आशीष ही है
जुगो राज रहे तुम्हारा

हेम पन्त

पहाङ में बुजुर्ग लोग नवदम्पत्ति को यह आशीर्वाद देते हैं..

तुमरि खूब फुल-बाङि है जो

अर्थात तुम्हारा परिवार खूब फले-फूले..

हेम पन्त

बच्चे द्वारा नये वस्त्र पहनने पर बुजुर्गों के चरण स्पर्श करने का रिवाज है.. बुजुर्ग भी बच्चों को यह कहकर आशीर्वाद देते हैं.

"बैग फाङे, बैग पाये"

"बैग फाङे, बैग पाये" आशीर्वाद का तात्पर्य है कि तुम्हारी जिन्दगी नये-2 कपडे पहनने के खूब मौके आते रहें.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आशीष
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सुफल हौ, मंगल हौ, य़ो दिन य़ो बार,
खुशियोकी फलवारी हौ, यौ घर, यौ द्वार

Devbhoomi,Uttarakhand

जुगराज रै तुमु - ये उत्तराखंडी  शुभकामना जितनी मीठी और सुरुली है उतनी ये शुभ कामना सुनाने और बोलने में  सुरुली है ! ये श्भ्कमना उत्तराखंड के टिहरी और पौड़ी तथा रुद्रप्रयाग में बहुत प्रशिध है इस शुभ कामना का प्रयोग हमारे बुजुर्ग लोग अपने से छोटे को देते हैं ,इसका मतलब होता हो कि-जुग-जुग तकजियों

Devbhoomi,Uttarakhand

गढ़वाली में एक और शुभकामना दी जाती है जब कोई शादी करने बाद या कुछ अच्छा काम करने के बाद अपने से बड़ों का पैर छू कर आशीर्वाद लेता है तो ये उसे बड़े-बुजुर्ग ये शुभकामना देते हैं -

खूब फली-फूल्यातुमु

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Here is famous Song of Narendra Singh Negi .. where you will the blessing of parent to their son...





जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे, जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे   
तेरा हात खुंटो बेटा काँडु न चुबो कबि, तेरा हात खुंटो बेटा काँडु न चुबो कबि     
होन्दु खान्दू रे तू- जी रे     
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे, तेरा हात खुंटो बेटा काँडु न चुबो कबि     
होन्दु खान्दू रे तू- जी रे     
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
निंद नि औन्दि भूख नी लगदी, जब गणिदा तेरी बिदाई का बरस – बिदाई का बरस ..   
तेरा दियां दुःख सुख ह्वै जन्दिन, जब सुण्दां तेरि राजि खुशि कैमां – राजि खुशि कैमां, जी रे     
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
हम खुंणि छोड़ि गै तू जै काँडोऊं, फूल ह्वैं जांदि तेरा बालपन समळि – बालपन समळि ..   
हमनुं क्या बुरु करि, सबि त कदिन अपणि जमाईं डाळ्यूं कि आस- डाळ्यूं कि आस, जी रे     
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
बाब दादा कुड़ि- पुगंड़ि नि चेंदि त, फणफुक जख रोळि, सुखि सत्ति रैई- सुखि सत्ति रैई   
बुलोंदी कबि त्वैमां ऐ जांदा हम बि, नाति- नत्येंणों कि भुकी पे लेंदा- भुकी पे लेंदा, जी रे     
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
खांण कमांणु हक छ जरुर तेरो भी, एत कबि खड़ाखड़ि देखि पूछि जांदि-देखि पूछि जांदि   
हमुंन क्या मंगण छे यो बेटा त्वै मां, ज्युंदि मदी जौंदा आशीष छ त्वैकि-आशीष छ त्वैकि, जी रे ..     
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
तेरा हात खुंटो बेटा काँडु न चुबो कबि होन्दु खान्दू रे तू- जी रे   
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे, जी रे, जी रे
Jee Re Jagi Re Jugraj Re by Narendra Singh Negi

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Devbhoomi,Uttarakhand

मेरी उम्र त्व़े लगी ज्या,-इसका मतलब है की मेरी उम्र भी आपको लग जाय