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Tribute To Uttarakhandi personalities : उत्तराखण्डी विभूतियों को नमन

Started by पंकज सिंह महर, August 18, 2010, 10:11:15 AM

पंकज सिंह महर

आज यानि ३० अगस्त को उत्तराखण्ड के क्रांतिवीर स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी जी की आठवीं पुण्य तिथि है। इस अवसर पर मेरा पहाड़ परिवार उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता है।
 
त्रिपाठी जी की पुण्य तिथि पर मेरा पहाड़ प्रतिवर्ष द्वाराहाट में कार्यक्रम करता है। इस वर्ष भी हमारे अधिकांश सदस्य उन्हें श्रद्धांजलि देने द्वाराहाट गये हैं।
त्रिपाठी जी के बारे में जानने के लिये- http://www.merapahadforum.com/personalities-of-uttarakhand/vipin-chandra-tripathi/
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पंकज सिंह महर

आज पेशावर कांड की वर्षगांठ है, इस अवसर पर मेरा पहाड़ इस क्रान्ति के नायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली एवं उनके साथियों को श्रद्धासुमन अर्पित करता है।



वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली जी के बारे में अधिक जानने के लिये निम्न लिंक पर जायें- http://www.merapahadforum.com/personalities-of-uttarakhand/chandra-singh-garhwali-''/ 

पंकज सिंह महर



आज बाबा मोहन उत्तराखण्डी जी की पुण्य तिथि है, २००४ में आज के ही दिन उन्होंने गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर ३९ दिन के अनशन के बाद अपनी शहादत दे दी थी। इस अवसर पर हम उनको अपनी ओर से अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन इस श्रद्धांजलि को अर्पित करते हुये हम अपने सीने पर एक बोझ भी महसूस कर रहे हैं कि बाबा ने जिस मांग को लेकर अपनी जान तक कुर्बान कर दी, उसके लिये हम आज तक न कुछ कर पाए और न करने जा पा रहे हैं।
इस अवसर पर हम यही प्रण करते हैं कि बाबा जब तक आपके सपनों का उत्तराखण्ड नहीं बनेगा और गैरसैंण राज्य की राजधानी नहीं बन जायेगी, हम इस बोझ को हमेशा महसूस करते रहेंगे।


बाबा आपका बलिदान प्रचण्ड, याद रखेगा उत्तराखण्ड।

Devbhoomi,Uttarakhand

बाबा मोहन उत्तराखंडी को सत सत नमन बाबा मोहन उत्तराखंडी के बलिदान और त्याग को उत्तराखंड का हर जन  याद रखेगा और बाबा आप उत्तराखंड के हर उस क्रांतिकारी के मन मैं बसे हुए हो और बसे रहोगे आपके बलिदान को ब्यर्थ नहीं जाने दिया जायेगा

जय बाबा  मोहन उत्तराखंडी

पंकज सिंह महर


आज गिरदा की द्वितीय पुण्य तिथि है, गिरदा ने कभी कहा था कि "ततुक नि लगा उदेख, घुनन मुणडि़ नी टेक, जैंता एक दिन तो आलो ऊ दिन यो दुनि में," वो दिन अभी आना बाकी है, उत्तराखण्ड उसका इंतजार कर रहा है, उसके आगे गिरदा ने कहा" चाहे हम नि ल्या सकां, चाहे तुम नि ल्या सको, जैंता क्वे न क्वे त ल्यालो, ऊ दिन ये दुनि में," तो गिर्दा की इन्हीं पंक्तियों को आत्मसात करते हुये हमें वह दिन लाना है, उत्तराखण्ड में। आज गिर्दा को मेरा पहाड़ परिवार उनकी पुण्य तिथि पर भावपूर्ण स्मरण करते हुये उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनके दिखाये हुये रास्ते पर चलने का प्रण भी करता है।

पंकज सिंह महर

आज यानि ३० अगस्त को उत्तराखण्ड के क्रांतिवीर स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी जी की आठवीं पुण्य तिथि है। इस अवसर पर मेरा पहाड़ परिवार उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता है।
 

त्रिपाठी जी की पुण्य तिथि पर मेरा पहाड़ प्रतिवर्ष द्वाराहाट में कार्यक्रम करता है। इस वर्ष भी हमारे अधिकांश सदस्य उन्हें श्रद्धांजलि देने द्वाराहाट गये हैं। त्रिपाठी जी के बारे में जानने के लिये- http://www.merapahadforum.com/personalities-of-uttarakhand/vipin-chandra-tripathi/

पंकज सिंह महर

आज यानि 10 सितम्बर को उत्तराखण्ड के महान व्यक्तित्व भारत रत्न श्री गोबिन्द बल्लभ पन्त जी का जन्म दिवस है। इस अवसर पर मेरा पहाड़ परिवार उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता है।
 

पन्त जी के बारे में ज्यादा जानने के लिये निम्न लिंक पर जांये।
http://www.merapahadforum.com/personalities-of-uttarakhand/bharat-ratna-shree-govind-ballab-pant/

पंकज सिंह महर



आज उत्तराखण्ड के प्रखर समाजवादी चिन्तक स्व० जसवन्त सिंह बिष्ट जी की पुण्य तिथि है, मेरा पहाड़ डाट काम नैटवर्क एवं क्रियेटिव उत्तराखण्ड-म्यर पहाड़ की ओर से उनको विनम्र श्रद्धांजलि।

जसवन्त सिंह जी का उत्तराखण्ड के गठन में महत्वपूर्ण योगदान है और ये समाजवाद के सच्चे सिपाही थे, उनकी सादगी और सरल स्वभाव आज भी एक मिसाल है। दो साल पहले क्रियेटिव उत्तराखण्ड-म्यर पहाड़ ने अपनी पोस्टर श्रृंखला में श्री बिष्ट जी को विराजमान किया था और स्याल्दे में उनकी पुण्य तिथि पर यह पोस्टर जारी किया था।

विनोद सिंह गढ़िया



आज उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोक गायक स्व0 श्री गोपाल बाबू गोस्वामी जी का जन्मदिन है। इस अवसर पर "मेरा पहाड़ डॉट कॉम" परिवार स्व0 श्री गोपाल बाबू गोस्वामी जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करता है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक गोपाल बाबू गोस्वामी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनके गीत हमें आज भी उनकी उपस्थिति का अहसास कराते हैं। जीवन के हर पहलु को छूते उनके गीतों की सूची लंबी है। हर किसी को रुला देने वाला दुल्हन की विदाई का उनका मार्मिक गीत 'न रो चेली न रो मेरी लाल', जा चेली जा सरास तथा उठ मेरी लाड़ू लूकूड़ पैरी ले, रेशमी घाघरी आंगड़ी लगै की आज भी जबरदस्त मांग है।
उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक स्व. गोपाल गिरि गोस्वामी को लोग गोपाल बाबू के नाम से भी जानते हैं। उनका जन्म चौखुटिया बाजार से लगे ग्राम पंचायत चांदीखेत में दो फरवरी 1942 को मोहन गिरि गोस्वामी के घर हुआ था। बचपन से ही गीतकार बनने के जुनून में उन्होंने पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया। वह बारह साल की उम्र से ही गीत लिखने और गाने लगे थे।
जीवन के 54 सालों में उन्होंने साढे़ पांच सौ गीत लिखे। उनका पहला गीत कैलै बजै मुरूली ओ बैंणा ऊंची-ऊंची डान्यूमा आकाशवाणी नजीबाबाद से प्रसारित हुआ था। 1972 में भारत सरकार के गीत और नाटक प्रभाग में नियुक्ति के बाद गोस्वामी को अपना हुनूर दिखाने का अच्छा मंच मिल गया। यहीं से उनके गीतों की संख्या और लोकप्रियता बढ़ती चली गई।
सेवा के दौरान ही बीमारी के चलते 26 नवंबर 1996 को काल के क्रूर हाथों ने एक महान गीतकार को हमसे छिन लिया। भले ही अब वह इस दुनिया में नहीं हैं परंतु लोक संस्कृति, प्रकृति, नारी सौदर्य तथा रीति रिवाज ही नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र को छूने वाले उनके गीत हमें हमेशा उत्प्रेरित करते रहेंगे।

पंकज सिंह महर

आज यानि ३० अगस्त को उत्तराखण्ड के क्रांतिवीर स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी जी की पुण्य तिथि है। इस अवसर पर मेरा पहाड़ परिवार उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता है।
 
त्रिपाठी जी की पुण्य तिथि पर मेरा पहाड़ प्रतिवर्ष द्वाराहाट में कार्यक्रम करता है। इस वर्ष भी हमारे अधिकांश सदस्य उन्हें श्रद्धांजलि देने द्वाराहाट गये हैं।
त्रिपाठी जी के बारे में जानने के लिये- http://www.merapahadforum.com/personalities-of-uttarakhand/vipin-chandra-tripathi/
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