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Chachari Jhoda on Fair, Love etc- मेलो एव जीजा साली पर बने पारंपरिक झोडे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, September 05, 2010, 09:15:43 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


    दोस्तों,

    उत्तराखंड के लोक संगीत में पारंपरिक
झोडे, चाचरी, झुमेलो आदि का बहुत   महत्व रहा है! जब लोगो के पास मनोरंजन के साधन नहीं थे स्थानीय मेलो पर   गाये जाने वाले चाचरी झोडे आदि बहुत लोकप्रिय हुवा करते थे ! यहाँ तक लोग   मेले के बाद आपस में पूछा करते थे कि मेले मे कौन सा चाचरी, झोडा सबसे   ज्यादे लोक प्रिय (हिट) था! ये झोडे विभिन्न प्रकार के विषयो पर बनाते थे!   लेकिन आधुनिकता के इस दौर में उत्तराखंड के यह लोक विधा लुफ्त होने की कगार पर   है!    

    जहाँ  पहले ये चाचरी, झोडे धार्मिक, सामाजिक, पारवारिक, प्रेम रस आदि   विषयों पर बनते थे जिनका कि समझ में प्रभाव भी देखा जाता था! कई झोड़ो पर   प्रेम प्रसंग की बाते भी बया होती थी जैसे लोक झोडे के रूप में गाये करते   थे!
   

    मेरापहाड़ पोर्टल में हमने सबसे पहले इन्टरनेट पर इन झोड़ो, चाचारो को   लिपिबद्ध रूप एव अन्य संसाधनों के रूप में प्रस्तुत किया है! इस टोपिक से   पहले हमने एक सामान्य टोपिक में सारे झोडे लिखे और एक धार्मिक झोड़ो के   लिए नया टोपिक बनाया है, जिससे कि लोगो को इन झोड़ो और अपने संस्कर्ती को   जानने और समझने में सहजता होगी!
   

    इस टोपिक में हम उत्तराखंड के मेलो, जीजा साली नोक झोक, प्रेम प्रसंग से   संभंधित झोड़ो को प्रस्तुत करंगे! आप भी इस टोपिक में अपना योगदान दे सकते   है!
   

    एम् एस मेहता
       

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


तो सबसे पहले शुरू करते है झोड़ो, चाचरी  का यह क्रम! बागेश्वर जिल्ले में प्रसिद्ध यह एक पुराना झोडा!

(बागेश्वर की रहने वाली हेमा का दानपुर के सूबेदार के लड़के से सम्बन्ध हो गया है! बागेश्वर विकसित स्थान है, दानपुर तब पिछड़ा इलाका हुवा करता था और इस पर भी प्रेमी मोहन वहां नहीं है! वहां से दूर कानपुर में गाडी चलाता है! येसे में बागेश्वर की रहने हेम कैसे यह पायगी दानपुर! देखिये इस झोडे में!

बागेश्वर की रोणी हेमा, कशिके रौछे दानपुर ?
सूबेदार क चेलो मोहना, गाडी चलोछे कानपुर !
रहट की तान, गाडी चलूछे कानपुर ?

तेरो बदन बाना मोहना, कशिके रोछे दानपुर?
लगुली को लेट  मोहन, गाडी चलूछे कानपुर !

कब ह्वोली भेट मोहना, कशिके रोंछे दानपुर?
हाथ बड़ी शीशा घडी, गाडी चलूछे कानपुर !

घडी जहाँ फ़ोडीए मोहना, कैसे रोंछे दानपुर?
राम जी की जैसी सीता, कशिके रोंछे दानपुर !

झोदी झन तोडिये मोहना, गाड़ी चलूछे कानपुर !
झंगोरा की दै च मोहन, गाडी चलून्छे कानपुर?

उम्र की धूमधाम, कशिके रोंछे दानपुर ?
चार दिन रु छ मोहन, गाडी चलोछे कानपुर!

कान्योला की दानी मोहना, गाडी चलूछे कानपुर
आंखियु मा ये जाण मोहन, कश के रो छे दानपुर ?

हिंदी :

बागेश्वर की रहने वाली हेमा, कैसे रहेगी दानपुर में ?
सूबेदार का लड़का मोहन, गाडी चलाता है कानपुर !
रहट की तान, मोहन गाडी चलाता  है कानपुर !
(सिर्फ) तेरे बहाने मोहन (हेम) कैसे रहेगी दानपुर ?
बेल का लपेटा मोहन!
कब होगी भेट मोहन, (बिना तेरे हेमा) कैसे रहेगी दानपुर ?
हाथ पर बंधी शीशे की घडी, गाडी चलाता  है कानपुर!
घडी मत फोड़ना, मोहन कैसे रहेगी दानपुर ?
राम जी की (पत्नी) सीता (की तरह है हेमा) कैसे रहगी दानपुर !
जोड़ी नहीं तोडना, मोहन गाडी चलाता  है कानपुर!
झंगोरा की दाय है, मोहन गाडी चलाता है कानपुर !
उम्र की धूमधाम, चार दिन तक ही रहती है!

साभार : Book Chachari Jhamoko (compiled by Nand Kishore Hatwal)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


मानंद  बिसवासी

(प्रेम जाति और धर्म बन्धनों से ऊँचा होता है क्या! लोक गीत में प्रचलित मानंद और बिसवासी का प्रेमगीत भी ये प्रमाणित कर रहा है!

मानंद, लो तामा की पीटण
मानंद, दुरे वे पछ्यांदी,
मानंद, तेरी झोमर हिटण!

बिसवासी, देवी को तगत!
बिसवासी, वे तो मेरो जोगयाण   
बिसवासी, मै च तेरु भगत!
मानंद, लो कडू बोयु रेक !
मानंद, बामणो को खौला!
मानंद, भल छो बिगरो बैख!
हे, चखुली, बबूला की कुंछी!
हे, चखुली, माला खौला दिख्यांदी!
बिसवासी, सबी बानो मा ऊँची!
मानंद, काटी जालो प्याज!
मानंद, व्याखुनी हवे गे !
मानंद, यखी रै जा आज !
बिसवासी, चौलू भरी सेर!
बिसवासी, रात रैण का बाना!
बिसवासी, आयु मै व्यखानी देर !
बिसवासी, हे तिमली को पात!
बिसवासी, मैंन अजो नि खायो!
बिसवासी, तेरु पकायो भात!
मानंद, हिरन को गात!
मानंद, कन कने खालो टीपाऊ!
मानंद, तेरो बामन की जात !
बिसवासी, तेरी माया को खातिर,
बिसवासी, तोड़ी मैंन जनेऊ की कोली !
मानंद, लपलप कोई!
मानंद, लोग राम जपदा
मानंद, मै जपदू तोई!

हिंदी :
मानंद, तावे को पीटना
मानद, दूर से पहचानती है
मानंद, तेरा झूमते हुए चलना!
बिसवासी, देवी का तखत
बिसवासी, तू मेरी जोगिन
बिसवासी, मै तेरा भगत
मानद, मडुवा बोया
मानंद, ब्राह्मणों के खौले!

नरेन्द्र सिंह भंडारी के पुस्तक "Snow Balls of Garwal" में यह गीत एक और रूप में अंग्रेजी में संग्रहीत है ! द्रष्टव्य

Manand

Bisshwashi ! my Girl
Do not ask me where i am for,
Bisshwashi, my girl;s
I am off to bring Brahmini home
Mahanand, my boy
where to, with umbrella in your hand?
Mananand, my boy
And with medicine bag hanging from your shoulder ?
Bisshwashi! my girl;s
Do not ask me where i am for.
Bisshwashi! my girl's
For your sake and your love,
Bisshwashi ! my girl's
I have left doing my Sandhya
Mananad my boy;s
Have you any scruples to take?
Manand, my boy;s
Rice cooked by me your love
Bisshwashi! my Girl's
How shall i each a Brahmin Boy?
Bisswashi! my girl's
Rice prepared by you, a Dom's daughter!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


देवानी लौडा द्वाराहाट को
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देवानी लौडा द्वाराहाट क, तीले धारु बोला
जेतुली बौरेरो की जैता, तू छे भली बाना!

तामा को अरध जैता, तामा का अरध!
औना रैये जाना रैये, दयो कसी बरखा
दयो कसी बरखा लौडा, दयो कसी बरखा !
दीवानी लौडा, द्वाराहाट को, दयो कसी बरखा !

हिंदी :

द्वाराहाट का देवान लौडा, तीले धारु बोला
जेतुली बोरेरी की, तू भली (सुंदर) बान है!
ताबे का अर्ध्य जैता, ताबे का अर्ध्य!
बारिश की तरह आती, जाती रहना
देवान लौडा द्वाराहाट, बारिश की तरह !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मासी का प्रताप लौड़ा
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(नायक वही मासी का प्रताप और गायिका भी वही चौकोट की पारवती!, लेकिन इस गीत पारवती विवाहित है! संभवतया उनके जबरदस्ती अन्यत्र विवाह कर दिया गया है और वह प्रताप के प्यार में दीवानी ससुराल ही जा रही है !)

मासी का प्रताप लौड़ा, कॉलेज नै जाना बली,
कॉलेज नि जान चौकोट की पारवती,
सौरास नि जानी बली, सौरास नि जानी !
पारवती हरिया दाबा छन्को मेरी आंसी बली छन्को मेरी आंसी
में धोको छाड़न्या,छूने है येले फसी बली. हेजो थेली फ़ासी !
घो धुरी को धो निडालू, बल्धुरी को छ्युली बली, बल्धुरी को छ्युली!
चिट्टी टी डाखाना धयुली माया कै थे, घूल बली माया कैथे घूल !


हिंदी :


मासी का प्रताप लौड़ा, कॉलेज नहीं जाता है चौकोट की पारवती ससुराल नहीं जाती !पार से हरी कोमल घास काटी मेरी डराती (ने) मै तेरा पीछा नहीं छोडूंगा, चाहे अभी फ़ासी हो जाय घो 'धुरे' का देव रिघाल, बल्धुरे का छिल्ला !चिट्टी को डाकखाने में दूंगा, प्रेम किसे ! (नन्द किशोर हटवाल किताब चाचरी झोमको किताब से) 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


सिलगडी का पाल चाल
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सिलगडी के पार प्रेमियों के लिए रोमांचकारी जगह है! वहां घास काटने वाली जवान घसियारी पर एक श्रंगकारिक नजर !

वो सिलगडी का पाल चाल
क्लू फुलिया लाल, गाड़ किनारी कोछे घसियारी!
वो उब हुनि उम्र में,
जन रिटो काल, गाड़ किनार कोछे घसियारी !
वो नेपाल छत्तीस धारा,
पानी को तुदुक, गाड़ किनार कोछे घसियारी!
ओ  जो घडी समझ उन्छी
छाती की धड़क, गाड़ किनार कोछे घसियारी!
ओ भोटिया ले बाकर लाया,
धारचूला को घाटी, गाड़ किनार कोछे घसियारी
ओ किका लयाखा छड़ी गिछे
लाई फूल्भाड़ी, गाड़ किनार कोंछे घस्यारी!

हिंदी :

सिलगडी के पल्ले किनारे
क्लू फूल लाल, नदी के किनारे कौन है घास काटने वाली ?
(जवानी की ओर) बढती उम्र में
काल ना घूमे (तेरे ऊपर)
ओ नेपाल के छत्तीस धारा
पानी की तुदुक (आवाज) नदी के किनारे कौन है घास काटने वाली ?
जिस घडी याद आती है,
छाती धडकती है !
भोटिया बकरिया लाया!
धारचूला के पेडू  का झुरमुट
ओ किसके भरोसे छोड़ गयी
लगी फूल की बगिया

(चाचरी झुमाको - किताब - नन्द किशोर हटवाल) 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

शिखर   जहाँ पर की भगवान मूल नारायण का पवित्र धाम है! इस चोटी को शिखर के नाम से   जाना जाता है बागेश्वर जिले में ! जो की काफी ऊँचाई पर है ! इस शिखर पर के   ऊँची चोटी पर बना यह झोडा (Jeeja Saali Song - In the Form of Jhoda )
   
Listen from Here:

http://ishare.rediff.com/music/kumaoni-others-jolly/chhodi-de-bhina-meri-dhameli/10060547

Lyrics :

महिलाये (Saali) -

ओह शिखर डाना घामा आगेछो
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

पुरुष :

घाम छाडी बरखा हेजो
कसकी छोडो तेरी धमेली

महिलाये -
ओह शिखर डाना घामा आगेछो
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

पुरुष :

घाम छाडी बरखा हेजो
कसकी छोडो तेरी धमेली

महिला :

सास देखली, सौर देखला
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

महिला :

को देखला काली पातल
कासी के छड़ो तेरी धमेली

महिला :
स्वामी मेरो परदेश
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

पुरुष :

ओह तेरी दीदी रिसा रेछो
कसीकी छोडो तेरी धमेली

महिला :

आसमान में काली बादल 
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

पुरुष :
म्यार करमा यस छाना
कसी छोडो तेरी धमेली

महिला :

आसमान में काली बादल 
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

पुरुष :
म्यार करमा यस छाना
कसी छोडो तेरी धमेली

पुरुष :

कैके दियो में दोष साली
कसी के छोडो तेरी धमेली

महिला :
ओह धरती पड़ी ओस
भीना छोड़ दे भीना तेरी धमेली

पुरुष :

कैके दियो में दोष साली
कसी के छोडो तेरी धमेली

महिला :

सनगाड़ कौतिक आये
छोड़ दे भीना तेरी धमेली

पुरष :

ओह तयार सौरासी आयी रुला
कसकी थामुल, तयार धमेली

महिला :

झोड़ चाचरी गैना भीना
छोड़ दे भीना तेरी धमेली

पुरष :

ओह तयार सौरासी आयी रुला
कसकी थामुल, तयार धमेली

महिला :

झोड़ चाचरी गैना भीना
छोड़ दे भीना तेरी धमेली

पुरष :

ओह मै पड़ेली मार साली
कसकी छोड़ त्यार धमेली

महिलाये -
ओह शिखर डाना घामा आगेछो
छोड़ दे  भीना मेरी धमेली 

पुरुष :

घाम छाडी बरखा हेजो
कसकी छोडो तेरी धमेली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आज क कौथिग भीना, कस-२ भौछ ?


छिला, भैसी मेरी चनी-बीनी गिरे छिना रैछ
आज क कौतिक भीना कस-२ भौछ?

छिला, भैसी मेरी चनी बीनी- गिरे छिना रैछ ?
आज क कौथिग साली, बड झक भौछ !

छिला, हाथ क मुनड़ी मेरी, हाथ लुकी भेछ!
जेब का रुपली मेरी, येक ले नि रेछ!

छिला, भैसी मेरी चनी बीनी, गिरे छिना रेछ!
आज क कौथिग साली, कस-२ भौछ!

छिला , चनी बीनी, गिरे छिना रेछे
आज क कौतिक भीना, मनकसी  भैछ!



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


पुष्पित धरती साली,.के मन में उमग पैदा कर रही है, उसका मन भी बंसंत के रंग में रंगने कोई है !

ग्वरील फूल फुलिगे, म्यार भीना
मालू बेडा फ्योलड़ी, फुलिगे भीना !
झपनियाली सकिनी, फुलिगे भीना!
घरसारी लगडी, फुलिगे भीना !
घूल थान कुँज, फुलिगे भीना !
गैरी गदनी तुशरी, फुलिगे भीना!
डाडियु फुलिग्ये बुराश, म्यार भीना !
डल फुलिग्ये बसंत, बौडिगे भीना !
बंसत रंग माँ, रंगदे म्यार भीना !
ग्वरील फुल फुलिगे, म्यार भीना !


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


यहाँ प्रस्ताव जीजा का साली को..
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हिट साली सुरमा, कयों टिपि लियोना
ओ क्वे क्वे का चावा, कयों टिपि लियोना !

ओ घाघरी चावा, कयों टिपि लियोना
ओ घाघरी चावा, कातो लागी जालो!

ओ अल्मोड़ा जूना, सापण मोल लियोना !
ओह धोबी घाट जूना, लुकुड़ी सुज्या लियोना !!

ओ हिट साई सुरमा, कयों टिपि लियोना!
ओ क्वे क्वे का चावा, कयों टिपि लियोना !

ओ पिछोड़ी चावा, कातो लागी जालो!
ओ अल्मोड़ा जूलू, सापण मोल लियोना !!

ओ धोबी घाट जूना, लुकुड़ी सुज्या लियोना !
ओ हिट साई सुरमा, कयों टिपि लियोना
ओ क्वे क्वे का चावा, कयों टिपि लियोना !!