• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Dhoni Uttarakhand Tiger mission ambassador- धौनी ब्रांड अंबेसडर बाघ संरक्षण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, September 06, 2010, 08:05:35 AM

विनोद सिंह गढ़िया

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on September 06, 2010, 03:37:39 PM

मित्रो..

मेरे हिसाब से राज्य के हित में कोई कार्य अच्छा हो रहा है तो हमें उसकी प्रशंशा करनी चाहिए! एक समय था हम सब लोगो का धोनी से नाराजगी थी की धोनी ने कभी भी उत्तराखंड से अपना पैत्रिक नाता होने की बात कबूल नहीं की और वह कभी भी उत्तराखंड में नहीं आया!

अगर शादी के बाद वह अपनी मिटटी से और राज्य के विकास में भागीदारी करना चाहता है तो इसमें शायद हम लोगो को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए! बल्कि इस विषय को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए !

क्यों हम एक बात को लेकर धोनी के पीछे पड़े हुयी की उसने कभी नहीं कहा की उसका उत्तराखंड से नाता है! मैंने कितने की न्यूज़ पेपर में और टीवी इंटरवियु में देखा है धोनी के अपना उत्तराखंड राज्य से समंध के जिक्र किया है!

हमारा बहुत ज्यादे भावनाओं में बहना भी उचित नहीं के जब -२ धोनी में "मैंन आप द मैच मिले" मंच में जाके कह में उत्तराखंड से हूँ ! हमारे राज्य के सरकारों ने उसे कितनी बार सम्मानित किया है, इसके हम क्यों नहीं देखते!

हमारी तरफ से कितनी पहल रही है?

जो भी मेरे हिसाब से हमे धोनी का इस योगदान की सराहना करनी चाहिए !

" देर आये पर दुरुस्त आये"... हिमालय पुत्र, भारत का गौरव !



मैं भी मेहता जी के बातों को अपना समर्थन देता हूँ | वे सही कह रहे हैं कि यदि कोई राज्यहित में कोई कदम उठाता है तो उसका हमें समर्थन करना चाहिए, ताकि वह उत्साहित हो, उसे कुछ प्रेरणा मिले और वह इसी भावना को लेकर राज्यहित में कुछ और अच्छे कदम उठाये |
हमें धोनी के उत्तराखंडी होने या न होने पर कोई बहस नहीं करनी चाहिए | यदि हेमा मालिनी "स्पर्श गंगा अभियान"  की ब्रांड अम्बेसडर हो सकती हैं तो धोनी "बाघ संरक्षण" के क्यों नहीं............?

दीपक पनेरू

मेरा ये मानना है कि टेलीविजन पर विज्ञापन देने से कुछ भी भला नहीं होने   वाला है क्योंकि आज भी भारत के उन राज्यों में बिजली, पानी, सड़क और संचार   का अभाव है जहा पर बाघ सबसे ज्यादा पाए जाते है और अमानवीय व्यवहारों की   वजह से मारे भी जाते है जिसका घातक परिणाम ये है की आज बाघों को संरक्षण   करने की जरुरत पड़ रही है, लोग धोनी के द्वारा दिए गए सन्देश को केवल   टेलीविजन में ही देखा और सुन पाएंगे जिनके पास ये सुविधा भी नहीं होगी   उन्हें कैसे पता होगा कि बाघ और धोनी ये क्या बला है........इनका आपसी   सम्बन्ध क्या है धोनी अगर कोई सन्देश टेलीविजन के माध्यम से दे रहा है तो   वह किसके लिए भविष्य में उससे हमें क्या फायदा होगा ? आम इन्सान यही सब   सोचता है ........इससे अच्छा तो ये होता कि जितना पैसा एक विज्ञापन फिल्म   पर खर्च किया जा रहा है उतना पैसा अगर किसी स्वयं सेवी संस्था जैसे-   क्रियेटिव उत्तराखंड, जैसी संस्था के दानकोश में डाल दिया जाता जो पहाड़ कि   हर उस बिरासत को सहेजने के लिए तत्पर जी तोड़, निस्वार्थ भाव से रात और दिन   एक कर मेहनत कर रही है, ये संस्था द्रुतगति से समाज में खासकर उन स्थानों   पर जहा आज तक धोनी जैसा कोई व्यक्ति भी किसी भी कार्य के लिए जाना पसंद   नहीं करेगा, लोगो के दिलों में विश्वाश कायम करने में सफल हुयी है, ये   संस्था अपने कार्य जनजागरण के माध्यम से लोगो में इतना विश्वाश और ऐसी सोच   पैदा करने में समर्थ होगी कि लोग निस्वार्थ भाव से इस सेवा कार्य यानि   बाघों के संरक्षण में किये जाने वाले कार्य को अपनी ओर से अपना सभी तरह का   सहयोग देकर मंजिल तक पंहुचा देंगे ये मेरा विश्वाश है.

दीपक पनेरू

ब्रांड एंबेसडर बनाने से नहीं होगा बाघों का संरक्षण

      रामनगर:   कार्बेट में बाघों के संरक्षण के लिए क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धौनी को   ब्रांड एंबेसडर बनाये जाने के बजाए सरकार को जमीनी स्तर पर ठोस कार्यवाही   करना चाहिए। यह बात सांसद सतपाल महाराज ने सोमवार को लोनिवि विश्राम गृह   में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।   उन्होंने कहा कि ग्लैमर से जुड़े लोगों को ब्रांड एंबेसडर बनाया जाने से   लोगों का ध्यान उस ओर आकर्षित होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार   बाघों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर वन्य जीवों एवं पर्यावरण के लिए   कार्य करने वाले लोगों को अभियान से जोड़े। तभी बाघों के संरक्षण की बात हो   सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी के मुद्दे पर उनकी पार्टी में   मतभेद नहीं है। दीक्षित आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही राजधानी   के मसले पर कुछ कहा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के विकास   के लिए हिमाचल की तर्ज पर गैरसैण में भी एक विधानसभा भवन बनाना चाहिये।   श्री महाराज ने बताया कि वह लोकसभा में कुमाऊंनी व गढ़वाली भाषा को राजभाषा   घोषित करने के लिए प्राइवेट मेम्बर बिल जल्द रखने वाले है। उन्होंने कहा   कि राज्य में वन ग्रामों के दस्तावेज मंगा लिये गये है। उत्तराखंड से हज   यात्रियों का कोटा बारह सौ ही है लेकिन हज कोटे की सीटों को बढ़ाया गया है।

सत्यदेव सिंह नेगी

मै अभी भी अपनी बात पर कायम हूँ की धोनी को चाहिए कि वे किसी पहाड़ी गाँव को गोद लेलें और ब्रांड एम्बेसडर से मिली रकम को उस गाँव के विकास में लगा दें

जय उत्तराखंड
जय भारत

Devbhoomi,Uttarakhand

हहाहाह पोखरियाल जी आप तो महान हैं! अरे जो इंसा अपनी आप को उत्तराखंड का मानता ही नहीं है उसे क्यूं आप लोग यहाँ धकेल रहे हो ! जिस इंसान या जिन सहिदों ने उत्तराखंड की भलाई के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है या जो दे रहे हैं उन्हें तो आप भूल गए हो !

पोख्रियाली जी जो पैसा अपने इस बबंडर मैं खर्चा किया होता वही पैसा अपने मेरा गाँव की सडक बनाए मैं या किसी गरीब की झोली में डाल दिया हो तो आपको दुवाएं मिलती और आप हर हमेशा सुखी रहते !

कौन है धोनी ,ये टीम इंडिया का कप्तान हैं और उत्तराखंड से उसका कोई लेना देना नहीं है ! यही तो धोनी कहता आप रहा है १ उसे अपने गाँव का नाम मालूम है क्या !
हाँ हाँ बर्बाद करो गरीब जनता का पैसा तुम्हारे बाप क्या जाता है !

Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on September 06, 2010, 02:53:30 PM
उल्टा होना तो ये चाहिए था की धोनी किसी ऐसे गाँव को गोद ले लेता जिसपर कुदरत का कहर बरपा है देव भूमि उसे दिल से दुआ देती अब इस बात पर चर्चा होनी चाहिए की उसे ब्रांड ऐम्बस्टर बनाने मी किसे कितना कमीशन  मिला


यही गोद लेने का काम अग पोह्रियाल जी भी करते तो देवभूमि उहने भी दुवा देती ,जी पैसा आपने धौनी को ब्रांड अम्बसेडर बनाने मैं कर्चा किया अगर वही पैसा आपने कपकोट गाँव मैं हुई तबाही मैं लगाया होता तो आपको भी दुवायें मिलती पोखरियाल जी

Hisalu

You are right Devbhoomi Jee
This is just kind of publicity stunt to be in news. Just a fake concern towards tiger. Just a Masala for ETV UP/Uttarakhand(and other TV Channels) to serve something to viewers.
Neither Dhoni Nor HONOURABLE CM give a damn to these causes.



Quote from: Devbhoomi,Uttarakhand on September 08, 2010, 06:28:15 AM
हहाहाह पोखरियाल जी आप तो महान हैं! अरे जो इंसा अपनी आप को उत्तराखंड का मानता ही नहीं है उसे क्यूं आप लोग यहाँ धकेल रहे हो ! जिस इंसान या जिन सहिदों ने उत्तराखंड की भलाई के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है या जो दे रहे हैं उन्हें तो आप भूल गए हो !

पोख्रियाली जी जो पैसा अपने इस बबंडर मैं खर्चा किया होता वही पैसा अपने मेरा गाँव की सडक बनाए मैं या किसी गरीब की झोली में डाल दिया हो तो आपको दुवाएं मिलती और आप हर हमेशा सुखी रहते !

कौन है धोनी ,ये टीम इंडिया का कप्तान हैं और उत्तराखंड से उसका कोई लेना देना नहीं है ! यही तो धोनी कहता आप रहा है १ उसे अपने गाँव का नाम मालूम है क्या !
हाँ हाँ बर्बाद करो गरीब जनता का पैसा तुम्हारे बाप क्या जाता है !

Devbhoomi,Uttarakhand

अगर पोखरियाल जी और उत्तराखंड की सरकार के यही हाल रहे तो ,आगे न जाने क्या होता इस राज्य का पता चला कि- धुनी साहब एक दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कि शपत ले रहे हैं ,और पोखरियाल जैसे लोग देखते रह जायेंगें !
क्या उत्तराखंड सरकार को कभी सरम मनही आती है ऐसे काम करते हुए! क्या उत्ताराखं में ऐसी प्रतिभाओं कि कमी है जो कि आप लोग भाड़े के टटू लेकर आ रहे हो,मुझे हर उस इंसान से सकत नफरत है जो कि उत्तराखंडी होने के बाबजूद भी अप्निआप को उत्तराखंडी नहीं मानता !

क्या हमारी इस देवभूमि में कोई ब्रांड अम्बेसेडर के लायक नहीं था क्यों आपने कभी इस देवभूमि में छुपी हुई प्रतिभाओं को पहचानने कि कोशिस क़ी, नहीं पोखरियाल जी आपको भी कैसे के अलावा सायद कुछ नजर नहीं अआता है !

देखो उत्तराखंड के आन्दोलन कारियों,उत्तराखंड के सहिदों,बाबा उत्तराखंडी,उत्तराखंड के गांधीजी आप भी देखो ,क्या यही सपने दिखने के लिए आप लोगों ने अपने प्राणों क़ी आहुति दी है !

Devbhoomi,Uttarakhand



उत्तराखंड का बाघ बचाने का वादा,पोखरियाल और धोनी,साबास पोखरियाल जी बढे चलो,ऐसे ही कारनामे करते रहो,उत्तराखंड का विकास ऐसे ही होगा,बागो को बचाओ और इंसानों को मारो तभी आप और आपके बाघ बचेंगें !

उत्तराखंड का बाघ बचाने का वादा




सत्यदेव सिंह नेगी

आपने झकझोर कर रखा दिया जखी साहब एकदम दुरुस्त फरमाते हैं आप अब इन लोगों को मै तो समझाते समझाते थक गया कि ये सब बेकार सरकार और दिवालिया दल कि
ओछी हरकत है इसमें धोनी फस गया है