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Questions & Answers in Jod-चार आंखर (जोड़ में सवाल जवाब) लोक संगीत की विधा

Started by हलिया, September 13, 2010, 03:52:09 PM

सत्यदेव सिंह नेगी

मित्रो अभी अभी पहाड़ घूम कर आया हूँ खुद लग रही है
वहां तुम लोगों की खुद लगी थी यहाँ अब पहाड़ की

बुती जला ग्युन्वू ,
तपरांद रैंदु दगडया
तेमा क्या लगोंऊं

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


नेगी जी यह छोटा सा जोड़ :

तुमुली क पात, साली तुमिल क पात
दूर क मामुल हवेगे साली, नि हुनी मुलाकात


सत्यदेव सिंह नेगी

गजब ढा गए मेहता जी हमारे दिल की बात आपके लफ्जों पर वाह
एक तुक्का मेरा भी जी

बूती जली राई स्याली बूती जाली राई
जिकुड़ी मिली भी जांदी स्याली
पर पुटकी बीच म ऐ ग्याई

Devbhoomi,Uttarakhand

मेहता जी और नेगी बहुत सुन्दर लब्ज सर्ज किये आप दोनों ने

भांडी भरी बल दूधकी भांडी भरी बल दूधकी !
हए जिया प्यारी मेरी माया बहु भांडी भरी बल दूधकी !
गोला लगादी बडुली, बौजी तुमारा खुद की,
हाँ जिया प्यारी मेरी माया बौहू ,तुमारा खुदकी!!

Vidya D. Joshi

चाल चीरि कै ले प लै ग्यो दिस्योंने दरी को ।
ईसाइ दिन रुन्या प हुन की जोभन भरी को ॥

सत्यदेव सिंह नेगी

खाए जला अल्लू स्याली खाए जला अल्लू
कनि बिराज दीन्द स्याली त्यरा साड़ी पल्लू

खाए जलि मुंगरी स्याली खाए जलि मुंगरी
कौथिक लग्युंचा च स्याली ऐ जणु डूंगरी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


नेगी जी,

अब देखिये साली कहती है :

आसमानी जहाज उड़ रंगून डानो में
पंछी हुनी उडी उनियु, मै बिना फांक क !

अगर साली के पास पंख होते, तो वो जरुर वहां उड़ के पहुच जाती !

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on October 16, 2010, 01:39:34 PM
गजब ढा गए मेहता जी हमारे दिल की बात आपके लफ्जों पर वाह
एक तुक्का मेरा भी जी

बूती जली राई स्याली बूती जाली राई
जिकुड़ी मिली भी जांदी स्याली
पर पुटकी बीच म ऐ ग्याई

सत्यदेव सिंह नेगी

मेहता जी ऐसी हर साली को मेरा यही कहना  है 
जामि जाली दैई स्याली जामि जाली दैई

मेरी कुंडी खुलींचा स्याली कभी भी ऐ  जैई
( मेरा घर खुला है खुला ही रहेगा .......  प्रेम में ईश्वरीय शक्ति होती है जो की भौतिक सुख से परे है  )

जय हो
Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on October 19, 2010, 10:02:33 AM

नेगी जी,

अब देखिये साली कहती है :

आसमानी जहाज उड़ रंगून डानो में
पंछी हुनी उडी उनियु, मै बिना फांक क !

अगर साली के पास पंख होते, तो वो जरुर वहां उड़ के पहुच जाती !

Quote from: सत्यदेव सिंह नेगी on October 16, 2010, 01:39:34 PM
गजब ढा गए मेहता जी हमारे दिल की बात आपके लफ्जों पर वाह
एक तुक्का मेरा भी जी

बूती जली राई स्याली बूती जाली राई
जिकुड़ी मिली भी जांदी स्याली
पर पुटकी बीच म ऐ ग्याई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


ये देखिये ...

आः हा....

अब केवा काटो चाखा
देवतानु लाख
मेरी माया धरी दिए कलेजी का काखा
पानी फटक हाली, नि भुझानी आग


Vidya D. Joshi

कुछ पंक्ति

तेरा किस्मत भल होलो कसी पड़ी मेरा भाग ।
घर का दु:ख ले वन गयूं वन में लागी आग ॥ १

गाड़ गधेर जन जाए चौमासी दिन में ।
दु:ख सुख जसोई होलो धरिये मन में ॥ २

दन्याली को दन, ले पीटनी घन रजा हरिचन ।
मैं भूलन भूली ले जौंलो तैंइ भूले जन ॥ ३