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Uttarakhand now one Decade Old- दस साल का हुआ उत्तराखण्ड, आइये करें आंकलन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 14, 2010, 12:35:19 PM

Are you Happy with development taken place during these 10 Yrs in Uttarakhand?

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Devbhoomi,Uttarakhand

दोस्तों विकास की बात छोडो कुकर्मों की बात करो की इन १० सालों में उत्तराखंड किस मंत्री ने कितने कुकर्म किये हैं और इनके कुकर्मों की सजा भोली भाली जनता भुगत रही है !
यही विकास हवा हैं१० सालों में

Devbhoomi,Uttarakhand

झिं बौ कु बल बडू भ्रोसू ,सया दिदा-दिदा बोल्दी

सत्यदेव सिंह नेगी

Bahut Sahi kaha aapne sarkaar
Quote from: Devbhoomi,Uttarakhand on October 16, 2010, 04:29:21 PM
दोस्तों विकास की बात छोडो कुकर्मों की बात करो की इन १० सालों में उत्तराखंड किस मंत्री ने कितने कुकर्म किये हैं और इनके कुकर्मों की सजा भोली भाली जनता भुगत रही है !
यही विकास हवा हैं१० सालों में

Risky Pathak

 
ये एक खबर मेरे गाँव की पढिये|
राज्य बनने के दस साल बाद भी रोड से वंचित मेरा गाँव|

अफसर तो नहीं, जंगली जानवर पहुंच रहे अनशन

निज प्रतिनिधि, नाचनी (पिथौरागढ़): बांज के एक पेड़ के फेर में दर्जनों गांवों को सड़क सुविधा से वंचित किये जाने के विरोध में लोगों की दशा को उजागर करने के लिए ग्रामीणों ने घनघोर जंगल के मध्य अनशन शुरू किया। सड़क से लगभग 14 किलोमीटर दूर जंगल में चल रहे अनशन की अधिकारी तो सुध नहीं ले रहे, अपितु सांझ घिरते ही अनशन स्थल के आसपास जंगली जानवर मंडरा रहे हैं।

मालूम हो कि तहसील बेरीनाग के अन्तर्गत पड़ने वाला यह क्षेत्र अभी तक सड़क सुविधा से वंचित है। इस क्षेत्र के लिए हलियाडोप से लछीमा होते हुए नाचनी तक सड़क स्वीकृत हुई। इस मार्ग में बांज का एक पेड़ आ जाने से वन मंत्रालय द्वारा स्वीकृति नहीं दी गयी। इससे क्षेत्रीय जनता में रोष फैल गया। इसके विरोध में लोगों ने हलियाडोप-लछीमा-नाचनी संघर्ष समिति गठित कर जंगल के मध्य खंडहर बनी महरी धर्मशाला लछीमा ओखरानी में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। घनघोर जंगल के बीच स्थित धर्मशाला सड़क मार्ग से 14 किमी दूर है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनके बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने के लिए 14 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र के लिए स्वीकृत मार्ग मात्र एक वृक्ष के फेर में निरस्त कर दिया गया है। आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन चले नौ दिन बीत गये। बड़े अधिकारी तो दूर, एक पटवारी तक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है। उनका कहना है कि क्षेत्र की सही तस्वीर से शासन-प्रशासन को भिज्ञ कराने के लिए ग्रामीणों द्वारा अनशन यहां किया गया, ताकि उनकी सुध लेने आने वाले अधिकारी पैदल चल कर उनके दर्द को समझ सकें।

इधर घनघोर जंगल के मध्य अनशन पर बैठने वाले ग्रामीण जंगली जानवरों के खौफ से डरे हुए हैं। उनका कहना है कि सांझ घिरते ही अनशनस्थल के आसपास गुलदार, भालू, जंगली सुअर सहित अन्य हिंसक पशु विचरण शुरू कर देते हैं। इसके अलावा समुद्र तल से लगभग साढ़े छह सौ फिट की ऊंचाई वाला स्थान होने से मौसम भी परेशान कर रहा है। इसके बावजूद उनका कहना है कि जब तक निरस्त सड़क को पुन: स्वीकृति नहीं मिल जाती, उनका अनशन जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर ग्रामीण आमरण अनशन शुरू कर देंगे। रविवार को दो लोग क्रमिक अनशन पर बैठे। उनके समर्थन में आधा दर्जन लोग धरने पर रहे। विदित हो कि उक्त क्षेत्र जिला पंचायत अध्यक्ष का गृह क्षेत्र है।


सत्यदेव सिंह नेगी

हिमांशु जी  काश कोई जनप्रतिनिधि इस माध्यम से ही सही पर सुन लेता मुझे तो ऐसा लग रहा है की ये सड़क कगचौं पर बन चुकी होगी और इस पैसे का डकार ले चुके होंगे हमारे प्रिय शासक
Quote from: Himanshu Risky Pathak on October 18, 2010, 01:17:35 PM
 
ये एक खबर मेरे गाँव की पढिये|
राज्य बनने के दस साल बाद भी रोड से वंचित मेरा गाँव|

अफसर तो नहीं, जंगली जानवर पहुंच रहे अनशन

निज प्रतिनिधि, नाचनी (पिथौरागढ़): बांज के एक पेड़ के फेर में दर्जनों गांवों को सड़क सुविधा से वंचित किये जाने के विरोध में लोगों की दशा को उजागर करने के लिए ग्रामीणों ने घनघोर जंगल के मध्य अनशन शुरू किया। सड़क से लगभग 14 किलोमीटर दूर जंगल में चल रहे अनशन की अधिकारी तो सुध नहीं ले रहे, अपितु सांझ घिरते ही अनशन स्थल के आसपास जंगली जानवर मंडरा रहे हैं।

मालूम हो कि तहसील बेरीनाग के अन्तर्गत पड़ने वाला यह क्षेत्र अभी तक सड़क सुविधा से वंचित है। इस क्षेत्र के लिए हलियाडोप से लछीमा होते हुए नाचनी तक सड़क स्वीकृत हुई। इस मार्ग में बांज का एक पेड़ आ जाने से वन मंत्रालय द्वारा स्वीकृति नहीं दी गयी। इससे क्षेत्रीय जनता में रोष फैल गया। इसके विरोध में लोगों ने हलियाडोप-लछीमा-नाचनी संघर्ष समिति गठित कर जंगल के मध्य खंडहर बनी महरी धर्मशाला लछीमा ओखरानी में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। घनघोर जंगल के बीच स्थित धर्मशाला सड़क मार्ग से 14 किमी दूर है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनके बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने के लिए 14 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र के लिए स्वीकृत मार्ग मात्र एक वृक्ष के फेर में निरस्त कर दिया गया है। आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन चले नौ दिन बीत गये। बड़े अधिकारी तो दूर, एक पटवारी तक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है। उनका कहना है कि क्षेत्र की सही तस्वीर से शासन-प्रशासन को भिज्ञ कराने के लिए ग्रामीणों द्वारा अनशन यहां किया गया, ताकि उनकी सुध लेने आने वाले अधिकारी पैदल चल कर उनके दर्द को समझ सकें।

इधर घनघोर जंगल के मध्य अनशन पर बैठने वाले ग्रामीण जंगली जानवरों के खौफ से डरे हुए हैं। उनका कहना है कि सांझ घिरते ही अनशनस्थल के आसपास गुलदार, भालू, जंगली सुअर सहित अन्य हिंसक पशु विचरण शुरू कर देते हैं। इसके अलावा समुद्र तल से लगभग साढ़े छह सौ फिट की ऊंचाई वाला स्थान होने से मौसम भी परेशान कर रहा है। इसके बावजूद उनका कहना है कि जब तक निरस्त सड़क को पुन: स्वीकृति नहीं मिल जाती, उनका अनशन जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर ग्रामीण आमरण अनशन शुरू कर देंगे। रविवार को दो लोग क्रमिक अनशन पर बैठे। उनके समर्थन में आधा दर्जन लोग धरने पर रहे। विदित हो कि उक्त क्षेत्र जिला पंचायत अध्यक्ष का गृह क्षेत्र है।



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720






Where is the Road ?

When the Uttarakhand Govt came in existence, like me many of you must have a dream that there would be road connectivity to your village but nothing could happen in this front. Still people walk miles to bring purchase their day today items. The situation becomes more serious in emergency evacuation. There are thousands of cases in hill areas where people lose their lives when any patient has to be rushed to hospital immediately. Firstly, it takes long time to bring the patient upto main road head; in mean time many people lose their life. We agree that 108 Ambulance Services has been instrumental but still we need road to reach the Ambulance upto the village.

Firstly ,it has been very poor initiative by the State Govt to make road net work in  the hills to connect the thousands of village with the road and later stage there was some hindrances by the Forest Dept and Act.

I quote an example of road link in my village.  We have been following-up a proposal of road connectivity to my village since 2004, you will surprise to know that the proposal is only running  on paper and so far no work on ground level could start.

More surprisingly, villages of great personalities of Uttarakhand like Bharat Ratan Govind Ballabh Pant, Former CM Mr Koshiyari and CM Nishank villages are connected with the road.

What else you can except now ?

In my opinion, due to poor road connectivity, it has also impacted the Tourism sector of Uttarakhand.

I would only give 5% to the development on this front. That too for some work in Highways!

सत्यदेव सिंह नेगी

मेहता जी उत्तराखंड की देव भूमि सच में इस धरती का स्वर्ग है
समस्त भारत वासी यहाँ आयें भ्रमण करें पवित्र हो जाएँ जय हो

Mahi Mehta

 
We had a lot of expectations of developent but these 10 yrs have been only dramatic in the state.

What was the objective and what happened.

Recall these posters during the struggle days.




Devbhoomi,Uttarakhand

दस साल में पता करें किस मंत्री ने कितना कमाया
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मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा देने के निर्देश
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                                                                                       मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा देने के निर्देश                                                                                                                                           उत्तराखंड  में मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा मांगने वाली एक अपील पर अंतरिम फैसला  सुनाते हुए राज्य सूचना आयोग ने निर्वाचन अधिकारियों से ब्योरा मंगवाकर  अपीलकर्ता को देने के निर्देश दिए हैं।
तीन  मंत्रियों की संपत्ति के विवरण संबंधी आरटीआई आवेदन पर गोपन विभाग ने यह  कहकर विवरण देने से मना कर दिया था कि उनके पास संबंधित मंत्रियों की  संपत्ति का कोई ब्योरा नहीं है।

गोपन विभाग के लोक सूचना अधिकारी  के पास तीन मंत्रियों गोविंद सिंह बिष्ट, राजेंद्र भंडारी व विजया बड़थ्वाल  की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा मांगा गया था। आवेदक को सूचनाएं नहीं मिली तो  गोपन विभाग के अपीलीय अधिकारी (अपर सचिव) के यहां प्रथम विभागीय अपील दायर  की गई। इस पर भी आवेदक को मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा नहीं मिला तो  मामला राज्य सूचना आयोग में चला गया।

सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल  ने गोपन विभाग के लोक सूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी को कारण बताओ नोटिस  जारी किया। दोनों अधिकारियों के प्रतिनिधियों ने आयोग को बताया कि उनके  पास संपत्ति का ब्योरा नहीं है। इस पर आयोग ने तीन मंत्रियों की संपत्ति  के ब्योरे के लिए उनके विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचन अधिकारियों से  ब्योरा मंगाए जाने की बात कही। गोपन विभाग ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए  कहा कि आवेदक संबंधित आरओ से अलग आवेदन पत्र भेजकर ब्योरा मांग सकता है।  अन्य लोक प्राधिकारी से सूचना प्राप्त कर आवेदक को उपलब्ध कराने की  आवश्यकता प्रतीत नहीं होती।

आयोग ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों  के साथ ही भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के  कार्यालय ज्ञापन का उल्लेख करते हुए गोपन विभाग को लोक सूचना अधिकारी व  अपीलीय अधिकारी को सूचना उपलब्ध कराने में मदद करने के निर्देश दिए। आयोग  ने अंतरिम आदेश में कहा है कि विभाग चल-अचल संपत्ति का विवरण तीनों  मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त करेगा  और उसके दो सप्ताह बाद तक अपीलार्थी को यह विवरण उपलब्ध कराना होगा। मामले  की अंतिम सुनवाई के लिए 26 नवम्बर की तिथि निर्धारित की गई है।





http://www.samaylive.com/regional-hindi/uttarakhand-hindi/102064.html

   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


इन दस सालो में सडको का निर्माण तो नहीं हो सका लेकिन जगह जगह, धरने, जलूस प्रदर्शन हर जगह जगह पर दिखे!

उधाहरण यह रहा :
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सड़क की मांग को मशाल जुलूस

उत्तरकाशी, जागरण कार्यालय : नगुण भवान सुवाखोली मोटर मार्ग को लेकर पर्यटन विकास समिति की अगुआई में स्थानीय लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध जताया। समिति ने देहरादून से उत्तरकाशी की दूरी को कम करने वाले इस मार्ग को शीघ्र पूरा न किये जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

रविवार को बिड़ला धर्मशाला में पर्यटन विकास समिति के आह्वान पर अनेक स्थानीय व्यापारी, कर्मचारी व अन्य लोग एकत्र हुए। नगुण भवान सुवाखोली मोटर मार्ग को शीघ्र पूरा किये जाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए सभी लोग हाथों में मशाल लेकर जुलूस की शक्ल में निकले। जुलूस नगर के मुख्य बाजार, हनुमान चौक, विश्वनाथ चौक से होता हुआ कलक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। जहां समिति के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि नगुण भवान सुवाखोली मोटर मार्ग उत्तरकाशी के विकास के लिये बेहद जरूरी है। आपदा के दौरान अगर इस मार्ग की ओर ध्यान दिया जाता तो अफरा तफरी से बचा जा सकता था और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी जारी रहती, लेकिन सरकार ने इस मामले में एकदम उदासीन बनी रही। जिसके चलते लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ी। अन्य वक्ताओं ने एक स्वर में मार्ग को शीघ्र आवागमन लायक तैयार करने की मांग की। इस मौके पर अजय पुरी, राजेंद्र पंवार, कुलदीप सिंह बिष्ट, दीपेंद्र पंवार, छात्र संघ अध्यक्ष नवीन भंडारी, सोहनपाल भंडारी, आमोद पंवार, रामनारायण नौटियाल, जितेंद्र पंवार सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

विधायक आज लेंगे जायजा

उत्तरकाशी : क्षेत्रीय विधायक व संसदीय सचिव गोपाल सिंह रावत स्थानीय लोगों को लेकर आज सामवार को नगुण भवान मोटर मार्ग पर पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों का एक जत्था मोटर मार्ग की स्थिति का जायजा लेगा। लोनिवि थत्यूड़ डिविजन के अधिशासी अभियंता भी मौके पर मौजूद रहेंगे। उनसे मार्ग तैयार होने के संबंध में बातचीत की जाएगी।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6843856.html