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Uttarakhand now one Decade Old- दस साल का हुआ उत्तराखण्ड, आइये करें आंकलन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 14, 2010, 12:35:19 PM

Are you Happy with development taken place during these 10 Yrs in Uttarakhand?

Not at all
14 (48.3%)
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3 (10.3%)
Highly dis-satisfied
8 (27.6%)
Satisfied
4 (13.8%)
Highly Satisfied
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दस साल का हुआ उत्तराखण्ड, आइये करें आंकलन,
क्या खोया-क्या पाया?
Dosto,

On 09 Nov 2010, Uttarakhand state will complete 10 yrs of its formation. In another words, we have become one decade old but the big question is still there. Where is development?. Most surprisingly, there has been only a race of chairs, as result there have been 05 CMs during these 10 yrs period. The state came in existence on 09 Nov 2000 after a long struggle and scarification of martyrs. The objective behind this struggle was only fast development of hill areas.

Even after 10 yrs of formation of decades, there are umpteen of questions in people mind about the development.

We invite you here on an open debate of "One Decade of Uttarakhand".

Regards,

M S Mehta
This is the truth now
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पंकज सिंह महर

एक कहावत के जरिये अपनी बात कहना चाहूंगा-


"कस ज होलो ठार्यो समधी, कस ज भ्यो"

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

we are going to organize a seminar on 31st of October 2010 on abobe topic, details of this programme will be given soon.

Charu Tiwari

भलि छे सुवा भली छै,
भलि बतौनी, भली छै।
जस छै सुवा, उसी छै।
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एक लोकोक्ति इन दस सालों के उत्तराखंड के लिये सटीक है- एक महिला का पति बहुत कम उमz में मर गया। बहुत समय बाद कोई परिचित मिला। उसने पूछा सब कैसा चल रहा है। महिला ने उत्तर दिया- और सब ठीके हैरो, एकै वीं नि राय।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


कहाँ से शुरू करू अपनी बात लगता है विकास के दृष्टि से बाझ बन गया यह राज्य! मेरे मित्रो ने अपनी पीड़ी कहावतो के के जरिये व्यक्त कर दिए! मुझे मालूम है, लोग इतने मायूश है पहाड़ के विकास और वहां की वर्तमान दशा और दिशा देखकर!

आज हो गए पूरे दस साल, पर क्यों नहीं हुए वे सपने पूरे जिसके लिए लोगो ने अपनी जान दी थी!

A)     कहाँ गए वो रोजगार के साधन, जिसके लिए बड़े बड़े दावे किये जा रहे थे!

b)     क्यों नहीं रुक पा रहा है पहाड़ से पलायन

c)     क्यों हुवा शहीदों से सपनो से खिलवाड़, राजधानी का मामला

d)    क्या हुवा पर्यटन उद्योग का

ओह १० दस पर विकास कहाँ!   

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा

It is really painful to learn that we not definitely on track of development. If we assess the development of during 10 yrs, we can hardly say there is not even 5% development in hill areas.



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


१० साल का राज्य
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अगर वास्तव में इन दसो सालो का उत्तराखंड में विकास हुए का आकलन करे तो, काफी वकत वक्त लगेगा क्यों की विकास ही कितना हुवा है कि विकास वर्णन कहाँ से शुरू करे, दुविधा यही है!

सबसे पहले बाते करे उत्तराखंड राज्य कितना रोजगार बड़ा
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राज्य बनाने के बाद कुछ उद्योग जरुर उत्तराखंड राज्य के मैदानी क्षेत्र जैसे, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार आदि जगहों पर आये वो भी केवल टैक्स में छूट के लिए!  लेकिन पहाड़ी क्षेत्रो में औधोगिक नीति पपेरो तक ही सीमिति रही! नजीजा पहाड़ में koi भी लघु उयोग नहीं लग पाए और लोग फिर से जो आश लगाये बैठ से राज्य बनाने के बाद एक चमत्कार हो और धीरे-२ पहाडो में रोजगार के साधन होंगे येसा कुछ भी नहीं हुवा! अब जहाँ केंद्र सरकार ने टैक्स में दी जारी छूट को बंद कर दिया है, बहुत से लघु उद्योग इन क्षेत्रो से पलायन करने लगे है!

जैसे के अनुमान लाया जा रहा था, पर्यटन के अपार संभावना होने के बाद राज्य में रोजगार की क्रांति आएगी पहाड़ में येसा कुछ दिखा नहीं!

तो पहाड़ वासियों को लगा ही नहीं कि राज्य बनाने के बाद नौकरी की दृष्टि से यहाँ और कुछ हुवा! केवल पांच मुख्य मंत्री जरुर पैदा हुए!


जारी है ....................



सत्यदेव सिंह नेगी

जब श्री TPS  रावत जी ने राजनैतिक सौदेबाजी के तहत धुमाकोट विधान सभा सीट खंडूरी जी को दी थी तब थोडा सा दुःख मगर ज्यादा ख़ुशी ये हुई थी की अब इस इलाके से कोई
मुख्यमंत्री आ रहा है अब तो विकास होके ही रहेगा मगर इसमें सिर्फ इन्ही दोनों महानुभावों का विकास हुआ राजनितिक ठगी कैसे होती है इसका हमें भी स्वाद लग गया

सत्यदेव सिंह नेगी

 
   
जिनसे हम छूट गये अब वो जहाँ कैसे हैं
शाखे गुल कैसे हैं खुश्‍बू के मकाँ कैसे हैं । 
ऐ सबा तू तो उधर से ही गुज़रती होगी
उस गली में मेरे पैरों के निशाँ कैसे हैं । 
कहीं शबनम के शगूफ़े कहीं अंगारों के फूल
आके देखो मेरी यादों के जहाँ कैसे हैं । 
मैं तो पत्‍थर था मुझे फेंक दिया ठीक किया
आज उस शहर में शीशे के मकाँ कैसे हैं । 

राही मासूम रजा
Thanks to hindi kunj

KAILASH PANDEY/THET PAHADI


Vikash ke baare mai to bahut jyada pata nahi hai kyonki iski paribhaasha hee mere samajh se bahar ki baat hai.....lekin kuch mahine pahile "SAMYANANTAR" patrika me 1 report padi thi jiske anusaar Vikash ke mamle me Uttarakhand ke sath bane naye Rajyo ke mukabale me hamare Uttarakhand ki sthiti jayada achi thi.....(report will update very soon)




Jai Uttarakhand....