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Uttarakhand now one Decade Old- दस साल का हुआ उत्तराखण्ड, आइये करें आंकलन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 14, 2010, 12:35:19 PM

Are you Happy with development taken place during these 10 Yrs in Uttarakhand?

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Devbhoomi,Uttarakhand

अरे कुकर्मियों शर्म आनी चाहिए हाहाह


दस साल बाद आठ किमी ही बन पाया मोटर मार्ग

खाड़ी-पिपलेथ चौंपा मोटरमार्ग का निर्माण कार्य कछुवा गति से हो रहा है। आलम यह है कि स्वीकृत 16 किमी मोटरमार्ग में से अभी तक 8 किमी मार्ग ही बन पाया है और इस पर भी वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं है। लाभान्वित होने वाले गांव को अभी तक यातायात सुविधा नहीं मिल सकी है।

क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मोटरमार्ग का निर्माण कार्य कछुवा गति से होने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग एक साल में 1 किमी सड़क भी नहीं बना पाया। वर्ष 2000 में खाड़ी से उतखंडा तक 16 किमी मोटरमार्ग को वित्तीय स्वीकृति मिली थी, जिस पर अभी तक पिपलेथ तक ही सड़क बन पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि उतखंडा के लिए जो सड़क जाएगी, उसका सर्वे बदलने पर ही निर्माण कार्य होने दिया जाएगा।


उनका कहना है कि गांव के ऊपर तक जो सड़क बनाई गई है उससे तीन पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है और प्राकृतिक जलस्रोत भी मलबे से दबे हैं। यदि पुराने सर्वे के अनुसार ही सड़क बनाई जाती है तो नुकसान और अधिक होगा। इस मोटरमार्ग को बनाने का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ की ग्राम पंचायत उतखंडा को यातायात सुविधा देना है, लेकिन जिस गति से मार्ग बन रहा है। उससे लगता नहीं है कि ग्रामीणों को जल्द यह सुविधा मिल पाएगी।



ग्राम प्रधान भावना भंडारी, क्षेपंस अंजु भंडारी का कहना है कि सर्वे बदलकर मार्ग का निर्माण शीघ्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की मरम्मत नहीं हुई तो वह आंदोलन को बाध्य होगें।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7409852.html

Devbhoomi,Uttarakhand

शिक्षामंत्री और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका




   कीर्तिनगर, जागरण कार्यालय: दो सूत्रीय मांग को लेकर क्षेत्र के बीएड एवं बीपीएड बेरोजगारों ने धरना प्रदर्शन व जुलुस निकालकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आधे घंटे का जाम लगाया। साथ ही शिक्षामंत्री और सीएम का पुतला फूंका।
विभिन्न क्षेत्रों से शुक्रवार को बीएड एवं बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगार यहां ब्लाक मुख्यालय के रामलीला मैदान में एकत्र हुए। यहां बेरोजगारों ने रामलीला मैदान में पहले धरना दिया। इसके बाद जुलुस निकालते हुए मुख्य बाजार से कीर्तिनगर पुल की तिराह पर पहुंचे। यहां उन्होंने सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की और सड़क पर बैठ गए। उन्होंने आधे घंटे तक सांकेतिक जाम लगाया।
इस दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार वर्ष 2006 के अनुरूप आठ हजार पदों पर विशिष्ठ बीटीसी के लिए विज्ञप्ति जारी करे और टीईटी की बाध्यता समाप्त करें। सभा के बाद बेरोजगारों ने राजमार्ग पर शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया।
इस दौरान  उपजिलाधिकारी के प्रतिनिधि में रूप में मौजूद नायब तहसीलदार देवप्रयाग जेएस राणा के माध्यम से ज्ञापन  प्रदेश व केन्द्र सरकार को भेजा।
इस मौके पर नीरज प्रेमी, अजय प्रकाश जोशी, राजेन्द्र सिंह, विजय आर्य, शूरबीर राणा, प्रवीण, पंकज,महादेव, प्रताप, उपेन्द्र भट्ट, भूपेन्द्र, जयमल, अनुराधा, सुमन, अर्चना, कविता, मंजू, चन्द्रभानु तिवारी आदि लोग मौजूद थे।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7622255.html

   

Devbhoomi,Uttarakhand

इन कुकर्मियों के पुतले क्यों फूक रहे हो भाइयों,पुतले फूंकने से अपना ही नुकशानकर रहे हो ,अगर फूंकना ही तो इन कुकर्मियों को फूंकों

PratapSingh Bharda

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on October 14, 2010, 12:35:19 PM
दस साल का हुआ उत्तराखण्ड, आइये करें आंकलन,
क्या खोया-क्या पाया?
Dosto,

On 09 Nov 2010, Uttarakhand state will complete 10 yrs of its formation. In another words, we have become one decade old but the big question is still there. Where is development?. Most surprisingly, there has been only a race of chairs, as result there have been 05 CMs during these 10 yrs period. The state came in existence on 09 Nov 2000 after a long struggle and scarification of martyrs. The objective behind this struggle was only fast development of hill areas.

Even after 10 yrs of formation of decades, there are umpteen of questions in people mind about the development.

We invite you here on an open debate of "One Decade of Uttarakhand".

Regards,

M S Mehta
This is the truth now
============


Though not so developed as per our expectation. What we expected before forming a separte Uttarakhand State has not reach upto that mark. Only few places like dehradun, Nainital, haridwar, Mussorie and some places in Almora have devloped in terms of infrastructere. But some places of very hilly areas of pithoragarh, Chamoli, Champawat are still lagging behind in every sectors. Even bageshwar though not hilly also far away from development.

Absenteeism from school by student is also increasing even though after providing mid-day meal. These kids often busy in playing, swimming, and other activities like marriage.

This is the only beginning, will take some more years to reach our expecation what we thought off.




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: PratapSingh Bharda on April 26, 2011, 05:56:43 AM
Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on October 14, 2010, 12:35:19 PM
दस साल का हुआ उत्तराखण्ड, आइये करें आंकलन,
क्या खोया-क्या पाया?
Dosto,

On 09 Nov 2010, Uttarakhand state will complete 10 yrs of its formation. In another words, we have become one decade old but the big question is still there. Where is development?. Most surprisingly, there has been only a race of chairs, as result there have been 05 CMs during these 10 yrs period. The state came in existence on 09 Nov 2000 after a long struggle and scarification of martyrs. The objective behind this struggle was only fast development of hill areas.

Even after 10 yrs of formation of decades, there are umpteen of questions in people mind about the development.

We invite you here on an open debate of "One Decade of Uttarakhand".

Regards,

M S Mehta
This is the truth now
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Though not so developed as per our expectation. What we expected before forming a separte Uttarakhand State has not reach upto that mark. Only few places like dehradun, Nainital, haridwar, Mussorie and some places in Almora have devloped in terms of infrastructere. But some places of very hilly areas of pithoragarh, Chamoli, Champawat are still lagging behind in every sectors. Even bageshwar though not hilly also far away from development.

Absenteeism from school by student is also increasing even though after providing mid-day meal. These kids often busy in playing, swimming, and other activities like marriage.

This is the only beginning, will take some more years to reach our expecation what we thought off.






Pratap Da..

I fully endorse your views. It is really dis-appointing that the objective of formation Uttarakhand state could not come true..

There is a lot to do but the corruption is in peak there.


Devbhoomi,Uttarakhand

विकास से दूर, पथरीले राहों पर चलने को मजबूर
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हालात बता रहे हैं कि गांवों के विकास को लेकर ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। आलम यह है कि सूबे के 1974 आबाद गांव अभी भी सड़क से वंचित हैं। वह भी तब जबकि राज्य गठन को दस साल हो चुके हैं। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को इस मामले में कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

सूबे के गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर वादे और दावे तो बहुत किए जा रहे हैं लेकिन प्रयास नहीं। इस मामले में दूरस्थ क्षेत्र और कम आबादी वाले गांवों की स्थिति ज्यादा ही चिंतनीय है। अलग-अलग विभागों द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक वर्तमान में सूबे के 1974 आबाद गांव सड़कों से वंचित हैं। इसमें देहरादून के 31 व हरिद्वार जिले के दो दर्जन गांव भी शामिल हैं। सूबे के 1974 गांवों के लिए कम से कम 15,225 किमी सड़क बनाने की आवश्यकता होगी और इसमें करीब 7500 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। जाहिर है सड़के नहीं होने से स्थानीय लोग कई किमी पैदल चलने को मजबूर हैं। सड़कें नहीं होने से जन प्रतिनिधि और अफसर भी ऐसे क्षेत्रों का रुख नहीं कर पा रहे। इसका विकास पर विपरीत असर पड़ रहा है।

गौर करने वाली बात यह है कि इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकार के साझे प्रयास पर तेजी से काम होने की बात कही जा रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस मामले में कितनी सुस्ती से काम चल रहा है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने पीडब्ल्यूडी, ग्राम्य विकास व ंिसंचाई विभाग समेत संबंधित विभागों को सड़क निर्माण कार्यो को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं।

इंसेट-

आबादी, कुल गांव, बिना सड़क वाले गांव

0-249, 9010, 1536

250-499, 3577, 345

500-999, 455, 77

1000-1499, 511, 09

1500 से अधिक , 673, 07

-

इंसेट

सूबे के कुल गांवों की संख्या-16826

आबाद गंाव -15761

गैर आबाद गांव - 1065


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7642662.html

हलिया

कोप कूछीं भल:

धें कभै बरसलाss कै अकाश हूं चै रैछीं
आब त अगासका बादल ले फटै गीं।




Devbhoomi,Uttarakhand

पेयजल को भटक रहे ग्रामीण
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जाका, चम्पावत: जिले के पर्वतीय क्षेत्र में करीब चार माह पहले बरसात से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की मरम्मत अभी तक नहीं हुई है। ब्लाक के ग्रामसभा खटौली तल्ला के साथ ही आसपास के तौकों के वासी पेयजल के लिए भटकने का विवश हैं। ग्रामीणों को डेढ़ किमी दूर नौलों से पानी ढोना पड़ रहा है।

विदित हो कि 16-17 अगस्त को जिले के पर्वतीय क्षेत्र में भारी बरसात के चलते अधिकांश पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से पेयजल संकट उत्पन्न हो गया था। विभाग ने हालांकि अधिकांश स्थानों पर वैकल्पिक रुप से पाइप लाइनों को जोड़ कर आपूर्ति सुचारु की थी।

इधर, करीब चार माह बाद भी ब्लाक के खटौली तल्ली में पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे ग्रामीणों को करीब डेढ़ किमी पैदल चलकर नौलों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान मोहनी देवी ग्रामीणों के साथ अनेक बाद डीएम व जल संस्थान के अधिकारियों के समक्ष उठा चुकी हैं। इसके बावजूद अभी तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीण होशियार सिंह ने बताया कि गांव की फेज वन पाइप लाइन पहले से ही क्षतिग्रस्त थी। अब दूसरी लाइन भी प्रभावित होने से पेयजल संकट है। इससे करीब साढ़े चार सौ की आबादी प्रभावित है। ग्रामीणों को नौलों से पानी लाना पड़ रहा है। उन्होंने तत्काल पेयजल लाइन मरम्मत की मांग दोहराई।

जल संस्थान जेई प्रदीप कुमार जोशी ने बताया कि खटौली तल्ला में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त व स्रोत में मलबा भर गया है। दैवीय आपदा में करीब दो लाख का इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। जिसका सत्यापन हो गया है। धन निर्गत होने ही कार्य शुरु कर दिया जाएगा। इसके अलावा भनौली में भी पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त है। राजस्व टीम के साथ सत्यापन का कार्य जारी है।

बहरहाल, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों से क्षेत्र वासियों के समक्ष पेयजल संकट गहराना आम हो गया है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8485308.html