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Haida Khan Baba Temple Ranikhet, Uttarakhand- हैडाखान बाबा मंदिर रानीखेत

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 17, 2010, 11:28:45 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

       photo                                              ranikhet

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

   हैड़ाखान को मायका मानते थे शम्मी कपूर       -लगाव के चलते बेटे का विवाह हैड़ाखान में किया था
-हैड़ाखान तथा चिलियानौला मंदिरों की भव्य रिकार्डिग कर विदेशों में प्रसारित किया था
जागरण कार्यालय, भीमताल: शम्मी कफूर के निधन की खबर से नैनीताल जिला स्तब्ध हो गया है। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि प्रसिद्ध धाम हैड़ाखान (भीमताल) को वह अपना मायका मानते थे। सन् 1975 में शम्मी कपूर ने हैड़ाखान बाबा के पहली बार दर्शन किए और पहली बार आशीर्वाद लिया। यह ऐसा दौर था कि शम्मी कपूर एशियाई सिनेमा में गहरी पैठ बना चुके थे।  बाबा के परम भक्त व हैड़ाखान मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी के रूप में वह मंदिर के समस्त कार्य कलापों में हिस्सा लेने लगे। उनका मंदिर से लगाव इस कदर बढ़ा कि उन्होंने अपने पुत्र निक्की कपूर का विवाह वर्ष 1982 में हैड़ाखान मंदिर में किया। इस दौरान राजकपूर से लेकर शशि कपूर का पूरा परिवार शम्मी कपूर के साथ हैड़ाखान पहुंचा था। यह परिवार पांच दिन तक हैड़ाखान में रहा। यहां बता दें कि हैड़ाखान मंदिर में वर्ष 1975 से आगमन के बाद शम्मी कपूर ने गेरुवा  वस्त्र व रुद्राक्ष की मालाएं पहननी शुरू कर दी थी। यही नहीं बाद के वर्षो में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.राजेश पायलट व उनकी पत्‍‌नी रमा पायलट की शम्मी जी से यहीं मित्रता हो गई थी। शम्मी कपूर ने हैड़ाखान व चिलियानौला रानीखेत के मंदिरों की भव्य रिकार्डिग की थी। विदेशों में प्रसारण के बाद यहां विदेशी शिष्यों की बाढ़ आ गई और हैड़ाखान मंदिर विश्व के मानचित्रों में प्रमुखता से छा गया। इधर शम्मी कपूर के निधन पर मंदिर ट्रस्टी के चेयरमैन त्रिलोक सिंह (गुरु जी) सहित तमाम ट्रस्टियों ने शोक प्रकट किया है। ट्रस्टी राघवेन्द्र सिंह संभल ने बताया कि शम्मी जी के निधन का समाचार मिलते ही पूरे इलाके में शोक छा गया है। शम्मी कपूर जी को हैड़ाखान मंदिर व आसपास के क्षेत्र से काफी लगाव था।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6288770.html

   



विनोद सिंह गढ़िया

भारतीय रीति-रिवाज से एक दूजे के हुए प्रवेश और मोहनी


जर्मनी के लेखक और टीवी पत्रकार का वैदिक परंपरा से विवाह


• अमर उजाला ब्यूरो
रानीखेत। हैड़ाखान आश्रम की यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंगलगीत गूंजे। अग्नि को साक्षी मानकर साथ जीने-मरने की सौगंध खाई गई। हैड़ाखंडी समाज के मुनिराज त्रिलोक सिंह ने आशीर्वाद दिया। इस प्रकार जर्मनी के 70 वर्षीय हार्बर्ड तथा 52 वर्षीया ब्रिगीट हिंदू मान्यताओं के अनुसार दांपत्य बंधन में बंध गए।
हैड़ाखंडी समाज से जुड़ी सुशीला के अनुसार जर्मनी के हाफमन परिवार से संबंध रखने वाले 70 वर्षीय हार्बर्ड लेखक हैं। अध्यात्मिक तकनीकों से लोगों को मानसिक शांति प्रदान करने का उन्हें शौक है। हैड़ाखंडी समाज से जुड़ी 52 वर्षीया ब्रिगीट जर्मनी में टीवी पत्रकार हैं। हैड़ाखंडी समाज में हार्बर्ड का भारतीय नाम प्रवेश तथा ब्रिगीट का नाम मोहनी है। दोनों सात साल पहले कैथोलिक परंपरा के अनुसार वैवाहिक बंधन में बंधे थे। आज उन्होंने सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार अपने इस रिश्ते को प्रगाढ़ता प्रदान की। सुबह यज्ञशाला में अग्नि को साक्षी मानकर उन्होंने एक दूसरे का वरण किया। पं. मायापति तिवारी, विनोद शास्त्री तथा पं. जय बल्लभ ने वैदिक परंपराओं के अनुसार रस्में निभाई। इस मौके पर स्थानीय महिलाओं ने मंगलगीत गाए। वहां मौजूद तमाम लोगों ने विवाह की बधाइयां दी। बाद में वर-वधू ने मुनिराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। दोनों ने भंडारे के समूह भोज में भी हिस्सा लिया।



दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने की तमन्ना

रानीखेत। विवाह समारोह संपन्न होने के बाद मोहनी ने कहा कि इस वक्त बहुत अच्छा और विशिष्ट किस्म का अनुभव प्राप्त हो रहा है। यह क्षण अविस्मरणीय हैं। प्रवेश ने कहा कि बाबा जी भले ही शरीर रूप में मौजूद नहीं हैं लेकिन वह हमेशा साथ रहते हैं। सब कुछ उनकी प्रेरणा का नतीजा है। हैड़ाखंडी समाज के लोगों ने कहा पाश्चात्य देशों में दांपत्य जीवन अस्थिर और पूर्णत: भौतिकवादी हैं, जबकि इसके विपरीत भारत में विवाह को दो आत्माओं का मिलन माना जाता है, जिसमें पति-पत्नी अगाध प्रेम और विश्वास की डोर में बंध जाते हैं। पाश्चात्य जगत के लोग भी विवाहेत्तर संबंधों को मधुर और प्रगाढ़ बनाने के लिए फिर से भारतीय परंपरानुसार विवाह करते हैं और हैड़ाखान बाबा की मूक  और अदृश्य मध्यस्थता उन्हें प्राप्त होती है।

http://epaper.amarujala.com/svww_index.php

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा


I have seen Heda Khan Baba temple has been hub of foreign visitors. Many of them marry here during Navratras.