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Justice for Muzzaffarnagar Case, State Struggle-न्याय की मांग- मुज्ज़फ्फर नगर

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 14, 2011, 02:57:43 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Santosh Joshi ‎-----------उत्तराऩ्ड आन्दोलन------------
-----2 अकटूबर मुज्पफर नगर काँड-----
---उस समय को याद कर के चार लाईन---

कैसे लौट जाऊँ मैं आज अपने गाँव में.
कुछ भी तो नहीं रहा आज मेरे गाँव में.
खेलता था जिसके साँथ वो साँथी छूट गया.
मुजफ्फर नगर की गलियों में मुझ से रूठ गया.
उठ रहा है धुँवा किसी चिता की आग का.
बाँशुरी के स्वर लगे हैं फुफार नाग का.
उत्तराखन्ड के बच्चे बूड़े आज रण की छाव में
कैसे लौट जाऊँ मैं आज अपने गाँव में.

माँ तो माँ तुम लोगो ने बच्चा भी नहीं छोड़ा है
इतीहास के पन्नों में तुमने काला पन्ना जोड़ा है
आने लगी है गंध तुम्हारे बिनासी रूपी हाथ से.
देश नहीं है खाली भरा है गद्दारों से
उत्तराखन्ड के बच्चे बूड़े आज गम की छाव में.
कैसे लौट जाऊँ मैं आज अपने गाँव में.

खेलते थे खुसी-खुसी लोग मेरे गाँव में.
छायी हुयी है ऊदाशी आज मेरे गाँव में.
उठने लगे हैं फफोले मेंहन्दी के पाँव में
कैसे लौट जाऊँ मैं आज अपने गाँव में......सन्तोष जोशी.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चन्द्रशेखर करगेती शहीदों हम आज फिर बहायेंगे घड़ियाली आँसू..........

मुजफ्फरनगर काण्ड को अठारह साल बीत गये ! इस दौरान अलग राज्य भी बन गया, वर्तमान में राज्य में चौथी सरकार भी सत्ता संभाले हुए है l  लेकिन लोकतंत्र को कलंकित करने वाली इस घटना के दोषियों को अब तक सजा नहीं मिली l अदालतों में आज भी इस काण्ड के कई मुकदमें लंबित हैं, कुछ आरोपी मर गये, कुछ सेवा मुक्ति पा गये और कईयों का ओहदा इतना बढ़ गया कि कारवाई करना राजनेताओं के बस की बात नहीं है l

पिछले 17 सालों  सरकारों के मुखिया हर बार 2-अक्टूबर को शहीदों को नमन करते रहें हैं, लेकिन इस मामले में पैरवी करने के लिये मजबूत व्यवस्था करने जैसा छोटा सा काम नहीं करते l

अब तों ऐसा लगने लगा है कि ओर जयन्तियों की तरह मुजफ्फरनगर काण्ड की बरसी अब केवल एक राजनैतिक अनुष्ठान भर ही रह गया हैं l इस काण्ड के शहीदों और पीड़ितों से किसी को कोई मतलब नहीं रह गया हैं ! न जनता को ना राजनेताओं को !

अगर राज्य और जनता की इच्छा शक्ति होती तों आज कसाब की तरह दोषी जेल की सलाखों के पीछे सड़ रहे होते......लेकिन अफसोस.......काश ऐसा होता........अब ऐसा होने की उम्मीद भी कम ही है, क्योंकि इन सालों में राजनीति का जो स्वरुप हो गया है उससे उम्मीद अब कम ही हैं........

शहीदों हम शर्मिंदा है कि हम आज फिर एक और बरसी मना रहें है, और तुम्हे न्याय ना दिला पाने वाले दोषी राजनेताओं के यहाँ भात भी खा आ रहें है...क्या करें शहीदों हम शर्मिंदा है ! 



(आभार : दैनिक हिन्दुस्तान)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा कांड की 18 बरसी । यह हादसा उत्तराखंड आंदोलन के लिए लड़ी गई लड़ाई का दुर्भाग्यपूर्ण दिन था। इस दिन राज्य आंदोलनकारी बड़ी संख्या में पुलिस बर्बरता के शिकार हुए। महिलाएं पुलिस बर्बरता की शिकार हुईं। वे घाव लोगों के मन में अभी भी हरे हैं। सैकड़ों गवाह मौजूद हैं, लेकिन सजा अभी तक किसी को नहीं हुई।
अमर शहीदों के नाम
१- अमर शहीद स्व० सूर्यप्रकाश थपलियाल(20), पुत्र श्री चिंतामणि थपलियाल, चौदहबीघा, मुनि की रेती, ऋषिकेश।
२- अमर शहीद स्व० राजेश लखेड़ा(24), पुत्र श्री दर्शन सिंह लखेड़ा, अजबपुर कलां, देहरादून।
३- अमर शहीद स्व० रविन्द्र सिंह रावत(22), पुत्र श्री कुंदन सिंह रावत, बी-20, नेहरु कालोनी, देहरादून।
४- अमर शहीद स्व० राजेश नेगी(20), पुत्र श्री महावीर सिंह नेगी, भानिया वाला, देहरादून।
५- अमर शहीद स्व० सतेन्द्र चौहान(16), पुत्र श्री जोध सिंह चौहान, ग्राम हरिपुर, सेलाकुईं, देहरादून।
६- अमर शहीद स्व० गिरीश भद्री(21), पुत्र श्री वाचस्पति भद्री, अजबपुर खुर्द, देहरादून।
७- अमर शहीद स्व० अशोक कुमारे कैशिव, पुत्र श्री शिव प्रसाद, मंदिर मार्ग, ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग।





एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चन्द्रशेखर करगेती3-अक्टूबर-1994 को रामपुर तिराहा काण्ड के फलस्वरूप राज्य में हुए विभिन्न विरोध प्रदर्शनो में पुलिस की गोली का शिकार हो, अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले अमर शहीदों को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजली, जिन्हें शायद हम लगभग भूल चुके है.....क्या थी घटना और कौन लोग थे, जिन्होंने अपना बलिदान दिया.....

देहरादून गोलीकाण्ड.........

3 अक्टूबर, 1994 को मुजफ्फरनगर काण्ड की सूचना देहरादून में पहुंचते ही लोगों का उग्र होना स्वाभाविक था। इसी बीच इस काण्ड में शहीद स्व० श्री रविन्द्र सिंह रावत की शवयात्रा पर पुलिस के लाठीचार्ज के बाद स्थिति और उग्र हो गई और लोगों ने पूरे देहरादून में इसके विरोध में प्रदर्शन किया, जिसमें पहले से ही जनाक्रोश को किसी भी हालत में दबाने के लिये तैयार पुलिस ने फायरिंग कर दी, जिसने तीन और लोगों को इस आन्दोलन में शहीद कर दिया।

गोलीकाण्ड मारे गए लोगों के नाम........
  अमर शहीद स्व. बलवन्त सिंह सजवाण (49), पुत्र श्री भगवान सिंह, ग्राम-मल्हान, नयागांव, देहरादून।
  अमर शहीद स्व. राजेश रावत (19), पुत्र श्रीमती आनंदी देवी, 27-चंदर रोड, नई बस्ती, देहरादून।
  अमर शहीद स्व. दीपक वालिया (27), पुत्र श्री ओम प्रकाश वालिया, ग्राम बद्रीपुर, देहरादून।

कोटद्वार गोलीकाण्ड.........

3 अक्टूबर, 1994 को पूरा उत्तराखण्ड मुजफ्फरनगर काण्ड के विरोध में उबला हुआ था और पुलिस-प्रशासन इनके किसी भी प्रकार से दमन के लिये तैयार था। इसी कड़ी में कोटद्वार में भी आन्दोलन हुआ, जिसमें दो आन्दोलनकारियों को पुलिस कर्मियों द्वारा राइफल के बटों व डण्डों से पीट-पीटकर मार डाला।

कोटद्वार में शहीद आन्दोलनकारी.......
  अमर शहीद स्व. श्री राकेश देवरानी।
  अमर शहीद स्व. श्री पृथ्वी सिंह बिष्ट, मानपुर, कोटद्वार ।

नैनीताल गोलीकाण्ड.........

नैनीताल में भी विरोध चरम पर था, लेकिन इसका नेतृत्व बुद्धिजीवियों के हाथ में होने के कारण पुलिस कुछ कर नहीं पाई, लेकिन इसकी भड़ास उन्होंने निकाली प्रशान्त होटल में काम करने वाले प्रताप सिंह के ऊपर । आर.ए.एफ. के सिपाहियों ने इसे होटल से खींचा और जब यह बचने के लिये मेघदूत होटल की तरफ भागा, तो इनकी गर्दन में गोली मारकर हत्या कर दी गई  ।

हो सकता है वास्तविकता इससे इतर हो लेकिन यह सत्य है कि उपरोक्त लोगो के योगदान को भी कम नहीं आंका जा सकता है l