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Chandika Raj Jaat Held Once in 22 Yrs- अगस्त्यमुनि मां चंडिका देवी की राजजात

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 06, 2011, 04:34:43 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

27th State of India Uttarakhand is also known as Devbhoomi". The place where God and goddess reside. There are innumerable places in Uttarakhand which has relevance with great Hindu Epic like Mahabharat and Ramanaya also.

Time to time many religious journey held in Uttarakhand. Like World largest Religious Journey which held after every 12 yrs. Other Religious Journeys like.. Hill Jaat, Ufrayee Devi, Religious Journey etc etc.

There is journey of Chandiga Maata which is held after 22 yrs in Rudraprayag District of Uttarakhand. The detail is here:-

मंदाकिनी घाटी के अरखुंड गांव में २२ वर्षों के अंतराल पर आयोजित hota hai! मां चंडिका राजजात में लोग देवनृत्य का पुण्य lete हैं।

अरखुंड गांव मां भगवती का मायका माना जाता है। गांव में देवी का स्वागत बेटी की तरह किया जाता है। एक माह के कठोर प्रशिक्षण के बाद नौ ऐरवालों, बलद्याें और गुरुआें के साथ भगवती चंडिका देवरा पर निकल चुकी है। माता घर-घर जाकर तकरीबन एक माह तक अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछने के लिए गांवों का भ्रमण करेगी। इसके बाद पुनः अरखुंड में पहुंचकर महायज्ञ बन्याथ का आयोजन किया जाएगा।

Regards,

M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




माता चंडिका निकली दिवारा पर
Story Update : Wednesday, January 19, 2011    12:01 AM
     
[/t][/t] अगस्त्यमुनि। आकाशकुंभा देती (आकाश को हिला देने वाली) रणभेरियाें और ताल से ताल मिलाती ढोल-दमाऊं की जुगलबंदियाें के साथ सफेद मिरजई (वस्त्र) से सजे ऐरवालाें (देवी के वाहक) का नृत्य इन दिनाें केदारघाटी के विभिन्न गांवाें में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मंदाकिनी घाटी के अरखुंड गांव में २२ वर्षों के अंतराल पर आयोजित हो रही मां चंडिका राजजात में लोग देवनृत्य का पुण्य ले रहे हैं। देवरा पर निकली चंडिका देवी का 'हयेरी की जा, फयेरी की जा तू मैती का मुल्क, खेती देई अन्न, मनखि देई बुद्ध' जैसे लोकगीताें से घर-घर में स्वागत किया जा रहा है। नृत्य को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालुआें के पहुंचने से गांववासियाें में भारी उत्साह है। देवी के आगमन को लेकर उत्साहित ग्रामीणाें के साथ प्रवासी बंधु और विवाहिता बेटियां भी बड़ी संख्या में अरखुंड पहुंच रही हैं।
अरखुंड गांव मां भगवती का मायका माना जाता है। गांव में देवी का स्वागत बेटी की तरह किया जाता है। एक माह के कठोर प्रशिक्षण के बाद नौ ऐरवालों, बलद्याें और गुरुआें के साथ भगवती चंडिका देवरा पर निकल चुकी है। माता घर-घर जाकर तकरीबन एक माह तक अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछने के लिए गांवों का भ्रमण करेगी। इसके बाद पुनः अरखुंड में पहुंचकर महायज्ञ बन्याथ का आयोजन किया जाएगा।
सोमवार को मां भगवती चंडिका की यात्रा अरखुंड से घरया दिवारा पूर्ण कर चंद्रापुरी पहुंची। जहां मां भगवती ने चंद्रशेखर मंदिर में भक्तों को आशीर्वाद दिया। बीरो के डिमरी गुरु ब्राह्मण के साथ देवी के वाहक ऐरवलों ने देवी के निशान ब्रह्म, काष्ठ फर्शा, क्षेत्रपाल व भूम्याल के निशानाें और रूप छड़ियाें के साथ मौजाज कर भक्ताें के घर-घर जाकर कुशलक्षेम पूछी।
(Source - Amar Ujala)



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  अरंखुड लौटी चंडिका की राजजात बन्याथ यात्रा        Feb 04, 06:36 pm    बताएं        अगस्त्यमुनि: ग्राम सभा अरखुंड में 22 वर्ष बाद आयोजित होने वाली मां चंडिका राजजात बन्याथ यात्रा भ्रमण के बाद वापस लौट गई। यात्रा सत्रह फरवरी को विशाल जल यात्रा के बाद 18 फरवरी को यात्रा पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न होगी।
गत 17 जनवरी से शुरू हुई मां चंडिका देवी की राजजात बन्याथ यात्रा ने 15 दिन तक नैडी, पौण्डार, क्यार्क, बीरों, पाली, डालंसिगी, बसुकेदार, कौशलप़ुर, किमाणा, दानकोट, स्यूर, डोभा, डांगी, कोटी, सिनकटा, अदूली सहित कई गांवों का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान मां चंडिका ने भक्तों की कुशलक्षेम पूछी। इस दौरान भक्तों ने बड़ी संख्या में चढ़ावा भी दिया गया। वहीं आज यात्रा की वापसी पर अरंखुण्ड गांव में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। इस मौके पर ग्रामीणों ने देवी का फूल- मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया गया।