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Dev Shilaye in Uttarakhand- उत्तराखंड में प्रसिद्ध देवी देवताओ के शिलाए

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 06, 2011, 09:03:07 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

There are several mythological stories connected to Devbhoomi Uttarakhand. The land of Uttarakhand has been favorite for God & Goddess, Saint who did penance to get peace and salvation.

उत्तराखंड में जगह जगह पर कई शिलाए है देवी देवताओ के नाम पर यहाँ पर ऋषि मुनियों ने तप किया था और ये जगह आज भी प्रसिद्ध है! कई जगह पर शिलाए शक्ति के रूप में प्रसिद्ध है! कई जगह पर आज भी कुछ शिलाए मंदिर के प्ररागण जिन्हें लोग देवी के मंदिर पूजा के दौरान उठाते है!

हम इस टोपिक में देवी देवताओ के शिलाओ के बारे में बतायंगे !

एम् एस मेहता


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

This Shila is near Tapt Kund in Badri Nathनारद शिला:




तप्तकुंड से अलकनंदा तक एक बड़ी शिला है। इसके नीचे अलकनंदा में नारद कुंड है। इस पर नारद जी ने दीर्घकाल तक तप किया था।

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Barahi Shila Near Tapt Kund Badri Nath
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वाराही शिला:


यह उच्च शिला अलकनंदा के जल में है। पाताल से पृथ्वी का उद्धार करके हिरण्याक्ष वध के पश्चात वराह भगवान यहां शिलारूप में स्थित हुए। यहां गंगा जी में लक्ष्मी धारा तीर्थ है। तप्तकुंड से कुछ दूर ब्रह्मकपाली तीर्थ है, जहां श्रद्धालु पिंडदान करते हैं। इसके नीचे ही ब्रह्मकुंड है, जहां ब्रह्माजी ने तप किया था।

(Info byपं.केवल आनंद जोशी)

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मार्कण्डेय शिला:



नारदकुंड के पास अलकनंदा की धारा में स्थिति शिला इस पर मार्कण्डेय जी ने भगवान की आराधना की थी।

नृसिंह शिला:
नारदकुंड के ऊपर जल में एक सिंहाकार शिला है। हिरण्यकश्यप वध के पश्चात नृसिंह भगवान यहां पधारे थे।



These Shilas are near Tapt Kund in Badri nath

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शिला जिया रानी (Near Kathgodam)--------------------------------'रानीबाग' से पहले इस स्थान का नाम चित्रशिला था। कहते हैं कत्यूरी राजा पृथवीपाल की पत्नी रानी जिया यहाँ चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थी। वह बहुत सुन्दर थी। रुहेला सरदार उसपर आसक्त था। जैसे ही रानी नहाने के लिए गौला नदी में पहुँची, वैसे ही रुहेलों की सेना ने घेरा डाल दिया। रानी जिया शिव भक्त और सती महिला थी। उसने अपने ईष्ट का स्मरण किया और गौला नदी के पत्थरों में ही समा गई। रुहेलों ने उन्हें बहुत ढूँढ़ा परन्तु वे कहीं नहीं मिली। कहते हैं, उन्होंने अपने आपको अपने घाघरे में छिपा लिया था। वे उस घाघरे के आकार में#ं ही शिला बन गई थीं। गौला नदी के किनारे आज भी एक ऐसी शिला है, जिसका आकार कुमाऊँनी घाघरे के समान हैं। उस शिला पर रंग-विरंगे पत्थर ऐसे लगते हैं - नानो किसी ने रंगीन घाघरा बिछा दिया हो। वह रंगीन शिला जिया रानी के स्मृति चिन्ह माना जाता है। रानी जिया को यह स्थान बहुत प्यारा था। यहीं उसने अपना बाग लगाया था और यहीं उसने अपने जीवन की आखिरी सांस भी ली थी। वह सदा के लिए चली गई परन्तु उसने अपने गात पर रुहेलों का हाथ नहीं लगन् दिया था। तब से उस रानी की याद में यह स्थान रानीबाग के नाम से विख्यात है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

This is stone is in Baijnath Temple, District Bageshwar.

It is said during the Mahabharat period, Bhima had played Badi with this stone. One single person can not lift this stone alone.





Devbhoomi,Uttarakhand

Chandrashila
Chandrashila is summit of the Tungnath . It literally means "Moon Rock". It is Located at height of about 4000mts above sea level. This pick provides a spectacular view of Himalayas,especially Nandadevi, Trisul, Kedar Peak, Bandarpunch and Chaukhamba peaks. There are various legends associated with this place. According to one of the popular legend, this is the place where Lord Rama meditated after defeating the demon-king Ravana.Another legend says that moon-god Chandra spent time here in penance.