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Marriages in Banquet Halls - बारातघरों में शादियों का प्रचलन क्यों बढ गया है?

Started by हेम पन्त, May 18, 2011, 06:04:26 AM

हेम पन्त

हर व्यक्ति के लिये शादी एक बहुत महत्वपूर्ण आयोजन होता है, पिछले कुछ सालों से उत्तराखण्ड में शादी के रीति-रिवाज और तरीकों में बहुत तेजी से बदलाव हुए हैं. पहले लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार रात की शादी के बदले दिन में शादी करने का चलन शुरु किया (One day Marriage).

अब देखने में आ रहा है कि लोग अपने घरों में शादी करने की अपेक्षा बारातघरों या मन्दिरों में शादी करने को प्राथमिकता देते हैं. इन शादियों में हालांकि बारात का वो पारम्परिक माहौल नहीं बन पाता लेकिन पैसे वाले लोगों के लिये ऐसी शादियां काफी सुविधाजनक होती हैं.

आप इस तरह की शादियों के बारे में क्या विचार रखते हैं? 

हेम पन्त

मेरे विचार से ऐसी शादियों से दुल्हन पक्ष के लोगों की कई परेशानियां कम हो जाती हैं. पैसे खर्चने के बाद शादी के लिये विभिन्न तरह की व्यवस्थाओं (केटरिंग, टेन्ट, लाइटिंग आदि) का झंझट नहीं रहता. दुल्हा पक्ष के लोग भी अब चाहते हैं कि उनके शहर में ही बारातघर में शादी हो जाये, जिससे बारात ले जाने के लिये गाड़ी आदि की व्यवस्था से भी बचा जा सके. 

 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


शायद लोग अपने suvidha के लिए इस और अग्रसर हो रहे हो! मेरा मानना है जैसे की उत्तराखंड के पहाड़ी शादियों की अपने एक विशिष्ठ पहचान है ! पहले बरात पैदल जाती थी जिस गाव से भी बारात गुजर रही हो लोग बरात देखने के लिए अपने घरो से बाहर निकल आते थे ! एक प्रकार का आकर्षण था!

बरात के बहाने लोग अपने सम्बन्धियों से मिलते है! मुझे लगता है बारात को जल्दी निपटने और सुख सुविदाहा के आधार पर लोग पहाड़ो में बारात घरो में अब शादियाँ कर रहे हो लेकिन इसमें हम कई चीजे अपने संस्क्रती की छोड़ भी रहे है !

कुछ फायदे कुछ नुकसान .. पर मेरे हिसाब से संस्क्रती के लिए हानि ही है ! एक बंद हाल में .. बारात का क्या मजा .. जो मजा बारात में लोग नाचते गाते चलते हो!

इस बदलाव के पीछे मेरे हिसाब एक कारण लोगो का शराब पीकर पर बारात में दंगा करते है लोग उससे बचने के लिए यह काम कर रहे हो!