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Timaru (Xanthoxylum aramatum) Useful Medicine Tree -टिमरू के फायदे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 03, 2011, 02:16:36 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
Dosto,

We are sharing information about a very useful Medicine tree which is found in Uttarakhand hills.

Timaru or Xanthoxylum aramatum is  used as medicines as carminative , stomachic , anathematic uses in many parts of India. The bark is purgative and is very much effective in toothache  the fruits and seeds are uses as medicines in expelling roundworms ,  skin diseases , chilblains cramp in the leg , fever, and dyspepsia . Timaru has the property of antibacterial and antifungal. That is why Garhwalis in Garhwal or in other places use Timaru an auspicious Lathi in the rituals of Yagyopavit.  (Info Courtsey - Our Member Bhisma Kukreti).


Shortly the [/color]Therapeutic Uses of Timaru are[/color] in :[/b] 1) asthma
2) bronchitis
3) cholera
4) fever
5) fibrosis's
6) indigestion
7) rheumatism
8) skin diseases
9) toothache
10) varicose veins


This is the photo of Timaru Tree which i had taken during my visit to my native place.



Regards,

M S Mehta


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कांटेदार टिमरू  ही नहीं रामबाण भी
 
उत्तराखंड के पहाड़ में कांटेदार टिमरू अधिकतर जगहों पर पाया जाने वाला पेड़ है। यह दवाईयों और टोटकों के साथ कई अन्य मामलों में भी इसका इस्तेमाल होता है। बदरीनाथ तथा केदारनाथ में इसकी टहनी को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। उत्तराखंड के सभी जिलों में टिमरू अधिकांश मात्रा में पाया जाता है। इसकी प्रमुख रूप से पांच प्रजातियां उत्तराखंड में पाई जाती हैं,जिसका वानस्पतिक नाम जैन्थोजायलम एलेटम है। दांतों के लिए विशेषकर दंत मंजन, दंत लोशन व बुखार में यह काम आता है। इसके फल को भी उपयोगों में लाया जाता है। इसका फल पेट के कीड़े मारने व हेयर लोशन के काम में भी लाया जाता है।

कई दवाइयों में इसके पेड़ का प्रयोग किया जाता है। इसके मुलायम टहनियों को दांत में रगड़ने से चमक आती है जो बाजार के किसी भी मंजन से नहीं आती है। यह आपके दांतों को मजबूत रखने के साथ ही दातों में कीड़ा नहीं लगने देता। यह मसूड़ों की बीमारी के लिए भी रामबाण का काम करता है।

उत्तराखंड के गांव में आज भी कई लोग इसकी टहनियों से ही दंतमंजन करते हैं। टिमरू औषधीय गुणों से युक्त तो है ही, साथ ही इसका धार्मिक व घरेलू महत्व भी है। हिन्दुओं प्रसिद्ध धाम बदरीनाथ तथा केदारनाथ में प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है। यही नहीं गांव में लोंगो की बुरी नजर से बचने के लिए इसके तने को काटकर अपने घरों में भी रखते हैं। गांव में लोग इसके पत्ते को गेहूं के बर्तन में डालते हैं, क्योंकि इससे गेहूं में कीट नहीं लगते।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा


As indicated above, this tree has multiple health benefits.  It works like panacea for toothache.


Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तराखंड के पहाड़ में कांटेदार टिमरू अधिकतर जगहों पर पाया जाने वाला पेड़ है। यह दवाईयों और टोटकों के साथ कई अन्य मामलों में भी इसका इस्तेमाल होता है। बदरीनाथ तथा केदारनाथ में इसकी टहनी को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

उत्तराखंड के सभी जिलों में टिमरू अधिकांश मात्रा में पाया जाता है। इसकी प्रमुख रूप से पांच प्रजातियां उत्तराखंड में पाई जाती हैं, जिसका वानस्पतिक नाम जैन्थोजायलम एलेटम है। दांतों के लिए विशेषकर दंत मंजन, दंत लोशन व बुखार में यह काम आता है। इसके फल को भी उपयोगों में लाया जाता है।

इसका फल पेट के कीड़े मारने व हेयर लोशन के काम में भी लाया जाता है। कई दवाइयों में इसके पेड़ का प्रयोग किया जाता है। इसके मुलायम टहनियों को दांत में रगड़ने से चमक आती है जो बाजार के किसी भी मंजन से नहीं आती है। यह आपके दांतों को मजबूत रखने के साथ ही दातों में कीड़ा नहीं लगने देता।

यह मसूड़ों की बीमारी के लिए भी रामबाण का काम करता है। उत्तराखंड के गांव में आज भी कई लोग इसकी टहनियों से ही दंतमंजन करते हैं। टिमरू औषधीय गुणों से युक्त तो है ही, साथ ही इसका धार्मिक व घरेलू महत्व भी है। हिन्दुओं प्रसिद्ध धाम बदरीनाथ तथा केदारनाथ में प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है।

यही नहीं गांव में लोंगो की बुरी नजर से बचने के लिए इसके तने को काटकर अपने घरों में भी रखते हैं। गांव में लोग इसके पत्ते को गेहूं के बर्तन में डालते हैं, क्योंकि इससे गेहूं में कीट नहीं लगते।