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Diwara Jat in Rudraprayag Distrct of Uttarakhand- दिवारा यात्रा

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 16, 2011, 03:06:41 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
Dosto,

We are sharing here information about Diwara Jat which held in ever 12 to 24 yrs in Uttarakhand. Here is the news.

M S Mehta

अगस्त्यमुनि। उत्तराखंड के १२ और २४ सालों के अंतराल पर चलने वाली देवी-देवताओं की दिवारा (भ्रमण) यात्राएं स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ देश विदेश के तमाम सैलानियों को अनूठी परंपराओं और रस्मो रिवाजों का दर्शन करा रही हैं। अनूठी लोक संस्कृति के दर्शन कराती इन लोक परंपराओं से देश विदेश के पर्यटक आकर्षण में बंध रहे हैं। कई विदेशी शोधार्थी तो इनको अपना शोध का विषय भी बना रहे हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, विभिन्न समयांतराल पर क्षेत्रीय देवी-देवता अपने प्रतिनिधि देवताओं को भेजकर क्षेत्र भ्रमण करते हैं। इन दिवारा यात्राओं में भगवान स्वयं भक्तों के घर जाकर कुशल क्षेम पहुंचते हैं। इन यात्राओं में देवता अपने प्रभाव क्षेत्र में भ्रमण कर भक्तों के कष्ट को दूर करते हैं। इस दौरान भक्त देवताओं का भेंट अर्पित करते हैं, तो देवता भी निशक्त, वृद्धजनों और असहायों को दान पुण्य कर मदद करते हैं।
इन संपूर्ण यात्राओं का निर्देशन देवता की ओर से स्वयं होता है।


दिवारा यात्रा के पथ प्रदर्शन के लिए आगवानी के रुप में वीर देवताओं के निशान चलते हैं। इस दौरान हर कार्य और निर्णय के लिए देवता की संस्तुति आवश्यक होती है। यात्रा में शामिल होना, विदा करना और भोजन व्यवस्था तक को देवता स्वयं जांचते हैं। एक दिन की समाप्ति पर देवता के समक्ष आय-व्यय का ब्यौरा दिया जाता है और नफा-नुकसान पर देवता सहमति और असहमति प्रकट करते हैं।
कुशल प्रबंधन से जुड़ी है यात्रा


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिवारा यात्राओं का प्रबंधन एक मजबूत व्यवस्था से जुड़ा होता है। इसमें थोकदार (निर्णयाधिकारी), पंचपधान (क्रियान्वयन अधिकारी), लिखवार (लेखाधिकारी), गुरु (कर्मकांडकर्ता), पुजारी (पूजा व्यवस्था), पोतीदार (व्यवस्थाधिकारी) और जमाणधारी (देवता के वाहक) मुख्य पद होते हैं। इनमें पंचकोटी (देवता के गूठ गांव) से दिवारी (यात्रा भक्त) बारी-बारी से शामिल होते हैं।
रुद्रप्रयाग में दिवारा यात्राएं
इन दिनों फलेश्वर तुंगनाथ, रांस माई और भगवती कुमासैंण की दिवारा यात्राएं विभिन्न गांवों में मौजाज (कुशल क्षेम) कर रही हैं। इसके अतिरिक्त तुंगनाथ (मक्कूमठ), मद्महेश्वर, कालीमाई (कालीमठ), नंदा देवी (दैड़ा), मनणा माई जात यात्रा, अगस्त्य ऋषि यात्रा, साणेश्वर दिवारा, चंडिका दिवारा, कुमासैंण, दिवारा, सन्यासैण दिवारा और फेगू दुर्गा देवी दिवारा जनपद की प्रमुख दिवारा हैं।

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा


Uttarakhand is known abode of God and Goddess. Every year, Religious Jaat of various God.

Like Diwara Jat, Nanda Jaat is famous in Uttarakhand which is words largest religious journey.

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About Sidhipeeth jaat

सिद्धपीठ मनणीमाई की जात
   

गुप्तकाशी: सिद्वपीठ मां भगवती राकेश्वरी मंदिर रांसी से मनणीमाई की भव्य जात 19 जुलाई से शुरु होगी। इसके लिए आयोजक समिति ने तैयारियां पूरी कर ली है।

मनणीमाई की यह जात रांसी से 32 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा में मनणी बुग्याल तक होगी, इसमें तीन दिन जाने व तीन दिन आने में लगते हैं। रांसी के भट्ट परिवार के पुजारियों ने मां मनणी जात के लिए शुभलग्नानुसार निश्चित दिन निकाला जाता है। डोली चौथे दिन मनणीमाई मंदिर मनणी पहुंचकर वहां भव्य पूजा-अर्चना के बाद देवी की मूर्ति को ब्रह्म कमलों तथा अन्य पुष्पों से ढका जाएगा। इसके बाद डोली वापस रांसी के लिए प्रस्थान करेगी। इसके साथ ही श्रावण मास की अमावस्या को यहां जड़ी-बृटियां प्रकाशमान होती दिखाई देती हैं! dainik jagran

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पिल्लू के भगवान कर्माजीत की दिवारा यात्रा
Wed, 18 Apr 2012

भगवान कार्तिकेय के तपस्थी में विराजमान नागों के देवता से प्रसिद्ध कर्माजीत की दिवारा यात्रा पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर से शुरू हुई। इस दौरान भगवान की उत्सव डोली जहंगी, कलाकोट, जगोठ, गुगली, आसों, कुणजेठी, अजयपुर, जयकंडी समेत क्षेत्र के कई गांवों में भ्रमण कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देगी। उत्सव डोली 21 अप्रैल को पिल्लू मंदिर परिसर में पहुंचकर हल्दी हाथ कार्यक्रम में शामिल होगी। इसके बाद 22 अप्रैल से यज्ञ शुरू होगा। 29 अप्रैल को जल कलश यात्रा व 30 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ यज्ञ का समापन किया जाएगा।

(http://www.jagran.com

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 पिल्लू के भगवान  कर्माजीत की दिवारा यात्रा हुई शुरू

पिल्लू के भगवान  कर्माजीत की दिवारा यात्रा हुई शुरू
   अगस्त्यमुनि: ग्राम सभा पिल्लू में विराजमान भगवान कर्माजीत की सात दिवसीय दिवारा यात्रा मंगलवार से शुरू हो गई है। 22 अप्रैल से मंदिर परिसर में नौ दिवसीय यज्ञ शुरू होगा।
भगवान कार्तिकेय के तपस्थी में विराजमान नागों के देवता से प्रसिद्ध कर्माजीत की दिवारा यात्रा पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर से शुरू हुई। इस दौरान भगवान की उत्सव डोली जहंगी, कलाकोट, जगोठ, गुगली, आसों, कुणजेठी, अजयपुर, जयकंडी समेत क्षेत्र के कई गांवों में भ्रमण कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देगी। उत्सव डोली 21 अप्रैल को पिल्लू मंदिर परिसर में पहुंचकर हल्दी हाथ कार्यक्रम में शामिल होगी। इसके बाद  22 अप्रैल से यज्ञ शुरू होगा।

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