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Aipan: Uttarakhand Art - ऐपण

Started by suchira, November 30, 2007, 12:28:46 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

महिलाओं की कलात्मक अभिब्यक्ति आकिक चित्रों के रूप मैं अल्पना या ऐपण द्वार प्रकट होती है ऐपण के स्थूल रूप मैं दो भेद है अफल भूआंकन दूसरा भीती चित्र ऐपण का मूल अर्थ है लेपना यह चित्र प्रथा समतल धरती पर अंकित रंगोली तथा दीवारों पर अंकित थापा कहलाती है !

बंगाल मैं इसे अल्पना और गुजरात मह्रास्त्र मैं इसे रंगोली कहते हैं तमिलनाडू मैं झेलम तथ मध्य प्रदेश में मंडाना कहते है !
ऐपण के लिए चावलों को भिगोकर तथा महीन पीस कर पेस्ट बनाया जाता है !

जिसे विस्वार कहते हैं वर्तमान में विस्वार के स्थान पर सफ़ेद पिंडोल (गढ़वाली में इसे कमेडा) कहते हैं इसका भी प्रयोग किया जाता है !ऐपण लिखने की परम्परा कुमाऊँ मंडल में अधिक प्रचलित है इसे महिलाओं द्बारा ही लिखा जाता है इनके नाम स्थान और अनुष्ठान के अनुरूप होते हैं लक्ष्मी पूजा वाले ऐपण को लक्ष्मी पूजा ,तथा शिव की पूजा वाले ऐपण को ,शिवपीठ कहते हैं !

यज्ञों पवित संस्कार के अवसर पर जनेऊ सूर्य बर्हामा मुख्यत वास्तविक नवग्रह तथा लक्ष्मी -सरस्वती का ऐपण के माध्यम से चित्रांकन किया जाता है !


Devbhoomi,Uttarakhand

महिलाओं का ऐंपण से हटने लगा ध्यान

बागेश्वर। दीपावली के अवसर पर घरों की दहलीज पर बनाए जाने वाले ऐंपणों की ओर अब महिलाओं का रुझान कम होने लगा है। महिलाएं अब बाजार में बने स्टीकर को दहलीज व मंदिरों में चिपकाकर ही काम चला रही है।

हालांकि बुजुर्ग व संस्कृति प्रेमी महिलाओं का मानना है कि ऐंपण गेरू व चावल के आटे से स्वयं बनाया हुआ ही संस्कृति को प्रदर्शित करता है तथा इससे संस्कृति का प्रचार-प्रसार भी होता है परंतु इसके बाद भी कुछ महिलाएं स्टीकर खरीदती दिखाई दी।

sanjupahari

wahhh pahar ki chirakala ne dil khus kar diyaa........bahut bahut dhanyawaad,,
:)

Meena Rawat


Meena Rawat

ये है मेरे घर के बने हुए ऐपण जो मैंने और मेरी दोस्त ने बनाये है :) :)

Meena Rawat


Meena Rawat


Meena Rawat


Meena Rawat


Meena Rawat