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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देख बाटा

देख बाटा थै
बाटा जुड्दा जोंला
अपरा गढ़ देश तक
पोंछी हम जोंला

मन आशा च
जिकड़ी मा बिसवास
कंडा पर फुल जाणी
एक दिनी खिल्दी जोंला

एक एक से इनी
हम इनी जुडदी जोंला
टूटे णा टूटे वो डोर
गेंठ दी हम जोंला

हे उत्तराखंड गढ़ देश मेरु
हम अब आणा छों
ऐ माई ऐ माटा मा
हम मिलदी जोंला

देख बाटा थै
बाटा जुड्दा जोंला
अपरा गढ़ देश तक
पोंछी हम जोंला

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

fir
my land
tree of mountain
is my uttarakhand

start to
end of me
is my mountain
is my uttarakhand

dev-bhumi
full of sant monk
pilgrims in my land
is my uttarakhand

devotional fo
for your mind
peace & quiet
is my uttarakhand

far far away from you
ones you came here
i am alwyas with you
is my uttarakhand

fir
my land
tree of mountain
is my uttarakhand

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीFridayवीं सबैर कबी त आली

वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,
इनी काली सदी का मुंड से , जबै राती कू साफा फुंडा जालो
जबै आकश झूम कै नाचेली , जबै धरणी गीत गैली
वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,

जी सबैर का खातिर जुग - जुग भतेक,
हम सबै मोरी -मोरी की जीण छा,
जी सबैर की अमृत की धुण मा ,हम जहरी का प्याळ पीण छा,
इनी भूखी तीसी जिकोडी मा ,एक दिनी तो म्याल्दु वहाली
वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,

माना की अबै तक मेर मनसा की , कीमत कुछ ऩा
माटू कू भी च यख कुछ मोळ मगर ,
आदम कू यख क्वी मोल ऩा ,
आदम की लज्जा जबरी खोटी टक्कों मा ऩा तोली जाली
वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,

टक्कों बाण जबै बेटी ब्वारी की ,लाज थै ऩा इनी बैची जाली,
प्रीत थै जबै ऩा इनी मसलू जालू , खुदेरी थै ऩा बैची जली ,
आपडी काली करतुते पै, जबै ऐ दुनिया खुदै लजैली ,
वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,

बिता ला कबी त ऐ दिन अखेरी , ये भूक ऐ बेकारी का
टूटा ला कबी त बुत अखेरी , टक्कों की ऐ तिमरदरी मा
अबै एक आजाण दुनिया की , जबै बुनियाद उठै जाली
वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,

लाचार बुढुप जबै सुण , बाटों मा धुल णी धोलोलो
नाना बालपन जबै घिन , गोल्यों मा भीक ऩा मंगलो
हक मंगाण वालों थै, जै दिनी सूली ऩा दिखै जैली
वीं सबैर कबी त आली, वीं सबैर कबी त आली ,


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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चित्रपट फिर सुबह होगी
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीThursdayकांचे की प्रीत मेरी

कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ
सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ
कांचे चूड़ी का नीच क्वी ओरी छोर छोर
तेरी प्रीती नी खीच्यूं चली ऐ मी तेरी ओर, ओर
कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........

लाल कांचे की चूड़ी चूड़ी सुआ लाल कांचे की चूड़ी
मुखडी तेर सेब जणी दिखै लाल कांचे की चूड़ी
लाल कांचे की चूड़ी जुडी ते दगड इनी जिकोडी
फजल शाम भूली मी खैण सीण भूली मी
सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ
कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........

हैरी कांचे की चूड़ी चूड़ी सुआ हैरी कांचे की चूड़ी
जोड़ी तेर बाणा सुआ हैरी कांचे की चूड़ी
कांचे की चूड़ी हैरी सुआ चडै आणू मी घोडी
ब्योला बाणूलू तेरु तू बाणेली मेर ब्योली
सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ
कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........

कांचे की मा बसी प्रीत मेरी हैरी राओ या वा पिंगली
कै मा भी सजै तू , तू सुआ मेरी वो कांचे की चूड़ी
जोड़ी रै सदनी तू ऐ जीयु दगडी वो कांचे की चूड़ी
मिल्दी रै तेरा माया मीथै वो कांचे की चूड़ी जणी
सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ
कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........

कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ
सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ
कांचे चूड़ी का नीच क्वी ओरी छोर छोर
तेरी प्रीती नी खीच्यूं चली ऐ मी तेरी ओर, ओर
कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Jagdish Rawat J D and 48 others. Photo: कांचे की प्रीत मेरी कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ कांचे चूड़ी का नीच क्वी ओरी छोर छोर तेरी प्रीती नी खीच्यूं चली ऐ मी तेरी ओर, ओर कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........ लाल कांचे की चूड़ी चूड़ी सुआ लाल कांचे की चूड़ी मुखडी तेर सेब जणी दिखै लाल कांचे की चूड़ी लाल कांचे की चूड़ी जुडी ते दगड इनी जिकोडी फजल शाम भूली मी खैण सीण भूली मी सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........ हैरी कांचे की चूड़ी चूड़ी सुआ हैरी कांचे की चूड़ी जोड़ी तेर बाणा सुआ हैरी कांचे की चूड़ी कांचे की चूड़ी हैरी सुआ चडै आणू मी घोडी ब्योला बाणूलू तेरु तू बाणेली मेर ब्योली सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........ कांचे की मा बसी प्रीत मेरी हैरी राओ या वा पिंगली कै मा भी सजै तू , तू सुआ मेरी वो कांचे की चूड़ी जोड़ी रै सदनी तू ऐ जीयु दगडी वो कांचे की चूड़ी मिल्दी रै तेरा माया मीथै वो कांचे की चूड़ी जणी सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........ कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ सुआ तेरी प्रीत मेरा बाणा उनी अनमोळ,मोळ कांचे चूड़ी का नीच क्वी ओरी छोर छोर तेरी प्रीती नी खीच्यूं चली ऐ मी तेरी ओर, ओर कांचे की चूड़ी जनी गोळ गोळ........ एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
वींसे

वींसे कुछ णा
कुछ णा बोला जी
बुरो मान जाली वा रूशे जाली
मेरी जिकोडी प्रीत डाली
वा मोली जाली
वींसे कुछ णा
कुछ णा बोला जी

ऐ स्याली ऐ
मेर आंखी स्याली
तू अग्ने व्है जादी ,तू ब्चोंदी तू मनोदी
मेरे प्रीत थै तू फूलों दी
वींसे कुछ णा
कुछ णा बोला जी
बुरो मान जाली वा रूशे जाली

स्याली आंखी देख्दी रै
तेर जिकोडी दीदी थै कुछ ना सुणे
गीचो दीदी तू चुप ही रै
आंखी स्याली छुईं रुशे जाली
जिकोडी बोऊ कंन मणाली
वींसे कुछ णा
कुछ णा बोला जी
बुरो मान जाली वा रूशे जाली

हाथ दीदा इशारु कै
कनुडी दीदी थै कुछ णा सुणे
खुठी दीदा बल खूब हिठे
प्रीत थै मेर माणुणे सबै ऐ
जिकड़ी जी मेर णा मणे
वींसे कुछ णा
कुछ णा बोला जी
बुरो मान जाली वा रूशे जाली
वींसे कुछ णा
कुछ णा बोला जी ...३
मेर आंखी स्याली लगी रै

एक उत्तराखंडी

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पिनीय का कूड़ा

अ : देख मीन देखी चा एक सुपिनीय
अ :फूलों का सैर मा च कूड़ा अपड़ो
अ :कया ऋतू च तू कख गैई

ळ : मी ऐई ऐई ऐई ऐई
अ : ऐ जा

ळ : कितगा स्वाणु च यो एक सुपिनीय
ळ:फूलों का सैर मा च कूड़ा अपड़ो
ळ :कया ऋतू च तू कख  गैई

अ : मी ऐई ऐई ऐई ऐई
ळ : ऐ जा

अ :यख तेरु मेरु नोंवों लिख्युं छा
ळ : बाटों नी ऐ आम लिख्युं छा
अ :हो ,यख च ऐकी दार तू जख उभी छे
ळ :भीतर ऐ जावा जडी काफी च 
अ :यख भतेक देखा त्यों नजारा पहाड़ों का
ळ : झांकी मील कख क्ख्क छे खिडको 
ळ : यख यख छे , तू कख छे
अ : मी ऐई ऐई ऐई ऐई
ळ : ऐ जा

ळ: अछा ऐ बतावा कख छे पाणी
अ : भैर भैणु छा ऐ गदनीयों बोली   
ळ : हो ,बिजली नीच बस ऐकी दुःख च
अ : तेरी बिंदुली कया बिजली से कम च
ळ : छेडा णा मीथे छोड़ा  अबै बजार जावा
अ : जाणु मी जाणू पैल यख आवा
अ :  ब्योखोंण जवाण छे , तू कख छे
ळ : मी ऐई ऐई ऐई ऐई
अ : ऐ जा

ळ : कंण प्यारी च ऐ नानी सी रसोयै
अ :हो , हम दोईया यख बस दुसरो नी क्वी 
ळ : ये कमरा मा वाहली मीठी छुंई
अ : वों कमरा मा गुजरेली राता
ळ : ऐ त बोळ कख होली लडैई
अ : मी नी वो जगै ही णी बणेई
अ : प्रीत यख च तू कख च   
ळ : मी ऐई ऐई ऐई ऐई
अ : ऐ जा

एक उत्तराखंडी

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पाणी पाणी कै जालू

पाणी पाणी ही होई जालो
तेर करणी का फल तू पालू ,पाणी पाणी कै जालू

जेंकी सत्ता च वो एकी दिनी लूछी जालो
भूमी थै फिर तू कंन कखक पालू ,पाणी पाणी कै जालू

चौं तरफ घेरु च तेरु ऐ चदरा
पाणी ऐकी भीगे जालो ,पाणी पाणी कै जालू

भैर भीतर तेरु पाणी च पाणी
दुःख सुख मा जबै उमाल आलू , पाणी पाणी कै जालू

दणमण ऐ आंसूं औरी चरका धरका बरखा
नाला गदनी वो समुद्र से भोरी जालो ,पाणी पाणी कै जालू

तैर रै तू अबै वो दिन कबी भी अब आलू
जबै ऐ भूमी फिर समोदर समै जाली ,पाणी पाणी कै जालू

पाणी पाणी ही होई जालो
तेर करणी का फल तू पालू ,पाणी पाणी कै जालू

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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देख बाटा

देख बाटा थै
बाटा जुड्दा जोंला
अपरा गढ़ देश तक
पोंछी हम जोंला

मन आशा च
जिकड़ी मा बिसवास
कंडा पर फुल जाणी
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एक एक से इनी
हम इनी जुडदी जोंला
टूटे णा टूटे वो डोर
गेंठ दी हम जोंला

हे उत्तराखंड गढ़ देश मेरु
हम अब आणा छों
ऐ माई ऐ माटा मा
हम मिलदी जोंला

देख बाटा थै
बाटा जुड्दा जोंला
अपरा गढ़ देश तक
पोंछी हम जोंला

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ

कितना ?

कितना
आज लाचार हूँ
मै बेबस हूँ
बस देखता हुआ

देखता हूँ
अपनो को
अपने सामने लुटाता
यूँ ही टूटता हुआ

कितना
आज लाचार हूँ
मै बेबस हूँ
मूक हूँ मै खड़ा

हदसा होते रहे
बस मोमबती जला
दो आंसूं आंख से गिरा
किधर तू चला

कितना
आज लाचार हूँ
मै बेबस हूँ
कैसे सब सह रहा

चुपचाप निश्ब्ध सा
ये दिल धडक रहा
हदसा होने के बाद
वो मुझे बेच रहा

कितना
आज लाचार हूँ
मै बेबस हूँ
बस देखता हुआ

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
22 hours ago
ब्याळ राती मी

ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे
ऐ सुबैरा ....२ किले जगेई ऐकी किले जगेई
निंदी का मस्त मी झंपा मा छे ,झंपा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे

कंन सुंदर सुप्नीयु यख मेरा सब अपडा वख
मीळ निंदी थै घेर दयाई निंदी मीथै फेर दयाई
खटलू पोड़ पोड़ीकी अपरू गों गोंल्यों घूम आई
कंन बेळ राती की आई जुगराज रै काली माई
ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे

हिलोर सी नींदी मेरी बसंत प्योंली बुरंस जणी
एक एक से भेंट आयों सेव सोंली मी कैर आयों
बाल बच्चों थै लाड़ क्याई ,जी छुंई मील चार कैरी
बाबाजी से अदमुख क्याई ईजा जणी ही मी मोड़ी
ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे

सुबैर दीदा मील जगे मीथै ईजा आंसूं णी पूछण दे
ऐ खंत मेर जिकोड़ी मा रै मीळ बोई की आशीष णा ले
बोई बोई कैकी ऐ आंखीळ मीथै बस यख य्क्लू रुलै
अपरा गढ़देश छोडिकी क्वी भै-भ्न्द ऐ परदेश ना ऐ
ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे

ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे
ऐ सुबैरा ....२ किले जगेई ऐकी किले जगेई
निंदी का मस्त मी झंपा मा छे ,झंपा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे ,डेरा मा छे ,डेरा मा छे
ब्याळ राती मी डेरा मा छे

एक उत्तराखंडी

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