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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी म्यार भोळ प्रमोद्चंद्र कांडपाल और ब्वारी लता जोशी जी जीवना की एक न्यु पड़ाव पर छन और आप सबका आशीर्वाद की जरुरत छन ३० जनवरी २०१३ शुभ लग्न बार च आपरा आशीर्वाद भी दैण व्हीयां

भुल्हो त्यारू ब्यो

दैण व्हीयां खोली को गणेशा हे
दैण व्हीयां मोली को नरेणा  हे

देख कानी सजी होली
ब्योली मेरी नटी होली

डोला वो सजा व्हाला
ब्योला मेरा वैमा बैठा आला

डोल दामू अब बजणा व्हाला
दगडया हमरा नचण व्हाला

रंगमत होंयीं आयींच बाहार
मोडमा धारियों मी सैरा आज

ब्योला ब्योली को साथ त
मागांण को कंन चली ब्यार

ऐजा मेरा अग्ने अग्ने
साथ सात रेघ रीटा जाला

सात जन्मो का साथ फेरा
ऐजा मेरा भागा घार मेरा

देख कानी सजी होली
ब्योली मेरी नटी होली

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

छुंयाळ छुंयीं लगा

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

भैजी मेरा तू ना और मीथै रुशा
ब्याल ब्यो व्हाई आज स्वामी परदेश चा
कंन कटनी ऐ यकुली दिन
क्या होलो जबै आली वो कली रात चा

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

भोळ क्या होली ऐ सोच मा छों,
गढ़ मा बस अब दाणा बुढया नाना छोरों
बेटी ब्वारी की खैरी विपदा व्यथा
की लगी चौमास बरसात चा

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

पुंगडी हमरी बांज पौडी
डांडू मा दूर तक मौलयार छायूँ
टूटी छनी लैंदु गौड़ मेरु वाख माथा
भ्युओ लागलो कंन जाओ मी राता

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

चुल्हू जग्दु चुल्हू बुझ्दु
बस साथ ही साथ चा
ऐ मेरी जुनी मा छायीं
कण ओंसी की काली रात चा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानीJanuary 26बगती जाली बोई गंगा

वख भतेक निकली गंगा धार
वख शिवजी नी जाटों मा धार
भागीरथी कु चा ये तप कू प्रताप
माँ गंगा जी ऐ अपरा घार

ऊँचा ऊँचा हिमाला ऐ पहाड़
गड़ा गदनियूं थै दे वैल बाट
पिताजी छन हमरु हिमाल
बेटी थै उन अंग्वाल मा धारा

माँ जयती जयती माँ
सारु गुंजो कुमो गढ़वाल
हरलो कैगै गढ़ कु डंडा धार
बोई भगोती तेरु उपकार

सदनी रै ऐ छाल पल छाल
जुग जुग तक रयां तेरु घार
जगी जावा मेरु कुमो गढ़वाल
ना तर रुउडी जाली वो धार

बोई अपरी गंगा आपरा घार
तब सोचा क्या होला तुम्हरा हाल
बगत च अब भी पैल तू भी जाग
आपर लोगों थै अब तू जगा

ऋणी रालो सरू हिन्दुस्थान
पीडी दर पीडी करली तेरु गुण गान
देवभूमि उत्तराखंड कू मान
जुग जुग बगती रै बोई गंगा धार

एक उत्तराखंडी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
‎**************
तेरु बीना बीना
********************************
जीना दुबारु मेरु तेरु बीना बीना
नी लागैदु जी ते बिगर बीना बीना
जिकोड़ी कू ऐसे कै बाण जीना बीना
लगी रोंलो ऐसे काम काम बसै काम
*********************************

शुभ संध्या उत्तराखंड

आपकू ध्यानी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ18 hours ago Allowed on Timeline
क्या खूब लगणी या

औ क्या खूब लगणी या , बड़ी दाण दिखणी या ...२

फिर से बोला ..मैसे से बोला अच्छु लगणु या
जीवना कु यु सुपिनिया अब सच्चु लग्णु या     

क्या खूब लगणी या , बड़ी दाण दिखणी या ...२
 
मेरु तारीफ़ करला कब तक ,बोला कब तक

मेरु जीयूं मा स्वास राली जबै तक

कबै तक मी रोलों मन मा ये मन मा

सूरज रालो जबै तक नीलू सरग मा
 
फिर से बोला ..मैसे से बोला अच्छु लगणु या
जीवना कु यु सुपिनिया अब सच्चु लग्णु या   

औ क्या खूब लगणी या , बड़ी दाण दिखणी या ...२
तुम प्रीत से प्यारी या तुम जीयु हमारी या

खुश छों ना मिथै तुम पाकर ,मिथै  पाकर
तिसलू जिकोड़ी कू आज मिलूं छे सागर

कया जिकोड़ी मा च औरी आशा,हाँ जी आशा
हर जीवना मा तुम मेरु स्वामी बण ना

फिर से बोला ..मैसे से बोला अच्छु लगणु या
जीवना कु यु सुपिनिया अब सच्चु लग्णु या   

औ क्या खूब लगणी या , बड़ी दाण दिखणी या ...२

तुम प्रीत से प्यारी या

तुम जीयु हमारी या

तुम प्रीत से प्यारी या

तुम जीयु हमारी या

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फिल्म  - धर्मात्मा गाने का गढ़वाली संस्करण
पढ़िए "धर्मात्मा" के और गाने कु गढ़वाली में
  को बोल मा गढ़वाली बोल जी कंन लाग्यां जी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
किले मन

किले छे टपराणू मन
किले छे भरमाणू मन
दोई दिना की जिंदगाणी
किले छे हरसाणू मन
किले छे बोल किले छे

यकुली मी लगुली
कथा अपुरी सुणूली
माया कू बीज खत्यां
भूमी भूमी मा वो बटयाँ

किले छे बोलाणू मन
किले छे लटाणू मन
किले तू हसाणु मन
किले तू रुलाणु मन
किले छे बोल किले छे

अपरा मा लगीरै तू
अपरों बाण मरीले तू
फैदा नुक्सान का बीच
झुला बणी झूलीरे तू

किले णी तिल जाणी मन
किले णी पछाणी मन
किले तू इनी लगी राई मन
इन लगी की क्या पाई मन
किले छे बोल किले छे

इनी लगी रलूं मी सदनी
कभी तेरी मनसा णी भरली
ऐलू जब बगत वो आखैर कू
तब तेथै मन दशा समजेली ...३

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बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी
Tuesday
वो मोमबत्ती

वो मोमबत्ती
से दीदी मेरी पुछ रही

वो बत्ती जलती रही
मोम पिघलती रही

जल जलकर
वो बुझ वो गयी

जो चिंगारी
बनी कभी वो मशाल थी

इंसाफ से अड़ रही
ना बालिग समझ रही

पथ से भटक रही
दामिनी अब तक तड़प रही

है वो अभी भी यंही कंही
हम से वो पुछ रही

वो कैसे नाबालिग
ये कैसा इन्साफ

अस्मत पर जिसके
हो आ है जो अघात

राख के धुल में
वो अब भी इंसाफ खोज रही

वो मोमबत्ती
से दीदी मेरी पुछ रही

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बालकृष्ण डी ध्यानी छुंयाळ छुंयीं लगा

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

भैजी मेरा तू ना और मीथै रुशा
ब्याल ब्यो व्हाई आज स्वामी परदेश चा
कंन कटनी ऐ यकुली दिन
क्या होलो जबै आली वो कली रात चा

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

भोळ क्या होली ऐ सोच मा छों,
गढ़ मा बस अब दाणा बुढया नाना छोरों
बेटी ब्वारी की खैरी विपदा व्यथा
की लगी चौमास बरसात चा

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

पुंगडी हमरी बांज पौडी
डांडू मा दूर तक मौलयार छायूँ
टूटी छनी लैंदु गौड़ मेरु वाख माथा
भ्युओ लागलो कंन जाओ मी राता

ऐ छुंयाळ छुंयीं लगा
गुमसुम किले तू आज बैठी चा
आपरा जिकोड़ी मा तू
कुछ ना लुका कुछ ना लुका
छुंयीं लगाकी तो बोली जा

चुल्हू जग्दु चुल्हू बुझ्दु
बस साथ ही साथ चा
ऐ मेरी जुनी मा छायीं
कण ओंसी की काली रात चा

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बालकृष्ण डी ध्यानी चित्रपट छोटी सी बात कू गीत च ये
न जणनु किले

न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड
अचाणचक ये जीयु ,
कैकी जणा का बाद , करणु फिर कैकी खुद
नाना नानी सी छुंयीं ,न जणनु किले

वीं अजाना बगत,
बीत गैन ब्याल, आज वो,
रंग बदली बदली जीयु मचल मचल
रैगे .न चलन जणनु किले,वीं अजाना बगत,
तेरु बिना मेरी आंखी मा,
टूटी रे ,है रे सुप्नीयु का महल ,
न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड ....


वींच च धोर
वीच ये सफर , है ना
दगडू कू मेरु मगर , अब मेरु दगडाया
ढूंड छन नजर न जणनु वींच च धोर ,
क्ख्क गै संध्या वी मदभरी,
वो मेरा,मेरा वो दिन क्ख्क गैनी
न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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    some one
    you suddenly like
    very much
    you should be
    ... Photo: beware some one you suddenly like very much you should be that time to beware now days everything happened very quickly its good or bad sudden  you can not realize so that time stopped and beware every time you think twice hold a deep breath then you reply if he is in very -very hurry so you know you should be beware some one you suddenly like very much you should be that time to beware एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतLike ·  · Share
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  • बालकृष्ण डी ध्यानी16 hours agoचित्रपट छोटी सी बात कू गीत च ये
    न जणनु किले

    न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड
    अचाणचक ये जीयु ,
    कैकी जणा का बाद , करणु फिर कैकी खुद
    ... — with Hemant Joshi and 47 others. Photo: चित्रपट छोटी सी बात कू गीत च ये न जणनु किले न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड अचाणचक ये जीयु , कैकी जणा का बाद , करणु फिर कैकी खुद नाना नानी सी छुंयीं ,न जणनु किले वीं अजाना बगत, बीत गैन ब्याल, आज वो, रंग बदली बदली जीयु मचल मचल रैगे .न चलन जणनु किले,वीं अजाना बगत, तेरु बिना मेरी आंखी मा, टूटी रे ,है रे सुप्नीयु का महल , न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड .... वींच च धोर वीच ये सफर , है ना दगडू कू मेरु मगर , अब मेरु दगडाया ढूंड छन नजर न जणनु वींच च धोर , क्ख्क गै संध्या वी मदभरी, वो मेरा,मेरा वो दिन क्ख्क गैनी न जणनु किले होणु च इनी जिंदगी दगड एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी न जाने क्यों, होता है ये ज़िंदगी के साथ साथ गाना का बोल छन ये गाने का गढ़वाली संस्करण चित्रपट छोटी सी बातLike ·  · Share

            
    • सुनीता शर्मा, Harish Rawat, Ganesh Bhardwaj and 36 others like this.
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    • बालकृष्ण डी ध्यानी अपरा भै भैनु को प्रेम इनी मिलदु रै हे रे मेरों देबता सब थै राजी खुशी राख्यां ...सबै थै शुभ संध्या को प्रणाम जी13 hours ago · Like
    • Anand Gaira nice8 hours ago · Like
    • नूतन डिमरी गैरोला खुदेणु गीत .. न जाने किले होणु इनी ... सुन्दरabout an hour ago · Like
    • नूतन डिमरी गैरोला प्रिय Chitra Rathore और परिवार को शुभकामनाएं...सदा हँसते मुस्कुराते खिलखिलाते गुनगुनाते रहें .... .. सुख समृधि खुशियों से भरपूर हो जिंदगी.. और भाई [ Jogendra ] के लिए भी यही शुभकामना... शुभप्रभातabout an hour ago · Like
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  • बालकृष्ण डी ध्यानी21 hours agoवों दिणों मा

    वो बिता दिणों मा
    चैन भी छा  करार भी छा
    अब रैगे बस हिरकरी 

    बस अब ...अ .अ अ अ अ अ
    अग्ने बड़ने की दौड़ लगी छा, दौड़ लगी छा
    पीछने ही तू क्ख्क छुटीगे

    वो दिणों मा फुल भी छा
    वोंका बागवान भी छा
    वोंका मायादार भी छा   

    बस अब ...अ .अ अ अ अ अ
    वों थे तुडना को रीत बदलगे ऋतू बदलगे
    प्रीत भी बदलगे

    वो दिणों मान भी छा सन्मान भी छा
    आपरा पराया एक साथ भी छा
    एक जुटी बात छा

    बस अब ...अ .अ अ अ अ अ
    माया कु बस साथ छा
    आपर अब दूर छा
    पराया अब औरी पास छा

    वो बिता दिणों मा
    चैन भी छा  करार भी छा
    अब रैगे बस हिरकरी 

    एक उत्तराखंडी

    बालकृष्ण डी ध्यानी
    देवभूमि बद्री-केदारनाथ
    मेरा ब्लोग्स
    http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
    मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Chandresh Joshi and 48 others. Photo: वों दिणों मा वो बिता दिणों मा चैन भी छा  करार भी छा अब रैगे बस हिरकरी बस अब ...अ .अ अ अ अ अ अग्ने बड़ने की दौड़ लगी छा, दौड़ लगी छा पीछने ही तू क्ख्क छुटीगे वो दिणों मा फुल भी छा वोंका बागवान भी छा वोंका मायादार भी छा बस अब ...अ .अ अ अ अ अ वों थे तुडना को रीत बदलगे ऋतू बदलगे प्रीत भी बदलगे वो दिणों मान भी छा सन्मान भी छा आपरा पराया एक साथ भी छा एक जुटी बात छा बस अब ...अ .अ अ अ अ अ माया कु बस साथ छा आपर अब दूर छा पराया अब औरी पास छा वो बिता दिणों मा चैन भी छा  करार भी छा अब रैगे बस हिरकरी एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत