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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी कंण भाणु मिलगे

रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै
दिन कंन भी कटे जलो
ब्रांडी चम्चु ऐ तांसुं राता घूले
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

कंन भाणु बाणुचा
चम्चु चम्चु कैकी तणुचा
ब्रांडी बोतल जब खुले
कुछ नी बचे दीदा कुछ नी बचे
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

ह्युंद अब येडो चा
दारू का नाश चडायूँ चा
गर गर गर गरठा जडू कू
गढ़ भैणी गर गर दारू की बथा
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

कंण भाणु मिलगे
अब रात दिन भूलीगै
मस्त च मस्त राम अब
अब कू ह्युंद अब कू हिवाळ
बस अब घुटी ही घुटी
वहैगे कम कजा की छुट्टी
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Manoj Bolya Dhundkari and 49 others. Photo: कंण भाणु मिलगे रजै रजै मीथै उबै रात दिन खटली तुडै दिन कंन भी कटे जलो ब्रांडी चम्चु ऐ तांसुं राता घूले रजै रजै मीथै उबै रात दिन खटली तुडै ................ कंन भाणु बाणुचा चम्चु चम्चु कैकी तणुचा ब्रांडी बोतल जब खुले कुछ नी बचे दीदा कुछ नी बचे रजै रजै मीथै उबै रात दिन खटली तुडै ................ ह्युंद अब येडो चा दारू का नाश चडायूँ चा गर गर गर गरठा जडू कू गढ़ भैणी गर गर दारू की बथा रजै रजै मीथै उबै रात दिन खटली तुडै ................ कंण भाणु मिलगे अब रात दिन भूलीगै मस्त च मस्त राम अब अब कू ह्युंद अब कू हिवाळ बस अब घुटी ही घुटी वहैगे कम कजा की छुट्टी रजै रजै मीथै उबै रात दिन खटली तुडै ................ एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतLike ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीMondayवो चिप्ला बांटा

वो चिप्ला बांटा
खुटो रौड़ी ठुरर र र रर र र र
टक्कों की घोडी
मी चट चडों सुरर र र र र र र र
वो चिप्ला बांटा .

फिसलाणाया
फिसलाणाया होंयाँ
घिस्रण सी लाग्यां
हारो घरों कागद नोटुं
का टुकड़ा टुकड़ा
फिस्लायाँ फिस्लायाँ

वो चिप्ला बांटा
खुटो रौड़ी ठुरर र र रर र र र
टक्कों की घोडी
मी चट चडों सुरर र र र र र र र
वो चिप्ला बांटा .

क्दगा चलगे अग्ने
क्दगा अब जाणा
क्दगा पिछने को तैयार
धरा च ऐ फिसरण
सीधु उंधार च ऐ फिसरण
उकोलों पर चिप्ले ऐ बाटा

वो चिप्ला बांटा
खुटो रौड़ी ठुरर र र रर र र र
टक्कों की घोडी
मी चट चडों सुरर र र र र र र र
वो चिप्ला बांटा .

किरमालों सी रेघ लगी
अग्ने बिच पिछने सब हरी
छोड़ घार सब हरी का
हरु हरु च ऐ चिप्लाण
कै घरु नीच ऐ चिप्लाण
चिप चिप्लेली चिप्लाण

वो चिप्ला बांटा
खुटो रौड़ी ठुरर र र रर र र र
टक्कों की घोडी
मी चट चडों सुरर र र र र र र र
वो चिप्ला बांटा .

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी तेरहा बरस गैनी
आज बाणयूँ चा मी ब्योला

तेरहा बरस बीत गैनी
तेरहा चौमासा गैनी
आज हुन्याँच मेरु लग्न
आज का दिन पैनी चा मिल सैर
आज ब्योन्चा मी ब्योला

धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो
ढोल दामू बजवा रै दगाड्यों माशों बजा लावा रै
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो

इन जानी की ब्याल की ई बात चा
कंन दिन राती गुजरी गैनी
वो ब्योली मेरी दोई नुनो की बोई चा
म्यार नुना नूनी थै भी नचवा रै
आज का दिन पैनी चा मिल सैर
आज ब्योन्चा मी ब्योला

धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो
ढोल दामू बजवा रै दगाड्यों माशों बजा लावा रै
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीJanuary 12ऐ मौला

ऐ मौला सब देखता है
ऐ मौला सब  तोलता है
किसी को कुछ ज्यादा
किसी को कुछ कम मिलता है
ऐ मौला रहम मौला रहम
कर दे उन नूर आँखों से करम
ऐ मौला सब देखता है
ऐ मौला सब  तोलता है ...........

किसी को सब मिलता इस पल में
कोई लुट जाता है इस पल में
वो पल पल हिसाब रखता है
फलक पर वो साफ  दिखता है
ऐ मौला रहम मौला रहम
कर दे उन नूर आँखों से करम
ऐ मौला सब देखता है
ऐ मौला सब  तोलता है ...........

कुछा नहीं उससे छुपा है 
पानी वो झम झम का जैसे
निर्मल शीतल मीठा वो जल है
कल कल करे कल्वर चंचल
सब कुछ यंह पर बिछा है 
ऐ मौला रहम मौला रहम
कर दे उन नूर आँखों से करम
ऐ मौला सब देखता है
ऐ मौला सब  तोलता है ...........

ऐ मौला सब देखता है
ऐ मौला सब  तोलता है
किसी को कुछ ज्यादा
किसी को कुछ कम मिलता है
ऐ मौला रहम मौला रहम
कर दे उन नूर आँखों से करम
ऐ मौला सब देखता है
ऐ मौला सब  तोलता है ...........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीJanuary 9बोल दे रै अब

बिंग दे रे बिंग दे रै
भुल्हा पाड़ी बोली तू पाड़ी बोली

कुछा ना कुछा तुड़ेकी
भुल्हा बोलदे रे बोलदे रै पाड़ी बोली

बिंग दे रे बिंग दे रै
भुल्हा पाड़ी बोली तू पाड़ी बोली

भाषा नी बाणी ना जमी ऐ डाली सी
तो भी भी छोडीगै इथे हेरदी ब्वारी सी

कुछा ना कुछा तुड़ेकी
भुल्हा बोलदे रे बोलदे रै पाड़ी बोली

पीड़ा हेरेदी जिबै पर दो बोल पेरदी मीठी गोली सी वो
घोली वा जली इनी बहाणे तिथै पहाडा की खुद आली

बिंग दे रे बिंग दे रै
भुल्हा पाड़ी बोली तू पाड़ी बोली

जख भी दिखे मैत ही अब ससोरस सा दिखे
गढ़ देश भैर भतेक खुश भितने निराशा दिखे

कुछा ना कुछा तुड़ेकी
भुल्हा बोलदे रे बोलदे रै पाड़ी बोली

बिंग दे रे बिंग दे रै
भुल्हा पाड़ी बोली तू पाड़ी बोली

एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी मै पहाड़ी हूँ

जब भी मै मुहं खोलों
गड़ देश तेरी बात मै बोलों
जब भी मै मुहं खोलों

इन मुक्त फिजाओं में
तेरे साथ हे देवभूमी बस मै डोलों
जब भी मै मुहं खोलों

पांच देबता मेरे पांच प्रयाग हैं मेरे
मै भी पांच तत्वों से बना हूँ
जब भी मै मुहं खोलों

मै पहाड़ी हूँ टूटकर भी
मै आपने निशान ना छोड़ों
जब भी मै मुहं खोलों

देशप्रेम मेरा मात प्रेम से बढकर
आपनी देशभूमी पर शत शत शीश चडाऊँ
जब भी मै मुहं खोलों

भोली भाली है फितरत मेरी
सीधा साधा मेरा चाल चलन
जब भी मै मुहं खोलों

अखंड रहे मेरी भूमी अखंड रहे ये आसमान
सदा रहे दिल में तिरंगे का मान
जब भी मै मुहं खोलों

साथ रहे अखंड मेरा उत्तराखंड
और मेरा ये पहाड़ हाँ मै पहाड़ी हूँ
जब भी मै मुहं खोलों

जब भी मै मुहं खोलों
गड़ देश तेरी बात मै बोलों
जब भी मै मुहं खोलों

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी20 hours agoभगमा स्वाद नीच

म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं
कैल पक्काण झुंगोरा की खीर
मीथै णी आंदी गढ़ बोली बिगंण
गढ़ बोली मील क्या ख़ाक बोलाण
म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं ...........

रैयुंच मी बस परदेश मा
जन्म च्यूं बस ऐ गड़ देश मा
गाथा की दाल वो फणु का रसा
दूर दूर मै से वो दोईया रंयाँ
म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं ...........

अरसा का टुकड़ा
कैगे मी थै टुकड़ा तिपड़ा मिले
ब्योहा व्हाई गुलगुला सी
गढ़ देश से मी गुल वहाई
म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं ...........

कफली कू सालना
माडू (चुना) की रोटी
जुनी मेरी केले तू रोणी
खुसका सी खुस गयुं अब
म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं ...........

म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं
कैल पक्काण झुंगोरा की खीर
मीथै णी आंदी गढ़ बोली बिगंण
गढ़ बोली मील क्या ख़ाक बोलाण
म्यारा भगमा
बस खीचड़ो च लिख्युं ...........

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानीTuesdayकंण भाणु मिलगे

रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै
दिन कंन भी कटे जलो
ब्रांडी चम्चु ऐ तांसुं राता घूले
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

कंन भाणु बाणुचा
चम्चु चम्चु कैकी तणुचा
ब्रांडी बोतल जब खुले
कुछ नी बचे दीदा कुछ नी बचे
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

ह्युंद अब येडो चा
दारू का नाश चडायूँ चा
गर गर गर गरठा जडू कू
गढ़ भैणी गर गर दारू की बथा
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

कंण भाणु मिलगे
अब रात दिन भूलीगै
मस्त च मस्त राम अब
अब कू ह्युंद अब कू हिवाळ
बस अब घुटी ही घुटी
वहैगे कम कजा की छुट्टी
रजै रजै मीथै उबै
रात दिन खटली तुडै ................

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी तेरहा बरस गैनी
आज बाणयूँ चा मी ब्योला

तेरहा बरस बीत गैनी
तेरहा चौमासा गैनी
आज हुन्याँच मेरु लग्न
आज का दिन पैनी चा मिल सैर
आज ब्योन्चा मी ब्योला

धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो
ढोल दामू बजवा रै दगाड्यों माशों बजा लावा रै
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो

इन जानी की ब्याल की ई बात चा
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वो ब्योली मेरी दोई नुनो की बोई चा
म्यार नुना नूनी थै भी नचवा रै
आज का दिन पैनी चा मिल सैर
आज ब्योन्चा मी ब्योला

धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो
ढोल दामू बजवा रै दगाड्यों माशों बजा लावा रै
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो दगाड्यों
धिन्ग्तालो धिन्ग्तालो

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बालकृष्ण डी ध्यानी21 hours agoचल ...............

चल दीदा
चल हिंटोला
दोई घड़ी चली चालोंला
थोड़ा बन्चोंला
थोडी छुंई लागोंला
चल रै दीदा चल

बीती बिसरी छुयीं
फिर लागोंला .
पुराण दिनों मा
फिर खोईं जोंला
चल रै दीदा चल

क्ख्क नीच खैर
क्ख्क नीच बैर
चल चलीकी सोंचोंला
एक नयै बाटों खोंजोंला
चल रै दीदा चल

छुटी च सब उखी
माटू भी त्यारु वखी
देर ना कैर बेर ना कैर
आली वख भी सबैर
चल रै दीदा चल

चल दीदा
चल हिंटोला
दोई घड़ी चली चालोंला
थोड़ा बन्चोंला
थोडी छुंई लागोंला
चल रै दीदा चल

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