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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
देख लेंगे

कैसा देश है तेरा
कैसा देह है वो मेरा

देख रहा बस चुपचाप
दो दिन के हो-हल्ले के बाद

लो कर लो घपलों की
हर एक दिन नई शुरवात

एक थमी भी नही थी
दूजे की हो गई बरसात

कितना लुटा तूने
कितना और लुटेंगे आप

कैसा पेट है आप का
खा खा कर भरता नहीं जनाब

हरे नोटों की हरयाली
बनाली तूने बगिया न्यारी

दफ्तर हो या घर
तू हर वक्त नोटों का अफसर

दीमक की तरह चिपका ऐसा
पैवीकौल का जोड़ा हो जैसे

दीवार अम्बोजा से बनवाया
नोटों का ही सीमेंट तूने लगवाया

देख लेंगे आप को हम ऐसे
ख़बरों में यूँ ही दिन रात जैसे

स्विस बैंक में सो रहे हैं हम
हमारे गढ़े मेहनत के वो पैंसे

सो सब सो चुके है
अपनी अपनी हिस्से की वो ले चुके हैं

लो कर लो घपलों की
हर एक दिन नई शुरवात

एक थमी भी नही थी
दूजे की हो गई बरसात

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
सुप्नीयु टूटी

बांटों मा देखी छे तू
या फिर सुप्नीयु मा भेंटी छे

बोल मी थै बोल गेल्या
ती थै कख दिखे छे

ऐ मेरु प्रीती कु ...प्रीती कु उमाल
क्या व्हैगै ईं ऐ माया,माया मा मेरु हाल

गदनीयों का ऐ छाला
गदनीयों का पल छाला

दिखे तू दिखे भगी
बोगी जाणी ...जणी गंगा की धारा

बांटों मा देखी छे तू
या फिर सुप्नीयु मा भेंटी छे

बोल मी थै बोल गेल्या
ती थै कख दिखे छे

ऐ मेरु प्रीती कु ...प्रीती कु उमाल
क्या व्हैगै ईं ऐ माया,माया मा मेरु हाल

ईखरी माया मेरी यकुली ही रहई
झम ऐकी की आंखोंयूँ मा यूँ तू कख लुकी ग्याई

बुरंस अबै खिली अबै मौली ग्याई
मेरी नींदी को वो सुप्नीयु टूटी ग्याई

बांटों मा देखी छे तू
या फिर सुप्नीयु मा भेंटी छे

बोल मी थै बोल गेल्या
ती थै कख दिखे छे

ऐ मेरु प्रीती कु ...प्रीती कु उमाल
क्या व्हैगै ईं ऐ माया,माया मा मेरु हाल

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी ॐ नमहा :शिवाया   

हर कंकड़ में शिव बसे मेरे
मेरे भोले भंडरी ..२
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

देवों के देव हैं बैठे कैलाश में मेरे
कैलाश बाबा त्रिशूल डमरू धारी
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

त्रिनेत्र के स्वामी मेरे
गंगा बहे चाँद सोहे अति शीतल
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

बाघ खाल ओढे तन पर
मशान की राख सोहे कपाल पर
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

गले में सर्पों की माल
भांग पीये मेरा प्रभु मतवाल
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

बेल पत्र से खुश हो जाते 
पिंडी दूध जल जो भी चड़ाता
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

महा शिवरात्री की बेला आयी
उपवास रखो  तुम मेरे भाई
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

शिव करेंगे तेर काज
हरेंगे  तेरे दुःख मेरे प्रभु आज
ॐ नमहा :शिवाया   ....४

हर कंकड़ में शिव बसे मेरे
मेरे भोले भंडरी ..२
ॐ नमहा :शिवाया   ....४


एक उत्तराखंडी

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राती णी

राती णी कया कया सुप्निया देखैनी
रंग भोरी की सौ जालू बीछेणी
आंखी खोली त स्पन टूटी
रै गै ग़म का काला झालो
रती णी कया ...........

औ .....( हम त चैदा बिसरी भी जेंया
वो कथा किले दोउरा णी) \- २
जीयु रै रै कि खुद दिलाणू
रती णी कया ...........
 
औ....(जिकोडी मा जिकोडी कि पीड़ा छुपै की
चला जख भग्या ले जाणू) \- २
दुनिया परैई  लोक परैई 
रती णी कया ...........

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हिंदी गाणा बोल छंण .. रात ने क्या क्या ख्वाब दिखाये, रंग भरे सौ जाल बिछाये
चित्रपट : एक गाँव की कहानी
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हिन्दी गीता कु ये च गढ़वाली बोळ संस्करण तुम थै कंण लग जी हे भोले शंकरा

हे भोले शंकरा .२
पसंद तेथै बेला की
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा ......शंकरा
हे भोले शंकरा ......महादेवा
हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा


गाला मा रुद्राक्ष का माळ , लगेले भस्म कपाळा – २
गाला मा रुद्राक्ष का माळ , लगेले भस्म कपाळा – २
लगेले भस्म कपाळा – २
पसंद तेथै बेला की
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा ......शंकरा
हे भोले शंकरा ......महादेवा
हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा .२
पसंद तेथै बेला की ..२
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा


त्रिशूल डमरू हाथ, संग नाच णी  पार्वती .... हॊ – २
त्रिशूल डमरू हाथ, संग नाच णी पार्वती – २
पसंद तेथै बेला की..२ 
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा ......शंकरा
हे भोले शंकरा ......महादेवा
हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा .२
पसंद तेथै बेला की ..२
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा


भॊळनाथा आ यों  मी तेरा दारा ,कख णी दिखैनु पुजारी .... हॊ – २
भॊळनाथा आ यों  मी तेरा दारा ,कख णी दिखैनु पुजारी – 2
पसंद तेथै बेला की..२ 
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा ......शंकरा
हे भोले शंकरा ......महादेवा
हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा .२
पसंद तेथै बेला की ..२
बेला कू पत्ती की
हे भोले शंकरा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एक मराठी भजन है जो भगवान शिव पर लिखा गया है और जब भक्त इसे गाते हैं शिव भक्ती में लींन हो जाते हैं आप लोगों को इस से अवगत करने हेतु थोड़ा सा गढवाली बोल दिये हैं
आप को कैसा लगा हर हर महदेव

उसके मराठी बोल ऐसे हैं

हे भॊळ्या शंकरा – 2
आवड तुला बेलाची – 2
बेलाच्या पानाची
हे भॊळ्या शंकरा .... शंकरा
हे भॊळ्या शंकरा ..... महादेवा
हे भॊळ्या शंकरा ..... हे भॊळ्या शंकरा
बेलाच्या पानाची
हे भॊळ्या शंकरा – 2
आवड तुला बेलाची – 2
बेलाच्या पानाची
हे भॊळ्या शंकरा1Photo: हे भोले शंकरा हे भोले शंकरा .२ पसंद तेथै बेला की बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा ......शंकरा हे भोले शंकरा ......महादेवा हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा गाला मा रुद्राक्ष का माळ , लगेले भस्म कपाळा – २ गाला मा रुद्राक्ष का माळ , लगेले भस्म कपाळा – २ लगेले भस्म कपाळा – २ पसंद तेथै बेला की बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा ......शंकरा हे भोले शंकरा ......महादेवा हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा .२ पसंद तेथै बेला की ..२ बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा त्रिशूल डमरू हाथ, संग नाच णी  पार्वती .... हॊ – २ त्रिशूल डमरू हाथ, संग नाच णी पार्वती – २ पसंद तेथै बेला की..२ बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा ......शंकरा हे भोले शंकरा ......महादेवा हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा .२ पसंद तेथै बेला की ..२ बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा भॊळनाथा आ यों  मी तेरा दारा ,कख णी दिखैनु पुजारी .... हॊ – २ भॊळनाथा आ यों  मी तेरा दारा ,कख णी दिखैनु पुजारी – 2 पसंद तेथै बेला की..२ बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा ......शंकरा हे भोले शंकरा ......महादेवा हे भोले शंकरा ......हे भोले शंकरा बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा .२ पसंद तेथै बेला की ..२ बेला कू पत्ती की हे भोले शंकरा एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित एक मराठी भजन है जो भगवान शिव पर लिखा गया है और जब भक्त इसे गाते हैं शिव भक्ती में लींन हो जाते हैं आप लोगों को इस से अवगत करने हेतु थोड़ा सा गढवाली बोल दिये हैं आप को कैसा लगा हर हर महदेव उसके मराठी बोल ऐसे हैं हे भॊळ्या शंकरा – 2 आवड तुला बेलाची – 2 बेलाच्या पानाची हे भॊळ्या शंकरा .... शंकरा हे भॊळ्या शंकरा ..... महादेवा हे भॊळ्या शंकरा ..... हे भॊळ्या शंकरा बेलाच्या पानाची हे भॊळ्या शंकरा – 2 आवड तुला बेलाची – 2 बेलाच्या पानाची हे भॊळ्या शंकरा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जीयु मा ते थै बिंठे की

जीयु मा ते थै बिंठे की , कैर लोंली ईं बंद आंखी
पूजा केंरुली तेरी ,बण की रूंली तेरी

मी ही मी हेरू जिया और्री णा देखी क्वी
एक बेल भी ऐ सोची णा कै विधि मिलाप होंदी
सबु मा तै थै ब्चै की ,कैर लोंली ईं बंद आंखी
पूजा केंरुली तेरी..............

णा क्वी अडंगा जग कू णा क्वी रखण णा दिबार
क्वी नी जांदू दोई मायादारों जीयु भोरिक कैले प्रीत
खुठी मा तेरी पोडे की ,कैर लोंली ईं बंद आंखी
पूजा केंरुली तेरी..............

तेरु ही मुख देखी की जिया राती मी सींण कू जेंदू 
फजल कू जबै आंखी बिजें दी , ते थै ही समण पेंदू
तै थै मीठी मारीकी,कैर लोंली ईं बंद आंखी
पूजा केंरुली तेरी..............
 

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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हिंदी गाणा बोल छंण.........दिल में तुझे बिठाके, कर लूँगी मैं बंद आँखें
चित्रपट :- फकीरा
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करणPhoto: जीयु मा ते थै बिंठे की जीयु मा ते थै बिंठे की , कैर लोंली ईं बंद आंखी पूजा केंरुली तेरी ,बण की रूंली तेरी मी ही मी हेरू जिया और्री णा देखी क्वी एक बेल भी ऐ सोची णा कै विधि मिलाप होंदी सबु मा तै थै ब्चै की ,कैर लोंली ईं बंद आंखी पूजा केंरुली तेरी.............. णा क्वी अडंगा जग कू णा क्वी रखण णा दिबार क्वी नी जांदू दोई मायादारों जीयु भोरिक कैले प्रीत खुठी मा तेरी पोडे की ,कैर लोंली ईं बंद आंखी पूजा केंरुली तेरी.............. तेरु ही मुख देखी की जिया राती मी सींण कू जेंदू फजल कू जबै आंखी बिजें दी , ते थै ही समण पेंदू तै थै मीठी मारीकी,कैर लोंली ईं बंद आंखी पूजा केंरुली तेरी.............. एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित हिंदी गाणा बोल छंण.........दिल में तुझे बिठाके, कर लूँगी मैं बंद आँखें चित्रपट :- फकीरा गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चूड़ी नीच

(चूड़ी नीच ऐ मेरु जीयू च
देखा देखा टूटी ना)-२ चूड़ी नीच ऐ मेरु ....................

नीलू पिंगली . रंग बिरंगी.माया की च भेंट
ना ना ना ना इनी ना , मठु मठु, छुप छुपैकी डाला इन मा हाथ
कांच च कच्चो , लेकी सच्चु होंदो ऐ से श्रृंगार
टक्का ना सोनो ना ,हीरा ना ,मोती ना कीमत च ईं की प्रीत
फूल से भी नाजुक छे ,देखा देखा देखा देखा टूटी ना
चूड़ी नीच ऐ मेरु ....................

मेरु माया च, चूड़ी जणी, इंका और्री ना छोर
यख ना,वख ना,देखा कबै, टूटी ना, सोंसारा की ऐ गेड
ईंकी खंन खंन, जिकोड़ी के धक धक , च मेरु संगीत
ऐका जरा , सोचा जरा ,गीत ऐ मायो भरी
वो मेरु जिकोड़ी गेल्या
क्वी साणी ना , णी क्वी तेरु जवाब ,देखा देखा देखा देखा टूटी ना
चूड़ी नीच ऐ मेरु ....................

तेरु माया , तेरु प्रेमांधता , च मेरु पड़ाव
घेरनु मीथै ,बयाँ तेरु , बांधेणु ते थै, माया मेरी , जिकोड़ी मेरु .तेरु जिकोड़ी
क्वी छे तू ,मेरु छे तू ,ऐ मेर गेल्या
दुःख मिली ,सुख मिली ,कख भी रै ,कंन भी रै , दुरवला ना हम
फिर भी ऐ गेल्या देखा देखा देखा देखा टूटी ना
चूड़ी नीच ऐ मेरु ....................


एक उत्तराखंडी

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हिंदी गाणा बोल छंण.........चूड़ी नही ऐ मेरा दिल है ...
चित्रपट :- गैम्बलर
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करणPhoto: चूड़ी नीच (चूड़ी नीच ऐ मेरु जीयू च देखा देखा टूटी ना)-२ चूड़ी नीच ऐ मेरु .................... नीलू पिंगली . रंग बिरंगी.माया की च भेंट ना ना ना ना इनी ना , मठु मठु, छुप छुपैकी डाला इन मा हाथ कांच च कच्चो , लेकी सच्चु होंदो ऐ से श्रृंगार टक्का ना सोनो ना ,हीरा ना ,मोती ना कीमत च ईं की प्रीत फूल से भी नाजुक छे ,देखा देखा देखा देखा टूटी ना चूड़ी नीच ऐ मेरु .................... मेरु माया च, चूड़ी जणी, इंका और्री ना छोर यख ना,वख ना,देखा कबै, टूटी ना, सोंसारा की ऐ गेड ईंकी खंन खंन, जिकोड़ी के धक धक , च मेरु संगीत ऐका जरा , सोचा जरा ,गीत ऐ मायो भरी वो मेरु जिकोड़ी गेल्या क्वी साणी ना , णी क्वी तेरु जवाब ,देखा देखा देखा देखा टूटी ना चूड़ी नीच ऐ मेरु .................... तेरु माया , तेरु प्रेमांधता , च मेरु पड़ाव घेरनु मीथै ,बयाँ तेरु , बांधेणु ते थै, माया मेरी , जिकोड़ी मेरु .तेरु जिकोड़ी क्वी छे तू ,मेरु छे तू ,ऐ मेर गेल्या दुःख मिली ,सुख मिली ,कख भी रै ,कंन भी रै , दुरवला ना हम फिर भी ऐ गेल्या देखा देखा देखा देखा टूटी ना चूड़ी नीच ऐ मेरु .................... एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित हिंदी गाणा बोल छंण.........चूड़ी नही ऐ मेरा दिल है ... चित्रपट :- गैम्बलर गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

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From - Bal Krishan dhyani

ऐ ब्योखोंण

ऐ ब्योखोंण सुखैणी, मी धुंद कै गै
मीथै गेडा क्वी खिंच्दु , तेर और्री लेकी जै

दूर रहन्दी छे तू ,मेर पास ओंदी णी
ओंठा मा तेरु , कबै तिस ओंदी णी
ईण लगनु , जनी की तू . हैंसी की जेर क्वी पी जाणी छे
ऐ ब्योखोंण....................

छोंई जबै मी कैरूं, मी थै रोक दें दी किले तू
तेर मीठी नजरी मी थै टोक दें दी किले तू
तेर हाया . तेर शरम तेर सौं मेर ओंठ सीं के गै
ऐ ब्योखोंण....................

एक रुशे ली, भाग्य जणी क्वी
शांत ईणी तू, चित्र जणी क्वी
तेर नजर बाणी की गीची , लेकी तेरु रैबार दे की गै
ऐ ब्योखोंण....................

एक उत्तराखंडी

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हिंदी गाणा बोल छंण.........ये शाम मस्तानी, मदहोश किये जाए
चित्रपट: कटी पतंग (१९७०)
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करणPhoto: ऐ ब्योखोंण ऐ ब्योखोंण सुखैणी, मी धुंद कै गै मीथै गेडा क्वी खिंच्दु , तेर और्री लेकी जै दूर रहन्दी छे तू ,मेर पास ओंदी णी ओंठा मा तेरु , कबै तिस ओंदी णी ईण लगनु , जनी की तू . हैंसी की जेर क्वी पी जाणी छे ऐ ब्योखोंण.................... छोंई जबै मी कैरूं, मी थै रोक दें दी किले तू तेर मीठी नजरी मी थै टोक दें दी किले तू तेर हाया . तेर शरम तेर सौं मेर ओंठ सीं के गै ऐ ब्योखोंण.................... एक रुशे ली, भाग्य जणी क्वी शांत ईणी तू, चित्र जणी क्वी तेर नजर बाणी की गीची , लेकी तेरु रैबार दे की गै ऐ ब्योखोंण.................... एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित हिंदी गाणा बोल छंण.........ये शाम मस्तानी, मदहोश किये जाए चित्रपट: कटी पतंग (१९७०) गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

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From - Bal Krishna Dhyani

ऐ  लालो रंग

ऐ  लालो रंग कब मीथै तू छोडीलू
मेरु दुःख कबी तक ,मेरु जीयु दुखीलू

केंकी का भी लीं नौ त
ऐ याद तू ही तू
ऐ जो भांड़ा सराब कू
बाणीगे किले  लहू
ऐ  लालो रंग .......................

पीणा की सौं खिले दी
अब मिल पीण कंण
ऐ बी णा सोच तिल गेल्या
जियुल अब कंण
ऐ  लालो रंग ....................

चली जोंलो कख छोडीकी
मी तेरु ऐ सहर
णा त यख अम्रत  मिलण
पीणा कू णा जैर
  ऐ  लालो रंग ...............................

एक उत्तराखंडी

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हिंदी गाणा बोल छंण.........ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा
चित्रपट: प्रेम नगर
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करणPhoto: ऐ  लालो रंग ऐ  लालो रंग कब मीथै तू छोडीलू मेरु दुःख कबी तक ,मेरु जीयु दुखीलू केंकी का भी लीं नौ त ऐ याद तू ही तू ऐ जो भांड़ा सराब कू बाणीगे किले  लहू ऐ  लालो रंग ....................... पीणा की सौं खिले दी अब मिल पीण कंण ऐ बी णा सोच तिल गेल्या जियुल अब कंण ऐ  लालो रंग .................... चली जोंलो कख छोडीकी मी तेरु ऐ सहर णा त यख अम्रत  मिलण पीणा कू णा जैर ऐ  लालो रंग ............................... एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित हिंदी गाणा बोल छंण.........ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा चित्रपट: प्रेम नगर गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी मंद चला जा रहा है वो

कुंठित है जड़ ,
निष्प्रभ हो रहा मन
मूर्ख क्यों हो रहा उदास है

कमज़ोर है मन
दुर्बल तन के साथ
निर्बल बल लेके आज

अल्पशक्ति उसकी क्षीण
सोच बनी बिलकुल संकीर्ण
नीचा क्यों हो रही वो आवाज

तल के पास बैठा अकेला
छोटा और धीमा वो साँस बसेरा
बिना चमक तारा दूर देखो आज

कमसमझ का साथ था
साँड़ सा कुंद वो उसका काज था
कर्कश असभ्य वो ताज था

आलसी सुस्त चलन समीप
निष्क्रिय निठला थी वो डगर
नरम एकांतप्रिय एकांत की बात थी

संकुचित विचारधारा सहारा
भद्र सुशील कुलीन सब किनार
सीसे के सामान्य चला वो मंद

कुंठित है जड़ ,
निष्प्रभ हो रहा मन
मूर्ख क्यों हो रहा उदास है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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मंद चला जा रहा है वो कुंठित है जड़ , निष्प्रभ हो रहा मन मूर्ख क्यों हो रहा उदास है कमज़ोर है मन दुर्बल तन के साथ निर्बल बल लेके आज अल्पशक्ति उसकी क्षीण सोच बनी बिलकुल संकीर्ण नीचा क्यों हो रही वो आवाज तल के पास बैठा अकेला छोटा और धीमा वो साँस बसेरा बिना चमक तारा दूर देखो आज कमसमझ का साथ था साँड़ सा कुंद वो उसका काज था कर्कश असभ्य वो ताज था आलसी सुस्त चलन समीप निष्क्रिय निठला थी वो डगर नरम एकांतप्रिय एकांत की बात थी संकुचित विचारधारा सहारा भद्र सुशील कुलीन सब किनार सीसे के सामान्य चला वो मंद कुंठित है जड़ , निष्प्रभ हो रहा मन मूर्ख क्यों हो रहा उदास है एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित