• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ जब बाग़ में

जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२
हमको को लगने लगा ,आप हमसे मिलने लगे
काटों सी वो दूरियाँ जो अब तक दिल में चुभी
आप देखते ही वो वो गुन-गुनाने लगे
जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२

फागुन में झूले पड़े देखा जब बागों में
याद आयी मुझको तुम उन ही राहों में
हाथों में मेरे होली गुलाल भरा पडा था
ना तुम आयी ना कोई खबर आयी तेरी
जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२

याद मैंने किया तुझको उन यादों में
साथ तुम भी आये थे साथ मेरे उन ख्वाबों में
आचनक मेरी आंख यूँ याद टूट गयी यादों में
ना तुम साथ थे ना ख्वाब अब साथ है
जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२

रुक्सते गम में यूँ दिले गम  जुदा हुये
मैखाने में अब तू सुबह जवान हुई
पहले डर था तेरा डर था इन रातों का
अब फ़िक्र नही कंहा सुबह कंहा रात गई
जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२

आपको मिल गया सहारा उस शराब का
हमारा गुजार भी होता अब बस उस बात से
जो रातें गुजारी उस चाँद सितारे साथ थे
तब भी तुम नही थे अब भी वो ही  साथ साथ हैं
जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२

जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२
हमको को लगने लगा ,आप हमसे मिलने लगे
काटों सी वो दूरियाँ जो अब तक दिल में चुभी
आप देखते ही वो वो गुन-गुनाने लगे
जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Ashutosh Dangwal and 48 others. Photo: जब बाग़ में जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ हमको को लगने लगा ,आप हमसे मिलने लगे काटों सी वो दूरियाँ जो अब तक दिल में चुभी आप देखते ही वो वो गुन-गुनाने लगे जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ फागुन में झूले पड़े देखा जब बागों में याद आयी मुझको तुम उन ही राहों में हाथों में मेरे होली गुलाल भरा पडा था ना तुम आयी ना कोई खबर आयी तेरी जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ याद मैंने किया तुझको उन यादों में साथ तुम भी आये थे साथ मेरे उन ख्वाबों में आचनक मेरी आंख यूँ याद टूट गयी यादों में ना तुम साथ थे ना ख्वाब अब साथ है जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ रुक्सते गम में यूँ दिले गम  जुदा हुये मैखाने में अब तू सुबह जवान हुई पहले डर था तेरा डर था इन रातों का अब फ़िक्र नही कंहा सुबह कंहा रात गई जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ आपको मिल गया सहारा उस शराब का हमारा गुजार भी होता अब बस उस बात से जो रातें गुजारी उस चाँद सितारे साथ थे तब भी तुम नही थे अब भी वो ही  साथ साथ हैं जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ हमको को लगने लगा ,आप हमसे मिलने लगे काटों सी वो दूरियाँ जो अब तक दिल में चुभी आप देखते ही वो वो गुन-गुनाने लगे जब बाग़ में फुल खिलने लगे ..२ एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ तो यंही कंही है

तो यंही कंही है
आँखों में नमी है
तो यंही कंही है

कली में खिली है
फूलों में बसी है
तो यंही कंही है

खोयी है ख्वाबों में
जागी तू रातों में
तो यंही कंही है

पलकों में थमी वो
दिये संग जली है
तो यंही कंही है

पल में बसी है
नब्ज में वो चली है
तो यंही कंही है

तो यंही कंही है
आँखों में नमी है
तो यंही कंही है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Raghubir Negi and 46 others. Photo: तो यंही कंही है तो यंही कंही है आँखों में नमी है तो यंही कंही है कली में खिली है फूलों में बसी है तो यंही कंही है खोयी है ख्वाबों में जागी तू रातों में तो यंही कंही है पलकों में थमी वो दिये संग जली है तो यंही कंही है पल में बसी है नब्ज में वो चली है तो यंही कंही है तो यंही कंही है आँखों में नमी है तो यंही कंही है एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी भंग्लो बौड़ा की होली

रंगा की होली खेली तिल
पाणी पिच्कैरी भोरी तिल
मुखडी लाल  देखी तिल
जीजा साली सीयुं खैल तिल

देखी त देखी तिल सबै का सब
कया भंग्लो बौड़ा की होली देखी तिल
त दिखी लो भंग्लो बौड़ा की उत्तराखंड होली
भंग्लो बौड़ा णी भी खेली च होली

रात उठी बौड़ाअ जंगलात  गै
भांग का पात्त तोउडीके घार ले
तब कया च जी बौड़ा फजल बौडी थै जगे
तब बौडी ल भांग पकोड़ा पके

बौड़ा खांद बैठी बैठी ल छकै छकै की खै
खै की खैकी बौड़ा बौडी बुलणु
  ऐ छोरी भंग्लो बौड़ा एक पकोड़ा और्री दे
होली छ होली भंग्लो बौड़ा की छ होली

रिटी यख उन्द तल मथा
बौड़ा थे भंग्लो पड़गै रिंगा
छोरी भंग्लो बौड़ा एक पकोड़ा और्री दे
होली छ होली भंग्लो बौड़ा की छ होली

छोचा तू भी ऐ पकोड़ा दबा
भंग्लो बौड़ा थै पौडा गै नाश
सब थै  बौड़ा बोला बोलैकी  पकोड़ा खिले
बारी बारी बौडी बौड़ा बोले

छोरी भंग्लो बौड़ा एक पकोड़ा और्री दे
बौडी की दैण होगे दशा
भंगा का पकोड़ा पकै पकै  की
बौडी होली बेल कटे होली छ होली भंग्लो बौड़ा की छ होली

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

आपको और आपके समस्त परिवार को होली की हार्दिक शुभ कामनाये.भंग्लो बौड़ा की होली रंगा की होली खेली तिल पाणी पिच्कैरी भोरी तिल मुखडी लाल  देखी तिल जीजा साली सीयुं खैल तिल देखी त देखी तिल सबै का सब कया भंग्लो बौड़ा की होली देखी तिल त दिखी लो भंग्लो बौड़ा की उत्तराखंड होली भंग्लो बौड़ा णी भी खेली च होली रात उठी बौड़ाअ जंगलात  गै भांग का पात्त तोउडीके घार ले तब कया च जी बौड़ा फजल बौडी थै जगे तब बौडी ल भांग पकोड़ा पके बौड़ा खांद बैठी बैठी ल छकै छकै की खै खै की खैकी बौड़ा बौडी बुलणु ऐ छोरी भंग्लो बौड़ा एक पकोड़ा और्री दे होली छ होली भंग्लो बौड़ा की छ होली रिटी यख उन्द तल मथा बौड़ा थे भंग्लो पड़गै रिंगा छोरी भंग्लो बौड़ा एक पकोड़ा और्री दे होली छ होली भंग्लो बौड़ा की छ होली छोचा तू भी ऐ पकोड़ा दबा भंग्लो बौड़ा थै पौडा गै नाश सब थै  बौड़ा बोला बोलैकी  पकोड़ा खिले बारी बारी बौडी बौड़ा बोले छोरी भंग्लो बौड़ा एक पकोड़ा और्री दे बौडी की दैण होगे दशा भंगा का पकोड़ा पकै पकै  की बौडी होली बेल कटे होली छ होली भंग्लो बौड़ा की छ होली एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित आपको और आपके समस्त परिवार को होली की हार्दिक शुभ कामनाये.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी ये तो चलता है चलता रहेगा

मन ना खाली रहा है  कभी ना ही ये मन यूँ ही भरेगा
मिलन जुदाई का सिलसिला चलता है सदियों से चलता रहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

कभी तो आके कोई तो कहेगा रूठा हुआ है कभी तो मानेगा
सुख अब रोयेगा दुःख अब हंसेगा दूर खडा खडा वो अकेला हंसेगा 
ये तो चलता है चलता रहेगा

खुशी है रंगों की नये उमंगों की कंही कोई सपना पलेगा कंही तो टूटेगा
कोई पराया लगेगा अपना कोई अपना पराया होगा  गा
ये तो चलता है चलता रहे

समीप और दूरियों के बीच एक जंग छिड़ी तन्हाई कहनी लिखेंगी
दर्द उभरा है उस कोने से जो ठहरा है सदियों से सहार उस कंधे का उस कोर किनारे से बहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

पर्वत और समतल जमीन बीच मतभेद पनपेगा एक दीवार खींची जायेगी
दरारें पड़ेगी कुछ इस तरह ना पर्वत संभलेगा ना समतल जमीन सह पायेगी
ये तो चलता है चलता रहेगा
 
फूलों के मौसम में अब पतझड़ के फुल खिलेंगे ,रोना जीवन है समझा पर वो भी हसेंगे
देख ना अब हम को उन नजरों से पहले मरते थे हम तुम पे अब ना हम मरेंगे
ये तो चलता है चलता रहेगा
 
मन ना खाली रहा है  कभी ना ही ये मन यूँ ही भरेगा
मिलन जुदाई का सिलसिला चलता है सदियों से चलता रहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रा बंद छा गयी कुछ ऐसे
आँखें,आंसूं भी ना रुक पाये जाने से उनको
अपनों में ही आज पराये दिखे .....................

अंधेरों से अब मुलकात अब यूँ बढने लगी
गली और मौहल्ले में मेरी बात होने लगी
आच्छा था वो जब तक इश्क ना किया उसने
अपनों में दिख जाता था जो आज हुआ पराया
अपनों में ही आज पराये दिखे .....................

अपनों में ही आज पराये दिखे
सपनो में ही बस वो मुस्कुराते दिखे
टूटकर,रूठ कर वो भी अब जाने लगे
सवेरे के स्वर जब कानो में आने लगे
अपनों में ही आज पराये दिखे .....................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रभु आओ मेरे

प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा ..५

बैठी हूँ कब से ध्यान लगा अलख जगा
आजा वो अब तो मोरे बलम अलख जगा
प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा

आके मुझे अब तो रंगवा लगा
कान्हा मोहे अब तो गरवा लगा अलख जगा
प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा

रासलीला की लील फिर से रचा
जमुना के तट पर आज बंसी बजा अलख जगा
प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा

राधा रानी होली खेलन आयी अंगना अलख जगा
होली खेले नंदलाल मोहे संग अलख जगा
प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा

लाल लाल गुलाल मोहे गाल लगा
रंग भरी पिचकारी मोरे अंग उड़ा अलख जगा
प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा

सुध बुध खो जाऊं मै मै ना रह जाऊं अलख जगा
फागुन के मास मै ब्वाली हो जाऊं अलख जगा
प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा

प्रभु आओ मेरे अंगना अलख जगा ..५

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
वो देख

वो देख
वो चला अकेला कंहा
ना संगी ना कोई मेला
वो चला अलबेला

वो देख
दो दिन का वो खेला
ना तेरा था ना मेरा
चला जो जा रहा है समय का रेला

वो देख
मुस्कुरा रहा है वो
दुःख भूलकर वो
सुख की ओर चला जा रहा है

वो देख
झंझट झमेला पड़ा पीछे
दुनिया वो रूठी छोड़के
मोड़ मोड़कर चला वो आगे

वो देख
सब देख सब जाने
आफत अपने गले बांधे
निभा रहे है सुख दुख के धागे


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
Tuesday
ये तो चलता है चलता रहेगा

मन ना खाली रहा है कभी ना ही ये मन यूँ ही भरेगा
मिलन जुदाई का सिलसिला चलता है सदियों से चलता रहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

कभी तो आके कोई तो कहेगा रूठा हुआ है कभी तो मानेगा
सुख अब रोयेगा दुःख अब हंसेगा दूर खडा खडा वो अकेला हंसेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

खुशी है रंगों की नये उमंगों की कंही कोई सपना पलेगा कंही तो टूटेगा
कोई पराया लगेगा अपना कोई अपना पराया होगा गा
ये तो चलता है चलता रहे

समीप और दूरियों के बीच एक जंग छिड़ी तन्हाई कहनी लिखेंगी
दर्द उभरा है उस कोने से जो ठहरा है सदियों से सहार उस कंधे का उस कोर किनारे से बहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

पर्वत और समतल जमीन बीच मतभेद पनपेगा एक दीवार खींची जायेगी
दरारें पड़ेगी कुछ इस तरह ना पर्वत संभलेगा ना समतल जमीन सह पायेगी
ये तो चलता है चलता रहेगा

फूलों के मौसम में अब पतझड़ के फुल खिलेंगे ,रोना जीवन है समझा पर वो भी हसेंगे
देख ना अब हम को उन नजरों से पहले मरते थे हम तुम पे अब ना हम मरेंगे
ये तो चलता है चलता रहेगा

मन ना खाली रहा है कभी ना ही ये मन यूँ ही भरेगा
मिलन जुदाई का सिलसिला चलता है सदियों से चलता रहेगा
ये तो चलता है चलता रहेगा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
इस पल में

इस पल में सब खोये से लगे
अपने आप में सोये से लगे
विचारों में कंही कोई गुम
कोई यंहा खयालों में सुम

ऐ पल गंवाकर ऐसे ही
दूजे पल की फ़िक्र की पड़ी धुंद
जीवन चले कंहा किस ओर
कौन सी मंजील कौन सी डगर पर

हैरान हूँ परेशान हूँ अपने आप से
मै कुछ इस तरह लगा हूँ अपने आप में
अपने ही दीवारों के प्रश्नों में अटका हूँ
अपने ही घर में उत्तर से उसके उलझा हूँ

बैठ दो पल सुस्ता ले
दो प्रेम के अपनों से बतिया ले
फिर रैन मिले ना मिले इधर
इस पल में हंस ले तू उनको हंसा दे

इस पल में सब खोये से लगे
अपने आप में सोये से लगे
विचारों में कंही कोई गुम
कोई यंहा खयालों में सुम


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी समलौंण

दिखै कि ना तू किले दिखै तू
अपरों कि कथा लगै तू
रुप अनवर आणु तैम अपरू सी
अपरू किले लगे तू
दिखै कि ना तू किले दिखै तू .....

समलौंण...अ ..अ ..  हो अ हो अ बस जी समलौंण

ऐ बाटा ऐ घाटा 
छुचा तू भी छे ऐ माटा कू लाटू
बिगरेलु दिखेणु
अपरू पाड़ा माँ जमी पौद दिखे
लगे कि तू ना लगे तू 

समलौंण...अ ..अ ..  हो अ हो अ बस जी समलौंण

बिसरी गैना अपरी गैना
जो गै यख भ्तेक परती नी ऐना
कंन खाद पड़ी ऐ भूमी मा बल
फल लगे परै लोक मा
फल खै कि तू फल ना खिले तू 

समलौंण...अ ..अ ..  हो अ हो अ बस जी समलौंण

दिखै कि ना तू किले दिखै तू
अपरों कि कथा लगै तू
रुप अनवर आणु तैम अपरू सी
अपरू किले लगे तू
दिखै कि ना तू किले दिखै तू .....

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितसमलौंण दिखै कि ना तू किले दिखै तू अपरों कि कथा लगै तू रुप अनवर आणु तैम अपरू सी अपरू किले लगे तू दिखै कि ना तू किले दिखै तू ..... समलौंण...अ ..अ ..  हो अ हो अ बस जी समलौंण ऐ बाटा ऐ घाटा छुचा तू भी छे ऐ माटा कू लाटू बिगरेलु दिखेणु अपरू पाड़ा माँ जमी पौद दिखे लगे कि तू ना लगे तू समलौंण...अ ..अ ..  हो अ हो अ बस जी समलौंण बिसरी गैना अपरी गैना जो गै यख भ्तेक परती नी ऐना कंन खाद पड़ी ऐ भूमी मा बल फल लगे परै लोक मा फल खै कि तू फल ना खिले तू समलौंण...अ ..अ ..  हो अ हो अ बस जी समलौंण दिखै कि ना तू किले दिखै तू अपरों कि कथा लगै तू रुप अनवर आणु तैम अपरू सी अपरू किले लगे तू दिखै कि ना तू किले दिखै तू ..... एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित