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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
April 19
खोया इंसान

फिर दिल खोया सा
इंसान फिर सोया सा
दर्द है की लकीर खिंच रही है
अबला तड़प रही है

तंत्र भ्रष्ट जन त्रस्त
वासना की अग्न सर्वत्र
समाज खड़ा भिन्न
हर आत्म आज खिन्न

मूक है सब जन
उपवन बना ये जंगल
भेड़ीयों का राज है
इंसानीयत अब लाचार है

रोज किस्से अपने हिस्से
नेता ढीट सिपै बेशर्म
कुकर्म आत्यचार पीड़ित
पैंसे ही अब यंहा हँसते

फिर दिल खोया सा
इंसान फिर सोया सा
दर्द है की लकीर खिंच रही है
अबला तड़प रही है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथApril 18कंडली रे

कंडली रे तू कंडली कंडली
गढ़ देशा उत्तराखंड की कंडली
कंडली रे तू कंडली कंडली

जख भी जंद मी
तू में दगड  मिसे मिसै जांदी
कख कखक  तू मी थै तू अब याद आंदी
कंडली रे तू कंडली कंडली

डंडा रुलों की तू कंडली
गदनीयों छालों की तू कंडली
कंडली रे तू कंडली कंडली

बलपना बोई की मार
तेरु च मै मा ये कंडली  उपकार
लग्युं मी आज सीधु बाट
कंडली रे तू कंडली कंडली

झंपा पौडी झम झम झम
झनक लागे सरीरा  सर सर सर
कंडली रे तू कंडली कंडली
   
तेरु भुजी तेरु साग
मी यख कख कखक खोजी  ये कंडली
गरीबी मा तिल दे हमारू साथ
कंडली रे तू कंडली कंडली

कंडली रे तू कंडली कंडली
गढ़ देशा उत्तराखंड की कंडली
कंडली रे तू कंडली कंडली

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथApril 18तुम साथ मेरे

हम चलें थे
बस दो कदम साथ
लगा ऐसा  की
तुम चलोगे उम्रभर

छोड़कर चली
दूर ऐसे कंही दूर मुझसे
रहा ना पाया जुदा
एक पल भी तुझ से दूर
   
चली दीवानागी मेरी
शब्दों की मेरे कलम से
मेरे पन्नों पर कल्पना की
बन तुम उड़ना भरोगी 

रहेगी साथ मेरे सदा
बनकर कविता तुम  मेरी 
अकेलेपन तनहाई की
तुम सदा साथी मेरी

राहों खोया यादों में तेरे
होकर मै अपने से जुदा 
रंग भरों बेरंग रहकर मै
दुनिया का बहता करवां

हम चलें थे
बस दो कदम साथ
लगा ऐसा  की
तुम चलोगे उम्रभर

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित Photo: तुम साथ मेरे हम चलें थे बस दो कदम साथ लगा ऐसा  की तुम चलोगे उम्रभर छोड़कर चली दूर ऐसे कंही दूर मुझसे रहा ना पाया जुदा एक पल भी तुझ से दूर चली दीवानागी मेरी शब्दों की मेरे कलम से मेरे पन्नों पर कल्पना की बन तुम उड़ना भरोगी रहेगी साथ मेरे सदा बनकर कविता तुम  मेरी अकेलेपन तनहाई की तुम सदा साथी मेरी राहों खोया यादों में तेरे होकर मै अपने से जुदा रंग भरों बेरंग रहकर मै दुनिया का बहता करवां हम चलें थे बस दो कदम साथ लगा ऐसा  की तुम चलोगे उम्रभर एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी वो कंही नही है

आज है अभी है
वो फिर कभी नही
गुजर गया वो पल
वो कंही नही है

जो कुछ है अब है
कुछ नही वो कल है
सोच ही अब सब है
ना समझ ये जग है

फिरेगा फिर भी
करेगा वो अपना ही
फसा ये ऐसा फंसा है
बुझिल बस साँस है

मंद गति का मंथर
सर सर उपर निचे कर
वायु का वो चाप है
छुटी तो वो बेकार है   

आज है अभी है
वो फिर कभी नही
गुजर गया वो पल
वो कंही नही है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी पाड़ मेरु  अधमुख

आज मेरा पाडे मा
अधमुख जो हन्दू वो तैर जांदू
माया मा आपरूं भरै जांदू
आज भी मेरा पाडे मा........................

कूड़ा मेरा पाडे का
वो माटा का छिन
दारा वोंका अधमुख छिन
आज भी मेरा पाडे मा........................

समय काल बदली
हैलो हया की कुदगली लगदी
अधमुख मेर धरती नी छुटी
आज भी मेरा पाडे मा........................

बड़ा वंहयाँ छुटयां
सेवा सोली की मीठी गोली खांयां
मिठस मिठसही पसरती जा
आज भी मेरा पाडे मा........................

आज मेरा पाडे मा
अधमुख जो हन्दू वो तैर जांदू
माया मा आपरूं भरै जांदू
आज भी मेरा पाडे मा........................
 
एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीTuesdayकुछ ज्यादा कुछ कम

कुछ ज्यादा कुछ यंहा कम
सुख दुःख का होता है जब मिलन

बहते हैं बस ये एक दिल और दो नयन
सुख दुःख ज्यादा हो या कम

निर्मल रहेगा जब ये मन भीतर
तब ही निर्मल बनेगा ये तन बाहर

जल की तरंह जीवन बह जायेगा
कल कल सुख दुःख मुस्कुराएगा

ज्यादा और कम से क्या फर्क पड़ेगा
भगवा रंग का  चोला जब राम नाम जपेगा

सब तब तू भीतर ही उसे पायेगा
ना ही व्यर्थ ही तू बाहर फिर देखा जायेगा

शांती है मन की तन शांत ना कर
प्रभु के नाम पर ही जीवन तू अब बसर कर

उसके साथ ही अंत में मिल जान है
मिट्टी में ही रह मिट्टी से ही प्यार कर

कुछ ज्यादा कुछ यंहा कम
सुख दुःख का होता है जब मिलन

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी अपरा मा रंगमत

रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२
कैल सुणी कू सुणा लो अब
रंगमत मत हुन्याँ छन  रंगमत..२

मत मत मा मत मिल्याँ छन..२
यक्ला यक्ला दूर दूर खिल्यां छन
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२

मत मत दगडी बिरदया छन ...२
अपरा अपरा गत दगडी हरचा छन
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

बुरंस छे की वा छे चा प्योंली ...२
मौल्यार मा या बसंत मा झड़यां छन
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

घुघूती की घुरा जाणी दूर दूरा..२
कू ऐक्लो कू आलू परती की ऐ घार
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

उजड़ी छा की उजाड़ी की पली गै तू
गढ़ मेरा ऐ मेरा भैजी ऐ मेरा भुलाह   
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२
कैल सुणी कू सुणा लो अब
रंगमत मत हुन्याँ छन  रंगमत..२

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Mahi Mehta and 49 others.अपरा मा रंगमत रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२ कैल सुणी कू सुणा लो अब रंगमत मत हुन्याँ छन  रंगमत..२ मत मत मा मत मिल्याँ छन..२ यक्ला यक्ला दूर दूर खिल्यां छन रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२ मत मत दगडी बिरदया छन ...२ अपरा अपरा गत दगडी हरचा छन रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२ बुरंस छे की वा छे चा प्योंली ...२ मौल्यार मा या बसंत मा झड़यां छन रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२ घुघूती की घुरा जाणी दूर दूरा..२ कू ऐक्लो कू आलू परती की ऐ घार रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२ उजड़ी छा की उजाड़ी की पली गै तू गढ़ मेरा ऐ मेरा भैजी ऐ मेरा भुलाह रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२ रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२ कैल सुणी कू सुणा लो अब रंगमत मत हुन्याँ छन  रंगमत..२ एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित ·

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बालकृष्ण डी ध्यानी एक परेशान हूँ

हर पल
दिल ने कहा
जो सपने थे
मैंने बुने 

नग्मा मेरा
वो दर्द का
साथ मेरे वो
यूँ ही चला

वेदना थी
सुकन भी था
करुणा भरा
वो मेरा मन था

विपत्ति का दुख
व्यथा का घेरा
वो ही घूम रहा
मेरे संग पहरा

ना उदास हूँ
ना हैरान हूँ
परेशान भरी दुनिया में
मै भी एक परेशान हूँ

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी वो कंही नही है

आज है अभी है
वो फिर कभी नही
गुजर गया वो पल
वो कंही नही है

जो कुछ है अब है
कुछ नही वो कल है
सोच ही अब सब है
ना समझ ये जग है

फिरेगा फिर भी
करेगा वो अपना ही
फसा ये ऐसा फंसा है
बुझिल बस साँस है

मंद गति का मंथर
सर सर उपर निचे कर
वायु का वो चाप है
छुटी तो वो बेकार है   

आज है अभी है
वो फिर कभी नही
गुजर गया वो पल
वो कंही नही है

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बालकृष्ण डी ध्यानी
अपरा मा रंगमत

रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२
कैल सुणी कू सुणा लो अब
रंगमत मत हुन्याँ छन  रंगमत..२

मत मत मा मत मिल्याँ छन..२
यक्ला यक्ला दूर दूर खिल्यां छन
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२

मत मत दगडी बिरदया छन ...२
अपरा अपरा गत दगडी हरचा छन
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

बुरंस छे की वा छे चा प्योंली ...२
मौल्यार मा या बसंत मा झड़यां छन
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

घुघूती की घुरा जाणी दूर दूरा..२
कू ऐक्लो कू आलू परती की ऐ घार
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

उजड़ी छा की उजाड़ी की पली गै तू
गढ़ मेरा ऐ मेरा भैजी ऐ मेरा भुलाह   
रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत..२

रंगमत मत हुन्याँ छन रंगमत ..२
कैल सुणी कू सुणा लो अब
रंगमत मत हुन्याँ छन  रंगमत..२

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