• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी परती की ऐजा दीदा

ये जिकोड़ी गीत ल्गाणी
तै थै भ्ट्याणी तै बुलाणी
ऐ भी जाणू रै
किले फुंड जाणू रै

पाड़े की पीड़ा रै पाड़े की पीड़ा
तै बैगैर मेरु दीदा पीड़ा क्न कटेण
खैरी का खैर
कंन य्कुलू य्कुलू सरेण

ये जिकोड़ी माया ल्गाणी
तै थै भ्ट्याणी तै बुलाणी
ऐ भी जाणू रै
किले फुंड जाणू रै

बंजा पुंगडी दैन दीदा बंजा पुंगडी दैन
बच्या पुंगड दीदा हौल चलण कैन
दैन दैन देखील सबुण
इन पुंगड जिमैदरी निभै ल कैण

ये जिकोड़ी आंसू रुलाणी
तै थै भ्ट्याणी तै बुलाणी
ऐ भी जाणू रै
किले फुंड जाणू रै
 
एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Geeta Chandola and 49 others.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी खुद को देखना चाहता हूँ

फिर देखना चाहता हूँ मै
खुद को करीब से फिर एक बार
हाथों में दे दो तुम अपना हाथ
आखें चार कर लो फिर एक बार
फिर देखना चाहता हूँ मै..................

उन नजरों में उन सपनों में
उन अपनों में फिर एक बार
जब प्यार से देखा था तुमने पहली बार
वो प्रेम देखना चाहता हूँ  फिर एक बार
फिर देखना चाहता हूँ मै..................

वो अधीर प्रेम का सकून
वो तृष्णा भरी अधरों की प्यास
वो इंतजार वो मेरे लिये बेकरारी
वो तड़प देखना चाहता हूँ  फिर एक बार
फिर देखना चाहता हूँ मै..................

उस पल में मै फिर जीना चाहता हूँ
उस पल को फिर मै पाना चाहता हूँ
इस जन्म नही सात जन्म तक
मै बस सथा तुम्हरा चाहता हूँ  फिर एक बार
फिर देखना चाहता हूँ मै..................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Geeta Chandola and 48 others

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ

यूँ ही लगा है

यूँ ही लगा है ये मेला यंहा
निकले हुये है क्यों सब साथ को
यूँ ही लगा है ......................

अकेला मंजर चला था मगर
इस कोने से लेकर उस मजार तक
यूँ ही लगा है ......................

भीड़ भाड़ का था तेरा सफर
पालने और बस उस अर्थी के हाथ तक
यूँ ही लगा है ......................

छोड़कर जाना था अगर
क्यों आपनाया माया के सार को
यूँ ही लगा है ......................

देख कली खिली थी दो पल
पर फिर भी तू उलझा रहा जाल में
यूँ ही लगा है ......................

यूँ ही लगा है ये मेला यंहा
निकले हुये है क्यों सब साथ को
यूँ ही लगा है ......................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


From -

बालकृष्ण डी ध्यानी देखयाली ये

देखयाली ये सारी दुनिया मा
और्री इन बाटों घाटों मा ...२
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

घुंघराली बाल की लटुली
तै मुंड घासा की जीयु मा माया की बैठुली
देखयाली ये सारी दुनिया मा
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

ऐ रूपा की खानी ऐ गढ़ रूपा
तेरु जिकोडी कु धक धक इन छपेडू मा
देखयाली ये सारी दुनिया 
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

इन छपे की बल खक नी छपे बल
तस्बीर इन तेर मेर जीयु बसै बल
देखयाली ये सारी दुनिया मा
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Geeta Chandola and 47 others.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी यूँ ही लगा है

यूँ ही लगा है ये मेला यंहा
निकले हुये है क्यों सब साथ को
यूँ ही लगा है ......................

अकेला मंजर चला था मगर
इस कोने से लेकर उस मजार तक
यूँ ही लगा है ......................

भीड़ भाड़ का था तेरा सफर
पालने और बस उस अर्थी के हाथ तक
यूँ ही लगा है ......................

छोड़कर जाना था अगर
क्यों आपनाया  माया के सार को
यूँ ही लगा है ......................
 
देख कली खिली थी दो पल
पर फिर भी तू उलझा रहा जाल में
यूँ ही लगा है ......................

यूँ ही लगा है ये मेला यंहा
निकले हुये है क्यों सब साथ को
यूँ ही लगा है ......................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Geeta Chandola and 48 others.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में

फिर आज बड़े दिनों के बाद
आज फिर मैंने कलम थामी है 
कोई रचना कोई नज्म जमी थी
उस टूटे और सूखे पत्तों पर
अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में

उड़ रही धुल वंही पड़ी मजारों पर
रुक्सत हुये दरकत के रुक्सारों पर
कब्र पर छाये उन अंधेरों गलियारों  पर
कभी जलते दीपक के उन किनारों पर 
अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में

देख रही है राह आयेगा कोई यंहा
चुन-चुनकर कोई यंहा से ले जायेगा
जो रचना नज्म जमी थी अब तक यंहा
इन अनजान सुनसान वीरानों पर
अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में

फिर आज बड़े दिनों के बाद
आज फिर मैंने कलम थामी है 
कोई रचना कोई नज्म जमी थी
उस टूटे और सूखे पत्तों पर
अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with Geeta Chandola and 49 others. Photo: अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में फिर आज बड़े दिनों के बाद आज फिर मैंने कलम थामी है कोई रचना कोई नज्म जमी थी उस टूटे और सूखे पत्तों पर अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में उड़ रही धुल वंही पड़ी मजारों पर रुक्सत हुये दरकत के रुक्सारों पर कब्र पर छाये उन अंधेरों गलियारों  पर कभी जलते दीपक के उन किनारों पर अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में देख रही है राह आयेगा कोई यंहा चुन-चुनकर कोई यंहा से ले जायेगा जो रचना नज्म जमी थी अब तक यंहा इन अनजान सुनसान वीरानों पर अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में फिर आज बड़े दिनों के बाद आज फिर मैंने कलम थामी है कोई रचना कोई नज्म जमी थी उस टूटे और सूखे पत्तों पर अब भी वो पड़े  हैं इन्तजार में एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
May 9
देखयाली ये

देखयाली ये सारी दुनिया मा
और्री इन बाटों घाटों मा ...२
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

घुंघराली बाल की लटुली
तै मुंड घासा की जीयु मा माया की बैठुली
देखयाली ये सारी दुनिया मा
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

ऐ रूपा की खानी ऐ गढ़ रूपा
तेरु जिकोडी कु धक धक इन छपेडू मा
देखयाली ये सारी दुनिया
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

इन छपे की बल खक नी छपे बल
तस्बीर इन तेर मेर जीयु बसै बल
देखयाली ये सारी दुनिया मा
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


       
बालकृष्ण डी ध्यानी ऐग्युं फिर ऐ पाड़ा

रीट राटी की ऐगयुं मी
रीता रीता फिर परती गयुं  मी
ऐग्युं फिर ऐ पाड़ा मी
ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा
ऐगयुं ऐ गढ़वाला..............
   
कुच ना बदली यख
बदली बस मनखी कु मन
सरीर कु सुख देखी जैन
मेर जण वो यख भटे भागी
ऐग्युं मी ऐग्युं मी
ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा
ऐगयुं ऐ गढ़वाला..............

ऐ जुनी खोज खाजी की
रोज ऐ पोट मरीकी
फिरदा रयुं मी यकुली सी
ऐ पाड़ा ऐ घार छुडीकी
ऐग्युं मी ऐग्युं मी
ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा
ऐगयुं ऐ गढ़वाला..............


कुच ना सुचे
कुच ना बुझे मी थै
यूँ उंदारूं का बाट दौड़ी की
ऐग्युं फिर मी उकालों बाट बौड़ी की
ऐग्युं मी ऐग्युं मी
ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा
ऐगयुं ऐ गढ़वाला..............

रीट राटी की ऐगयुं मी
रीता रीता फिर परती गयुं  मी
ऐग्युं फिर ऐ पाड़ा मी
ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा
ऐगयुं ऐ गढ़वाला..............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षिऐग्युं फिर ऐ पाड़ा रीट राटी की ऐगयुं मी रीता रीता फिर परती गयुं  मी ऐग्युं फिर ऐ पाड़ा मी ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा ऐगयुं ऐ गढ़वाला.............. कुच ना बदली यख बदली बस मनखी कु मन सरीर कु सुख देखी जैन मेर जण वो यख भटे भागी ऐग्युं मी ऐग्युं मी ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा ऐगयुं ऐ गढ़वाला.............. ऐ जुनी खोज खाजी की रोज ऐ पोट मरीकी फिरदा रयुं मी यकुली सी ऐ पाड़ा ऐ घार छुडीकी ऐग्युं मी ऐग्युं मी ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा ऐगयुं ऐ गढ़वाला.............. कुच ना सुचे कुच ना बुझे मी थै यूँ उंदारूं का बाट दौड़ी की ऐग्युं फिर मी उकालों बाट बौड़ी की ऐग्युं मी ऐग्युं मी ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा ऐगयुं ऐ गढ़वाला.............. रीट राटी की ऐगयुं मी रीता रीता फिर परती गयुं  मी ऐग्युं फिर ऐ पाड़ा मी ऐग्युं ऐ पाड़ा हे......गंगा की धारा ऐगयुं ऐ गढ़वाला.............. एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता  उत्तराखंड की बालकृष्ण डी  ध्यानी May 28दो आँसूं

फिर बह गये
दो आँसूं आँखों के
दर्द से थे जमे  वे
ले कर गये वो कंहा
जिंदगी के आईनों पर
फिर बह गये वो कंही पर
फिर बह गये
दो आँसूं आँखों के

रोना था रो दिया
गम को हलक से हल्का कर दिया
रोते रोते  वो सीसक सा गया
वो कोना और वंही पर रोना था 
सब सम था सहम सा गया
बहना था वो बह गया
फिर बह गये
दो आँसूं आँखों के

कहना था उसे,वो कहता रहा
रो रो के दर्द बस वो सहता रहा
रोक रोक वो उभरता रहा
पग अपना रखा वंहा पर उसने 
जग जंहा पर उसे ठगता रहा
बोझा दिल का ठेला दिल ने
दिल पर इसका रोग बड़ता रहा
फिर बह गये
दो आँसूं आँखों के

फिर बह गये
दो आँसूं आँखों के
दर्द से थे जमे  वे
ले कर गये वो कंहा
जिंदगी के आईनों पर
फिर बह गये वो कंही पर
फिर बह गये
दो आँसूं आँखों के

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 9
देखयाली ये

देखयाली ये सारी दुनिया मा
और्री इन बाटों घाटों मा ...२
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

घुंघराली बाल की लटुली
तै मुंड घासा की जीयु मा माया की बैठुली
देखयाली ये सारी दुनिया मा
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

ऐ रूपा की खानी ऐ गढ़ रूपा
तेरु जिकोडी कु धक धक इन छपेडू मा
देखयाली ये सारी दुनिया
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

इन छपे की बल खक नी छपे बल
तस्बीर इन तेर मेर जीयु बसै बल
देखयाली ये सारी दुनिया मा
तै जनी नी दॆखै क्वी
इन यख यकला बाटों मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित