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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता  उत्तराखंड की बालकृष्ण डी  ध्यानी May 29मेरा पाडे ठंडो पाणी

पाणी पाणी बोगी जालू ठंडो पाणी
रैंदु रालू  रुणु रालू  ......जबै कथै की जालू ठंडो पाणी
मेरा पाडे का रौल ........ बिसै की जालू ठंडो पाणी

पाणी पाणी कंन कै की ठण्डु रालू ठंडो पाणी
घामा को चरखा बरखा क्ख्क अबै दा हरचा ठंडो पाणी
मेरा पाडे का जंगलात.....डाली क्ख्क लुक्गै आज ठंडो पाणी

लो ठण्डु पाणी प्या कु बोलालू ठंडो पाणी
कु ठण्डु पाणी पंदेर भटे की लंदु ठंडो पाणी
पितला की घ्सेरी भरालू कू घस्लू मेरा पाडे मा ठंडो पाणी

देख देख की हाल हुन्याँ ठंडो पाणी
बेटी ब्वारी का सरिल सुख्यां ठंडो पाणी
बांज कू आंजाड केडा क्ख्क चुल्याँ मेरा पाडे मा ठंडो पाणी

पाणी पाणी बोगी जालू ठंडो पाणी
रैंदु रालू  रुणु रालू  ......जबै कथै की जालू ठंडो पाणी
मेरा पाडे का रौल ........ बिसै की जालू ठंडो पाणी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता  उत्तराखंड की बालकृष्ण डी  ध्यानी 15 hours agoएक वृक्ष

एक वृक्ष
अकेला खडा था
बरसों से उस तट पर
जो अब सुखा पड़ा था

कभी उस तट पर
कल कल की गूंज गूंजा करती थी
हरियाली चादरें फ़ैली होती थी

कभी लहलहाते
वो करीब और पास साथ मेरे
वो जंगल अब उन पेड़ों से
विहीन पडा था

सब और सुखा पड़ा है
बादल अब जल विरहा में घूम रहा है
कभी होते थे काले अब स्वेत सा दिख रहा है

अब अकेला खडा हूँ
अपनो को खत्म होते
अब अपने को भी खत्म होते

एक वृक्ष
अकेला खडा था
बरसों से उस तट पर
जो अब सुखा पड़ा था

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितPhoto: एक वृक्ष एक वृक्ष अकेला खडा था बरसों से उस तट पर जो अब सुखा पड़ा था कभी उस तट पर कल कल की गूंज गूंजा करती थी हरियाली चादरें फ़ैली होती थी कभी लहलहाते वो करीब और पास साथ मेरे वो जंगल अब उन पेड़ों से विहीन पडा था सब और सुखा पड़ा है बादल अब जल विरहा में घूम रहा है कभी होते थे काले अब स्वेत सा दिख रहा है अब अकेला खडा हूँ अपनो को खत्म होते अब अपने को भी खत्म होते एक वृक्ष अकेला खडा था बरसों से उस तट पर जो अब सुखा पड़ा था एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितUnlike ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता  उत्तराखंड की बालकृष्ण डी  ध्यानी 21 hours agoभूली गीयूं मी

ओंकी हैंसी देखी की
भूली गीयूं मी ..२  भुली
खैरी अप्डी  पीड़ा अप्डी 

भगवती इन दैणी रै सदा
अपरा परायुं पर कैर दे किरपा
तेरु ये रूप देखी की 
अपरों पर अंग्वाल लेखी की
भूली गीयूं मी ..२  भुली
खैरी अप्डी  पीड़ा अप्डी 

देख वा कंन हंस्द
गीच मा दंतुली किद द
वीं हैंसी दगडी दगड ऐरै दगडाया
पाड़ भी हैंसद देखी की मेरु पाडे दा भी हैंसीद 
भूली गीयूं मी ..२  भुली
खैरी अप्डी  पीड़ा अप्डी 

इनी णी खिद खिदा रंया
पाडे का बुरंश प्योंली लंया
घुघती घुर हिलांसा उडी भूर
ईं हैंसी ना जा मेरा पाडे से दूर ,तेर हैंसी मा मी हैंसी की
भूली गीयूं मी ..२  भुली
खैरी अप्डी  पीड़ा अप्डी 

ओंकी हैंसी देखी की
भूली गीयूं मी ..२  भुली
खैरी अप्डी  पीड़ा अप्डी 
 
एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता  उत्तराखंड की बालकृष्ण डी  ध्यानी 13 minutes agoये बरखा हे बरखा

फिर ऐगे  डाँडो कंडों
फिर छेगै ऐ पाडों मा ये बरखा हे बरखा
पौड़ी गे तू  स रा रा र र धम धम

काला काला बादल मा बैठीकी
दूध की धार कैलास मा वार पार बेखैरी की ये बरखा हे बरखा
भीगे गै तू मेरा बद्री-केदार धाम

जख तख सबै भिज्याँ भिज्याँ
हरा हरा मनखी मा अबै प्रीत कोपल फुंटयां ये बरखा हे बरखा
हरालू कैगै जीयु मया लगै मेरु पाड़े गाम

तू ईंण ऐई तू ईंण जैई
कैको ना हो पीड़ा ना खैरी ऐसूं का साल ये बरखा हे बरखा
कैर दे ईंनी उपकार आभारी रहलू मेरु उत्तरखंड राज्य

फिर ऐगे  डाँडो कंडों
फिर छेगै ऐ पाडों मा ये बरखा हे बरखा
पौड़ी गे तू  स रा रा र र धम धम

एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी  मेर देशा की माया

यख जख वख
कख भी ज्न्याँ
खती पड़ी व्हाली
मेर देशा की माया
ये और्री तै और्री
चौ तरफी बेखरी पड़ी व्हाली

म्यार खैरी का देश मा
म्यार  विपदा का देश मा
म्यार  डंडों का देश मा
म्यार कंडों का देश मा
हे उत्तरखंड म्यारा गढ़ देश मा

लगी व्हाली क्वी
सजी व्हाली पिंगली सारी मा
बैठी व्हाली टेक की
सोने नथुली व्हाली नाकी मा
वोंकी आंखी माया दडी व्हाली

म्यार खैरी का देश मा
म्यार  विपदा का देश मा
म्यार  डंडों का देश मा
म्यार कंडों का देश मा
हे उत्तरखंड म्यारा गढ़ देश मा

वख दाणी डाली जमी व्हाली
रुखी सुखी डाली मा आस की
की एकी टक टकी लगी व्हाली
मुखडी खींचा रेघा का दगडी
माया का तांसू भिज्या व्हाला

म्यार खैरी का देश मा
म्यार  विपदा का देश मा
म्यार  डंडों का देश मा
म्यार कंडों का देश मा
हे उत्तरखंड म्यारा गढ़ देश मा

बालपना का डेरा मा
गैर हाकंणा व्हाला छोरो मा
तिमला कंडली कैदु की सारी मा
बौडी की साग और्री बाडी मा
किनकारालू घीयु का छरा मा   

म्यार खैरी का देश मा
म्यार  विपदा का देश मा
म्यार  डंडों का देश मा
म्यार कंडों का देश मा
हे उत्तरखंड म्यारा गढ़ देश मा

यख जख वख
कख भी ज्न्याँ
खती पड़ी व्हाली
मेर देशा की माया
ये और्री तै और्री
चौ तरफी बेखरी पड़ी व्हाली

एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी  और्री कया देखंण मील

मील धार दर चुला धार देखी
अपड़ो थे वें पार सुरक जांदा देखी
और्री कया देखंण मील ..२
अपरी इतिहास कू हास हुंदा
ईनी नीरबै आंखी  देखी
मील धार दर चुला धार देखी .....

हे बगता तू ई अब बता
औरी कया छुपयूँ च तैमा
औरी कया कया लपयूँ च तैमा
अपरी खैनी कमाई लुट दा देखी
गढ़ देश खड़ो य्कुलू बस य्कुलू ई देखी
मील धार दर चुला धार देखी .....

यख खैरी भी च यख विपदा भी च
ऐ गढ़ मा जमी सदनी कू लगुली देखी
कुड़ी घर दर बंजा पुंगड़ा कैकी
भुर उड़ायूँ रखाण दार भी देखी
बस मील यख ईणी ही लिपापोती देखी
मील धार दर चुला धार देखी .....

आंसूं भी गै ईंणी वार पार
कैमा धैय लगाण कैमा छुंयी लगाण
कू हुलो आपरो गैलु सी
कैल पाछाण कैल रशायाँण लगाण
मनखी थै मेर कैल धीर बधाण
मील धार दर चुला धार देखी .....

मील धार दर चुला धार देखी
अपड़ो थे वें पार सुरक जांदा देखी
और्री कया देखंण मील ..२
अपरी इतिहास कू हास हुंदा
ईनी नीरबै आंखी  देखी
मील धार दर चुला धार देखी .....

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित — with राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' and 5 others. Photo: और्री कया देखंण मील मील धार दर चुला धार देखी अपड़ो थे वें पार सुरक जांदा देखी और्री कया देखंण मील ..२ अपरी इतिहास कू हास हुंदा ईनी नीरबै आंखी  देखी मील धार दर चुला धार देखी ..... हे बगता तू ई अब बता औरी कया छुपयूँ च तैमा औरी कया कया लपयूँ च तैमा अपरी खैनी कमाई लुट दा देखी गढ़ देश खड़ो य्कुलू बस य्कुलू ई देखी मील धार दर चुला धार देखी ..... यख खैरी भी च यख विपदा भी च ऐ गढ़ मा जमी सदनी कू लगुली देखी कुड़ी घर दर बंजा पुंगड़ा कैकी भुर उड़ायूँ रखाण दार भी देखी बस मील यख ईणी ही लिपापोती देखी मील धार दर चुला धार देखी ..... आंसूं भी गै ईंणी वार पार कैमा धैय लगाण कैमा छुंयी लगाण कू हुलो आपरो गैलु सी कैल पाछाण कैल रशायाँण लगाण मनखी थै मेर कैल धीर बधाण मील धार दर चुला धार देखी ..... मील धार दर चुला धार देखी अपड़ो थे वें पार सुरक जांदा देखी और्री कया देखंण मील ..२ अपरी इतिहास कू हास हुंदा ईनी नीरबै आंखी  देखी मील धार दर चुला धार देखी ..... एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

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बालकृष्ण डी ध्यानी
म्यारी सांकी मा
माया तेरी .... बसेगी .
जिकोडी की गौल लगी गै ..२
मुखड़ी यूँ रोंसा तेरी
म्यारी सांकी मा
माया तेरी......२

कैल भी णी पूछी मिल
मिल कै थै णी बतैई ..इ
तेरी प्रीत ये गेल्या मिल ..2
तै दगडी भी छुपैई ..इ इ इ
म्यारी सांकी मा
माया तेरी......२

फिरदा रायों मी ईन...बाटों मा
छुई लगॆ ना मिल इ
प्योंली बुरांस का डालियों मा ...२
घुघूती थै भी णी बतैई ..इ
म्यारी सांकी मा
माया तेरी......२

तिस लगे की गै कै छोर
चिठ्ठी ना पत्री ना गौं को ठोरा
कै दिसा को जाण कै धैय लगाण ..2
नौअ कया च वीं को ,मिल ये भी छुपाण बल
म्यारी सांकी मा
माया तेरी......२

निंदी भी हर्चे
फूलों दगड मील इनी रुपया खर्चे
तै दैना को हिक्मत ना वहाई ..इ ..2
ना कै दिल तू ये जिकोड़ी तैर कया वहाई
म्यारी सांकी मा
माया तेरी......2


म्यारी सांकी मा
माया तेरी .... बसेगी .गी
जिकोडी की गौल लगी गै ..२
मुखड़ी यूँ रोंसा तेरी
म्यारी सांकी मा
माया तेरी......२


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
देव भूमि बद्री-केदार नाथ
तेरु मेरु साथ

बल जोड़ी ले की जोडीली
बिधातन अब देखा
अपरू हर बाट गौं घारदार
और्री यू तेरु मेरु साथ
हो हो अ तेरु मेरु साथ ............

कंन कंन फुल खिल्यां
अब तक ये भूमी मा कख छा छुपयाँ
ये जब मेरु हाथों मा तेरु हाथ
लगाण लगे अब नैय दिन चा ये नैय रात

बल जोड़ी ले की जोडीली
बिधातन अब देखा
अपरू हर बाट गौं घारदार
और्री यू तेरु मेरु साथ
हो हो अ तेरु मेरु साथ ............

नीलू सरग हराली डंडाली कंठी
गद गद बौग्न नायरों का पाणी
यू पाणी तेर मेरा प्रीत की क्यारी मिल
मेर पुंगड,बथों मा उल्ल्यार फुल्यार छेगै

बल जोड़ी ले की जोडीली
बिधातन अब देखा
अपरू हर बाट गौं घारदार
और्री यू तेरु मेरु साथ
हो हो अ तेरु मेरु साथ ............

हारे हारे चूड़ी मा मेर घार ये तू
मांग सिंदूर मेर मांगटिक छे तू
सीधी सिंदूर की सबेरा सी मेर उजाली
जोड़ी तिल सात जन्मों की अपरी बाटी

बल जोड़ी ले की जोडीली
बिधातन अब देखा
अपरू हर बाट गौं घारदार
और्री यू तेरु मेरु साथ
हो हो अ तेरु मेरु साथ ............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

वों सै मील

वों सै मील बोली थी
वों सै मील बोली थी
ना जावा छोड़ी की ..२
ये गौं घार अपरू मुल्की से
इनी मुख मौडीकी
वों सै मील बोली थी .......

अड़ बाटा मा अड़े मिल
अदा अदा छुंई तुम दगडी लगे मिल
कया कया नी जतन कै मिल
चलगे तुम इन बाटों इन छुई छोड़ी की
वों सै मील बोली थी .......

खुद अब आणी वहाली
खुदेड घुघूती जिकोड़ी घुरान व्हली
छुई मेरी रोलाण व्हाली
अब कया फैदा आँखों कू पाणी बोगी की
वों सै मील बोली थी .......


वों सै मील बोली थी
वों सै मील बोली थी
ना जावा छोड़ी की ..२
ये गौं घार अपरू मुल्की से
इनी मुख मौडीकी
वों सै मील बोली

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी पिताजी दिन

हो गये कंहा ओझल वो पल
आँखों में ऐनक है आंखें अब नम

अंगुली पकड़कर वो मेरा चलना
वो बाग़ पाठशाल से मेरा मिलना

पीठ पर की थी कभी घोड़ स्वारी मैंने
वो मेरा मस्ती से पीठ पर उछालना

पड़ाई और वो मेरा लड़कपन
दिल में प्रेम बाहरी कोठरता का आवराण 

कदम कदम पर उनका साथ चलना
गिर पड़ा मै फिर उठाकर चलाना

याद आता है अब हर एक एक पल
पिताजी का जब मुझ से दूर चलना

हो गये कंहा ओझल वो पल
आँखों में ऐनक है आंखें अब नम

बालकृष्ण डी ध्यानी
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितपिताजी दिन हो गये कंहा ओझल वो पल आँखों में ऐनक है आंखें अब नम अंगुली पकड़कर वो मेरा चलना वो बाग़ पाठशाल से मेरा मिलना पीठ पर की थी कभी घोड़ स्वारी मैंने वो मेरा मस्ती से पीठ पर उछालना पड़ाई और वो मेरा लड़कपन दिल में प्रेम बाहरी कोठरता का आवराण कदम कदम पर उनका साथ चलना गिर पड़ा मै फिर उठाकर चलाना याद आता है अब हर एक एक पल पिताजी का जब मुझ से दूर चलना हो गये कंहा ओझल वो पल आँखों में ऐनक है आंखें अब नम बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित