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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ दिनांक १४/७/२०१३
बार इतवार

मी बालकृष्ण धि. ध्यानी 
रैहणा कु जिला पौड़ी गढ़वाल उत्तरखंड
पोस्ट रिखानीखाल पट्टी पाणी सैण
ग्राम पाली
                                 
सेवा  मा आप सब थै नमस्कार और राम राम जी

पाड़ा देब्तों औरी बोई बाबा का आशीष वचन साथ मी राजी खुशी छों
आप लोगों थे वोंका आशीष  वचन दगडी राजी खुशी रहला ये कामना कर दू
 
चिठ्ठी लिखाणा की बात ईच  की गढ़ मेरु बोगाणों लगगे .
उत्तराखंड मा चौं तरफा हाहाकार मची च .
आपरा लोको का बुरा हाल होंयोंच कैका सारी मवशी घर दर  कूड़ा सारी ईं आपदा मा बोगीग्या
रहांणा कू कूड़ा नीच खाणा को अन्न नीच रहात का नाम पर आजकल व्यापर हुन्योंच

कैक समण हाथ पसरनी जब अपरी सरकार संवेदनाहीन बणगे .
जो मोरगे वों थे २ लाख टक्का जो घायल छन ५० हजार का टक्का
और्री ज्यों का कूड़ा बोगीगे वों थे बस ५० हजार टक्का     

रहत का नौ दगडी बस मजाक हूँयुंच   
 
अब तुमी बताव अब तुमी समजवा कया करण हमल ?

आपको एक भै
जो ईं आपदा शिकार वहालो

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण धि. ध्यानी
— with Geeta Chandola and 34 others.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ July 14 दिनांक १४/७/२०१३
बार इतवार

मी बालकृष्ण धि. ध्यानी 
रैहणा कु जिला पौड़ी गढ़वाल उत्तरखंड
पोस्ट रिखानीखाल पट्टी पाणी सैण
ग्राम पाली
                                 
सेवा  मा आप सब थै नमस्कार और राम राम जी

पाड़ा देब्तों औरी बोई बाबा का आशीष वचन साथ मी राजी खुशी छों
आप लोगों थे वोंका आशीष  वचन दगडी राजी खुशी रहला ये कामना कर दू
 
चिठ्ठी लिखाणा की बात ईच  की गढ़ मेरु बोगाणों लगगे .
उत्तराखंड मा चौं तरफा हाहाकार मची च .
आपरा लोको का बुरा हाल होंयोंच कैका सारी मवशी घर दर  कूड़ा सारी ईं आपदा मा बोगीग्या
रहांणा कू कूड़ा नीच खाणा को अन्न नीच रहात का नाम पर आजकल व्यापर हुन्योंच

कैक समण हाथ पसरनी जब अपरी सरकार संवेदनाहीन बणगे .
जो मोरगे वों थे २ लाख टक्का जो घायल छन ५० हजार का टक्का
और्री ज्यों का कूड़ा बोगीगे वों थे बस ५० हजार टक्का     

रहत का नौ दगडी बस मजाक हूँयुंच   
 
अब तुमी बताव अब तुमी समजवा कया करण हमल ?

आपको एक भै
जो ईं आपदा शिकार वहालो

एक उत्तराखंडी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी  मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे

गीत लिखे रा 
गीत लिखे दै
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

वों आखरों थे बोल देकी 
संगीत रचे दे
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

धुन गांठी की धुन बजे दे
घुड्कू लगे दे
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

बोल मिसै दे
मीठी ताना की मिसरी घुले दे
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

घ्न्ग्तोल हुन्यों मी
ईंकी पीड़ा थे बिसरी  दे
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

गीत लग्युं चा संगीत बजणु चा
ऐजवा दीदा नचणा कुंण  कंण रास आईं चा
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

गीत लिखे रा 
गीत लिखे दै
मेर पाड़े थे नचे दे नचे दे ...२

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी
18 hours ago
मेरी शोखियाँ

मेरी शोखियाँ
मेरी अंगडाईयां आप को लुभाते तो होंगी
कभी एकांत मे बैठा कर वो
आपको मेरी याद दिलाते तो होंगे
कभी यादों में ही सही ..................

मेरा खिल खिलाना
मेरा इठलाना आप को गुदगुदाता तो होगा
आँखों मे आप के आंसों देखकर
मेरा हंसता चेहरा आप का गम भूलता तो होगा
कभी यादों में ही सही ..................

परछाइयां आपकी
मेरे दूरीयाँ को मिटाती तो होंगी
हिचकिचाने में कभी ना कभी सही
मेरा नाम उभर कर ओंठों पर आता तो होगा
कभी यादों में ही सही ..................

पल पल मे छिपी हूँ मै
हर पल वंही हों मै
मेरे यूँ मांग के सिंदूर का नूर दमकना
आप की सांसों को उसने संभाल तो होगा
कभी यादों में ही सही ..................

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी  दीदी गीता चंदोला दी

देखा दीदी ईंन  लगी च 
यकुली यकुली धुंगा सरनीच 
आपदा विपदा यख आंसूं रुणा च 
गीता दी खैरी पीड़ा  हरनी च 

दूर भ्तेक ना आंसूं डाला
धै लग्णु पाड़ ऐ जावा दादा 
हाथ भार तू बी लगालॆ 
गीता दी दगडी तू खुठा हिटा दे 

माया अपरू थै तू लगाले 
बिराणा समझी की 
ना इनी आंखी फिरा दे   
गीता दी दगड तू दगड लगदे 

हैन्सी का फिर दिना आला दादा 
कब तक दीदी इनी रुन्शा राला 
दीदी हाथों थे चार कर दे 
अपरा पाड़े की पीड़ा हरदे   

लोक बोल्दा रिंदा दीदी 
क्नुडी थे बोलदे अनसूणी कैदे
तू पाड़े की बेटी छे दीदी 
तेरु ही यख जमी खेती च दीदी 

देखा दीदी ईंन  लगी च 
यकुली यकुली धुंगा सरनीच 
आपदा विपदा यख आंसूं रुणा च 
गीता दी खैरी पीड़ा  हरनी च 

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी  भगवाना 

हे रै भगवाना 
दे रै भगवाना 
जिकोड़ी तिल कया मोळ पाई 
झ्योति जिंदगी की मेर इनी तौल ग्याई 
हे रै भगवाना   ............

नीलू सरग हरा भरा बन 
बगदा गदना वों मा बी ना देख पाई 
हरी की हरली थै कंन खो दयाई   
हे रै भगवाना  ............

नर नारयण दोईया दार खडयाँ   
मेरु भाग कंन कख बटायाँ   
वों की पाडों का झोल थे ना पछाण पाई 
हे रै भगवाना   ............

मंगतू ही रै मी बौल्या बणी
मील सबे कुच खो दैयाई 
माया दगडी मेर सुबैर ब्योखोंन इनी ही गैई 
हे रै भगवाना   ............

हे रै भगवाना 
दे रै भगवाना 
जिकोड़ी तिल कया मोळ पाई 
झ्योति जिंदगी की मेर इनी तौल ग्याई 
हे रै भगवाना   ............

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बालकृष्ण डी ध्यानी July 16मेरा स्वामी

मेरी पीड़ा कैल णी जाणी
बोगीगै सरगा को पाणी...२
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी

लेंण गैण स्वामी जी दोई आणी
छोडी गेंण आंखी ई दोई रुवाणी
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी

दगडया मेरा आसूं गाणी
कैल खाणी स्वामी जी इन कमाणी
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी

आपदा विपदा कथा पूराणी
पीड़ा खैरी यख सदनी गाथा लगैणी
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी

उकालू उन्दारू ईं दोई भै भैना
बांजा लग गै जंगलात कू लकडू लेणा
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी

जनी बिस गैनी पंधेरूं को पाणी
वोनी छोडी गेना लेंदु गौड़ी छनी मेरा स्वामी
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी

मेरी पीड़ा कैल णी जाणी
बोगीगै सरगा को पाणी...२
मेरी पीड़ा कैल णी जाणी


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बालकृष्ण डी ध्यानी  पत्तों को हिलना था

पत्तों को हिलना था
हिलकर उन्हें गिरना था
पत्तों को हिलना था ...................

किस्मत की  रेखा दबी 
मिलकर ,बिछड़ना था
पत्तों को हिलना था ...................

तन्हा सफर  तन्हा मंजील
अगंतुक, चलते चलना था
पत्तों को हिलना था ...................

निशान छूटे कंही पहचान छूटी
तकदीर, कदम कदम पर टूटी-फूटी
पत्तों को हिलना था ...................

रूठी रही वो उड़ते रहे
रूखे सूखे पत्ते उन्हें उड़ना था
पत्तों को हिलना था ...................

पत्तों को हिलना था
हिलकर उन्हें गिरना था
पत्तों को हिलना था ...................

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बालकृष्ण डी ध्यानी  बस म्न्ख्यों की   

भुला
मनखी की दौड़
बस म्न्ख्यों तक
बल कया हुन्दो और्री अग्ने
बस म्न्ख्यों तक
 
हरी हरी बुला
बस म्न्ख्यों तक
टक्का मा हरी खोजा
बस म्न्ख्यों तक

देब्तों कू यख धाम
बस म्न्ख्यों तक
यख मेरु कया काम
बस म्न्ख्यों तक

छे चं गढ़देश मेरु
बस म्न्ख्यों तक
भैर देश बैठयूँ
बस म्न्ख्यों तक

कैलणी जाणी मनखी ते
बस म्न्ख्यों तक
जिकोड़ी तिल भी णी माणी
बस म्न्ख्यों की...............

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी  बस म्न्ख्यों की   

भुला
मनखी की दौड़
बस म्न्ख्यों तक
बल कया हुन्दो और्री अग्ने
बस म्न्ख्यों तक
 
हरी हरी बुला
बस म्न्ख्यों तक
टक्का मा हरी खोजा
बस म्न्ख्यों तक

देब्तों कू यख धाम
बस म्न्ख्यों तक
यख मेरु कया काम
बस म्न्ख्यों तक

छे चं गढ़देश मेरु
बस म्न्ख्यों तक
भैर देश बैठयूँ
बस म्न्ख्यों तक

कैलणी जाणी मनखी ते
बस म्न्ख्यों तक
जिकोड़ी तिल भी णी माणी
बस म्न्ख्यों की...............

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