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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी Wednesdayबस म्न्ख्यों की   

भुला
मनखी की दौड़
बस म्न्ख्यों तक
बल कया हुन्दो और्री अग्ने
बस म्न्ख्यों तक
 
हरी हरी बुला
बस म्न्ख्यों तक
टक्का मा हरी खोजा
बस म्न्ख्यों तक

देब्तों कू यख धाम
बस म्न्ख्यों तक
यख मेरु कया काम
बस म्न्ख्यों तक

छे चं गढ़देश मेरु
बस म्न्ख्यों तक
भैर देश बैठयूँ
बस म्न्ख्यों तक

कैलणी जाणी मनखी ते
बस म्न्ख्यों तक
जिकोड़ी तिल भी णी माणी
बस म्न्ख्यों की...............

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी July 23ज्ञान सूरज   

घर में ही ......
हिंदी और इंग्लिश की तकरार में 
मेरी खो गई पहचान जी
कल तक मै बोलता था महान जी 
बेटा बोलने लगा... डैड देट इस कूल जी 

रस्ते में चला..... 
ना देखा ऐसा भी कोई स्थान जी 
ना ही कोई ऐसा कोई स्टेट जी 
लड़ते ना वो एक दुसरे को 
जैसे सास बहु की हो भेंट जी 

रहा में बैठे होये..... 
फकीर की कटोरी में मैंने 
जब डाला १० रुपये का नोट जी 
तब लगी ठेस  उस के उस हार्ट को 
उस ने कहा डॉलर नहीं पास जी

जब दूर निकल गया ......
टहलते टहलते जब मै दूर निकल गया
एक  ट्रीरी के नीचे बैठ कर रेस्ट किया
सुस्ता सुस्ता के सीलीप कीया 
ड्रीम में उन दोनों को फिर साथ किया

समझ जब आया ......
जब समझ आया तो मै हो गया लेट जी 
लेट लेटकर सारा जीवन चला गया वेस्ट जी 
ईस्ट और वेस्ट बस इतना ही फर्क 
ज्ञान सूरज उगता यंहा ढलता उस देश जी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी अब त हरी हरी बोलले..

सदणी णी रैंदा
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा
कै कू णी रुक्दा
कै कू णी थ्म्दा
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा

पीड़ा की खैणी
पीड़ा लेई जाणी
पीड़ा का दार ...गै..ल्याणी
सदणी... णी  बंद रैंदा
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा

भग्या का लेखी
भाग ही जाणी
कर्म बिधातन..... णा
मनसा तेंण बांटी
अपरा कर्म से मुक्ती .. गै..ल्याणी
तू कख क्ख्क छे भटाणी
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा

जिकोड़ी मा देखले
जिकोड़ी थे अपरा भेंटी ले
रैंदा सुख दुख हारी वख
तू वों पर सब छोडी ले
अब त हरी हरी बोलले....गै..ल्याणी
भव समुद्र गौता मारी ले
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा

सदणी णी रैंदा
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा
कै कू णी रुक्दा
कै कू णी थ्म्दा
गै..ल्याणी ..सुख दुःख
ये सुख दुःख
आंदा जांदा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितअब त हरी हरी बोलले.. सदणी णी रैंदा गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा कै कू णी रुक्दा कै कू णी थ्म्दा गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा पीड़ा की खैणी पीड़ा लेई जाणी पीड़ा का दार ...गै..ल्याणी सदणी... णी  बंद रैंदा गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा भग्या का लेखी भाग ही जाणी कर्म बिधातन..... णा मनसा तेंण बांटी अपरा कर्म से मुक्ती .. गै..ल्याणी तू कख क्ख्क छे भटाणी गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा जिकोड़ी मा देखले जिकोड़ी थे अपरा भेंटी ले रैंदा सुख दुख हारी वख तू वों पर सब छोडी ले अब त हरी हरी बोलले....गै..ल्याणी भव समुद्र गौता मारी ले गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा सदणी णी रैंदा गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा कै कू णी रुक्दा कै कू णी थ्म्दा गै..ल्याणी ..सुख दुःख ये सुख दुःख आंदा जांदा एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी 9 minutes agoआज की बात  ध्यानी के अंदाज
२८/०७/२०१३  इतवार
प्रणाम

कुत्तों के शाही ठाठ

कुत्तों के शाही ठाठ तो
आपन ने देखे ही होंगे
कुत्तो की शाही शादी देख
अचम्भा रहा आज वो भेंट
नर और कुत्तो,में ना रहा
अब प्राणी देख कोई भेद
अमृतसर में शादी करें ध्यानी
लंदन में मनाये हनीमून देख

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी. ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी 19 hours agoउमस भरा मीत

चल आज
उमस पर कुछ लिखूं
तपती धुप पर
मै कुछ थोड़ा जलों
वो उमस भरा मीत .............

जंगम है वो
अब चलायमान
गतिशील है वो
हर वक्त चलता-फिरता
वो उमस भरा मीत .............

गरीबी वो  पेट की
अब थोड़े दिन मै भी भूख रहूँ
चलनक्षम बन बकरा
वस्तुएँ सा हलाल हुओं
वो उमस भरा मीत .............

अनियमितता हर दिन की
अस्थिरता बस उस तन की
अनित्य पर चल बनकर
बदलने का प्रयास करों
वो उमस भरा मीत .............

योग्यता है या अयोग्यता
गतिशील इस धरा पर
तिरती पर एक गीत लिखों
फिरता उसे बस मीत लिखों
वो उमस भरा मीत .............


एक उत्तराखंडी

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी Fridayहम और तुम 

कुछ मेरी सुनो 
कुछ  तुम अपनी करो 
ये जीवन 
यूँ ही चला जायेगा  l

मै कांटे चुनों
तुम गुल सी मिलती रहो 
अपना मधुबन खिल जायेगा
ये जीवन 
यूँ ही चला जायेगा  l

नदी के छोर है हम 
एक दूजे की ओर हैं हम 
कल कल संग संग यूँ बहते चलो 
ये जीवन 
यूँ ही चला जायेगा  l

मै बादल हूँ 
तुम मेरा आकाश हो   
संग तुम्हरे मै उड़ता फिरूं
ये जीवन 
यूँ ही चला जायेगा  l

रित हो तुम 
मेरी प्रीत हो तुम 
इस जीवन का संगीत हो तुम
ये जीवन 
यूँ ही चला जायेगा  l

कुछ मेरी सुनो 
कुछ  तुम अपनी करो 
ये जीवन 
यूँ ही चला जायेगा  ल

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित Photo: हम और तुम कुछ मेरी सुनो कुछ  तुम अपनी करो ये जीवन यूँ ही चला जायेगा  l मै कांटे चुनों तुम गुल सी मिलती रहो अपना मधुबन खिल जायेगा ये जीवन यूँ ही चला जायेगा  l नदी के छोर है हम एक दूजे की ओर हैं हम कल कल संग संग यूँ बहते चलो ये जीवन यूँ ही चला जायेगा  l मै बादल हूँ तुम मेरा आकाश हो संग तुम्हरे मै उड़ता फिरूं ये जीवन यूँ ही चला जायेगा  l रित हो तुम मेरी प्रीत हो तुम इस जीवन का संगीत हो तुम ये जीवन यूँ ही चला जायेगा  l कुछ मेरी सुनो कुछ  तुम अपनी करो ये जीवन यूँ ही चला जायेगा  ल एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षितLike ·  · Share

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बालकृष्ण डी ध्यानी Thursdayआँखों से

आँखों से
गिरे है
गिरे दो आंसूं
राह तुम्हरी जौ रहे
गिरे अब
गिरे तब
वो चौमासा
बहे जा रहे हैं
रुकते नही
ना थमते है
बैरंग से वो
लुढक जाते हैं
आँखों से
गिरे है
गिरे दो आंसूं

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बालकृष्ण डी ध्यानी 16 hours agoमेर दीदी

सेवा भाव रहे
मन में उत्पन
कल्याण होगा
जग में जन जन
   
प्रेम रहे
हरदम इस तन
अनुराग रहे
चित्त  हरदम

देना रहे
अर्पित  इस तन का
प्रेम रहे
सदा इस मन का

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी  सच और झूठ

कोई सच है
तो वो खुद है तू
कोई झूठ है
तो मौन है तू

झूठ की परछाई
में सत्य हुआ हरजाई
साँच को आंच लगी है
झूठ दे रहा दुहाई

सचाई की गहराई में
आज झूठ ने बाजी मारी
ठीक है निश्चित है वो
सुरक्षिता  हुई आज उसकी लुगाई

अलबत्ता झूठ का अंत
होता बड़ा ही दुखदाई
सच है सदा से हर्षित
सुख बस सुख उसमे समाही

कोई सच है
तो वो खुद है तू
कोई झूठ है
तो मौन है तू


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी 20 hours agoआज की बात  ध्यानी के अंदाज
२८/०७/२०१३  इतवार
प्रणाम

कुत्तों के शाही ठाठ

कुत्तों के शाही ठाठ तो
आपन ने देखे ही होंगे
कुत्तो की शाही शादी देख
अचम्भा रहा आज वो भेंट
नर और कुत्तो,में ना रहा
अब प्राणी देख कोई भेद
अमृतसर में शादी करें ध्यानी
लंदन में मनाये हनीमून देख

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी. ध्यानी