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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


बालकृष्ण डी ध्यानी
June 26 at 7:07am ·
हर लम्हा खूबसूरत है,उस में जी लो तो जरा
पल पल बिता पल है,उसे अपना लो तो जरा
ध्यानी प्रणाम

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ग़ज़ल क्या हैं
ग़ज़ल क्या हैं
जज़्बात और अलफाजों का
एक गुंचा ये मज़्मुआ है वो
शायरी की इज़्ज़त वो आबरू है वो
ग़ज़ल क्या हैं
मधुर दिलकश रसीली है वो
दिल के नाज़ुक तारों का हिस्सा है वो
भावनाएं पैदा करती हैं वो
मेरे बयां के लिये
ग़ज़ल क्या हैं
माशूक से बातचीत है वो
कंठ की दर्द भरी आवाज़ है वो
करूण स्वर बोल रही है वो
ज़िंदगी की कोई पहलू है वो
ग़ज़ल क्या हैं
शेर की दो पंक्तियों का सार है वो
मत्ला क़ाफिया रदीफ मक़्ता का जोड़ है वो
एक बुनियाद है वो
हृदय मन कोमल भावनाओं का निचोड़ है वो
ग़ज़ल क्या हैं
माशूक हृदय में झांकती हुयी
जिस्म ख़ूबसूरती का अंदाज है वो
बनाव-सिंगर और नाज़ों-अदा है वो
इश्क़ का एक जामे सागर है वो
ग़ज़ल क्या हैं
इक़बाल' की नज़्म है वो
ज्वलंत कोई व्यंग है वो
काल्पनिक दुनिया में रहती वो
यथार्त की देन है वो
ग़ज़ल क्या हैं
इतिहास रोज़ लिखाता है उसे
क्षितिज पर रोज़ स्वर उभरे हैं उसके
संगीत की त्रिवेणी संगम है वो
बातें, शब्द, तर्ज़ की आवाज़ है वो
ग़ज़ल क्या हैं
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरा पाप
मैं अपना पाप
साथ लेके चला .... २
थोड़े से सुख के लिये
मैं कितना दुःख लेके चला
साथ लेके चला .... २
उसे पास करने के लिये
किस से दूर होके चला
जिंदगी भर मुझे
ना इसका पता चला
साथ लेके चला .... २
समझा था सब मैं
ना समझ बनके चला
किसको दिया था धोखा
अब तक ना मिला उसका पता
साथ लेके चला .... २
आँसूं हँस दिये थे
या मैं बस रो कर चला
पूछ जब मैंने अपने से
तब वो चुप ही रहा
साथ लेके चला .... २
बालकृष्ण डी ध्यानी
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वो आवाज बुलाती रही
वो आवाज बुलाती रही
मेरे कदम खींचते चले
ना जाने क्या कसीस थी उस में
बस उसकी ओर वो चलते चले
पहाड़ों से वो टकरा रहे
पेड़ पत्तों से वो लिपट रहे
फूलों के संग खिल कर वो
भौरों के जैसे वो गीत गाने लगे
कल कल वो बहने लगी
सब जगह मेरे संग वो रहने लगी
कभी हवा कभी पानी बनकर
निर्मल मेरा मन करने लगी
सोया था अब तक मैं
खोया था अपने में कहीं
आ कर वो मुझे उठाने लगी
बरसों की नींद से मुझे जगाने लगी
वो आवाज बुलाती रही ......
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मन के कंवल में
मन के कंवल में
शब्द खिल पड़े ...
मन के कंवल में
आज शब्द खिल पड़े ...
अरे होने लगी बरखा
आज मेर मन में
भीगा भीगा मन
भीगा संग जोबन
भीगा भीगा मन
आज भीगा संग जोबन
अरे आने लगा है मजा
आज मेर मन में
घिर घिर के
रोज आओ तुम
घिर घिर के
अब रोज आओ तुम
अरे शुरु होने लगी जिंदगी
आज मेर मन में
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तुम से अगर मैं मिलने आऊं
तुम से अगर मैं मिलने आऊं
मगर आऊं कैसे
मिलने आऊं बहुत मन तो करता
मगर वो रास्ता मिले ना मुझे
तुम से अगर मैं मिलने आऊं ....
मेरे साथ हो तुम
ये ख्याल जब मैं खुद से करूँ
एक अलग सा अहसास जगे
और मैं तेरे साथ साथ चलूँ
मेरा मन अब ना मेरे पास वो चल साथ साथ तेरे
मिलने आऊं बहुत मन तो करता
मगर वो रास्ता मिले ना मुझे
तुम से अगर मैं मिलने आऊं ....
अपने हाथों की लकीरों को जब मैं देखों
वो तेरा चेहरा ही क्यों मुझे दिखाये
तेरे मन की प्यास को अगर मैं भी पड़ लूँ
मेरे मन की वो प्यास और बढ़ जाये
वो प्यास बुझाने का मन तो करता
मगर वो रास्ता मिले ना मुझे
तुम से अगर मैं मिलने आऊं ....
बालकृष्ण डी ध्यानी
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वो भी चलेगा
ज्यादा नहीं
थोड़ सा है वो
वो भी चलेगा ..... २
दुनिया में
कुछ ना मेरा ना तेरा
वो भी चलेगा ..... २
सांसों की रफ़्तार है
ज़िंदा हूँ मैं और तू
वो भी चलेगा ..... २
अकेला है वो
और अकेला हूँ मैं
वो भी चलेगा ..... २
कैसे मगर वो
वो खुद से कहेगा
वो भी चलेगा ..... २
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मेरी बदमाशियां
मेरी बदमाशियां
टिकी रह गयी बस तुझ पर
क्या असर हुआ
आ करीब आ देख ले मुझ पर
मेरी बदमाशियां
बस नादानियां झलकती है
अभी भी मेरी आदतों में
मैं खुद हैरान हूँ
मुझे इश्क़ हुआ कैसे..
मेरी बदमाशियां
अधूरे से रह जाते मेरे लफ्ज़
ज़िक्र तेरा किये बिना,
मानो मेरी हर *शायरी की
जैसे बस रूह तुम ही हो...
मेरी बदमाशियां
निगाहों के समन्दर
हम बस ठिकाना चाहते थे
हम तुमसे मोहब्बत करते हैं ,
बस ये बताना चाहते थे ..
मेरी बदमाशियां
बारिशों ने की
कुछ यूँ शरारतें हम पर की
बूंदों से भीगा बदन तेरा
क्यों वो आग लगा गयी मुझ को
मेरी बदमाशियां
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बस लगन होनी चाहिए
बस लगन होनी चाहिए
और कुछ नहीं और कुछ नहीं
सच्ची सेवा भाव होना चाहिए
और कुछ नहीं
बस लगन होनी चाहिए
ना हार हो ना तेरी जीत हो
हर चीज से बस तुझे प्रीत हो
सुख में भी तेरे अश्रु बहने चाहिए
दुःख में मुख हँसता रहना चाहिए
बस लगन होनी चाहिए
पत्थर नहीं तब वो फूल हैं
कांटे नहीं ना वो शूल हैं
बस मन को तेरे सब कबूल होना चाहिए
विशवास हो अविश्वास ना होना चाहिए
बस लगन होनी चाहिए
बढ़ते कदम चले साथ साथ तेरे
सदमार्ग में उन्हें सदा बढ़ते रहना चाहिए
ठहराव नहीं तुझ में बहाव होना चाहिए
एक नहीं उन्हें हजार हाथ होने चाहिए
बस लगन होनी चाहिए
बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चुपके चुपके .......
चुपके चुपके इन ख्वाब में
अब ना मेरे तुम आया करो
आँखों को करने दो आराम अब
यूँ ना अब तुम इन्हे रुलाया करो
चुपके चुपके .......
माना हम से हुयी थी खता
हम निकले बेवफा
कांटे थे बस वो मेरे लिये
फूलों से रहे हम जुदा
चुपके चुपके उन राहों में
अब मुझे बुलाया ना करो
भूल चुके है हम उन्हें
यूँ ना अब हमे याद दिलाया करो
चुपके चुपके .......
बस फर्क इतना आप में
और मुझ में ये अब रह गया
आप कई आगे निकल गये हम से
और मेरा वक्त वहीँ थम गया
चुपके चुपके आँखो से
अब बस बहने लगे हो तुम
मैं कुछ कह नहीं पाता अब भी
बस अब भी कहने लगे हो तुम
चुपके चुपके .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
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