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Girda Ke Baad Girda Kee Yaad - गिर्दा के बाद गिर्दा की याद

Started by Hisalu, January 24, 2012, 02:29:43 PM

Hisalu


Hisalu


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dosto,

Though, Girda is not amongst us but his contribution will always be remembered. This is programme dedicated to Girda and highlight his work which is source inspiration for all of us.

We cordially invite to join the programme on 04 Feb 2012 as per the details give above.

Here is Girda's few poem

जैंता एक दिन तो आयेगा

इतनी उदास मत हो
सर घुटने मे मत टेक जैंता
आयेगा, वो दिन अवश्य आयेगा एक दिन

जब यह काली रात ढलेगी
पो फटेगी, चिडिया चह्केगी
वो दिन आयेगा, जरूर आयेगा

जब चौर नही फलेंगे
नही चलेगा जबरन किसी का ज़ोर
वो दिन आयेगा, जरूर आयेगा

जब छोटा- बड़ा नही रहेगा
तेरा-मेरा नही रहेगा
वो दिन आयेगा

चाहे हम न ला सके
चाहे तुम न ला सको
मगर लायेगा, कोई न कोई तो लायेगा
वो दिन आयेगा

उस दिन हम होंगे तो नही
पर हम होंगे ही उसी दिन
जैंता ! वो जो दिन आयेगा एक दिन इस दुनिया मे ,
जरूर आयेगा,

(वप्नदर्शी    डा. सुषमा नैथानी)
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कैसा हो स्कूल हमारा

कैसा हो स्कूल हमारा
जहां न बस्ता कंधा तोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न पटरी माथा फोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न अक्षर कान उखाड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न भाषा जख़्म उघाड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा

कैसा हो स्कूल हमारा
जहां अंक सच-सच बतलाएं, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां प्रश्न हल तक पहुंचाएं, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न हो झूठ का दिखव्वा, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न सूट-बूट का हव्वा, ऐसा हो स्कूल हमारा

कैसा हो स्कूल हमारा
जहां किताबें निर्भय बोलें, ऐसा हो स्कूल हमारा
मन के पन्ने-पन्ने खोलें, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न कोई बात छुपाये, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न कोई दर्द दुखाये, ऐसा हो स्कूल हमारा

कैसा हो स्कूल हमारा
जहां न मन में मन-मुटाव हो, जहां न चेहरों में तनाव हो
जहां न आंखों में दुराव हो, जहां न कोई भेद-भाव हो
जहां फूल स्वाभाविक महके, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां बालपन जी भर चहके, ऐसा हो स्कूल हमारा

जहां न अक्षर कान उखाड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न भाषा जख्म उघाड़ें, ऐसा हो स्कूल हमारा
ऐसा हो स्कूल हमारा

Hisalu


उत्तराखंड के विभिन्न जन आंदोलनों में गिर्दा का बहुत बड़ा योगदान रहा है! गिर्दा अपने गीतों एव कविताओं से जनता को जागरूक करते थे! इस प्रकार के आयोजनों से गिर्दा के द्वारा किये गये कार्यो को बल मिलेगा और लोग उनका अनुकरण करंगे! बधाई कार्यक्रम की सफलता के लिए !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

   गिर्दा हमारी यादों, संघर्षों में हमेशा जिंदा रहेंगे[/b][/color]
                                                    (जहांगीर राजू, रुद्रपुर से)

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[/size][/size]हम मेहनकश जगवालों से जब अपना हिस्सा मागेगे
एक खेत नहीं एक देश नहीं हम सारी दुनिया मंगेंगे
का कुमाऊंनी भाषा में इस तरह से अनुवाद कर लोगों में क्रांतिकारी जोश भरा।

ततुक नी लगा उदेख, घुनन मुनइ नि टेक                                                   
                                                   जैंता एक दिन तो आलो उ दिन यो दुनी में
जै दिन कठुलि रात ब्यालि,
                                                  जै दिन फाटला कौ कड़ालो
जैंता एक दिन तो आलो उ दिन यो दुनी   जै दिन नान-ठुली निरौली,
जै दिन त्योर-म्यौर न होलो

जैंता एक दिन तो आलो उ दिन यो दुनी में
जै दिन चोर नि फलाल, कैके जोर नि चलौल

जैंता एक दिन तो आलो उ दिन यो दुनी में
चाहे हम नी ल्यै सकों, चाहे तुम नी ल्यै सकौ

मगर क्वे न क्व तो ल्यालो उ दिन यो दुनी में
उदिन हम नी हूंलो लेकिन हम लै उदिन हूं लो

जैंता ए क दिन तो आलो यो दिन यो दुनी में


Hisalu

Than Lagi Baachi Ki Gai Panguri Hai...
Dwee Dwaa Dwee Dwaa Doodhi Dhaad Footi Hai....
Or Doohne Waali Ka Hiyaa Bhara Hai..
O Ho Re Digo Laali..............

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरापहाड़ के सभी सदस्य को सादर आमंत्रण इस प्रोग्राम के लिए! आये गिर्दा की यादो को संजोये और उनके द्वारा किये गये कार्यो से प्रेणा ले!



Girda was very simple & down-to-earth.

Harish Rawat

सभी साथी पहुचे ......

गिर्दा की रचनाओं को और गहराई से समझने का सुनहरा अवसर हम सभी को मिलेगा ...