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Kumaoni Khadi Holi Exclusive Collection-कुमाऊंनी खड़ी होली संग्रह, अल्मोड़ा से

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 21, 2012, 01:31:29 PM

हलिया

जय बोलो यशोदा नंदन की

जय बोलो यशोदा नंदन की, जय बोलो यशोदा नंदन की
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे,
भाल बिराजे चंदन की... जय बोलो यशोदा नंदन की
मधुर मधुर स्वर बांस मुरलिया,
बाजत यशोदा नंदन की जय बोलो यशोदा नंदन की
जय बोलो यशोदा नंदन की .....
यमुना के तीरे  धेनु चरावे,
हाथ लकुटिया चंदन की, जय बोलो यशोदा नंदन की
जय बोलो यशोदा नंदन की....
दुष्ट दलन कंसासुर मारे,
रक्षा करी सब संतन की जय बोलो यशोदा नंदन की
जय बोलो यशोदा नंदन की......
बृंदाबन में रास रच्यो है,
सहसन गोपी चंदन की जय बोलो यशोदा नंदन की
जय बोलो यशोदा नंदन की....
सारा जग प्रभु चरण लुभाये,
सुख दायक दु:ख भंजन की जय बोलो यशोदा नंदन की
जय बोलो यशोदा नंदन की....

हलिया

श्याम मुरारी के दर्शन को जब बिप्र सुदामा आये हरी..2
बिप्र सुदामा द्वार खडे हैं,
पूछत कृष्ण कहां हैं हरी, बिप्र सुदामा आये हरी
श्याम मुरारी के दर्शन को जब बिप्र सुदामा आये हरी..
हाजिर वासी गये जब भीतर,
द्वार खडे हैं बिप्र हरी, हाँ हाँ बिप्र हरी, बिप्र सुदामा  आये हरी
बालापन के मित्र हमारे,
रोकोनहीं क्षण मात्रहरी, हाँ हाँ क्षण मात्रहरी  बिप्र सुदामा  आये हरी
श्याम मुरारी के दर्शन को जब बिप्र सुदामा आये हरी..
बांह पकड के निकट बैठाये,
रुकमणी चरण दबाये हरी श्याम मुरारी के दर्शन को जब बिप्र सुदामा आये हरी..2
तीन मुट्ठी तंदुल लाये,देने में आये लाज हरी, हाँ हाँ लाज हरी,
श्याम मुरारी के दर्शन को जब बिप्र सुदामा आये हरी..
दुख दरिद्र सब दूर कियो है,
सुख सम्पति सब दीजे हरी, हाँ हाँ दीजे हरी, बिप्र सुदामा आये हरी
श्याम मुरारी के दर्शन को जब बिप्र सुदामा आये हरी..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

होलि कसिकै खेलनुं
होलि कसिकै खेलनुं मन चैन बिना।

अशान्ति मची रै देश में सारा ऐसो स्वराज्य छ आज दिना।
कांग्रेस में दलबंदी है रै क्या करला यौं स्वराज्य लिना।
गुंडन हाथ में पर्वि पड़ी रै। हिन्दु मुसलमान लड़िया जिना
किसान जिमीदार अलग लड़ाया। धनिक ढेपु हालो खाड़ उना।
उधार लै मिलणो मुश्किल है ग्वे। घर में नि हांति चांदी सुना।
द्यो नि हूणा लै अकाल देखींछ अकरो हैग्वे ग्युँ और चना।
असली घ्यूं लै मिलनो नि हांति फैसन में जोर नान तिना।
जागा जागा में मारै काटै गोली चली रैछ देस उना।
होलि कसिकै खेलनुं मन चैन बिना।
भावार्थ: मन के चैन बिना होली कैसे खेलें ? सारे देश में अशांति मची हुई है, ऐसा स्वराज्य है, आज के दिन। कांग्रेस में दलबंदी हो रही है, ये स्वराज्य वाले भकुवे क्या करेंगे ? गुडों के हाथ में पर्वी पड़ी है। (किन्तु खबरदार) हिन्दु, मुसलमान लड़ना मत, उन्होंने किसान और जमींदार को अलग लड़ा दिया है, धनिकों ने अपना धन भूमिगत कर दिया (ऋण मिलना कठिन हो गया)। उधर भी मिलना मुश्किल हो गया, घर में चांदी सोना कुछ भी नहीं है। वर्षा न होने से अकाल के चिन्ह दीखते हैं, गेहूं और चना महंगा हो गया। असली घी भी मिलता नहीं, बच्चों का फैशन में जोर है। जगह-जगह मारकाट मची है – नची मैदानों में गोलियाँ बरस रही हैं।


(source http://www.nainitalsamachar.in/holi-geet-holi-wishes-2009/)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

होली खड़ी

रंग सो है गुलाबी नैनन में।
फागुन मास की मस्त होरिन में
जादू जगा लाई सैनन में। रंग....
चन्द्रकला मुखमंडल सोहे
मधुरस बरसे बैनन में। रंग...
बसन बसन्ती सजे सब अंगन
कौन उमंग उठी मन में । रंग..
कोयल कूके आम की डाली
भँवरा गूँजे फूलन में। रंग..
'चारु' सिंगार सजी ब्रजबाला
फाग मची बृंदाबन में। रंग...

(Source - nainitalsamachar).

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खड़ी होली

आली धूम मची बृज कुंजन में। आली...

फूलि गये टेसु निकसि गये अमुवा, भँवर गुंजारत वन वन में। आली...
आओ गोरी खेलन होली, हो मतवाली फागुन में। आली..
केशर को सब रंग बनो है, छिड़कत है सब सखियन में। आली...
फाल्गुन मास सुहावन आली, उड़त गुलाल सजन तन में। आली..
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, खेले कन्हैया सखियन में। आली...
बाजत ताल मृदंग सुहावन, गावत राग सु साजन में। आली..
महल-महल से ग्वालिन निकली, भूल रही है यौवन में। आलीकृ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तुमको प्यारी नीद देवर तुमको प्यारी जोबन है!
अच्छा हां रे देवर कोयल बोले बागो में!
सहा बोले अमुवा  की  डाल  देवर!
अच्छा हां रे देवर रंग मलाल की कोठरी दीवा!
चौगुना दीप जलाय देवर !
अच्छा हा रहे देवर कटोरा तीक को देखो!
अचल हो देवर लाल पलंग पर लाल बिछौना !ल
लाल ही चादर ओड. देवर !
अच्छा हां रे द्वार छोटी पलंग पर जन ओड़े!
उलटी पलती होय देवर
अच्छा हा रे द्वार छोटी चादर दो जन ओडे
खीचा ताई होय . देवर

 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भर पिचकारी रंग डालो रे होली आयी रसिया 
अबीर गुलाल के थाल भरे है केश्वर रंग छिड्काओ रे!
होली आयी रहे रसिया.. भर पिचकारी० .
हरा रंग डालो गुलाबी रंग डालो सब रंग में रंग!
डालो रे होली आयी रसिया!
भर पिचकारी० ...........
मै तेरा कान्हा तू मेरी राधा ठुमुक ठुमुक कर नाचो! '
रे होली आयी होली... भर पिचकारी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


रंग चंगिलो देवर घर एरेछो !
मेरी नानो देवर घर एरेछो
मेरी सियोनी को बड़ना ले रेछो!
मेरी भलो भलो द्वार घर एरेछो!
कपाली की बिंदिया ले रेछो, मेरी नानो०
छम छम छम छम घुघुरू लेरेछो !
मेरी नानो देवर घर एरेछो !
छाति को मखिया लेरोछो!
मेरी देवर घर एरेछो, हो  मेरी देवर घर एरेछो,
रंग चंगिलो देवर घर एरेछो !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

होरी खेलन राम लखन आये,
लगे बसंत बुरी गये आभार,
चंपा केशर रंग छाये, होली खेलन!
रघुवर लक्ष्मण भारत शत्रुघन संग सखा, हनुमान आये!
फेट गुलाल हाथ पिचकारी, केशर कलश भरी आये!
हिलमिल फाग परस्पर खेरे राम लखन सखियन भाये,
तुलसीदास छवि देखि मगन भये
चरण कमल पर चित काये
होरी खेलन राम लखन आये,

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गोरी प्यारो लागो तेरो झंकारों! गोरी० ...
तुम हो ब्रज की सुंदर गोरी, मै मथुरा के मतवारी!
चुंदरी चादर सभी रंगे है, फागुन ऐसे रखवारो! गोरी० ...
सब सखिया मिल खेल रहे है, दिलवर को दिल है न्यारो!
अब के फागुन अर्ज करत है, दिल कर दे मतवारो!
ब्रज मंडल सब धूम मची है, खेलत साक़िया सब मारो! गोरी० ...
लपटी झपटी को ब्यथा मरोरे, मोरे मोहन पिचकारी!
घूघट खोल गुलाल गलत है, ब्रज करे वो बाजारों! गोरी० ...