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Religious Chants & Facts -धार्मिक तथ्य एव मंत्र आदि

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 03, 2012, 02:08:05 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नमामि भक्त-वत्सलं, कृपालु-शील-कोमलम्।
भजामि ते पदाम्बुजं, अकामिनां स्व-धामदम्।।1||
निकाम-श्याम-सुन्दरं, भवाम्बु-नाथ मन्दरम्।
प्रफुल्ल-कंज-लोचनं, मदादि-दोष-मोचनम्।।2||
प्रलम्ब-बाहु-विक्रमं, प्रभो·प्रमेय-वैभवम्।
निषंग-चाप-सायकं, धरं त्रिलोक-नायकम्।।3||
दिनेश-वंश-मण्डनम्, महेश-चाप-खण्डनम्।
मुनीन्द्र-सन्त-रंजनम्, सुरारि-वृन्द-भंजनम्।।4||
मनोज-वैरि-वन्दितं, अजादि-देव-सेवितम्।
विशुद्ध-बोध-विग्रहं, समस्त
-दूषणापहम्।।5||
नमामि इन्दिरा-पतिं, सुखाकरं सतां गतिम्।
भजे स-शक्ति सानुजं, शची-पति-प्रियानुजम्।।6||
त्वदंघ्रि-मूलं ये नरा:, भजन्ति हीन-मत्सरा:।
पतन्ति नो भवार्णवे, वितर्क-वीचि-संकुले।।7||
विविक्त-वासिन: सदा, भजन्ति मुक्तये मुदा।
निरस्य इन्द्रियादिकं, प्रयान्ति ते गतिं स्वकम्।।8||
तमेकमद्भुतं प्रभुं, निरीहमीश्वरं विभुम्।
जगद्-गुरूं च शाश्वतं, तुरीयमेव केवलम्।।9||
भजामि भाव-वल्लभं, कु-योगिनां सु-दुलर्भम्।
स्वभक्त-कल्प-पादपं, समं सु-सेव्यमन्हवम्।।10||
अनूप-रूप-भूपतिं, नतोऽहमुर्विजा-पतिम्।
प्रसीद मे नमामि ते, पदाब्ज-भक्तिं देहि मे।।11||
पठन्ति से स्तवं इदं, नराऽऽदरेण ते पदम्।
व्रजन्ति नात्र संशयं, त्वदीय-भक्ति-संयुता:।।12||

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

{{ श्री }} _______ हे गौरि शंकरार्ध।ग्ङि यथा त्वं शंकरप्रिया | तथा माम् कुरु कल्याणि कान्तकान्तं सुदुर्लभाम् || {{श्री}} कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्र्वरि । नन्दगोपसुतं देवि पतिम् मे कुरु ते नमः

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

या देवी सर्व भूतेशु शक्ति रूपेण संस्थिता
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमहा !
या देवी सर्व भूतेशु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमहा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रथमे "शैलपुत्री"
द्वितेये "ब्रहाम्चारिणी"
तृतीये "चन्द्रघंटिका"
चतुर्थे "कुष्मांडा"
पंचमे "स्कंदमाता"
सष्ठमे "कत्यायनी"
सप्तमे "कालरात्रि"
आष्ठामे "महागौरी"
नवमे "सिद्धिरात्रि"

ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

विनोद सिंह गढ़िया


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया॥

नवरात्र के आठवें दिन महागौरी की उपासना की जाती है.... भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप हैं, इसलिए अष्टमी के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है.... यह धन, वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं.... इनका स्वरूप उज्जवल, कोमल, श्वेतवर्णा तथा श्वेत वस्त्रधारी है..... यह एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू लिए हुए हैं.... गायन और संगीत से प्रसन्न होने वाली 'महागौरी' सफेद वृषभ यानि बैल पर सवार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

देवी का सातवां स्वरूप 'कालरात्रि' भयानक लेकिन सदैव शुभ फल देने वाला है...इन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है... 'कालरात्रि' केवल शत्रु एवं दुष्टों का संहार करती हैं.... यह काले रंग-रूप वाली, केशों को फैलाकर रखने वाली और चार भुजाओं वाली दुर्गा हैं.... यह वर्ण और वेश में अर्द्धनारीश्वर शिव की तांडव मुद्रा में नजर आती हैं.... एक हाथ से शत्रुओं की गर्दन पकड़कर दूसरे हाथ में खड्ग-तलवार से उनका नाश करने वाली कालरात्रि विकट रूप में विराजमान हैं.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जय माँ बराही देवी !

बराह रूपिणी देवी, दष्ट्रोघृत वसुन्धराम।
शुभदां नील बसनां, बाराही तां नमाम्यहम।

Thul Nantin

Could anybody plz tell more about "Varahi" devi ?
जैसे महेश्वर का मात्रि रूप माहेश्वरी है , ब्रह्मा का ब्रह्मानी , शिव - शिवा , विष्णु - वैष्णवी etc  क्या उसी तरह भगवान विष्णु के वराह अवतार का वाराही है ?