• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Debate - बहस - क्या वास्तव में जातिवाद की राजनीति अब प्रवल हो रही है?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 06, 2012, 05:02:07 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


दोस्तों,

हाल में संम्पन्न हुए उत्तराखंड तीसरे विधान सभा चुनावों के बाद एक बार फिर से जातिवाद की राजनीति की सुरबुराहट सुनायी देने लगी है! जब से प्रथक उत्तराखंड राज्य बना है यहाँ पर अब तक सात मुख्यमंत्री बन चुके है जिनमे से सिर्फ भगत सिह कोशियारी को छोड़ कर सारे मुख्यमंत्री ब्राहमण वर्ग से है! इसका एक स्पष्ट उदहारण सामने है! जिस प्रकार अभी कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद के लिए घमासान हुवा है वहां भी जातिवाद राजनीति का मुद्दा भी उत्तराखंड में सामने आ रहा है ! जबकि उत्तराखंड के ठाकुर समाज का बहुत बड़ा जनाधार है!


क्या वास्तव में जातिवाद की राजनीति अब प्रवल हो रही है जिसके कारण उत्तराखंड में विकास कार्य अवरोध हो रहे है ! इस मुद्दे में हम आपकी राय जानना चाहिंगे!


एम् एस मेहता

www.merapahadforum.com




मेरे हिसाब है हाँ -

जिस तरह अब तक कोशियारी को छोड़ करे सारे मुख्यमंत्री ब्रह्मण बने है, उसे प्रतीत होता है! कोई न कोई राजनीतिक षड़यंत्र जरुर है इसके पीछे वर्ना अभी हरीश रावत भी मुख्यमंत्री बन गये होते !

खीमसिंह रावत

आज समय बदल गया है   :) मै नहीं समझता की ब्राहमण या ठाकुर वाद है जहाँ तक सवाल है राजनीति का वहा सब चलता है  :)
राजनीति है तिकड़म लड़ाने की चीज , इसमे भाई भतीजा, परिवार, गाँव , पट्टी , जिला , ठाकुर ब्राहमण हरिजन सब चलता है |
हमे ये सोचना चाहिए की अच्छे आदमी को हमारी कमान सौपी जाय |

8)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Mahi Singh Mehta बहस - क्या उत्तराखंड में जातिवाद की राजनीती प्रभावी हो रही है ? Thakar Vs Brahmin?

http://www.merapahadforum.com/development-issues-of-uttarakhand/debate-2190/msg90947/ — at Noida, Uttar Pradesh.http://www.merapahadforum.com/development-issues-of-uttarakhand/debate-2190/msg90947/ www.merapahadforum.comLike ·  · Unfollow Post · Share · 2 hours ago

यह उत्तराखंड का 'संयोग' कहा जाय या कोई 'चाल'! उत्तराखंड के 7 में से 6 मुख्यमंत्री ब्रह्मण वर्ग से हैं। यदि इसमें कोई चाल है तो यह हमारा दुर्भाग्य है। लेकिन यहाँ पर निम्नांकित बात भी जातिवाद को मजबूत कर रही है।
2007 का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने श्री भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में लड़ा और पार्टी की जीत हुई लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बारी आयी तो श्री कोश्यारी को नजरंदाज कर दिया गया। केन्द्रीय नेतृत्व (श्री आडवाणी ) की मंशा से श्री खंडूरी जी को राज्य की कमान सौंपी गयी। उस वक्त लोग चर्चा करते तो वे कहते थे - "अरे यार सब बामणी चाल छू" अर्थात सब ब्रह्मणवाद वाली चाल है और सब लोग श्री आडवाणी को इसका जिम्मेदार मान रहे थे और 2011 के विधानसभा के चुनाव में सबक सिखाने की सोच रहे थे।

2011 के विधानसभा चुनाव में भी यही देखने को आया। उत्तराखंड कांग्रेस के कद्दावर नेता श्री हरीश रावत को भी दरकिनार कर दिया गया और श्री बहुगुणा जी मुख्यमंत्री के रूप में टपक पड़े।

इस प्रकार के निर्णय बार-बार सामने आये तो यह सवाल उठाना स्वाभाविक है। भगवान जाने।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरे हिसाब से उत्तराखंड में अब जातिवाद की राजनीती हावी है! जहाँ एक तरफ शिक्षित समाज जातिवाद की राजनीती को नकार रहा है वही दूसरी तरफ देश के कई राज्यों में लोग शिक्षित होने के बाबजूत भी चुनावों में सिर्फ जाति के हिसाब से वोट करते है! उत्तराखंड में शायद नेत्रत्व में जातिवाद की राजनीती सामने आयी है और लोगो ने जो विधायक  या सांसद चुने है वहां पर विकास के आधार या पार्टी को देखकर वोट दिया है!

उत्तराखंड में राष्टीय पार्टियों ने शायद कोशिश की है वहां भी राजनीती जाति के हिसाब से खेली जाय! यहाँ मुख्यमंत्री विधायको द्वारा चुना हुवा नेता नहीं होता बल्कि केंद्र में बैठे हुम्करानो के इशारों पर मुख्यमंत्री बनते है !

Ajay Pandey

आदरणीय ms  मेहता जी एवं मेरा पहाड़ फोरम के सभी सदस्य
सबसे पहले तो आपका धन्यवाद जो आपने यह बहस में हमें अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया है तो आज में इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करना चाहूँगा महान दार्शनिक थोरो ने अपनी पुस्तक a  reduction  of  politics  एंड reducing  the  castism  में लिखा है की राजनीती तभी सफल हो सकती है जब राजनीती जातिवाद से परे हो और विकास भी तभी हो सकता है जब राजनीती में किसी ऐसी जाती को चुना जाए जो अच्छी हो और विकास करा सके पर ऐसा होता नहीं लोग चाहते ही नहीं की brahman  समाज से कोई चुनाव लड़े जो लड़ता है brahman  समाज से तो उसके मत काट दिए जाते हैं हाँ उत्तराखंड के विकास में जातिवाद हावी है ठाकुर समाज विकास की और ध्यान नहीं देता बल्कि सब खा जाता है उत्तराखंड की राजनीती में brahman  समाज के लोगो को आगे आना चाहिए तभी उत्तराखंड का विकास हो paayega  वैसे अगर महान दार्शनिक थोरो और इमर्सन की बातों को उत्तराखंड के लोग माने तो उत्तराखंड का विकास जातिवाद से परे होता और जातिवाद हावी नहीं होता उत्तराखंड के विकास में पर नहीं जातिवाद ही है तो कोई ऐसा व्यक्ति चुने जो विकासकरे तो वह brahman  समाज ही है पंचायत चुनाव में भी कोई brahman  प्रतिनिधि ही खड़ा हो तभी उत्तराखंड का विकास हो सकेगा और महान दार्शनिक वूड्स ने भी कहा था की राजनीती तभी सफल होगी जब कोई अच्छे समाज का व्यक्ति खड़ा हो और उत्तराखंड का विकास किसी अच्छे प्रतिनिधि को खड़ा करके ही संभव होगा ऐसा मेरा मानना है और चाणक्य जी भी इस श्लोक में एक सच्चे राजनीतिज्ञ के बारे में कहते हैं यह श्लोक तो याद नहीं है पर भावार्थ है
राजनीती में जातिवाद हावी है तो ऐसा प्रतिनिधि चुने जो विकास के योग्य हो मेरा मानना है की आज उत्तराखंड के विकास के लिए ब्रह्मिन समाज से कोई खड़ा नहीं है तभी विकास नहीं हो रहा है उत्तराखंड का विकास तभी होगा जब brahman  आगे आएगा
धन्यवाद
उत्तराखंड हित में अजय पाण्डेय

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: ajaypandey on July 06, 2012, 10:09:27 AM
आदरणीय ms  मेहता जी एवं मेरा पहाड़ फोरम के सभी सदस्य
सबसे पहले तो आपका धन्यवाद जो आपने यह बहस में हमें अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया है तो आज में इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करना चाहूँगा महान दार्शनिक थोरो ने अपनी पुस्तक a  reduction  of  politics  एंड reducing  the  castism  में लिखा है की राजनीती तभी सफल हो सकती है जब राजनीती जातिवाद से परे हो और विकास भी तभी हो सकता है जब राजनीती में किसी ऐसी जाती को चुना जाए जो अच्छी हो और विकास करा सके पर ऐसा होता नहीं लोग चाहते ही नहीं की brahman  समाज से कोई चुनाव लड़े जो लड़ता है brahman  समाज से तो उसके मत काट दिए जाते हैं हाँ उत्तराखंड के विकास में जातिवाद हावी है ठाकुर समाज विकास की और ध्यान नहीं देता बल्कि सब खा जाता है उत्तराखंड की राजनीती में brahman  समाज के लोगो को आगे आना चाहिए तभी उत्तराखंड का विकास हो paayega  वैसे अगर महान दार्शनिक थोरो और इमर्सन की बातों को उत्तराखंड के लोग माने तो उत्तराखंड का विकास जातिवाद से परे होता और जातिवाद हावी नहीं होता उत्तराखंड के विकास में पर नहीं जातिवाद ही है तो कोई ऐसा व्यक्ति चुने जो विकासकरे तो वह brahman  समाज ही है पंचायत चुनाव में भी कोई brahman  प्रतिनिधि ही खड़ा हो तभी उत्तराखंड का विकास हो सकेगा और महान दार्शनिक वूड्स ने भी कहा था की राजनीती तभी सफल होगी जब कोई अच्छे समाज का व्यक्ति खड़ा हो और उत्तराखंड का विकास किसी अच्छे प्रतिनिधि को खड़ा करके ही संभव होगा ऐसा मेरा मानना है और चाणक्य जी भी इस श्लोक में एक सच्चे राजनीतिज्ञ के बारे में कहते हैं यह श्लोक तो याद नहीं है पर भावार्थ है
राजनीती में जातिवाद हावी है तो ऐसा प्रतिनिधि चुने जो विकास के योग्य हो मेरा मानना है की आज उत्तराखंड के विकास के लिए ब्रह्मिन समाज से कोई खड़ा नहीं है तभी विकास नहीं हो रहा है उत्तराखंड का विकास तभी होगा जब brahman  आगे आएगा
धन्यवाद
उत्तराखंड हित में अजय पाण्डेय


Ajay pandey, i endorse your views on this subject.