• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Articles & Poem on Uttarakhand By Brijendra Negi-ब्रिजेन्द्र नेगी की कविताये

Started by Brijendra Negi, August 17, 2012, 01:27:49 AM

Brijendra Negi

प्रौढ़ शिक्षा  

सार्या साल
प्रौढ़ शिक्षा  मा
पढ़ना कु बाद
पुछन बैठ व
हे नौनी---!
जरा
वे आखर सिखादी
ज्यान्से
'यूंक' नाम आन्द।   
---

Brijendra Negi

(कुछ परिभाषा इनी भि)
(1)

मर्द

मार खाकी
निह्वा दर्द।
गाली सूणी
नि प्वाडु फर्क।
दारू कु ह्वा
जैफर मर्ज।
छकै ह्वा
वैफर कर्ज।
द्वी-चार
मुकदमा भी दर्ज।
इनै-उनै जा
अप्णि गर्ज।
जैकु निह्वा
क्वी भी फर्ज।
वी ह्वा
असली मर्द।
..

Brijendra Negi

(2)
कज्याण

कर्ज ल्हेकि
जै थै ल्ह्याण।
अगाल-पगाल
कैकि खवाण।
आठ-दसूँ कि
ह्वा घिमसाण।
काम-धाम कु
कै कणाण। 
गाली-गलौज मा
गाँ गंज्या।
बत्था-बत्थौ मा
घात-घत्या।
स्वारा-भारों कु
मुख उस्या।
वी ह्वा
असली क्ज्याण।
...

Brijendra Negi

(3)
रुमुक

रुमुक प्वाड़ली
सीं मवासि खुण 
कभि देन्दा छा
जो गाली
आज वी
रुमुक प्वड़ना कु
दिन जग्वलदी
किल्लैकि ---?
रुमुक प्वड़दी
दारू पेकी
वो
अफु तै
सबसे जादा
भग्यान समझदी। 
...

Brijendra Negi

(उत्तराखण्ड मे बादल फटने के कारण बरबादी पर कविता तो लिखी परंतु इसमे मेरी आप लोगो से विनती है की इसमे संसोधन कर मुझे कृथार्थ करे)

मेघ विष्फोट

उमड़-घुमड़-श्यामल जलधर,
घनघोर-सघन-प्रचंड-प्रबल।
उन्माद-क्रोध-क्रीड़ा-कौतूहल
दामिनी दहक रही हर-पल।

निर्मम-निष्ठुर-गर्जन-तर्जन,
नृशंश-निरंकुश-तांडव नर्तन।
वसुधा के वक्ष:स्थल पर,
विकल-वेदना-करुण-विवर्तन।

मेघ-विष्फोट-घात-प्रतिघात,
प्रतिफल भीषण-जल-संघात।
छितिज-क्षीण, धरा-विचलित,
अवशेष-न-शेष धरणी चिर-संचित।

चर-अचर नष्ट अति बेग,
नगर-गाँव के निशां-न-शेष।
जीवन-करुण-कथा-विशेष,
धरती डोली देख-अवशेष।
...

Brijendra Negi

मान्योंडर

प्रकृतिक संसाधनु से परिपूर्ण
पर सौ-सुबिधों से अपूर्ण
उत्तराखंड कु यकुलु
मजबूर, असहाय बृध
झुकीं कमर, हताश मुखिड़ी
रकर्यान्द सक्स्यांद, तंगत्यांद
उकलि-उंदरी कु बाटु पर
रुफड़ान्द, रबड़ान्द, बबड़ान्द
रोज डाखाना आंद-जांद
कि पतनि मान्योंडर
कै दिन आ जान्द।
       ...

Brijendra Negi

मलै चटणा छीं लुण्ड

चुनौ मा बुलै जो उण्ड
चुनौ बाद खिस्कै फुण्ड
अफु देहरादूण मा टिकै कि मुंड
विकास योजनों का उडै फंड
उत्तराखंड थै कैकि उतणदंड
मलै चटणा छीं लुण्ड।
...

Brijendra Negi

बल

'बल' चुनौ का नौ सुणदी
कपाल ऐंचा प्वड़ि 'बल'
पर जातिगत 'बल' से
चुनौ मा इन्नु मीलू 'बल'
कि अब फजल-ब्यखुनि
वूँकु निच्वड़नु 'बल'।
...

Brijendra Negi

जनतंत्र

जनतंत्र में
जनता द्वारा
जनता के लिए
नेता का शासन है
जनतंत्र में नेता जी स्वतंत्र है
जनता चुनाव उपरांत परतंत्र है
चुप रहना ही मूलमंत्र है
अन्यथा एक षड़यंत्र है
जिस पर टूटता पूरा राजतंत्र है।

Brijendra Negi

मै हार गया उसी क्षण

मैं विजेता था उस क्षण तक
मतदान नहीं किया था जब तक
मै हार गया उसी क्षण
बिन सोचे मतदान किया जिस क्षण।
किस्मत को अपनी किया बंद
नेता जी को किया स्वछन्द
किए विकास के रास्ते कुंद
जाती-धर्म को किया बुलंद 
मै हार गया उसी क्षण
बिन सोचे मतदान किया जिस क्षण।

बार-बार आया यह क्षण
हर बार मगर मै चूका हूँ
कभी जाती, कभी धर्म
कभी छेत्रवाद मे उलझाया हूँ
भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार को
चुनाव के दिन भुलाया हूँ
मै हार गया उसी क्षण
बिन सोचे मतदान किया जिस क्षण।
...