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Articles & Poem on Uttarakhand By Brijendra Negi-ब्रिजेन्द्र नेगी की कविताये

Started by Brijendra Negi, August 17, 2012, 01:27:49 AM

Brijendra Negi

(काले धन और नेताओ पर एक कविता बिना मात्रा के प्रयोग कर लिखने की कोशिश की है कृपया अपने विचार दे)
शरण हर पल

पल-पल-पल, अधम-करम-रत,
जतन-जतन कर, गहन-जतन।

सरक-सरक कर, गमन-करत,
कनक-कनक सब, चरत-धरत।

बचत-बचत कर, बचत-बचत,
परत-परत-दर, परत चढ़त।

छल-बल-खल, गरल रग-रग,
नव-नग, रजत-पक्ष, पग–पग।

अतल-अधम, ठसक-जरठ-फण,
खग-खर-गज-जड़, करत पद-पण।

चहक-महक, यश-अपयश फहरत,
दर-दर भटक, जन-मन लत-पत।

धन-धन-धन, भरत-पथ-अक्ष-दल,
शत-शत नमन, शरण हर पल। 

Brijendra Negi

दैं किस बल्द रिंगणू छै

खेती-पाती छ्वड़ड़म त्वे दुख नि ह्वे,
हैल-तांगल-बंसुला तिल टांड चढें
कच्ची-पक्की से जो रिस्ता ज्वड़ी
भैरि-भितिरि तेरी बांझ प्वड़ी।

पढै-लिखै तिल जम्मा नि कै,
इसकोला रस्ता कभी नि गै,
तु कॉपी-किताब सभी फड़दु रै,
कभि बाटा-कुबाटा ध्वल्द रै।

दुनिया उठ कै पढ़दी रै,
तु ट्वटुकु मुंड कु-निन्द रै,
सब बग्त कि कीमत समझदा रै,
तू बक्त थै बर्बाद कर्दू रै।

दुनिया ऐथर-ऐथर बढ़दि रै,
तु पिछनै-पिछनै जांदु रै,
जब दुनिया इसकोल जान्दी छै,
तु कल्यो की कंडी सर्दु रै।

आज तु खैरि खाणू छै,
दारु की लत नि छ्वड्णु छै,
अगाल-पगाल अर काम खुण,
दैं किस बल्द  रिंगणू छै,।
     ...

Thul Nantin

अति सुन्दर क्षणिकाएं | पर मन नहीं भरा | waiting for more.....
Quote from: Brijendra Negi on October 29, 2012, 11:57:12 AM
क्षणिकाएं

   राहत

सूखा राहत
वातानुकूलित गाड़ियों की यात्रा।
बाढ़ राहत
हैलिकैप्टर की हवाई यात्रा॥

   राजनीति

उनकी राजनीति,
रंग ला रही है।
राज्य से हार कर वे,
केंद्र में आ रहे हैं।।

   परोपकार

परोपकार की नीति ने
कुछ ऐसा रंग दिखाया
चन्दा लेने पैदल निकले थे
वापस अपनी कार से आये।


पर्सनल्टी

हर रोज बॉस के साथ,
पर्सनल-टी लेती है।
इसलिए कार्यालय में,
उनकी अलग पर्सनल्टी है।

Thul Nantin

सफल  प्रयोग | काले धन व नेताओं की तरह कविता भी ढक छुप कर बहुत कुछ कह जाती है |
Quote from: Brijendra Negi on October 31, 2012, 09:53:57 AM
(काले धन और नेताओ पर एक कविता बिना मात्रा के प्रयोग कर लिखने की कोशिश की है कृपया अपने विचार दे)

शरण हर पल

पल-पल-पल, अधम-करम-रत,
जतन-जतन कर, गहन-जतन।

सरक-सरक कर, गमन-करत,
कनक-कनक सब, चरत-धरत।

बचत-बचत कर, बचत-बचत,
परत-परत-दर, परत चढ़त।

छल-बल-खल, गरल रग-रग,
नव-नग, रजत-पक्ष, पग–पग।

अतल-अधम, ठसक-जरठ-फण,
खग-खर-गज-जड़, करत पद-पण।

चहक-महक, यश-अपयश फहरत,
दर-दर भटक, जन-मन लत-पत।

धन-धन-धन, भरत-पथ-अक्ष-दल,
शत-शत नमन, शरण हर पल।

Brijendra Negi

क्षणिकाएं

चुप्पी

उनकी चुप्पी
भ्रष्ट्राचारियों की आबरू रख रही है
और भारत माता बे-आबरू होकर
गलियों में बिलख रही है।


रूपये पेड़ों पर नहीं उगते

रूपये पेड़ों पर नहीं उगते हैं
जब से एनाउंस हुआ है
रूपये का कागज हमसे बनता है
पेड़ों को कहते सुना है।


यादगार

वे मेमोरियल ट्रस्ट को
यादगार बना रहे हैं
उनके नाम को व्हीलचेयर से उछाल कर
घर-घर पहुँचा रहे हैं।


आदर्श

वे विकलांगों के आदर्श कहलाते हैं
इसलिए अपनी कार को
व्हील चेयर के पहियों से चलाते  हैं।


कोल-गेट

गरीब  के चूल्हे के कोयले से
दाँतो में चमक बिखरी जिनकी
करोड़ो रूपये के कोल-गेट से
मुख पर कालिख पुती उनकी।

Brijendra Negi

उत्तराखंड मा अब नि रयेन्द

क्वी भी कारिज जब हुरेन्द
दारू कु बिना पूरु नि हून्द
सबसे पैलि भेंट निकलवान्द
देल्ली-देल्ली मा मुंड टिकवान्द
ठ्यकादारु ऐथर हथ ज्वड़वान्द
बड़ी मुसकिल से ड्यारम ल्यान्द
सबसे उच्चु आसण सजान्द
दस बार देखी तालु लगान्द
पुट्गा कीसन्द चाबी लुकान्द
भित्री-भितर दिल दुखान्द
क्य कन्न दारू जरूर चयेन्द
एक कूणा पर मुर्दा रैन्द
हैका कूणा पर दारू पियेन्द
मजबूरी मा क्या नि करेन्द
उत्तराखंड मा अब नि रयेन्द।

Brijendra Negi

देवभूमि

उत्तराखंड देवभूमि,
दिव्य, भव्य महान चा,
क्या त्यारा गुण गाऊँ,
माता त्वेथै प्रणाम चा।

सबसे सुंदर रूप त्यारू,
तन-मन पवित्र चा,
माता तेरि झलक पाणकु,
दुनिया सर्या बेचैन चा।

सर्व शक्तिमान ब्रह्माजी ल
जब पृथ्वी-लोक निर्माण काई
देवी-द्यपतों खुण ब्रह्माजी ल
उत्तराखंड कु विधान काई।

नर-नारैण कि कथा यख,
बद्रीश यख, केदार यख,
गंगा-जमुना कु अवतरण यख,
शिवजी कु निवास यख।

हर-की-पैड़ि-हरिद्वार यख
चार-धाम पवित्र यख
पंच-प्रयाग, पंच बद्री अर
स्वर्गरोहिणी सीढ़ी यख।

जीवन दायिनी जड़ी-बूटी
कालजयी संजीवनी यख
बिगरैला फुलूं कि घाटि
अर कस्तूरि मृग यख।

गाड़-गदिनी-रौली कखि,
कखि भ्याला पाखा छन,
हैरि-भैरि डालि कखि,
कखि खर्स्यणा डांडा छन।

झरना-छुयाँ ब्वग्दी कखि
कखि निर्पणि धार छन
पाणि का मगरा कखि
कखि छाला नवल्ला छन।

ह्यू कि चद्दर सफ़ेद कखि
कखि बरखा कि बूंद नीच
सारी सौड़ सट्टी कखि
कखि उखड़ी सारी छन।

बन-बनिका चखुला कखि,
कखि रिक्क-बाघ-बाज छन,
गूणी-बाँदर-स्याल कखि
कखि घ्वीड़-काखड़ चाँठा छन।

बन-बनिकी रूप त्यारा,
बन-बनिकी कथा छन,
कखि बिगरैला फूल छन,
कखि विषैला काँड़ा छन।
      ...

Brijendra Negi

(उत्तराखंड के स्थापना दिवस 9-11-2012 पर विशेष)

खंड-खंड हुआ उत्तराखंड

स्थापना के बारह वर्षों में
खंड-खंड हुआ उत्तराखंड
खंड-खंड में बटें हुये हैं
गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल
इन सबसे अलग मचा है
तराई और मैदानी दंगल
स्थापना के बारह वर्षों में
खंड-खंड हुआ उत्तराखंड।

खंडित जिसकी राजधानी है
खंडित जिसका सचिवालय
खंडित हक पन-ऊर्जा पर है
खंडित हक जल संसाधन
खंडित जिसकी बोली-भाषा
खंडित राज-विचारधारायें है
स्थापना के बारह वर्षों में
खंड-खंड हुआ उत्तराखंड।

राज्य बना पर्वतीय खण्ड का   
बहुमत तराई-मैदानी खण्ड का। 
त्याग-बलिदान पर्वतीय खण्ड का
हक प्रथम तराई-मैदानी खण्ड का।
गरीबी-बेगारी पर्वतीय खण्ड में
कल-कारखाने तराई-मैदानी खण्ड में।
स्थापना के बारह वर्षों में
खंड-खंड हुआ उत्तराखंड।


खंड-खंड हुये सपने सारे,
खंड-खंड हुई आशाएँ,
खंड-खंड हुये स्कूल-कॉलेज,
खंड-खंड हुई स्वास्थ्य सेवायें,
खंड-खंड हुये घर और आँगन,
खंड-खंड हुआ उत्तराखंड।
स्थापना के बारह वर्षों में
खंड-खंड हुआ उत्तराखंड।
   ....

bhandari58


बहुत खूब नेगीजी.

Quote from: Brijendra Negi on October 23, 2012, 11:16:31 AM
नेता बणा दे

सुलार-कुर्ता सिला दे, फतुखी एक दिला दे,
मुंड मा ट्वप्ला धरा दे, मिथै नेता बणा दे।
पढ़े-लिखै बस की नी, इस्कोल मिल जाणु नी,
खैरि काम कन्नु नी, बिना कमया भि रैणु नी।
सुलार-कुर्ता सिला दे, फतुखी एक दिला दे,
मुंड मा ट्वप्ला धरा दे, मिथै नेता बणा दे।

शरम-ल्याज मी जम्मा नी, अकल की जर्वत नी,
भल्लि सीरत चैन्दी नी, स्वाणी सूरत जरूरी नी। 
गाली तेरि सिखईं छी, चुगली कन्न आंदी चा,
बचन त्वड्ना जणदु छौ, कज्याण मेरी छ्वड़ि चा।
सुलार-कुर्ता सिला दे, फतुखी एक दिला दे,
मुंड मा ट्वप्ला धरा दे, मिथई नेता बणा दे।

चंदा ल्हीणु जणूदु छौ, झूठु रूणु आँदू चा,
रामलीला मा कतगै दा, बिलाप म्यारु कर्यू चा।
कभि पधानुकु टिकिट ल्य्होलु, कभि ब्लॉक कु चुनाव द्यखुलु,
कभि राज्य कु चुनाव ह्यलु, कभि संसद कु चुनाव लड़लु।
साल भर कु काम यो, बारा मैना कु धाम यो,
हींग चा न फिटकरी, रंग स्वाणु-स्वाणु यो। 
सुलार-कुर्ता सिला दे, फतुखी एक दिला दे,
मुंड मा ट्वप्ला धरा दे, मिथै नेता बणा दे।

Brijendra Negi

(दीपावली के हार्दिक शुभकामनाएं)
     
शुभ दीपावली

तिल्लु   कु  तेल, कपासकि बाति
जग-मग  जगीं,  औंसि  कि राति
जी रयाँ  पूत,  अमर  रयाँ  नाति
जुग-जुग-जुग  रै,  तुम्हरी  ख्याति
हत्थ-जोड़ि विनती बग्वाल कि राति।
         ...