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Jauljibi & Thal Fair Pithoragarh Uttarakhand-जौलजीवी मेला भारत-नेपाल-तिब्बत

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2012, 10:50:15 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dosto,

We are sharing here information about historical Jauljibi Fair which held every year on every year on Makar Sankranti  at Jauljibi, 68 km. from Pithoragarh, the confluence of the rivers Kali &  Gori. People come even from Nepal  to this fair to sell horses, ghee foreign goods & take back food grains,  jiggery etc. A similar fair is held at Thal on Vaishakh Sankranti (14th April).

M S Mehta


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Wednesday, 18 November 2009 01:57



Amar Ujala reports on Jauljibi Mela

जौलजीबी (पिथौरागढ़)। जौलजीबी मेले में सोमवार को भारी भीड़ उमड़ी। आज सोमवती अमावस्या तथा मार्गशीर्ष माह की संक्रांति होने के कारण सैकड़ों लोगों ने काली और गोरी के संगम पर स्नान किया। बाद में ज्वालेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची हुई है। रविवार को देर रात तक लोग कार्यक्रमों का आनंद उठाते रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि हिल्ट्रान अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि जौलजीबी मेला अब पूरे राज्य की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से मेला स्थल का विकास और मेला आयोजन के लिए धन देने का आग्रह करेंगे। उन्होंने दीप जलाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत कराई। विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक नबियाल और व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा मौजूद थे। उन्होंने मेले में धन की कमी से पैदा हो रही समस्या की जानकारी दी। मुख्य मंच पर कल रात स्थानीय स्कूली बच्चों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रम पेश किए। आज मेले में ज्यादा भीड़ उमडऩे से व्यापारियों के चेहरे खिल गए। स्टालों में भी अच्छी खासी भीड़ देखी गई। मेले में ऊनी सामान की बिक्री जोर पकडऩे लगी है। मेलाधिकारी नवनीत पांडे ने कहा कि सरकारी तौर पर मेला 19 नवंबर तक चलेगा। तब तक सभी सरकारी विभागों के स्टाल लगे रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्टालों से लोगों को अहम जानकारियां मिल रही हैं।



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जौलजीबी (पिथौरागढ़)। जौलजीबी मेले में शनिवार को देर रात तक लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठाने के लिए जमे रहे। पिथौरागढ़ से आए सुरेश प्रसाद सुरीला एंड पार्टी ने मेले में लोकगीतों का ऐसा रंग जमाया कि लोग कड़ाके की ठंड के बावजूद मेले का आनंद लेते रहे। स्थानीय कलाकारों ने भी खूब रंग बिखेरा। रविवार होने के कारण आज मेले में अपेक्षाकृत ज्यादा भीड़ रही। सामान की खरीददारी भी तेज होने लगी है। नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंच रहे हैं। जौलजीबी में भारी रौनक है।

शनिवार को मेले का औपचारिक उद्घाटन होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम शुरू हो गई। सुरेश प्रसाद की टीम ने एक से बढ़कर एक कुमाऊंनी गीत पेश किए। उन्होंने लोगों को कई बार थिरकने के लिए मजबूर कर दिया। बाद में राजकीय इंटर कालेज बलुवाकोट, कालिका, जौलजीबी, सरस्वती शिशु मंदिर के कलाकारों ने भी रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। आज मेले में दूरदराज से सैकड़ों लोग पहुंचे थे। व्यापारियों के अनुसार खरीददारी भी जमकर हुई है। सरकारी विभागों के स्टालों में लोगों का रेला लगा हुआ है। कल मार्गशीर्ष संक्रांति पर जौलजीबी में ज्यादा भीड़ उमडऩे की संभावना है। मेले का मुख्य पर्व भी कल होगा। सरकारी तौर पर मेला 19 नवंबर को संपन्न हो जाएगा लेकिन हर बार की तरह इस बार भी मेला 22 नवंबर तक चलता रहेगा। मेले में शांति व्यवस्था के लिए इस बार व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

Devbhoomi,Uttarakhand

एतिहासिक जौलजीवी मेले की तैयारियां शुरू

राज्य के प्रसिद्ध व्यापारिक जौलजीवी मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिलाधिकारी ने बुधवार को मेले की तैयारियों के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। काली और गोरी नदी के संगम पर लगने वाले एतिहासिक जौजलीवी मेले का आयोजन 14 नवंबर से 20 नवंबर तक होगा। बुधवार को जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर अब तक की गई तैयारियों की समीक्षा की।


उन्होंने सुरक्षा के लिए तैनात किए जाने वाले जवानों की आमद दो रोज पूर्व जौलजीवी थाने में कराए जाने, मेले के दौरान ओवरलोडिंग रोकने, भारत-नेपाल के बीच बने झूला पूल को एक घंटा अधिक समय तक खोले रखने, मेले के दौरान रोडवेज की पांच अतिरिक्त बसों का संचालन किए जाने, मेले के दौरान विकास प्रदर्शनी लगाने,

पशुपालकों के लिए कृषि बीज, खाद, उपकरण आदि उपलब्ध कराने, सफाई व्यवस्था के लिए जौलजीवी व्यापार संघ, क्षेत्रीय पटवारी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धारचूला में समन्वय स्थापित करने, आपात स्थिति से निपटने के लिए 108 सेवा उपलब्ध रखने, मेले में खानपान व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।


उन्होंने लोनिवि और ग्रिफ के अधिकारियों को मार्ग की दशा में सुधार लाने और खतरे वाले स्थानों पर जेसीबी तैनात रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राघव लंगर, एडीएम बीएल राणा, उपजिलाधिकारी नरेश दुर्गापाल, उपजिलाधिकारी धारचूला प्रमोद कुमार सहित तमाम विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

Source Dainik Jagran

Risky Pathak

Jauljibi fair was started by Raja Pushkar Pal in 1871.

More information in attached pdf file. Copied from amar ujala

विनोद सिंह गढ़िया

जौलजीबी के ऐतिहासिक मेले की नींव 143 साल पूर्व अस्कोट के पाल राजाओं ने रखी थी। अंग्रेजों ने 15 साल तक इस मेले का संचालन किया। रियासत के भारत में विलय के 8 साल बाद सरकार मेले का संचालन करने लगी।
पाल राजवंश के पास मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि व्यापारिक महत्व के जौलजीबी मेले की नींव अस्कोट रियासत के राजा पुष्कर पाल ने 1871 में रखी थी। उसी समय जौलजीबी में ज्वालेश्वर महादेव का मंदिर भी बनाया गया। पुष्कर पाल के बाद अस्कोट रियासत की गद्दी संभालने वाले राजा गजेंद्र पाल, विक्रम पाल ने भी मेले का संचालन किया। युवराज टिकेंद्र पाल के नाबालिग होने के कारण 1938 से 1953 तक रियासत का कामकाज अंग्रेजों ने अपने हाथ में लिया। इस दौर में मेले का संचालन अंग्रेजी हुकूमत करती थी।
1953 से 1967 में रियासत के भारत में विलय होने तक राजा टिकेंद्र पाल ने मेले का संचालन किया। 1967 से 1974 तक भी पाल रियासत के वारिस ही मेले की व्यवस्थाओं को देखते रहे। पाल राजवंश के वर्तमान वारिस राजा टिकेंद्र पाल के पुत्र कुंवर भानुराज पाल बताते हैं कि वर्ष 1975 में यूपी सरकार ने मेले को अपने हाथों में ले लिया। तब से मेला देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन 14 नवंबर से मनाया जाने लगा।


साभार - अमर उजाला