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Poems written by Krishna Nayal - कृषण नयाल जी की कविताएं !

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 19, 2012, 10:50:06 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

I am sharing poems written by Krishna Nayal ji who basically hails from District Bageshwar.  Mr Nayal has written many heart touching poems on social issues. Hope you will appreciate the poem written by Nayal ji.

Here is the first poem which he has written in kumoani.

Krishna Nayalपहाडंक परछाई....

दाज्यू म्यर पहाड़ लोगो हाथ मैं, नई- नई मोबाइल देखिनी.
चाल ढाल बदली- बदली नई- नई इस्टाईल देखनी..

ग्यु पिसहू जानी ब्वारी, बीस रुपे रिचार्ज लयूनी.
आज पिसाई महंगी हगे, सास सोरागे भली ठगुनी..

सास सोरागे समझ नी पान, ब्वारी आपुण चतुराई देखुनी.
ईस्कुलक फीसहे डबल नी हुन, चेली SMS पैक डलौनी..

आज प्रेक्टिकल फाइल लिनछु, इम्तिहान टाइम बतूनी.
बाबु थोडा ग़ुस्स हूनी, इजा आपुण भलाई देखुनी..

गोवामा मोबाइल लटकाबे बुबू, राती पर बाजार लजानी.
घर बे आमा फ़ोन करने, उनमें क़स देर हैजनी..

कसहोल म्यर पहाड़क भविष्य,दाज्यू पहाडंक परछाई देखिनी.
चाल ढाल बदली- बदली नई- नई इस्टाईल देखनी..

दाज्यू म्यर पहाड़ लोगो हाथ मैं, नई- नई मोबाइल देखिनी.
चाल ढाल बदली- बदली नई- नई इस्टाईल देखनी..

कृष्णा नयाल..


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Krishna Nayal

"बहुमूल्य जीवन"...

गुमनामी की चांदर ओढे, जीना भी कोई जीना नहीं.
बहुमूल्य है तेरा जीवन, मिट्टी का तू खिलौना नहीं..

अपने लिए तो सब जीते है, कभी दुसरो के लिए भी जीकर देखो,
भूके पेट जो सोते है उनकी, भूख मिटाकर तो देखो..

कभी किसी को तडफता छोड़कर,अपनी खुशिया संजोना नहीं.
बहुमूल्य है तेरा जीवन, मिट्टी का तू खिलौना नहीं..

जरुरत मंदों का साथ निभाकर, थोरा सकून पाकर देखो.
अँधेरे घर के कोने में, एक दीप जलाकर देखो..

पवित्र रखना अपने मन को, मन में अहंकार पिरोना नहीं.
बहुमूल्य है तेरा जीवन, मिट्टी का तू खिलौना नहीं..

खुदा की मर्जी से हमको, निस्वार्थ एक जीवन मिला है.
ये बैग कलियाँ उसकी, उसी का ये पुष्प खिला है..

मुरझाने ना देना बगीचा मन का, पश्चाताप में फिर रोना नहीं.
बहुमूल्य है तेरा जीवन, मिट्टी का तू खिलौना नहीं...

कृष्णा नयाल..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Krishna Nayal

"दो फूलो की दास्तान"....

एक ही डाली में खेले थे दो फूल,दोनों में आयी थी महकती बहार.
सुख- दुःख कहते एक दुसरे को,दोनों का इतना ही था अपना संसार..

तोड़ दिये दोनों फूल एक दिन माली ने,अब बिछड़ गया था उनका प्यार.
एक फूल सजा अर्थी पर,एक बन गया गले का हार..

जो फूल सजा था अर्थी पर,उसने भेजा एक पैगाम..
लिखकर अपनी दुखी दास्तान,खत भेजा साथी के नाम..

जिस तरह डाली से बिछड़े हम,लाखो सहे हमने गम.
क्या कहूँ में तुमसे आगे, आँखे ना करना अपनी नम..

अर्थी पर चढ़कर आया था,अब चिता में जल जाऊंगा.
बेवफा ना मुझे समझाना,ज़माने को दास्ताँ सुनाऊंगा..

जब जब सावन आएगा,याद वो तुम्हारी दिलाएगा.
सुख- दुःख कहते एक दुसरे को,दोनों का इतना ही था अपना संसार..

धन्यवाद..
कृष्णा नयाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

From
Krishna Nayal "हिटो पहाड़".......

घर छोड़ी, बाड़ी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी.
ईजा छोड़ी, बाबु छोड़ी, आमा छोड़ी, बुबू छोड़ी..

हिसाल छोड़ी, काफल छोड़ी, दाडिम छोड़ी, रीखु छोड़ी.
ठंडी हवा, पाणी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी..

सूट लगुनी, बूट लगुनी, पेंट लगुनी, कोट लगुनी..
पंजाबी सूट लगुनी, टॉप कट्दार लगुनी...

घुघूती त्यार छोड़ी, उतरयानी म्यल छोड़ी,
आफुण धड छोड़ी, दगड़ छोड़ी...

दाज्यू किले मीठी बाणी छोड़ी,
दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी...

घर छोड़ी, बाड़ी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी.
ईजा छोड़ी, बाबु छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी.

             "आपुण बोली, आपुण बुलान
          जय पहाड़, जय पहाड़"..
धन्यवाद..
कृष्णा नयाल
— with Rpg Gosain and 48 others. Photo: "हिटो पहाड़"....... घर छोड़ी, बाड़ी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी. ईजा छोड़ी, बाबु छोड़ी, आमा छोड़ी, बुबू छोड़ी.. हिसाल छोड़ी, काफल छोड़ी, दाडिम छोड़ी, रीखु छोड़ी. ठंडी हवा, पाणी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी.. सूट लगुनी, बूट लगुनी, पेंट लगुनी, कोट लगुनी.. पंजाबी सूट लगुनी, टॉप कट्दार लगुनी... घुघूती त्यार छोड़ी, उतरयानी म्यल छोड़ी, आफुण धड छोड़ी, दगड़ छोड़ी... दाज्यू किले मीठी बाणी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी... घर छोड़ी, बाड़ी छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी. ईजा छोड़ी, बाबु छोड़ी, दाज्यू किले तुमुल पहाड़ छोड़ी. "आपुण बोली, आपुण बुलान जय पहाड़, जय पहाड़".. धन्यवाद.. कृष्णा नयाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Composed by - Krishna Nayal

माँ की ममता................

मैंने कब सोचा था ऐसा दिन भी आएगा,
टुकड़ा कलेजे का माँ से बिछड़ जायेगा...

खुद जागकर माँ ने मुझे रातो मैं सुलाया होगा,
पीकर दो घूट पानी के, मुझे अपना खून पिलाया होगा....

मेरे गीले बिस्तर मैं भी, खुद माँ सोयी होगी,
मुझको एक छीक आने पर माँ कितना रोई होगी...

मुझे पता ना था इतना पाने की आस में,
मेरा सब कुछ छीन जायेगा, टुकड़ा कलेजे का माँ से छीन जायेगा..

मुझे पता न था जिंदगी इतनी मजबूर होगी,
यादो में मेरी माँ, रोई तो जरुर होगी.......

वक़्त के हाथो मजबूर हूँ मैं,
माँ को जाकर कौन समझाएगा.....

मैंने कब सोचा था,
टुकड़ा कलेजे का माँ से छीन जायेगा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



हिटो पहाड़ (दांस्ता- ए- दिल)....

यादेँ मेरे गाँव की मुझको बहुत रुलायेँगी.
ये जिंदगी एक दिन यूँ ही बिखर जाएगी..

सरसों के खेतो में, तितलियाँ आज भी मंडराते होंगे.
पेंड़ो में कूक कोयल की, झरने गीत गाते होंगे..

मिट्टी के उस टीलें पर, चीटिंयां फिर आपना घर बनायेगी.
ये जिंदगी एक दिन यूँ ही बिखर जाएगी.

ज़माने की इस दौड़ में, सब यांदें धूमिल हो गयी है.
ख्वाब मेरे कुछ पाने में, मसंगुल हो रही है..

गाँव के उस नुक्कड़ पर, मेरे होने का आभास दिलायेगी.
ये जिंदगी एक दिन यूँ ही बिखर जाएगी.

होंगे कुछ शिकवे- गिले, कुछ मन की फरयांदें होंगी.
अपनों से रुठने की रश्मे, कुछ मीठी यादें होंगी..

वास्ता देकर ना बुलाना मुझको, जब रात अँधेरे में घिर जाएगी.
  ये जिंदगी एक दिन यूँ ही बिखर जाएगी..

यादेँ मेरे गाँव की मुझको बहुत रुलायेँगी.
यादेँ मेरे गाँव की मुझको बहुत रुलायेँगी..


कृष्णा नयाल..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Krishna Nayal
सभी साथियों को गणतंत्र दिवस के ढेर सारी शुभकामनाये..
सत- सत नमन उन शहीदों को जिन्होंने हमारे भविष्य के लिए अपना वर्तमान कुर्बान किया.

वीरो की वीरता की, जल रही वो शमा है.
धरती से मिलकर आज, रो रहा आसमां है..

२६ जनवरी को भारत ने बनाया जो संविधान है.
गणतंत्र दिवस के नाम पर, हर वर्ष मानाने का विधान है..

उल्झंने लांखो आयी होंगी रहो में.
मगर सपने सजा लिए थे निगाहों में..

हर वीर, हर शहीद के मान सम्मान का, फिर से मौका आया है.
उनकी क़ुरबानी का एहशास दिलाने, यादो का झोका आया है..

भारत माँ के उन वीरो पर, आज देश को गुमाँ है.
धरती से मिलकर आज, रो रहा आसमां है..

विचलित ना हो अब मन की आशा.
वेजान पत्थरो पर ही, वीरो का था जीवन तराशा..

हरदम मंजिलो की तरफ बढ़ रहा कारवा था.
पा लिया बुलंदियों को, मन में उनके पाने का जज्बा था..

वीरो की वीरता की, जल रही वो शमा है.
धरती से मिलकर आज, रो रहा आसमां है.. —

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Krishna Nayal आओ बेटियां बचाये.

क्यों जीवन छीना मेरा? क्यों मेरा अस्तित्व मिटाया.
बनाने वाले ने फर्क न समझा, तुमने कैसे ये हक पाया..

एक अंकुर था तेरी धरती का, माँ तुमने मुझको सीचा था.
आउंगी इस धरा में, मैंने मन में सोचा था..

छल कपट का भाव ये फिर, कैसे मन में तेरे आया.
क्यों जीवन छीना मेरा? क्यों मेरा अस्तित्व मिटाया.

तुझे चाह थी फूलो की, काँटों में दामन क्यों चुभाया.
तेरी बगिया की फुल थी में, क्यों तूने मुझे मुरझाया..

भूल न करना फिर कभी, तुझे जीवन की दुहाई है.
फिर न देना किसी और को सजा, जो सजा मैंने पायी है..

माँ तुम भी कभी बेटी थी, क्यों ये बात आज तुमने भुलाया.
क्यों जीवन छीना मेरा? क्यों मेरा अस्तित्व मिटाया..

क्यों जीवन छीना मेरा? क्यों मेरा अस्तित्व मिटाया.
बनाने वाले ने फर्क न समझा, तुमने कैसे ये हक पाया..

**कृष्णा नयाल **

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Krishna Nayal वसंत पंचमी एक भारतीय त्योहार है, इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। प्राचीन भारत में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था।जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। बसन्त पंचमी के दिन माता शारदा का पूजन Puja of Goddess Saraswati माता शारदा के पूजन के लिये भी बसंत पंचमी का दिन विशेष शुभ रहता है. इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को पीले-मीठे चावलों का भोजन कराया जाता है. तथा उनकी पूजा की जाती है. मां शारदा और कन्याओं का पूजन करने के बाद पीले रंग के वस्त्र और आभूषण कुमारी कन्याओ, निर्धनों व विप्रों को दिने से परिवार में ज्ञान, कला व सुख -शान्ति की वृ्द्धि होती है. इसके अतिरिक्त इस दिन पीले फूलों से शिवलिंग की पूजा करना भी विशेष शुभ माना जाता है.

आप सभी साथियों को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की ढेर सारी शुभकामनाये.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


From - Krishna Nayal

मन का भ्रम...(पलायन का दर्द)..

(सभी उत्तराखंडी प्रवाशियो को समर्पित मेरी मन की वेदना)

बिखर रहे है गाँव मेरे, ऐसा कुछ भ्रम सा है.
मन में है लाखो उलझन, आंखे मेरी नम सा है..

एक भूमी के टुकड़े में, चार परिवारों का गुजरा था.
चार टुकडो में बटा फिर टुकड़ा, बरबादी का इशारा था..

खो दिया है अपना सब कुछ, ये पाना- लेना कुछ कम सा है.
बिखर रहे है गाँव मेरे, ऐसा कुछ भ्रम सा है..

थी नादान तब मेरी उम्र, अब कुछ विचित्र मंजर हो गया.
कैसे लीपों मिट्टी का घर, जो अब खंडर हो गया..

आशाओं की किरण बुझी सी, हर तरफ तम सा है.
बिखर रहे है गाँव मेरे, ऐसा कुछ भ्रम सा है..

संस्कारो की जब बात चलेगी, मेरे उत्तराखंड की झलक देखेगी.
कब रुख करेंगे काफिले गाँव में, कब लोगो में वो ललक देखेगी..

मांफ करना ऐ जन्मभूमि, हुई बेवफाई हम से है.
बिखर जायेंगे गाँव मेरे? या ऐसा कुछ भ्रम सा है..

बिखर रहे है गाँव मेरे, ऐसा कुछ भ्रम सा है.
मन में है लाखो उलझन, आंखे मेरी नम सा है..