• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


    Shailendra Joshi



    साँका का तलक पौची की

    अटक्की चा माया की बात

    कनुक्वे करू प्रपोज

    सोच सोची छोरी मुण्डारु हुयू आज

    कनी कनी तरकीब आणी दिमाग मा

    त्वे मा माया जतौणू कू

    जनी तू आणी सामाणी

    भुलि बिसरी जाणू सारा फोरमुला माया का

    कु समीकरण लगै जौ

    ज्यू हल निकल जोउ तेरी मेरी माया का

    बिन बोलीया भींगजा छोरी माया की बत

    दिख रूप मेरु क्या हुयू हाल

    माया कू भिखारी समझी

    दिजा भिख मितै आज

    रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


भै यी रगड़ बगड़ की बरखा से

नी बर्खु सर्ग

बरखा क्या  होनी 

कखी सड़क ही साफ होणी

कखी बादल ही फटणा

कखा हर्ची व़ू रिमझिम बरसात

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


मेरु हिया हरेली हरुलिन
उडनू छोऊ आसमान मा
त्वे देखि हरुली मन मेरु कुजणी कख गे
डंडा यी पार गे चा व़ी पार
मीत नि जन्दु माया की यी सार तार
बते दे हरुली तू ही चा मेरु प्यार
फांटी जाली रुई हरुली फांटी जाली रुई
मेरु मनत बस हरुली की छुई
हरुली कु सज दय्खुणु का खातिर
बाटा मा लुक्क छुपी दय्खुदू हरुली कु सज
मिन हिया हरेली हरुली कू
जून जुन्ख्याली हरुली तू चा भंडी मयाली
हरुली त्वे खातिर मन खुदैंदु दिन रात त्वे समलोंदु
भग्यानी चा हरुली ऊ बिंदी जू तेरा माथा सजी चा
भग्यानी चा हरुली उ फौंदी जू तेरा लट्लियो लगी चा
भग्यानी छिन हरुली ऊ कुंडल जू तेरा कन्दुडीयों मा हलणं छिन
भग्यानी छिन हरुली ऊ सुनो हार जू तेरा गौला मा चमकुणु चा
भग्यानी छिन ऊ झावरी ऊ पैजिबि जू तेरी खुटीयों छम छम कदिन
कन कु भाग्यान ह्यु मी
मै से भला यी लारा लता गैणं छिन जू तेरा गात सजणा छन
कै पै हरुली जूपराण ले कि
मेरु हिया हरेली हरुलिन
उडनू छोऊ आसमान मा
रचना शैलेन्द्र जोशी


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

"पहाड़ी भुला "

तू भूलगी अपणू मुलुक भुला

मजदूरी ध्याड़ी कमाणी खुणी ग्यू भैर भुला

ना आदी पहाड़ी

ना देखी तिन कभी पहाड़ भुला

पहाड़ी भुला खाणा छिन

भैर मुलुक धुल मिट्टी भुला

हमरा डांडा काठो डाम बनै की

धुल उड़ानी सरकार भुला

सैरा भुला चल गैनी दिल्ली बम्बै

यू डांडी काठियों तै प्रभु तुम यखी ले चला

खाली नोउ का मेड इन पहाड़ी छन भुला

देसी लुक कू प्रोडक्ट भरयु गात सैरा

जन भी छन मेरी मुलुक की शान छन पहाड़ी भुला

तुम पर ही मुलुक की लाज चा पहाड़ी भुला

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मैने एक झलक जो तेरी देखी
तू मंद मंद मुस्करायी
थोड़ा हिलडुल थोड़ा शर्मायी
मैने एक झलक जो तेरी देखी
तू मेरे लिए चांदनी
तू मेरे लिये अनजानी
फिर भी है जानी पहचानी
तू है मेरी स्वप्न कहानी
तू मेरी स्वप्न रानी
तुझे देखते ही मुझमे बिजुरिया जैसा एहसास हुआ
काश मै तेरी रूमानी बदन की रूह की साँस होता
तू दूर भी है पास भी है
तुझे पाने की आस भी है
तुझमे विश्वास भी है
तुझे पाना तो है दुरी
पर तू मिलेगी बस मिलेगी
क्योंकी तू है मेरी स्वप्नसुंदरी
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरा सब्द मेरा बोल मेरा आंखर
सब ठगे का ठगाया रै गिन
छोरी तेरा रूप का ऐथर
निथर मिन कानी कानी बांधो मा रचा छिन
गीत भला भला
कै की होली इनी स्वाणी रचना
छंद आलंकर भी सोचाना
तेरा रूप देखी छंदो ते छंद नि आणू
कलम कंठ का सरोकार एक बार
देखी देला तेरा रूप ज्यूत
फूल चाँद सूरज की उपमा
बिसरी की तेरी ही उपमा देला
कना कना फोरमेट मा धालिन मिन गीत कविता
तेरा रूप देखी का ऐथर इ कवी वे गया रीता
कविता शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi कैका जलम लेण से ना कैका मरण से
कौथिग ना  रुकदा
कौथिग जग्वाल करदा सिर्फ हैसदरो की
रुन्दारो की रोई का आंखा आंसू
द्वी चार दिन
सैद जीवन यी चा
तस्वीर रिटदा उक़ा आखो मा जरूर जौका का पास जिकुडा
नी त  खै पै हौर गीत लगै का रिवाज परंपरा मा दुनिया चलदा
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi  उसी का  का  कारोबार  है
उसी की सरकार है
रंग उसका रूप उसका इश्क उसका ये हुस्न  उसका
टसन उसका  फैशन  उसका
वो का ले  धंदे भी गोरे रंग मे करता है
क्यों  की  वही  अंधरे मे दिया करता है
जो भी किया उस ने की या उसी का मीडिया
उसी का  सरोकार उसी का अखबार
जल उसका  जंगल उसका  जमीन उसकी
जब मन किया सोदा कर लिया
बैबलैत का बटन उस के पास
जब नचा लिया जब घुमा लिया
वही परधानमंत्री वही मुखिया मंत्री                               
वही  रास्ट्रीय  पति  वो सब का पति
वो पतियों का पति
क्यों  की  वो पूंजीपति
कविता शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

धार धार पाहुचा है आज कल पत्रकार
खबर आपदा की हो या विपदा की
हर खबर मे सभी मीडिया ये है कहना
हम पाहुचे सब से पहले
या तो ये रेस गलत
या सब एक साथ पाहुचे
सच क्या है
नही तो ये झूठा ऐड क्यों
करो खोजी पत्रकारिता
मेरे सोशल मीडिया के यारो
ये पता लगाओ ये सब साथ थे
या कोई बन्धा बाद मे भी गया
अंत मे गुस्ताखी माफ़ हो
इस बात मे भी दही की छाच हो
रचना शैलेन्द्र जोशी