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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गीत की फीलिंग में एक नया मुक्तक
प्रेम के गीत में
क्या नया लिखूं
गोरी या काली
वो चाँद है
वो सूरज है
वो फूल है
इन बासी उपमाओं
क्या नया गीत रचाउ
मै क्या नया गीत लिखूं
वो लम्बी है छोटी है
वो मोटि है छोटी है
कब तक इन बासी
उपमाओं में गीत रचाऊँ
प्रेम गोरा काला
लंबा या छोटा
मोटा या पितला
फिगर नही होता
फिर क्यों
इन बासी उपमाओं में
प्रेम के गीत रचाउ। ,............शैलेंद्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

व्यंग सम्राट नरेँद्र कठैत का व्यंग बाण भोट
परसी तै / हम एका -हैंका
काम अयां / घोर बुण
दुस्मन दग्ड़ा / लड़याँ - भिड़याँ
पर नेता जी / एक भोट खैंची
तुम यू क्या कर गयाँ
तिमला तिमला खत्येनि
अर नग्या नंगी दिखेयाँ
जाति पातिन / हमारा मुंडा बाल
दुरंगा हुयां
एक आँखि हमारि / गढ़वलि रेगी
हैंकि आँखि कुमायाँ ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi 

January 19 at 3:00pm ·

व्यंग सम्राट नरेँद्र कठैत का नेता काव्य व्यंग
खेती - बाड़ी होवु
नाडु -निसडू बि
पर बल्द नीन जैका
जन अजक्याल
नेता छन्
पर बिधायक नीन
त नेता कै लैका ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नरेँद्र कठैत का व्यंगबाण नेतागिरी
अरे लाटा !
सुद्धि नेतगिरी नि करदी
अगर छै तू तागतबर
त त्वे हमारि
क्या जरोरत प्वङगी
अर -
अगर छै तू निरबल
त लाटा !
हमारू छै हमारा बीच रे
अरे चुचा !
जन हम हिटणा छवां
तनि तू बि हीट ली ।