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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चुनावी साल च
हर क्वी माला माल च
टीबी अखबरू का
कारोबार मा पौबार च
ठ्क्यादरोंन उर्या छिन
जगा जगा कौथिग
नचणा गाणों कु
भि संस्कृतिक साल च
भासण भौपू मा बिकास च
निति नियम बनणा छमा छम
पोस्टर बैनर छपणा ठमा ठम
जत्गा बटोर सकदी बटोर ली
ब्येटा
सज्यु थाल च
अपणि लैक ज्यू धाणि कमाणि
वू लैन पकड़ ली
चारो तरफ माल ही माल च
चुनावी साल च ..........................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Himalayannews.com...द से दिल्ली मा
ग से गढवल्ली
क से कुमौनी
स से सिखाणु
उ से उत्तराखण्ड साहित्य मंच
ह से हिमालय न्यूज़
ड से डीपीऍम आई
यु सबकु संयुक्त परयास च ब्येटा
तू भी ब से बाटू पकड़
म से मेट्रो मा बैठ
सीधा पहुँच जा ब्येटा
न से न्यू अशोक नगर बी -20
इंन्नु मौका लाटा दुबारा नि आण
तिल बुबा अपणा ब्वै बुबा से नि सिखि
अपणी बोली भासा
पर अपणा उत्तरखण्ड का
हैका ब्वै बुबो से त सिखले छोरा
इंन्नु मौका दुबारा कब आलू
जा इतवार मा घ्याल नि मच्यो घार मा
सिखि औ गढ़वल्ली कुमौनी ब्येटा ।.....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हिर्दय से बर्फी
रूप से बार्बी
हर घर आंगन
में खिलती है
महकती है
हंसी की फुहार है
अपनी मधुर मुस्कान से
संसार को मीठा और
प्रफुलित कर देती है
अपनी खट्टी मिठी अदाओं से
एक चटकारा सा स्वाद
जिहवा को दे जाती है
नन्नी मुन्नी बार्बी डौल .................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सिरिनगरा गोला बाजार मा
जब देखदु सज्यु तांबासारि ढोल
लाला जयदयलै दुकान मा
त मि सोचदू अज्यु बि बजणु च ढोल
अभी च येकु बाजार मा मोल
सज्यु च टिक्यु च बिकणौ बाजार मा
क्वी न क्वी त होलू येकु खरीदार
होलू क्वी वू जरूर नयु पुराणु कलाकार
ज्यू भी च बाजार मा
मोल च अज्यु भि ढोल कु ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घमुतु मिस्तरी का सु हातोंन
लोकल दुंगो मा गणेश मूरती संवारी
परिहार जाती लोंगोंन
सन उन्नीस सौ बीस मा
गणेश कु मंदीर बणायी
तब बिटि सिरी नगर कु
लोहर बाजार बणगी भयों
गणेश बाजार .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दखिण एशिया का देसु मा
हवा चली बयार
हिन्द अरब सागर तै लांघी
हवा पौची रे केरला धार
उड़ी उड़ी हवा मिली गरम जलवायु मा
अर बरखा लगी सैरा इण्डिया मा
समोदर मा दौड़दू दनकदू
बथौ मा झूली हवा मा फूली
नचदू गांदु खुटीयों मा घुंघुरू पैरी
छम छम
ऐगी मानसून
गरम झुल्सैया तै जलवायु
एक सुरसरी बयार देगी
किसान तै खेती उपज कु सारु देगी
पूरा इण्डिया तै आर्थिक चारू देगी ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पूरब दिशा दूर कुमाऊ बिटि
कंडी मा पहुँची दयब्ता भी
पौड़ी वाला हो गया
बन कंडोलिया
पर पौड़ी वाले
सब देहरादून वाले हो गए
वो कै कंडी मा पौंचीकि
देहरादून का होलिया
वि कंडी भि जरा खुजेल्या ।......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नरेन्द्र सिंह नेगी जी का लोकप्रिय गीत नयु नयु ब्यो चा हिंदी रूपांतर
अनुवादक :शैलेन्द्र जोशी
नयी नयी ब्याही हु तुम से प्रिये
सुनते हो जी तुम को इतनी जल्दी भी क्या
धीरे धीरे चलो न दो प्यार भरी बाते करो प्रिय
इन पेड़ो की छाव के तले
अरे जो भी बतियाना है तुमको
घर जाके कहना
वैसे तुम इतने कंजूस हो
पैदल चला रहे हो
गर्मी के दिन है
सामने गाड़ी खड़ी है
उसमे चलते है ना
वैसे इतनी खड़ी चडायी है ससुराल की
चला जा रहा है नहीं वैसे ऊँचे सैंडिल पहने है मैने
मान भी जाओ मेरे प्रिय पति देव
ज्यादा नखरे मत दिखाओ
तेरी इन कप्पनाओं मे भूखा मर जाउगा
चल जल्दी कदम बड़ा
सैंडिल को पर्स मे रख
नंगे पाँव चल फटा फट
इतनी भरी पुरी जवानी तुम्हारे ये हाल है
बुढापे मे तो भगवान जाने क्या होगा
वैसे भी कल परसों तुम खेतों मे जाना होगा
तुम्हारे इतने नाजुक हाल देख कर मै बहुत परेसान हु

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यु तो काफल हमने काफी समय नहीं खाये
पहाड़ो मे रहकर भी
काफल दर्शन फेसबुक पर ही होते है
क्युकी हम गांव ग्वेर छोरे तो है नहीं
जो टीपने गये हो कभी काफल को
वन जंगलो मे सहाब
पर उन ग्वेर छोरे किरपा से
पहाड़ी स्टेशनों मे उनकी काफल से भरी टोकरी से
चाय वाले गिलास से काफल कि नाप
और अखबार कापी का कागज के
कोन से भरे काफल बहुत खाये है
गिलास दस बीस रुपिया मे खाया
पुराना रेट बता रहा हु
क्युकी पहाड़ो मे रहकर भी
काफल दर्शन फेसबुक पर ही होते है
अब पहाड़ मे आपको काफल
खाने को मिल जायेगा भाई सहाब
पर पहाड़ किसी स्टेशनों मे
सुबह सुबह तक इसके दर्शन होते
क्युकी सीजन का फल है
बिकता माल कंडी कब खाली हो जाती है
पता नहीं चलता है
जो भी है पर्वतीय बाजारों तक
इन गाँव के ग्वेर छोरों
बदौलत काफल बाजार में आता है
और मैने जब खाया इन ग्वेर छोरों किरपा से खाया
अब सुबह सुबह स्टेशनों तरफ जाना नहीं हो पाटा है
इनमे इन ग्वेर छोरों कसूर नहीं है भाई साहब
ये बेच ही रहे है हर साल
पर जो भी है फेसबुक मे ही दर्शन हो रहे काफल के
पहाड़ मे रहकर भी काफल मिल भि नि चाखो ...............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हे पौड़ी
कखी उकाल
कखी उंदार
आँखों का तीर
हिवाला प्यारा
धारा रोड
अपर बाजार
लोहार बाजार
मॉल रोड एजैन्सी चौक
का भिड़ा आहा कतगा स्वाणा
कंडोलिया का बण जंगल
नागदेव मा बुरांस बांज का छेला
असीस देदा क्वीकाला का शंकर
पौडी तै
आवा तुम बि पौड़ी मा
थोडा घूमणा खुनि
हे देब्भूमि का पर्यटक
रचना शैलेन्द्र जोशी