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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फेसबुके वाल मा माया अर पिरेम परे एक हौर रचना थुपड़ायली जी
#‪#‎मेरा‬ जिकुड़ा का जलोटा मा
तिन आणु जाणु छोड़याली
तू उड़ी म्वारि कुजाणि कै दिसा फुर
तेरी माया जम्यु सैद
रीतू हवेकी भि अभि भि बच्यु च
मेरा जिकुड़ा आसे जलोटा मा
सूंघ ली अपणी माया जमी
सैदे गंद बास मेरी म्वारि
कै हैका बिराणी म्वारि तै
मिल टपकाण नि दे सैद माया कु
अपणा जिकुड़ा का जलोटा मा
तेरा डांडा का जम्या फूल कु रस
तेरा अस्यो पस्यो की गंद बास
अज्यूँ भि मेरा नाक मा टिकी च
मेरी माया झूटी लगणी त्वेकु म्वारि
तो तू अफु ऐ की सूंघली
अपणी टपक्यी सैदे गंद बास
मेरा जिकुड़ा जलोटा मा म्वारि## ।.......शैलेन्द्र जोशी
फोटो क्लिक .............शैलेन्द्र जोशी की नजर से

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कै गौ कि छे
कै मौ की छे
हे बाटा चलदी बाँद
जरा इन्न सुण दौ
बात बिराणी नि
तेरी अपणी छे
सुंप्नयो मा ज्यु
गाणी स्याणी गठेनी
वू निंद मा देख्या
भला सुप्नयू की सौ
वू बांद तू ही छे
कन्न बात करना छौ
बाटा लगा अपणा घौर का
निथर चप्पल पड़ला
कपाल मा गिनगिन कर
ज्वानि का चिफ्ला बाटो
नि चिफल्या तुम
क्या जवान हुयां तुम
तुम जी बतवा दी हे बांद
फूल सि खिल्या
अर कै मवारन नि दगया
क्या खिलया तुम हे बांद ।........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

इण्डिया की पहली ओलम्पिक क्वालिफाई जिम्नास्ट दीपा कर्माकार को हार्दिक बधाई शुभकामना । 9 अगस्त 1993 को अगरतला में जन्मी 22 वर्षीय दीपा ने इतिहास रचा ।
बेटियों फिर साबित किया
वो गोल्ड है
हर पथ प्रदर्शन में
युही लौह जलाती रहो
दीपा कर्माकर
युही शीश नवती रहे दुनिया
फिर भारत भूमिपर
दीपा कर्माकर का ये
प्रयास ये अभ्यास
रंग लाया ऐसा
रच दिया उसने इतिहास
भारत भूमि पर ।..............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखण्ड राजनीती और भार तुमरा हथु मा भयो तुम ही छा उत्तरखण्ड सब्भि सि भला मनखी मेरा दागी बागी भयों
#‪#‎भला‬ मनखी##
दीदा दागी भि चा
दिगा बागी भि चा
अर बन्यू च
सब्बी सि भलु
कभी भाजपायी
कभि दीदा बणगी कांग्रेसि
परसि नितरसी बितैनी
सपा बसपा मा
कभि नयु लोकल दल मा
बितैनी दिदन कुछ पल
कखी जगा ठौर नि मिली
दीदा बणगी निर्दलिय
पर उत्तरखण्ड बनाण मा
दिदन क्वी कसर
नि छोड़ी अफु तरफ बिटि
सेवा ब्रत लियू च
आखिर दौ तक
छोड़न कनुक्वे ..........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लोक भासा सब्द जात्रा मा व्यंग सम्राट नरेन्द्र कठैत की एक कविता
सबसिडी
धन्यवाद मोदी जी!
बिकासा दगड़ा-दगडि़
जु तुमुन् हमारि भाषा मा
'सबसिडी' सब्द जडि़
पर्सि तल्या खोळा बिटि
धै लगौंणि छै
हमारि अंगूठा छाप
फुलमुंड्या बडि
हे ब्यटा नरी!
जरा
गैसा ऽ औफिस मा जैकि
पता करि
पिछल्या मैना भ्वरि छै गैस
पर खाता मा
अज्यूं तैं
'सबसिडी' नी चढ़ी !........................नरेंद्र कठैत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Shailendra Joshi  .
May 15 at 2:21pm ·
मै लोगो अक्शर कहते सुनता हु नरेन्द्र सिंह नेगी का गला चन्द्र सिंह राही गोपाल गोस्वामी जैसा सुरीला नहीं है उनके गले वो मुरखी खटके नहीं है कही लोग कहते उनसे अच्छा गीत कन्हैया लाल डंडरियाल या गिरीश तिवारी गिर्दा के है खैर लोगो अपना आकलन है मै तो कला साहित्य संस्कृति को न्युमेरिकल अंदाज नहीं देखता हु हर कलाकार और रचनाकार अपनी शैली है . भले नरेन्द्र सिंह नेगी गला बहुत सुरीला न हो उनको सहित्यकार न माना जाये उनको भले बडे संगीतकार कमत्तर देखा जाये . किन्तु जब गले सुर मे भाव् अधिक मजबूत होजाते है गीत के समाज का दर्शन होता है संगीत कंपोज लोगो हँसाने और रुलाने मे मजबूर कर देती है तो जब सुर शब्द और संगीत बनारस बनता तब नरेन्द्र सिंह नेगी बनता है तब साहित्य अलंकार हो गले मूर्खे खटके या संगीत के राग इन सब भारी पड़ता है वो भाव जो जीवन छुई बात है वो गीत बनजाते है उनके गीत लाइन है वो दिन वा रात वा छवी वा बात गीत बणगिन गितेर गाला . नरेन्द्र सिंह नेगी बारे गड्वाली साहित्य सिंह भजन सिंह सिंह अपने निबंधो कही सालो पहले लिख दिया नरेन्द्र सिंह नेगी के गीत उत्तरखंड गीत साहित्य संगीत एकनई दिशा देगे . ये निबंध इतिहासकार यशवंत सिंह कठौच सम्पादित पुस्तक सिंह भारती मे छपी है , कहने आशय है नरेन्द्र सिंह नेगी अपनी धारा अपनी शैली अपनी गायकी अपने तरह एक कलाकार है जो तबले कि ताल से जुड़ा फिर रामलीला अभिनय और सुर से फिर संगीत से फिर लोकगीत से और गायन से और इसी बीच एक कलाकार अन्दर कवि जागता है वो लोक भाषा अन्दोलन और संसकृति को बचाकार देश दुनिया तक ले जाता बन जाता है गढ़ गौरव गढ़ रतन इसलिये नेगी दा पर आप एक गायक नहीं एक साहित्यकार नहीं एक संगीतकार नहीं एक युग एक काल देखो ऐसा संस्कृति पुरुष युगों मे पैदा होता उसका मुझे लगता वो तुलानाताम्क अध्यन से परे क्युकी वो अपनी धारा अपनी शैली का एक कालजयी कलाकार है जब उनको सुनो तो ऐसा लगता जैसे उसी लोक समाज पहुच गए हो चाहे आप कही भी उनको सुन रहे हो

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Shailendra Joshi 
May 13 at 11:50am ·
उल्टा हाथ बिटि
सुल्टा व्यंग लिखण
वालू इन्ना उल्टा सुल्टा
मनखी कु एक नोऊ च
व्यंग बाबा नरेन्द्र कठैत
पौड़ी क्वीकाला डांडा वाला

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहाड़ी गा रही कोई सुरीला गीत
झूम रहे पेड़ फुल पत्ती
नाच रही है हरियाली
किस राग मे पिरोया है
ये गीत ये सुरीला
धरती भी झूम रही है
झरनो कि रिदम हवाओं कि बीट
नदीयों ने सजाया प्यारा संगीत
ऐसे मौसम मे पंछी भी गुनगुना रहे है
प्रकृति के प्यारे प्यारे गीत .....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आली जाली सरकार
बिकली फिर कैका हाथ आली
रुक्ली थमली सरकार
द्वि तरफ छन लूगबाग चिफ्ली
यि चिफ्ली राजनीती मा
वि टिक्लू भै जैकी
गिच्ची भि हो भारी चिफ्ली
यि निहोणया चिफ्ल्लापन
उत्तरखंड ही रडकैली
सरकार त थम जाली
जन तन ले देकी
पर यि उतराखंड कन्न थमलू
तू भि जरा सोचली .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्वी चखुली माया रसीला गीत गाणी होली
कै बैरीन यि डाँडो मा बणाग लगायी होली
बाला पंछी घोल मा कन्न तड़पड़ाना होला
त्वे निर्द्यि कै दया भी नि ऐ होली
अध्जलि गात लाचार पसुओं कि
यि आग मा लगान्द बगत त्वे
बण जंगलो कु जीबन किल्हे नि
दिखी होलू
तिन यि आग किल्हे सुलगाई होली
क्या त्वे डांडो मा हरियाली भली नि लगदी
क्या त्वे गीत गांदी चखुली भली नि लगदी
यि धन संपदा किल्हे छे हर्चाणि
अपणि बनो जंगल कि यि माया मा
माचिस एक तिल्ली झड़ी
तौ जंगलों खारु किल्हे बनाणी
क्या त्वे भली नि लगदी बांच दगड़ी बुरांस
सकनी दगडी ग्वीराल
झ्प्न्याला कुले का डाला
यि डालो मा मायादारो कु गैल
तू कखन ऐ निरमाया कु बैरी
ज्यू लुवा पितल जन तेरी गात
खुद भी तच्ची फुखणु आग मा अपणि गात
खली दिमाग बैठी आंदन दिमाग यन ख्याल
लगे दे तिन भि बीड़ी सुलगी माचिस झड़ी
इन्नी उन्नी मा यि निहोणया आग
सैरा जंगल जैली कि कर्नू च उत्तराखंड बरबाद ...........शैलेन्द्र जोशी