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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सावन भादो बरसात के दिनों मे ही
गायक पैदा होते
अक्सर देखा है ज्यादातर
सावन भादों राग मल्हार भिगती मास मे पैदा
होते है सुरीले कंठ के धनी
इस भिगती ऋतू में सुरीला किशोर कुमार हुआ
तो इन ही भीगते महीनों में
दर्द भरी आवाज का गायक मुकेश दुनिया में आया
पहाड़ की आवाज नरेन्द्र सिंह नेगी भीगते सावन मे
सैरा बस्ग्याल गाते गाते दुनिया मे आया तो
इस भीगते महीनों मे वेर्सटायल सिंगर
सोनू निगम दुनिया मे आया
इस सुरीले मौसम के महीनों में
गाते गाते मंच में मोहम्मद रफ़ी ने प्राण गवाया
दिल दिल हुम हुम करते नार्थ इस्ट कि आवाज
भूपेंद्र हजारिका धरती मे आया
सावन के अंत होते दुनिया मे आया
लता मंगेशकर आशा भोषले इस भीगते महीनों
के अंत अंत होते दुनिया मे आयी
ये चौमास कितना सुरीला हर गायक आया गया
सच कहा सुरीले लोग बरसात मे पैदा होते
राग मल्हार गाते गाते ....................................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कै भि संचार कि गाड़ी एक एक भला सब्दो मा पिरोयि गंठायि माला से चल्दी द्वि मनखीयों कि पर कभि बातचित इन्नु सब्द आ जांदू क्वी एक बातचित त बंद हवे जांदी अर मिठी मिठी छुयु कि माला दाणा टूटीकि वू कड़वू सब्द याद रैंदू अर एक माभारत सुरु हवे जांदी इन्नी एक मयाली रचना गीत का संत नरेंद्र सिंह नेगी कि
:""एक सब्द "" !
घिरणा अर गुस्सा मा
मेरा मुक्खमा थुक्यु
तेरो वो एक सब्द
मैलु कुचैलू वो एक सब्द
जैका पुच्का
मेरा कन्दुड बटी जिकुड़ा मा
अर जिकुड़ा बिटि बरमंडमा
जिलारू सि बिल्क्युछ
छडयेणु नीछ तेरु थुक्यु वो एक शब्द
तिन भि त जरा घूट नि साकी
वो निर्भे सब्द
घल घुलि देंदि
त इथगा च्रकचाल भि नि होंदु कुटुमदार्यु
चक्रचाल त तबभि नि होंदु
जो मि वे सब्द को उनो मतलब नि लगान्दो
जन मिन लगै
जग्दो मुच्छयालोसि मै उन्द चुलांयु तेरो वो एक शब्द
राखो कैगे मेरा स्वीणोकु मेरि स्याणी गान्यु को
तू भि नि टूटी मीभि नि झुकू
पर सब्द अपुड़ो काम करिगे
तु वे छाला मि ये छाला
पुल बणने न मिन सोची न तिन चाही
जबकि बने सक्दा छा हम
कुछ भला भला सब्दु की मिठी मिठी छुयु मा
सैरि रात काट देंदा छा हम
भला सब्दूकि कमि त बिचारी
त्वेमा भि निछे
मैमा भि निछे .............................नरेन्द्र सिंह नेगी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हरिया हरिया रे हरिया
मनौला हरेला
नचला गाला झुमेला
घ्यू करला संगरांद
पर गौरु बछरा
सब हवे गिन
ददा बजरया
सैरी हरयाली
चल गिनी धार पार
पोर बाजार
गोर बछरा क्या मनखी
सब हवेगिन बज्रया सांड
लड़णु भीड़णु कु खालु
यि बची हरयाली कु
मैस खाणु प्येणु
दूध मदर डेरी कु
गौरु बछरा खाणु
फिर दूधे वि रिती थैली कु
डांडा कांठा त भैजी
हवे गिन सुखी खरड़ा
फिर बि आदेश परम धरमा
मनलु पड़लू हम जनता तै बि
बीच बाजार बची खती हरयाली
टिपला गमलो मा
फुल क्रीम दूधे मले निकली
घ्यू जमोला ददा हम बि मनौला
रे ददा हरिया रे हरिया
हरिया हरिया रे हरिया
मनौला हरेला
नचला गाला झुमेला
घ्यू करला संगरांद......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

शब्दों को पिरो
दिया भाव मे
गीत बनाकर
सजीला गीतकार ने
गीत की सिच्युवेसन समझ
सजा दिया संगीत रसीला
किसी साजदान
फनकार ने
अब तुम को
ज़माना गाना है
अपने मुर्खी खटको से
ये तराना सुरीला .......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हे बादल लोला आसमान
निहोण्या तू बरखदी दौ
क्या इन्न सोचदि
सैरा उत्तराखण्ड त
दिल्ली देहरादून चा
खाली सून हयूं
लाचार पाड़
फटैकि बादलों
करला आसमानी बग्वाली
कु च आखिर युकु पैरादार
पुछदरा धार धार
फुट बस इखी अब
तू तो इन्न्न फटणी
हर साल चुचा खड़ोणया
हे लोला आसमान
जन बच्यु न हो
अब उत्तराखण्ड मा
ज्यु जान ।..............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बिता रे गर्मी का मौसम
खत्म हुयी समर वेकेशन
आया रे सावन का मौसम
भिगते सावन मे
बच्चों का मन भी हुआ
गिला गिला
बीत गयी छूटटी छुटटी
बच्चा सोच रहा आज
फिर उठाना पड़ रहा
स्कुल बैग का बोझ
फिर कब आयेगी
मेरी प्यारी छुट्टी छुट्टी..............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लूँण कम निमिक जादा हवेगि
सवाद खुजाणु
घर से भैर निकली घर्या आदिम
विथे बाजार मा
आलू प्याज मूला कखडी
यख तक फल फुरुट सि लेकर
दाल साग भुज्झी
सब कुछ घर्या चैणु
पर वू सारी
घर्या चीज खुजाणु च
घर से भैर निकली
येकु ही बोल्दन
अज्क्याल घर्या आदिम ....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सिरिनगरा गोला बाजार मा
जब देखदु सज्यु तांबासारि ढोल
लाला जयदयलै दुकान मा
त मि सोचदू अज्यु बि बजणु च ढोल
अभी च येकु बाजार मा मोल
सज्यु च टिक्यु च बिकणौ बाजार मा
क्वी न क्वी त होलू येकु खरीदार
होलू क्वी वू जरूर नयु पुराणु कलाकार
ज्यू भी च बाजार मा
मोल च अज्यु भि ढोल कु ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

योगदान !
गंगा पावन है
दर्शनीय पूजनीय है
गंगा क्या है
सब जानते है
उसको तुम्हारे
शब्द गाथा कथा से
न उसका मान
न घटता है
न बढ़ता है
गंगा अपने चरित्र की
ग्वाही खुद दे रही है
पर गंगा तुम भी
जमाने का
योगदान !
प्यार प्रेम मत भूलना
मत भूलना
उन झरनों गाड गदेरो
और उन नदियों मत भूलना
जो मिलकर
गंगा मे !
तुमको और पावन पूजनीय
दर्शनीय बनाते है
जिनका बहुत योगदान है
गंगा को गंगा बनाने मे .................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बीच सभा मा जब रावण
बिभीषण की लात लगांदू
तभी विभीषण बि राम दगड़ी
हाथ मिलांदु अर सत्ताधरी
रावण की पुटगि मा लुकी छिपी
नाभि कु राज राम तै बतांदू
अर फिर सत्ता परापत करदु
अब तुम्ही बता भयों
राजनिति मा बागीयों
पैदा आखिर कु करदु
सत्तादल कु नेता
ठीक बोली तुमुन
समझ मा एगी
अब तुमरा भयों । ...........शैलेन्द्र जोशी