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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जै हो नेता जी की

जै हो वोटर महाराज की

जै हो दारू की

जै हो नोटों की

जै हो भीतरघातियों की

जै हो ठेकेदारो की

मै य़ू की जै सुदि नी करनू छोऊ

ब्याली कुर्सीन मैमा एकी खुद बोली

जै भला मनखी मा ये सब गुण छन

वी मैमा बैठणा लायक चा

नहीं ता क्वी लोला एकी बैठ जांदू



आखिरकार मेरी भी क्वी इज्जत चा समाज मा

मिन मन मा सोची चकडैतो का दगड़ी कुर्सी भी चकडैत ह्वे गे

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




Shailendra Joshi वो रेशमी बालों वाली

वो चांदनी खालों वाली

वो चुनर संग खेल खेलने वाली

वो पतली कमर बाली उमर वाली

वो लड़की थी या थी खुदा की कारीगरी

जो भी थी हुस्न की खुली किताब थी यारों

रचना शैलेन्द्र जोशी


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


By Shailendra Joshi

आज मै शैलेन्द्र जोशी आप लोगों को अपना लिखा पहला गीत कविता या अपनी कलम का पहला सबूत आप के साथ साझा कर रहा हु मैं बचपन मे फ़िल्मी गानों और पॉप गीतों का बहुत शौकीन था जैसा हर बच्चा होता है उस से प्रभावित हो के मैने ये गीत रचा .तब से तक कही गीत कविता रच चुका हू

शो मे जाना है

रूशी को बुलाना है

अप्पुन को पांच तारीक शो मे जाना है

ऐ हटेले क्यों रो रेला है

बास रूशी है अनफिट

शो का बिक चुका है टिकट

मोडल तो पाडैली साडैली बाज़ार मे हज़ार पर

रूशी जैसी काहा कोई मेरे यार

शो है तैयार

रूशी है बीमार

क्या करू यार

ऐ हटेले रोने का वक़्त चालेला है और तू हँसेला है

बास रूशी फिट हो गयी

तो नाचो गाओ झूमो

शो मे जाना है

रूशी को बुलाना है

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तेरे कोमल अंग देख

बजते है हिर्दय मे जल तरंग

है तेरा सोमकर जस तेरा रंग

तू हर उस शख्स की की पहली पसंद है

जिन्हे सौन्द्रय परख है

तू सौन्द्रय की पहली शक्ल है

जीवन मे होगी सरल तू

तुझमे एक तमस है

समझ के यार समझदार एक बार तुझे देखले तो

मुझे ही सौंन्द्रय की परख रखने वाला पहला समझदार समझ ले

मै हु झल्ला

पर अपनी काव्य शक्ति से अवगत करा

तेरी सुन्दरता  का डंका बजाकर

पुरे अवाम मे करुगा हल्ला

मेरी हिर्दय स्पर्शी

मेरी प्रियता

मेरी सुन्दरता

ऐ मेरी स्वप्न सुन्दरी

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


From - Shailendra Joshi

मैने एक झलक जो तेरी देखी

तू मंद मंद मुस्करायी

थोड़ा हिलडुल थोड़ा शर्मायी

मैने एक झलक जो तेरी देखी

तू मेरे लिए चांदनी

तू मेरे लिये अनजानी

फिर भी है जानी पहचानी

तू है मेरी स्वप्न कहानी

तू मेरी स्वप्न रानी

तुझे देखते ही मुझमे बिजुरिया जैसा एहसास हुआ

काश मै तेरी रूमानी बदन की रूह की साँस होता

तू दूर भी है पास भी है

तुझे पाने की आस भी है

तुझमे विश्वास भी है

तुझे पाना तो है दुरी

पर तू मिलेगी बस मिलेगी

क्योंकी तू है मेरी स्वप्नसुंदरी

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


From - Shailendra Joshi

मी हैसदा उजाला मा भी डौर की निकलू भैर

मी घणा अंधेरो मा त कत्ते ना निकलू भैर

जामना की या ही फरमान चा मी खुणी

दोष मेरु क्या ये ही चा मै नारी छोऊ

तुमरी कू नज़र कुनैत की मारी छोऊ

कब तक मेरी उमर तै दोष देला

कब तक मेरा फैशन तै दोष देला

मित्ते नौ निसाब च्यैणु चा

अपणी बेजेतीकू हिसाब च्यैणु चा

कब तक बौग मारला तुम

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

From - Shailendra Joshi

नेतो की सोच देरादूंण तक
ब्याली भी छै आज भी चा भोल भी राली
गैरसैंण मा राजनीती
ब्याली भी छै आज भी चा भोल भी राली
पाड़ मा खैरी

ब्याली भी छै आज भी चा भोल भी राली
पाड़ मा ईस्कूल बिटी मास्टर गोल
ब्याली भी छोऊ आज भी चा भोल भी राला
खाली नौ का अस्पताल
... ब्याली भी छोऊ आज भी चा भोल भी राला
बेटी ब्वारी दुख मा
ब्याली भी छै आज भी चा भोल भी राली
पाड़ ज़िन्दगी आस मा
ब्याली भी छै आज भी चा भोल भी राली
पर मन मा आज तलक आणा छिन बिन्सिर का वो भला सुपन्या
एक दिन जरुर होली सुखों की सुबैर
रचना शैलेन्द्र

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshiसुना है बिकते है मुखटे बाज़ार मे हर किस्म के
हर गली मौहल्ले शहर दुकान पर
एतबार ना रहा चेहरे की किताब पर
ना अब इसे पढ ने का मन
ना इससे अब कुछ सुने का मन
ज़िन्दगी मे बोलना सुनना है जरुरी क्योंकी जीवन है जब तक
आप चेहरे के कारोबार से बच सकते नहीं
इस लिए इसे खरीद रहे है और मोड़ मे ठग रहे है
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshiposted toMahi Mehta
9 minutes ago
खुरचे खुरचे की ज्यू नींद मा सुपन्या देखदन
उंका सुपन्या सुपन्या ही रै ज़ादिन
ज्यू सुपन्यों का खातिर नींद ही हर्ची देदीन
उक़ा सुपन्या हैका तै सुपन्या भी बण जैदिन
तिन वी बांद पर सुपन्यो मा पर माया खूब जतै
पर बोली नी कभी मन की बात वी पर
काज ना तेरु काम ना तेरु
ध्याण का सुप्न्या छन तेरा भारी
लाटा इनमा कनुक्वे चललू
खाली नज़र ऐच करी एवरेस्ट नी चड़दा
बिना दौडया रेस नी जीते जांदी
सुपन्या की माला गझेणा खुणि
नींद हर्चींन पड़दी तभी मिलदन दिन भला
रचना शैलेन्द्र जोशी