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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तुम मेरा गीत हो सुर हो सुंदरी हो रचना शैलेन्द्र जोशी
by Shailendra Joshi on Monday, March 4, 2013 
सूरज की तपन के  नीचे बैठी है चंदा
गोरी धूप मे  तू बैठी गोरी और गोरा हो गया नज़ारा
आती है तू हिर्दय मे उजाला
जाती दिखती तो मन अंधेरा सा
आती दिखती जाती दिखती पर कब होगी मुलाकात
रंग बिरंगे सूटो पर बहुत भाती हो गोरी
अलग अलग स्टाइलों मे बालो को बनाती हो गोरी
जब जुल्फों का पैहरा खुल जाता है
बाल बिखर जाते है तब
रात और दिवस दिखता एक पल पर
तुम्हारी कुछ कहने वाली हँसी का ये असर है
मेरे ह्रदय से कविताये फूट पड़ती है
तुम मेरा गीत हो सुर हो सुंदरी हो
स्वप्न हो तुम मेरी स्वपनसुंदरी हो
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हर एक सोच रहा है

  वो देख रही है तो किसको एक टक

कही मुझे तो नहीं कही मुझे तो नहीं

लड़किया मौहल्ले की हमारी सोच रही है

ये देख रही है किसको

कोई कहती  पढती है मेरे कालेज  मे

कोई उस को देख हैऱा हो थी

कोई उसको देख मुस्कुराती 

कोई कहती  अपने को हूर समाझाती है

कोई कहती  सुंदर है क्या इतनी

कोई कहती सुंदर तो है ही

पर सब लड़कियों प्रशन ये ही है देख किस को रही है

लड़कियो की इस वार्तालाप के बीच मौहल्ले के और लड़के है अनुपस्थित

है उपस्थति दर्ज हमारी  तो लड़की तो देखेगी  ही लड़के को

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कब तक गंगा गोमुख मा जमी राली

झौल चा इतगा मैमा तू पौछी की राली अपणा सागर मा

चदरिल कब तक मुखड़ी ढाकाली छोरी

इतगा त मेरी ज्वनि मा बथो चा

उड़ीकि राली मुखडी बीटी तेरा पल्लू का ढकेण

कब तक राली गिचि मा तेरा ना

इतगा माया चा मैमा छोरी

दैणी करदू तेरा गिचा मा तेरी निहोणिया हां

कब तक राली मै तरसाणी

इतगा प्रेम चा मैमा

खुद ही करली मेरी तू गाणी स्याणी

कब तक गंगा गोमुख मा जमी राली

झौल चा इतगा मैमा तू पौछी की राली  अपणा सागर मा

  रचना  शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi ऐसु बरस मेरा मुल्क नंदाजात होली

  बाराबरस मा  नंदाजात    अपणा मुलूक बौड़ाली

दीदी भूली नंदा का गीत गाली

ध्याणी अपणा मैत जाली वख नाचली गाली

मै कनी अभागी छोऊ रमियु देस मा मन मेरु पौच्यु हिमालय

नौटी कासुवा ईधा बधाणी की दीदी भूली नंदा  गीत गाली

चौसिंघ्या खाडू का पैथर छातोलियो तै लेकी जात्रा का जत्रोई जाला

सेम कोटी भगोती कुलसारी की दीदी भूली नंदा गीत गाली

मेरु मन पौच्यु वख

चैपड़ो नन्दकेसरी फल्दिया गोउ मुन्दोली

कण भैटुली होली अपणी मैत बैटूली

कुरुड़ बाधण वाला भी पौचिया होला नन्दकेसरी

नंदा जात कु कनु मिलन देखा

कुरुड़ दसोली दसमद्वार डोली दगडी

गैरोली पाताल पातर नाचोणिया

सिलासमुद्र च्न्दनियाघाट

वख बुग्यालो लोग हिटणा होला

मेरु मन पौचियु वख

घाट माँ कानी भारी करुणा

नंदा मैत से विदा होली मै यख परदेश मा खुदेणु छोऊ

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
क़ाठन डाडा से बोली
ज़िन्दगी की छवी बात मा एक गीत मा लौला
एक भला गीत बणोला
वी गीत मा एक बात तेरी होली एक बात मेरी
वी गीत मा एक बात मेरा सुख दुख की
एक बात तेरा सुख दुख की
वी गीत मा तेरी खैरी भी लौला मेरी खैरी भी लौला
वी गीत माँ एक हैके की छवीबात लौला
डाडान बोली काठ से लाटा धरतल मा किलै बटणू चै तू
तू भी माटो ढेर चा मै माटो ढेर छोऊ
हमरा सुख दुख एक छन लाटा
हमरी पीड़ा भी एक चा
तब गीत मा अपणी छवीबात अलग अलग किलै लाण लाटा
हम दुवी माटा का ढेर चा
हम दुवी एक छा धरातल मा नि बाटण लाटा
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अर वीकू क्या कसूर जू पैदा हुवे दुर्गम मा रचना शैलेन्द्र जोशी
by Shailendra Joshi on Tuesday, March 12, 2013 
सोना चाँदी की होणी चा बरखा सुगम मा
अर जोग देखा दुर्गम कू यख पाणी की भि नी हो पाणी बरखा
गुरु जी नि हिट सकदा दुर्गम
भारी पैसा खते की पौचिया छिन सुगम मा
पर  प्रशन आज यू चा मन मा
आज भी किल्है  क्वी जगा दुर्गम उत्तराखड मा
क्या ये खातिर राज बाने छोऊ
अर वीकू क्या कसूर जू पैदा हुवे दुर्गम मा
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सोना चाँदी की होणी चा बरखा सुगम मा

अर जोग देखा दुर्गम कू यख पाणी की भि नी हो पाणी बरखा

गुरु जी नि हिट सकदा दुर्गम

भारी पैसा खते की पौचिया छिन सुगम मा

पर  प्रशन आज यू चा मन मा

आज भी किल्है  क्वी जगा दुर्गम उत्तराखड मा

क्या ये खातिर राज बाने छोऊ

अर वीकू क्या कसूर जू पैदा हुवे दुर्गम मा

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi पानी की पीड़ा

         पीड़ा मे पानी

तरसा गला एक बूंद पानी

             पानी की पीड़ा

पीड़ा मे पानी

प्रकृति प्रक्रिया थी जो पिघलते थे हिमालय से गिलेशियर  गल गल

गंगा बहे घर घर पहुंचे पानी

ये सब हो जाये गी बीती कहानी

आप्राकृतिक हो गया मानव

      धर लिया रूप उस ने दानव

काट डाले वन कैसे करे झरने छन छन

मन मे रह गया पानी स्रोत सब सुखे

विश्व शव हो रहा पानी

बचे कैसे पानी अभी तो घर मे थी लड़ाई 

तैयार खड़ा विश्व युध पानी

मुखडे से पानी छीन लेगे पडोसी

ज़रूरत है सब को पानी

जाहा देखेगे पानी पागल हो जायेगा आदमी

तस्वीर मे भी देखेगे नदी झरने सागर

फाड़ देगा चीर देगा

दीवाना हुआ जो पानी के लिये आदमी

पानी पानी सारे कषट कालेष घुम रहे है पानी

सारी सुख संपदा है पानी

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चैत नया साल मा फूलदेई आली

कै बौंण ग्वीराल होलू सोचणू

कू फुलारी ले जाली आज मैकू

कै बीटा फ़्योलि देखणी होली बाटा कै फुलारी कू

सोचणी होली मन मा मेरा कुंगला गात पड़ला कै फुलारी गुन्द्ख्याला हात

कखी बुरांस तै होली आस कै फुलारी की

लैया का फूल सोचणा होला कू भगि  फुलारी

ज्यू मेडो मा हीटी आली आज  मेरा धोरा

कखी पैया कखी आडू चोलों का फूल सोचणा

कू भगि  फ़ुल्वरि ले जाली कै भग्यानी की दैली मैकू

रचना शैलेंन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मै उसकी याद मे उसे जगह जगह ढुढती हू

लोग समझते है कि मै अपने अपने मे रहती हू

पर मै तो उसके ख़यालो के संग रहती हू

इतना इन्तजार कभी मै ने अपनी सहेली का न किया हो

जितनी फरियाद उसकी मुलाकात के लिए करती हू

उसे दुंढती हू कभी अनजानों मे

कभी पहचानो मे

मै उसे ढूंढती ढुढती रह जाती हू

अशिकी के आशियाने के लिए तरस जाती हू

मै उसे ढूंढने के लिए अपनी सहेलियों को इतल्हा भी करू

तो सोचती हू कही वो मेरी खिल्ली ना उडाये

कही मुझसे सवालों की पहेलियाँ ना बुझाये

मुझ प्यासी को कोई पनघट दिखाये

मै तरसी हु बहुत कोई झटपट दिखाये

मै चारपाई मे बैठे उसकी दुहाई करती हू

उसको पाने की दवाई चाहती हू

मै बैठे बैठे आँखों मे उसकी तस्वीर रखती हू

पलंग मे हिलडुल तकिया सीने मे रखती हू

मै उसकी याद मे उसे जगह जगह ढुढती हू

रचना शैलेन्द्र जोशी