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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


       
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Shailendra Joshi ऐसु की होरी मा चुनों की बयार चा

कचि पकी टिचरी दारू अद्या पवा कु जुगाड़ चा

एमपी बनण कू मेरु भी विचार चा

क्वी कसर ना छूटो जीत मा इनी  की हार का द्वार पडू मी हार मिलुत बस जीत कू

इलै ही सीदा सैणा  बीटी की दूर धारखाल तक मेरु परचार चा

ऐसु की होरी मा चुनों की बयार चा

ऐशु की होरी मया घोसोणों की लगली पिचकारी

विकास कू लगलू रंग बस ऐशु की होरी मा

मिते भी पता चा चलनि चा देश मा पैसो की तंगी

तुम दिया भै बंधो मितै वोट तुम तै दैलु नोट

अबरि होरी न कोरी होरी न गीली होरी होलि

ना छोरी की अंगड़ी भीझे जाली ना गोरी की मुखड़ी लपोड़ी जाली

ऐशु की होरी मा त बस राजनीती खेली जाली

बागी दागी छोऊ मि रंग सैरा छिन मैंमा

नि सताली चिन्ता नौकरी चाकरी बिजली पाणी की

अगर दे देला मैते वोट कू दाना पाणी

बात खरी  खरी होलि दिन चुनौ का छिन बात सिर्फ वोट की होलि

ऐसु की होरी माँ चुनौ की बयार चा

कचि पकी टिचरी दारू अद्या पवा कू जुगाड़ चा

रचना शैलेन्द्र जोशी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फेसबुक उत्तराखंड ना घार ना बौण की
लबार होंदी बस बाज़ार की
ना प्रेम की ना माया की
लबार होंदी बस मायाजाल की
जोग कू चक्रचाल मा फंसी जांदा भला लोग
हैका रुलै की मुल हैसदी लबार
ना पलिया पार की ना गंगा पार की
सिर्फ डमडमा क़िस्सों की होंदी लबार
तेरी नी हवे सकदी मेरी नी ह्वे सकदी लबार
कभि कैकी भि नी ह्वे सकदी लबार
राड़ादी चिफला बाटो मा
भला लोगो ते ठस लबार

रचना शैलेन्द्र जोशी
ना घार ना बौण की लबार होंदी बस बाज़ार की ना प्रेम की ना माया की लबार होंदी बस मायाजाल की जोग कू चक्रचाल मा फंसी जांदा भला लोग हैका रुलै की मुल हैसदी लबार ना पलिया पार की ना गंगा पार की सिर्फ डमडमा क़िस्सों की होंदी लबार तेरी नी हवे सकदी मेरी नी ह्वे सकदी लबार कभि कैकी भि नी ह्वे सकदी लबार राड़ादी चिफला बाटो मा भला लोगो ते ठस लबार रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

From - Shailendra Joshi उतराखण्ड राज का पैला मेडिकल कालेज की कथा सुणादू

तुमतै ये मेडिकल कालेज की व्यथा बतादू

सुणा भै टक लैगै की

पन्द्रह हज़ार मा डोक्टर बनणा भली बात

डोक्टर भंडी पैसा देकी भी नी टिकणा या कनी बात

श्रीनगरा ये मेडिकल कालेज की महिमा चा हपार

जरा सा भी होणा मनखी घमताघोर तो सीदा पोर दून मा

हमन तो सुनयु छोऊ मेडिकल कालेज मा कना कना रोग होंदा दूर

पर ये अस्पताल कू यनु चा दस्तूर

खासी बुखार ,जच्चा बच्चा ,उल्टी दस्त हवे जन्दु जना तनी मा इलाज

जोग मा चा अगर भारी रोग

तो डाक्टर साब का गिचा माँ चा एक ही बात हवे जा रैफर देश का कै भला अस्पताल मा

पौड़ी ,चमोली ,टिरी की आस

यखा का हाल देखी जनता हवे जांदी निराश

पैसा वाला त चल जांदा भैर कै बड़ा अस्पताल मा

गोंऊ गोंउ की गरीब जनता इनी मरनी चा

कसूर क्या यी चा युकू की ये पैदा हवेनि पाड़ मा

पैसों का मायाजाल मा टिकणा नी डोक्टर

जू आणा भी छन डॉक्टर ऊ निकलणा फर्जी मुन्ना भै फटीचर

गरीबी का चक्रचाल मरणा छन लोग इख खालधार

सरकार का यी सुप्न्यु प्रोजेकट मा

स्वास्थ सुविधा भी एक सुप्न्यु रैगे

रचना शैलेन्द्र जोशी
— with Mass Comm Srinagar and 28 others. Photo: उतराखण्ड राज का पैला मेडिकल कालेज की कथा सुणादू तुमतै ये मेडिकल कालेज की व्यथा बतादू सुणा भै टक लैगै की पन्द्रह हज़ार मा डोक्टर बनणा भली बात डोक्टर भंडी पैसा देकी भी नी टिकणा या कनी बात श्रीनगरा ये मेडिकल कालेज की महिमा चा हपार जरा सा भी होणा मनखी घमताघोर तो सीदा पोर दून मा हमन तो सुनयु छोऊ मेडिकल कालेज मा कना कना रोग होंदा दूर पर ये अस्पताल कू यनु चा दस्तूर खासी बुखार ,जच्चा बच्चा ,उल्टी दस्त हवे जन्दु जना तनी मा इलाज जोग मा चा अगर भारी रोग तो डाक्टर साब का गिचा माँ चा एक ही बात हवे जा रैफर देश का कै भला अस्पताल मा पौड़ी ,चमोली ,टिरी की आस यखा का हाल देखी जनता हवे जांदी निराश पैसा वाला त चल जांदा भैर कै बड़ा अस्पताल मा गोंऊ गोंउ की गरीब जनता इनी मरनी चा कसूर क्या यी चा युकू की ये पैदा हवेनि पाड़ मा पैसों का मायाजाल मा टिकणा नी डोक्टर जू आणा भी छन डॉक्टर ऊ निकलणा फर्जी मुन्ना भै फटीचर गरीबी का चक्रचाल मरणा छन लोग इख खालधार सरकार का यी सुप्न्यु प्रोजेकट मा स्वास्थ सुविधा भी एक सुप्न्यु रैगे रचना शैलेन्द्र जोशी




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पाड़ की तू नारी चा
फूल नी चिनगारी चा
तलवार की धार चा
तेज़ खुकरी चा भारी रणबाकुरी चा
वीरागना तू वीरागना
भाड़ो कू साहस चा त्वे मा वीरागना
वीर मा की वीर च तू वीरागना
नारी चा पर सब मा भारी चा वीरागना
तीलू की वीरता की अन्वार त्वे मा वीरागना
ज़ुल्म देखा नी सकदी तू वीरागना
जुल्मियो कू नाश करी चैन पौँदी तू वीरागना
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हर एक सोच रहा है

  वो देख रही है तो किसको एक टक

कही मुझे तो नहीं कही मुझे तो नहीं

लड़किया मौहल्ले की हमारी सोच रही है

ये देख रही है किसको

कोई कहती  पढती है मेरे कालेज  मे

कोई उस को देख हैऱा हो थी

कोई उसको देख मुस्कुराती 

कोई कहती  अपने को हूर समाझाती है

कोई कहती  सुंदर है क्या इतनी

कोई कहती सुंदर तो है ही

पर सब लड़कियों प्रशन ये ही है देख किस को रही है

लड़कियो की इस वार्तालाप के बीच मौहल्ले के और लड़के है अनुपस्थित

है उपस्थति दर्ज हमारी  तो लड़की तो देखेगी  ही लड़के को

रचना शैलेन्द्र जोशी