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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

छत मे आना गोरी ईद ए चाँद बनकेटूट जा ये रोजा आज तू जे देख केहम तो तेरे दिदार के ली ये तरस गये है तेरे प्यार के ली येतीर ए तरकस चुबा बैठे है दिल ए गुलजार मे गोरी तेरे प्यार मेदर्द ए दिवार पर सर टिकया है घुटन कमरे मे गम ए आसू बहा ये तेरे प्यार मेईद है गले मिलो मेरे यारभूल जा ओ तुम लड़की हो हम लडके है ईद है बस गले मिलो मेरे यारटूट जा ये रोजा आज तू जे देख के

कविता शैलेन्द्र जोशी.]

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मा मी गोउ जाणू रचना शैलेन्द्र जोशीby Shailendra Joshi on Thursday, January 31, 2013 at 9:46am ·मा मी गोंऊ जाणू
धैर्यलि छतरु हाथ
कान्धा धैर्यलि थौला
जाणू गोउ मी मा
मीथे दादी की भुकी की खुद
दादा की घुघती बासुती की खुद लगी भारी
मा मी गोउ जाणू
चौक तीर नारंगी की दाणी
तोड़ी तोड़ी खाला
कखी धरी होलू भुकना चुडा
ऊ ते भुखाला
मेरा गोऊ गौड़ी बाचि
खला वख दूध भाति
मा मी गोउ जाणू
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



Shailendra Joshi s
मा मी गोंऊ जाणू

धैर्यलि छतरु हाथ

कान्धा धैर्यलि थौला

जाणू गोउ मी मा

मीथे दादी की भुकी की खुद

दादा की घुघती बासुती की खुद लगी भारी

मा मी गोउ जाणू

चौक तीर नारंगी की दाणी

तोड़ी तोड़ी खाला

कखी धरी होलू भुकना चुडा

ऊ ते भुखाला

मेरा गोऊ गौड़ी बाचि

खला वख दूध भाति

मा मी गोउ जाणू

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता ------ शैलेन्द्र जोशी जी

सड़ता है अनाज गोदाम मे
मरता है गरीब देश अवाम मे
यु तो नगे होते सभी हवाम मे
नाक कट के रक् दी है चाहुरय मे
घागर खोल बैसर्मी की नगे नाच की
कसे गे कमर कटारा महैगाए पर
की ते हर बार मनमोहन सरदार
हाथ पर तो विस्वास धरे बठी है जनता नेहरु कल से
हाथ ए खानदान का ये हॉल है इस जामने मे
नाते खता गरीब की ये यहाँ
सरकार की महैगाए खा टी गरीब को यहाँ
दादी का फ़ॉर्मूला गरीबी i को हटा न है
गरीब खो भी महिगाए से गरीब को हटा ओ भी —


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पडिगे ह्युवालू डांडा रे

बदन तय क़पैगे ये ह्युवालू रे

चा की कनी बार रे

राजे खंतरो मा भुज्या भटो कू ठुगार रे

बाँज कुले डालियों की ठंडी बयार

हार्डमांस तय चीरि की हड्गो तय कर नि च तार तार

आंगेठो की तात मायादारो की बकिबात

काजदारो कू काज ये हिम् बरखा न लुछयाली

पर जुगो की डोरों घघरू नि छुटदू यी काजदार भी लग्या छा अपणा काज

छोटा नानतिन तय कनु सजा होगे

गवाडीयू च बुवौइन विते भीतर

छटला बादल पिघलु हियु आलू भै कब बसंती घाम

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ना रंग देखाणु ना रूप

ना जात ना पात

ना देखाणु धरम की घेर बाड़

कै गोऊ कै धार कै बाज़ार कू चा यू

कण रचयु वीकू यु किरदार

देखनी कना कना लोग

नि देखी ज़माना यनु किरदार

भै कखी भी ह्वै सकदु नोउ बल वीकू मायादार

प्रेम कु पुजारी माया कु तिसयालु

नि मन्दू कुई भेद भोउ

सभी जात धर्मो तय देखादु संगता

छटक्या छा जु हम धरम जात कुटुब्म कबीलों मा

ऊ तय माया की माला गिडादू

जपदू प्रेम कु पाठ ये किरदार नोउ बल मायादार

आंखी छिन ये की समदरसी

कण भली मनखयात चा यी मायादार का पास

रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिल्ही वाली स्याली चल बाज़ार
त्वे खुनि मुल्य्लू घागरी

घागरी घुरि नी पैन दू भीना अगर मुल्य्न्दी कैपरी तो चल बाज़ार

  हे निहोनिया स्याली हे निर्भाग्य स्याली कुछ कर सरम ल्याज़

  हे बेक वार्ड जीजा अपनी सोच विचार आफी दगडी लिजा घागरी नी सिला दी नी सिला

  मेरी मन मोहनिया स्याली चल कुरता सुलार ही सीली लै

ज़माणु मिनी स्कर्ट और टॉप कु और तू भीना चल नू चा कुर्ता सुलार

चल स्याली त्वे खुनि मुल्य्लू धोती साडी

  भीना मेरी भी एक बात सुन लै कैपरी स्कर्ट टॉप मुल्य्न्दी चा तो मुलिया नी तो भूली जा आज बीती अपनी स्याली

कविता शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मा मी गोउ जाणू रचना शैलेन्द्र जोशी
by Shailendra Joshi on Thursday, January 31, 2013 at 9:46am ·
मा मी गोंऊ जाणू
धैर्यलि छतरु हाथ
कान्धा धैर्यलि थौला
जाणू गोउ मी मा
मीथे दादी की भुकी की खुद
दादा की घुघती बासुती की खुद लगी भारी
मा मी गोउ जाणू
चौक तीर नारंगी की दाणी
तोड़ी तोड़ी खाला
कखी धरी होलू भुकना चुडा
ऊ ते भुखाला
मेरा गोऊ गौड़ी बाचि
खला वख दूध भाति
मा मी गोउ जाणू
रचना शैलेन्द्र जोशी