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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 29
दिल्ली की हाट मा
झ़ंगोरा कि खीर
सब्ब खांदा
अंग्लो कि चटा चटी
गिच्चा लगांदा
पर कब तक
किल्है क्वी बि
बडू आदिम
झ़ंगोरा का झ़ंगरेङा
नि जाणा चांदा
दिल्ली कि हाट मा
सिल कु पिस्यु लुण
सब्बी लेणा
पर आखिर कब तक
किल्है क्वी बि
बडू आदिम
सिल मा लुण
नि पीसणा चाणा
दिल्ली की हाट मा
कोदा की रोटी
सब्बी खांदा
पर आखिर कब तक
कोदा का कादेड़ा
किल्है क्वी बि
बडू आदिम
नि जांदा
जब क्वी जालू
नि पहाड़ मा
धाण खुणि
भोल तुम बि
कनुक्वे जाला
कोदा झ़ंगोरा
खाण दिल्ली
हाट मा
रचना। ...... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 29
देश दिल्ली मे है
या दिल्ली मे देश
या देश ही दिल्ली है
जब देखो टीवी चैनल मे
हर खबर दिल्ली की
दिल्ली देश की समस्या
या समस्या मे दिल्ली
दिल्ही का सीएम को
इतनी कवरेज क्यों
क्या वो इतना अच्छा है
या इतना खराब
मुझे राजनीती और
सीएम से कोई बैर नहीं
पर क्या और स्टेट के
सीएम ने क्या कोई
विकास या घोटाला
नहीं किया जो उनको
मीडिया कवरेज नहीं मिलता
क्या दिल्ली ही विज्ञापन है
क्या दिल्ली ही तक मीडिया है
क्या दिल्ली ही खबर
अगर ऐसा नहीं है
तो अखण्ड भारत के
राज्य के और खण्ड
ब्रेकिंग न्यूज़ क्यों नहीं
या दिल्ली ही ब्रेकिंग न्यूज़ है
रचना। ......। शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 28
ये सुरत जानी पहचानी लगती है
ये सीरत जानी पहचानी लगती है
मिले बहुत बरस बाद
पर अंदाज वही जैसे रोज मिलते है
हाथ मिलाया मुस्कुराये
हाल - चाल पूछा फिर चल दिये
कि फिर मिलगे
दोस्त सफ़र ज़िन्दगी मे
रचना। ...... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi




मेरु सि मिज्याज
क्वी त् होलू
बैठियु होलु
कखी मेरी जग्वाल
स्वीणो का कैनवास
बाणदु वीकी तस्बीर
म्यरी बने तस्बीर
मैकु मिल जाली
झणि कबी
कै बाटा अचणचक
हेरदु रांदु वी अन्वार
गौ गौ बाजार बाजार

रचना। ....... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
20 hours ago
ये जो स्वामी दास प्रथा है दुनिया की मुझे मंजूर नहीं
तुझे कहू अपनी दासी
बनकर तेरा स्वामी ये बात मुझे मंजूर नहीं
स्वामी दास प्रेम नहीं हो सकता जीवन साथ का
ये दुनिया के रीती रिवाज मेरे लिये शूल
ये दुनिया के के रीती रिवाज मेरे लिये फिजूल
तुझे कहू दासी
बनकर तेरा स्वामी
अपने को स्वामी बनकर दू सम्मान
और तुझे दासी बनाकर दू अपमान
ये पाप मुझ से हो सकता नहीं
जिन्होने ये रीती चलायी
इन्होने स्त्रियो के साथ अन्याय की रीत अपनायी
ये रीती रिवाज शूल फिजूल मेरे लिये
जीवनसाथ संगत जीवन की
मै संग तू मेरी संगनी
मै तेरा राघ तू मेरी राघनी
मै तेरा साथ हम दोनों साथी
ये ही असल रीत जीवन साथ की
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi

संगीत के साथ स्वरो का आप निक नाम तो जानते है किन्तु पुरा जानते है क्या जानते है तो ठीक है नहीं जानते है तो जाने फिर
सा ..................षडज

रे..................ऋषभ

ग ................... गंधार

म ..................मध्यम

प................... पंचम



ध ..................... धैवत

नि .....................निषाद

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
14 hours ago
आशियना मे छिपी है
कहानी कमरो की
कुछ खट्टी
कुछ मीठी
बाते है ढेर सारी
अस्मित आकाश
सी कल्पनाये
हर सदस्य की
जो सजाती है
आशियना को
हर सामान मे
है यादे बहुत सारी
हर जीज मे प्राण
बसता हो जैसे
कभी किचन की थाली
तो कभी कटोरी
तो कभी बाथरूम का नल
कभी छत की सीढ़ी
कभी दरवाजा
कभी खिड़की
कभी पलंग
तो कभी सोफा
तो कभी मेज
कभी आईना
कभी किताब
बाते करती है
कभी बतियाथा पुरा
आशियना
सब बातुनी है
लम्बा फासाना है
आशियना का
रचना। शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
February 11

चुल्ला की आग
ऊँन्नी नि जल्दी
बौण हिटै चा
भारी वीकी
तब जल्दी
चुल्ला की आग
चुल्ला की आग
उन्नी नि मुझदी
भारी हव्वा फुकी
मेहगयीन जब
तब जैकी मुझदी
चुल्ला की आग
रचना। ...शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi

February 11

एक ब्रांड चा
सारी पार्टी कु
एक ब्रांड
इमेज खुणि
यार तुम हि बोला
कनुक्वे विस्वास करा
कखी एक राहुल चा
कखी एक मोदी
कखी एक केजीरवाल
भै हम युका आधार पर
अपणा एमपी मा
सुधि विस्वास
कन कर सकदा
पर क्वी बि पार्टी
चुनौ ये नि बताणी चा
हमरु नेता कु होलु
सब नेता अपणी जुगाड़
मा छिन कबि
जनता से बि पूछा
एक ब्रांड का सारा
देस नि चल्दु
भले पार्टी चल जौ
पर देस त् कतै नि चल सकदु
रचना। ...शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
February 10
एक चाँद
और एक सुरज
छिन
द्वि झणा
कुटुम्दरी का
पहिया छिन
द्वि झणा
गंगा का द्वि
छाला छिन
द्वि झणा
द्वि गात
एक साँस
छिन
द्वि झणा
सुख दुख का
साथी छिन
द्वि झणा
मंगलमय रहुँन
सदानी
द्वि झणा
रचना। ...शैलेन्द्र जोशी