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Uttarayani घुघुतिया उत्तरायणी (मकर संक्रान्ति) उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा पर्व

Started by पंकज सिंह महर, January 08, 2008, 12:52:56 PM

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विनोद सिंह गढ़िया

कुमाऊं में घुघुत्या त्यार मनाने के पीछे एक लोककथा।

मान्यता है कि कुमाऊं के एक राजा के पुत्र को घुघते (जंगली कबूतर) से बेहद प्रेम था। राजकुमार का घुघते के लिए प्रेम देख एक कौवा चिढ़ता था। उधर, राजा का सेनापति राजकुमार की हत्या कर राजा की पूरी संपत्ति हड़पना चाहता था। इस मकसद से सेनापति ने एक दिन राजकुमार की हत्या की योजना बनाई। वह राजकुमार को एक जंगल में ले गया और पेड़ से बांध दिया। ये सब उस कौवे ने देख लिया और उसे राजकुमार पर दया आ गई। इसके बाद कौवा तुरंत उस स्थान पर पहुंचा जहां रानी नहा रही थी। उसने रानी का हार उठाया और उस स्थान पर फेंक दिया जहां राजकुमार को बांधा गया था। रानी का हार खोजते-खोजते सेना वहां पहुंची जहां राजकुमार को बांधा था। राजकुमार की जान बच गई तो उसने अपने पिता से कौवे को सम्मानित करने की इच्छा जताई। कौवे से पूछा गया कि वह सम्मान में क्या चाहता है तो कौवे ने घुघते का मांस मांगा। इस पर राजकुमार ने कौवे से कहा कि तुम मेरे प्राण बचाकर किसी और अन्य प्राणि की हत्या करना चाहते हो यह गलत है। राजकुमार ने कहा कि हम तुम्हें प्रतीक के रूप में मकर संक्रांति को अनाज से बने घुघते खिलाएंगे। कौवा राजकुमार की बात मान गया। इसके बाद राजा ने पूरे कुमाऊं में कौवों को दावत के लिए आमंत्रित किया। राज का फरमान कुमाऊं में पहुंचने में दो दिन लग गए। इसलिए यहां दो दिन घुघत्या का पर्व मनाया जाता है।

विनोद सिंह गढ़िया



घुघुतिया त्यार पर कुमाऊं के बागेश्वर में तैयार किये गए 'घुघुते' और 'घुघुते' के आधुनिक रूप।

फोटो : दीप साह

MANOJ BANGARI RAWAT

दरिया देवता बैजरो
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यहाँ पर उतरैणी मेला लगता है
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विनोद सिंह गढ़िया

एक्टर हेमंत पाण्डे जी ने भी मुम्बई में घुघूती त्यार मनाकर हम सभी के लिए बधाई सन्देश के साथ एक चित्र भी भेजा है।



विनोद सिंह गढ़िया

उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्य सभा सांसद श्री भगत सिंह जी कोश्यारी घुघुतों की माला डाले हुये।