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25 Years Of Uttarakhand Cinema - उत्तराखंड सिनेमा के २५ साल पूरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 22, 2008, 10:46:10 AM

HAS UTTARAKHANDI CINEMA DONE PROGRESS DURING THESE 25 YRS ?

Very good
4 (12.9%)
Good
9 (29%)
Average
12 (38.7%)
Poor
4 (12.9%)
Can't say
2 (6.5%)

Total Members Voted: 31

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हेम पन्त



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


daju sachi mai appriciatable work by u ... great.. keep it up.. me inspire with dis video...
Quote from: M S Mehta on January 22, 2008, 10:48:14 AM

Interview with Parashar Gaur, Pioneer of Garhwali Cinema

Parashar Gaur is the director of the first Garhwali language feature film, JAGWAL ("The Long Wait") that premiered in 1983. He now resides in Toronto, Canada.

The 2004 interview was featured on Badhai Ho, a Hindi news-magazine programme on OMNI Television that celebrates the successes of local community members in business, entertainment and the arts.

http://www.youtube.com/watch?v=C2ZBEFJB7Xw

पंकज सिंह महर

देहरादून (एसएनबी)। उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत प्रख्यात सिनेतारिका व भाजपा नेत्री हेमा मालिनी ने कहा है कि राज्य सरकार प्रस्ताव दे तो बालीवुड के लोग यहां स्टूडियो बना सकते हैं। राज्य के पहाड़ी हिस्सों की तुलना स्विटजरलैंड से करते हुए करोड़ों दिलों पर राज करने वाली ड्रीमगर्ल ने प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं के टोटे की आ॓र संकेत करते हुए राज्य में पर्यटन के विकास के लिए बहुत कुछ किये जाने की जरूरत बतायी। वे आज यहां डिफेंस कालोनी स्थित एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के आवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक बात कर रही थी। वर्षों पूर्व संन्यासी फिल्म की सूटिंग के दौरान देवभूमि के संस्मरणों को याद करते हुए हेमा मालिनी ने कहा कि यहां अपार सौंदर्य है। फिल्मों की सूटिंग के लिए यहां एक से बढ़कर एक सुंदर स्थान हैं। बावजूद इसके सूटिंग के लिए स्विटजरलैंड व अन्य यूरोपियन देश फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद हैं। इसकी वजह उन्होंने सुविधाओं का अभाव बताया। उन्होंने पेशकश की कि राज्य सरकार अगर प्रस्ताव दे, तो बालीवुड के लोग मिलकर यहां स्टूडियो बना सकते हैं।

अरुण भंडारी / Arun Bhandari

Aaj Uttarakhand geet sangeet sabhi pahadi logo ki zuban par hai par fir mein kabhi kabhi bahut zayada dukhi hota hu zab dekhta hu ki ham mein se kuch logo ko apni bhasa bhi bolani nahi aati jab ki ye jarooi hona chahiye or parents ka to khas toar se apne bacho ko apni basa sikhani chahiye jese or logo apni basa ka use karte hai wese hi hame bhi apni bhasa ka use har jagah karna chahiye par kuch log esa nahi karte kyo pata nahi?

Thanks to all member jo ki Pahadi bhasa mein Film ya Music Video bana rahe jis se logo ko apni basa ka or  ghyan hota hai.

Regards
Arun Bhandari


पंकज सिंह महर



उत्तराखंड का सिनेमा उद्योग इस वर्ष अपनी स्थापना की रजत जयंती मना रहा है। इस उपलक्ष्य में रविवार को राजधानी में आयोजित समारोह में 25 साल पूर्व जग्वाल से शुरू हुए अब तक के फिल्मी सफर पर रोशनी डाली गई। इसके साथ ही एक और उपलब्धि जुड़ी और वह है जग्वाल के निर्माता पाराशर गौड़ की दूसरी पारी। उनकी फिल्म गौरा का भी इस मौके पर प्रीमियर हुआ। आंचलिक फिल्म्स् और ग्लैक्सी इंटरनेशनल कनाडा की संयुक्त पहल पर ओएनजीसी ऑफीसर्स क्लब में आयोजित समारोह का शुभारंभ पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। समारोह में उत्तराखंडी सिनेमा का सफरनामा प्रदर्शित किया गया। इसमें 4 मई 1983 को प्रदर्शित पहली गढ़वाली फिल्म जग्वा8 से लेकर अब तक आई फिल्मों के कुछ अंश दिखाए गए। इस मौके पर कनाडा में बसे जग्वाल के निर्माता पाराशर गौड़ की दूसरी फिल्म गौरा का प्रीमियर भी हुआ। मौजूदा दौर में दूषित होती राजनीति की पोल खोलती यह फिल्म संभवत: राजनीति पर बनी पहली आंचलिक फिल्म है। समारोह में फिल्म गौरा के सह निर्माता भूपेंद्र असवाल (कनाडा), कार्यकारी निर्माता मदन मोहन डुकलान, उक्रांद नेता विवेकानंद खंडूड़ी, बलदेव राणा, राजेंद्र रावत समेत अन्य सदस्य और फिल्म के कलाकार मौजूद थे। संचालन रमेंद्र कोटनाला ने किया।



Anubhav / अनुभव उपाध्याय


पंकज सिंह महर

Quote from: Anubhav / अनुभव उपाध्याय on June 12, 2008, 03:42:03 PM
Mahar ji yeh news jara badi scan kar ke daaliye padhne main nahi aa rahi hai.

ऊपर पूरी न्यूज डाली है दा, उसमें जो प्रकाश पंत जी के बगल में खड़ी हैं, पीली साड़ी में, वह चंद्रकांता जी है, वे इस फिल्म की नायिका हैं।